Brazil: ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे की पुष्टि की, अमेरिका जाने से पहले फरवरी में आएंगे नई दिल्ली

अमेरिकी टैरिफ के चलते भारत कई देशों के साथ अपने व्यापार संबंधों को मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने ब्राजील के साथ व्यापार संबंधों को नई दिशा देने का फैसला किया है। बीते दिनों पीएम मोदी और ब्राजीली राष्ट्रपति के बीच फोन पर लंबी बात हुई थी और अब ब्राजील के राष्ट्रपति ने फरवरी में भारत दौरे की पुष्टि कर दी है।

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने सोमवार को अपने भारत दौरे की पुष्टि कर दी। उन्होंने बताया कि वे फरवरी में नई दिल्ली आएंगे। ब्राजीली राष्ट्रपति अमेरिका दौरे पर भी जाएंगे, लेकिन अभी उसकी तारीख तय नहीं है। अमेरिका दौरे से पहले लूला डा सिल्वा का भारत दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।

ब्राजीली राष्ट्रपति ने टेलीफोन पर ट्रंप से बात की

  • ब्राजील के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में उनके और ट्रंप के बीच सहमति बनी है कि फरवरी में भारत और दक्षिण कोरिया के दौरे के बाद वे वॉशिंगटन का दौरा करेंगे।
  • अपने पोस्ट में लूला ने लिखा, ‘संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्राजील की आर्थिक वृद्धि पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक है। हमने पिछले कुछ महीनों में बने अच्छे संबंधों का स्वागत किया, जिसके परिणामस्वरूप ब्राजील के उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ के एक महत्वपूर्ण हिस्से को हटा दिया गया।’
    ब्राजील के राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने संगठित अपराध से निपटने में सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों नेताओं के बीच मनी लॉन्ड्रिंग और हथियारों की तस्करी को रोकने के साथ-साथ आपराधिक समूहों की संपत्ति को फ्रीज करने और वित्तीय लेनदेन पर डेटा का आदान-प्रदान करने के मुद्दे पर भी सहमति बनी।
  • भारत 2026 में ब्रिक्स शिखर बैठक की अध्यक्षता करने वाला है और ब्राजील भी इसका सदस्य है। इसमें शामिल होने के लिए अन्य शासनाध्यक्षों के अलावा लूला दा सिल्वा भी आने वाले हैं। लूला ब्रिक्स देशों के साथ अमेरिकी टैरिफ का जवाब देने के लिए चर्चा कर रहे हैं। ट्रंप, ब्रिक्स की आलोचना कर रहे हैं और उनका आरोप है कि ब्रिक्स देश अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्रा के जरिए व्यापार से अमेरिकी डॉलर को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिकी टैरिफ के चलते दोनों देश व्यापार बढ़ाने पर कर रहे विचार
अमेरिका द्वारा भारत और ब्राजील, दोनों देशों पर भारी टैरिफ लगाया गया है। टैरिफ के इस तनाव भरे माहौल में दुनिया के कई देश आपस में व्यापार के नए अवसर खोज रहे हैं। इन्हीं देशों में भारत और ब्राजील भी हैं, जो तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं। इसी कड़ी में 7 अगस्त को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच फोन पर एक घंटे तक बातचीत हुई थी। अब ब्राजीली राष्ट्रपति भारत का दौरा कर रहे हैं जिसमें दोनों देशों के बीच अहम समझौतों पर सहमति बन सकती है।

Nepal: आम चुनाव में पूर्व PM ओली के लिए चुनौती बनेंगे ये युवा नेता, बालेन शाह से गगन थापा तक दौड़ में

नेपाल की वरिष्ठ पत्रकार सरस्वती कर्माचार्य ने कहा, ‘केपी ओली के लिए इस बार का संसदीय चुनाव न केवल एक कठिन चुनौती होगा। उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व महापौर बालेन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, यह उनके पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक करियर के लिए भी खतरा बन सकता है।
नेपाल में कड़ाके की ठंड के बावजूद चुनाव प्रचार ने सियासी गर्मी बढ़ा रखी है। तीन राजनीतिक दलों ने 5 मार्च को होने वाले आम चुनावों के लिए अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों का एलान कर दिया है। देश की सबसे बड़ी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने हाल ही में अपदस्थ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को आधिकारिक तौर पर अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है।

वहीं नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस और नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने अपने-अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों को 50 वर्ष से कम आयु का घोषित किया है। बीते सप्ताह 49 वर्षीय गगन थापा नेपाली कांग्रेस (एनसी) के अध्यक्ष चुने गए। उनके चुनाव के तुरंत बाद पार्टी के उपाध्यक्ष विश्व प्रकाश शर्मा ने एलान किया कि थापा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।

गगन थापा के खिलाफ देउबा क्यों पहुंचे सुप्रीम कोर्ट?
वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता चरण प्रसाई ने कहा, ‘नेपाली कांग्रेस के सक्रिय नेता गगन थापा, जो जेन जी के युवाओं की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं, का अध्यक्ष पद पर चुनाव होने से वर्तमान चुनावी परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है।’ हालांकि, नेपाली कांग्रेस के एक अन्य गुट, जिसका नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा कर रहे हैं, ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें थापा के नेतृत्व वाले गुट को आधिकारिक तौर पर वास्तविक राष्ट्रीय कांग्रेस के रूप में मान्यता दी गई है।

बालेन शाह आरएसपी के पीएम पद के उम्मीदवार
इंजीनियर और गायक से राजनेता बने 35 वर्षीय बालेंद्र शाह 2022 में भारी बहुमत से काठमांडो महानगरपालिका के महापौर चुने गए थे। वह बालेन शाह के नाम से भी मशहूर हैं और काठमांडो के साथ पूरे देश में युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में महापौर चुनाव जीतने वाले बालेन अब अपनी टीम के साथ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गए हैं और आम चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया ताकि वे 20 जनवरी को होने वाले संसदीय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकें। सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली को बालेन चुनौती देंगे, जिनकी उम्र उनसे आधी है। दोनों ने झापा-पांच निर्वाचन क्षेत्र से संसदीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है, जिससे पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत का यह जिला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

ओली के लिए कैसे चुनौती बने बालेन शाह?

  • 2008 में हुए आम चुनाव को छोड़कर ओली पिछले तीन दशकों में छह बार झापा जिले से संसद के लिए चुने गए हैं।
  • 2022 में हुए पिछले आम चुनाव में ओली ने नेपाली कांग्रेस के अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ 28,000 से ज्यादा वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी।
  • इस बार ओली का मुकाबला लोकप्रिय युवा नेता बालेन से है, जिनकी उम्र उनसे आधी है।
  • बालेन नेपाल की उभरती युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि ओली रूढ़िवादी और कट्टरपंथी विचारधारा का चेहरा हैं।

पूर्व पीएम ओली के खिलाफ फूटा था जेन जी का गुस्सा
जेन जी के युवाओं के पिछले साल सितंबर में हुए आंदोलन में 77 लोगों की मौत हो गई थी। जेन जी ने आरोप लगाया था कि इस आंदोलन को दबाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और नेपाली कांग्रेस के तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक ने हद से ज्यादा बल प्रयोग किया। गौरतलब है कि सैकड़ों आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू के बलुवाटर स्थित प्रधानमंत्री आवास में तोड़फोड़ की थी। इसके चलते ओली को एक सेना के हेलीकॉप्टर से भागना पड़ा था।

 

अमेरिका में नए साल पर हमले की साजिश नाकाम: हथौड़ा-चाकू.. ISIS से प्रभावित साजिशकर्ता से FBI को क्या-क्या मिला?

अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में नए साल की पूर्व संध्या पर हमले की साजिश को एफबीआई ने नाकाम कर दिया। आईएसआईएस से प्रेरित युवक गिरफ्तार किया गया, जिसके घर से चाकू और हथौड़ा बरामद किया गया। सात जनवरी को अगली सुनवाई तक वह एफबीआई की हिरासत में रहेगा।

अमेरिका के न्याय विभाग ने शुक्रवार को कहा कि उत्तरी कैरोलिना में नए साल की पूर्व संध्या पर एक चाकू और हथौड़े से हमले की साजिश को नाकाम कर दिया गया। विभाग ने कहा कि इस हमले को अंजाम देने की योजना कथित तौर पर इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से प्रभावित एक व्यक्ति ने बनाई थी।

मामले पर एफबीआई निदेशक ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिकी संघीय गुप्तचरों ने बुधवार को क्रिश्चियन स्टर्डिवेंट (18 वर्षीय) को इस हमले की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया। संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के निदेशक काश पटेल ने शुक्रवार को कहा कि अधिकारियों ने इस हमले की साजिश को नाकाम कर दिया। उन्होंने एक्स पर लिखा, एफबीआई और सहयोगियों ने नए साल की पूर्व संध्या पर एक और हमले की साजिश को नाकाम कर दिया, जिसे कथित तौर पर आईएस से प्रभावित एक व्यक्ति अंजाम देने वाला था। एफबीआई जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में और जानकारी साझा करेगी। 

अगली सुनवाई तक हिरासत में रहेगा आरोपी
रिपोर्ट के मुताबिक, जब यह स्पष्ट हुआ कि स्टर्डिवेंट हमला करने की योजना बना रहा था, तो उसे चौबीस घंटे की निगरानी में रखा गया। नॉर्थ कैरोलिना की एक जज ने उसे सात जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक हिरासत में रखने का आदेश दिया। 

जिहाद करने वाला था स्टर्डिवेंट: अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय
अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के मुताबिक, एफबीआई के गुप्तचरों ने स्टर्डिवेंट को यह भरोसा दिलाया कि वे आईएसआईएस के सदस्य हैं। उसने आईएसआईएस के प्रति अपनी वफादारी जताई और बताया कि वह जल्द ही ‘जिहाद’ करने वाला है। उसने खुद को ‘आईएस का सैनिक’ बताया। एक अन्य एफबीआई एजेंट को उसने बताया कि उसने मिंट हिल शहर में एक ग्रॉसरी स्टोर और फास्ट-फूड रेस्तरां में चाकू और हथौड़े से हमला करने की योजना बनाई थी। स्टर्डिवेंट ने माना कि वह बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर नए साल की पूर्व संध्या पर लोगों पर हमला करने वाला था।

2022 से आईएसआईएस सदस्य के संपर्क में था’
एफबीआई के एक बयान के मुताबिक, गुप्तचरों ने स्टर्डिवेंट के घर से हाथ से  लिखा एक नोट बरामद किया जिसका शीर्षक ‘नए साल पर हमला 2026’ था। इसमें करीब 20 लोगों को छुरा मारने और पुलिस अधिकारियों पर हमला करने की योजना बताई गई थी। एएफपी ने विशेष गुप्तचर जेम्स बार्नकल के हवाले से बताया, एफबीआई 2022 से ही स्टर्डिवेंट को जानती थी जब वह अभी नाबालिग था। उस समय वह सोशल मीडिया के जरिये आईएसआईएस के एक अज्ञात सदस्य के संपर्क में था।

South Korea: दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति वर्षों बाद राष्ट्रपति भवन पहुंचे, ऐतिहासिक ब्लू हाउस में शिफ्ट हुए

पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के कार्यकाल में बेसहारा छोड़ दिया गया राष्ट्रपति भवन ब्लू हाउस एक बार फिर से आबाद हो गया और मौजूदा राष्ट्रपति ने आधिकारिक राष्ट्रपति भवन में शिफ्ट करने का फैसला किया है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग सोमवार को आधिकारिक राष्ट्रपति भवन चोंग वा डे पहुंचे, जून में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह ली जे म्युंग का पहला राष्ट्रपति भवन का दौरा था। यह राष्ट्रपति भवन बीते तीन वर्षों से खाली पड़ा है क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल ने राष्ट्रपति भवन को रक्षा मंत्रालय परिसर में स्थानांतरित कर दिया था।

ऐतिहासिक है दक्षिण कोरिया का ब्लू हाउस
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास की इमारत बेहद ऐतिहासिक है और इसे ब्लू हाउस कहा जाता है। 9 मई 2022 के बाद पहली बार कोई दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ब्लू हाउस गया है। 9 मई 2022 को तत्कालीन राष्ट्रपति मून जे इन के कार्यकाल का आखिरी दिन था। उनके बाद राष्ट्रपति बने यून सुक योल ने राष्ट्रपति भवन को रक्षा मंत्रालय की इमारत में शिफ्ट कर दिया था। दिसंबर 2024 में यून सुक योल पर देश में मार्शल लॉ लगाने का आरोप लगा और उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया। उसके बाद हुए चुनाव में ली जे म्युंग ने सत्ता संभाली।

यून सुक योल ने रक्षा मंत्रालय में शिफ्ट कर दिया था राष्ट्रपति भवन
ब्लू हाउस उत्तरी सियोल में शहर की भागदौड़ से दूर एक पहाड़ी के निचले इलाके में बना है। 62 एकड़ में फैली ये ऐतिहासिक इमारत ऐतिहासिक जियोंगबोकगुंग महल के पास स्थित है और दक्षिण कोरिया के जापान के शासन से आजाद होने के बाद से ही राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास रहा है। हालांकि यून सुक योल का मानना था कि राष्ट्रपति भवन लोगों की पहुंच से दूर है और ज्यादा लोकतांत्रिक होने का हवाला देते हुए रक्षा मंत्रालय परिसर में राष्ट्रपति भवन को स्थानांतरित कर दिया। इस काम में भारी-भरकम रकम खर्च हुई, जिसे लेकर यून की आलोचना भी हुई थी। यून ने ब्लू हाउस को संग्रहालय में तब्दील कर दिया और इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया था।

 

Bangladesh: मोहम्मद यूनुस से नाराज हुआ अमेरिका, शेख हसीना की पार्टी को मिल सकती है प्रतिबंध से राहत

बांग्लादेश में जारी अराजकता के हालात पर अमेरिका ने नाराजगी जताई है। अमेरिका की विदेश मामलों की समिति ने मोहम्मद यूनुस को पत्र लिखा है। इस पत्र में मोहम्मद यूनुस के राजनीतिक पार्टियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की आलोचना की गई है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ बांग्लादेश में कानून व्यवस्था खराब है और अराजकता का माहौल है। वहीं दूसरी तरफ अब अमेरिका भी मोहम्मद यूनुस से नाराज हो गया है। दरअसल अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति ने मोहम्मद यूनुस को पत्र लिखा है। इस पत्र में अमेरिकी सांसदों ने एक राजनीतिक पार्टी पर पूरी तरह से प्रतिबंध को गलत ठहराया है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में अवामी लीग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बांग्लादेश के हालात पर जताई चिंता
अमेरिका के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की विदेश मामलों की समिति ने मोहम्मद यूनुस को लिखे पत्र में बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर भी नाराजगी जाहिर की। पत्र में लिखा गया है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार देश की राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाए, जिससे देश में निष्पक्ष, मुक्त और शांतिपूर्वक चुनाव हो सकें। लेकिन हमें आशंका है कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि अंतरिम सरकार ने राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियों को बर्खास्त कर दिया है और साथ ही त्रुटिपूर्ण इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल को भी फिर से शुरू कर दिया है।

‘एक राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध पूरी तरह से गलत’
अमेरिकी सांसदों ने लिखा, ‘2018 और 2024 के आम चुनाव निष्पक्ष नहीं थे और फरवरी में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट में बताया गया कि जुलाई और अगस्त 2024 में बांग्लादेश में भड़की हिंसा में करीब 1400 लोग मारे गए। असल में बांग्लादेश को इन घटनाओं से सीख लेकर लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए, लेकिन उसकी जगह वहां बदले की कार्रवाई शुरू हो गई है। हम चिंतित हैं कि एक राजनीतिक पार्टी को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना गलत है।’

कुछ माह पहले ही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग पार्टी की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध में अवामी लीग के ऑनलाइन मंचों पर होने वाली गतिविधियां भी शामिल हैं। यह प्रतिबंध तब लगाया गया, जब कई संगठन अवामी लीग पर प्रतिबंध की मांग कर रहे थे।

 

FATF ने भारत की संपत्ति पुनर्प्राप्ति प्रणाली की सराहना की, ED को वैश्विक आदर्श एजेंसी बताया

एफएटीएफ ने कहा कि भारत ने संपत्ति वसूली के लिए एक सुव्यवस्थित और तकनीक-संचालित तंत्र बनाया है, जिसमें कानूनी उपकरणों को कई एजेंसियों के बीच परिचालन सहयोग के साथ जोड़ा गया है।

मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के प्रयासों की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) ने भारत की संपत्ति वसूली प्रणाली की सराहना करते हुए इसे अपने सदस्य देशों में सबसे प्रभावी बताया है।

अपनी नई जारी रिपोर्ट, “संपत्ति वसूली मार्गदर्शन और सर्वोत्तम अभ्यास” में, FATF ने आपराधिक आय का पता लगाने, कुर्की करने और जब्त करने में अपनी दक्षता के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक आदर्श एजेंसी के रूप में रेखांकित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रणाली आर्थिक और वित्तीय अपराधों से प्राप्त संपत्तियों की वसूली करने में सक्षम एक मजबूत ढाँचे का प्रतिनिधित्व करती है।

एफएटीएफ रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
एफएटीएफ ने पाया कि भारत ने संपत्ति वसूली के लिए एक सुव्यवस्थित और तकनीक-संचालित तंत्र विकसित किया है, जिसमें कानूनी उपकरणों को विभिन्न एजेंसियों के बीच परिचालन सहयोग के साथ जोड़ा गया है। इसने भारत के दोहरे दृष्टिकोण की विशेष रूप से प्रशंसा की, जो दोषसिद्धि-आधारित और गैर-दोषसिद्धि-आधारित, दोनों तरह की ज़ब्ती की अनुमति देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आपराधिक मुकदमे पूरे होने से पहले ही संपत्ति ज़ब्त की जा सके।

रिपोर्ट में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत भारत की विधायी शक्ति की भी सराहना की गई, जो अधिकारियों को आपराधिक गतिविधि से जुड़ी संदिग्ध संपत्तियों को तुरंत ज़ब्त, कुर्क और ज़ब्त करने में सक्षम बनाता है। एफएटीएफ ने कहा कि इसने भारत के प्रवर्तन मॉडल को सदस्य देशों में सबसे अधिक उत्तरदायी और अनुकूलनीय बना दिया है।

एफएटी

उदाहरण के तौर पर, रिपोर्ट में भारत में कई उच्च-मूल्य वाली वसूली का उल्लेख किया गया है, जिनमें कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, सहकारी बैंक घोटाले और निवेश योजनाओं से जुड़े मामले शामिल हैं, जहाँ हज़ारों करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की गई और बाद में सार्वजनिक लाभ के लिए पुनर्व्यवस्थित की गई। इनमें से कई मामलों में, संरचित क्षतिपूर्ति उपायों के माध्यम से पीड़ितों को धनराशि सफलतापूर्वक वापस कर दी गई।

जिन पहलुओं का विशेष उल्लेख किया गया, उनमें से एक भारत द्वारा मूल्य-आधारित ज़ब्ती का उपयोग था, जो मूल संपत्ति का पता न चलने पर भी समतुल्य संपत्ति को ज़ब्त करने की अनुमति देता है। FATF के अनुसार, यह दृष्टिकोण वित्तीय अपराधियों के विरुद्ध निवारक प्रभाव को महत्वपूर्ण रूप से मज़बूत करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी अवैध लाभ पहुँच से बाहर न रहे।

एफ ने भारत के मज़बूत अंतर-एजेंसी सहयोग पर प्रकाश डाला
एफएटीएफ रिपोर्ट में वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू-आईएनडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सहित प्रमुख भारतीय संस्थानों के बीच समन्वय की सराहना की गई है। इसमें कहा गया है कि इन एजेंसियों के बीच तालमेल ने “अन्य देशों के लिए अध्ययन और अनुकरण हेतु एक व्यावहारिक मॉडल” तैयार किया है।

 

गाजा पट्टी में खत्म हो गया युद्ध… इजरायल-हमास करेंगे बंधकों-कैदियों की अदला-बदली, मिस्र में ग्लोबल लीडर्स का जमावड़ा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सोमवार तड़के मिस्र पहुच गये हैं। उनके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो भी विश्व नेताओं में शामिल हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिस्र में आयोजित गाजा शांति समझौता कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अमेरिका से निकल चुके हैं। अमेरिका से निकलते वक्त उन्होंने कहा कि ‘गाजा में युद्ध खत्म हो चुका है।’ माना जा रहा है कि भारतीय समय के मुताबिक साढ़े 10 बजे से हमास, इजरायली बंधकों की रिहाई शुरू कर देगा। रिहाई, मिस्र में गाजा सीजफायर समिट से पहले पूरा हो जाने की संभावना है, जिसके तहत हमास, इजरायली बंधकों को रिहा करेगा और इजरायल, हजारों उन फिलीस्तीनियों को रिहा करेगा, जो इजरायली जेल में सालों से बंद हैं।

इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौता होने से गाजा के उन लाखों लोगों को राहत मिलने की संभावना है, जो पिछले दो सालों से बम बारूद के धमाकों के बीच जिंदगी जी रहे हैं। गाजा में अकाल है और हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में शुरू हुए गाजा पर इजरायल के युद्ध में कम से कम 67,806 लोग मारे गए हैं और 170,066 घायल हुए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के क्रूर हमले में इजरायल में कुल 1,139 लोग मारे गए थे और लगभग 250 लोगों को हमास ने बंदी बना लिया था।

इजरायल और हमास में सीजफायर समझौता
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एयर फोर्स वन में सवार हैं और उनके सोमवार सुबह इजराइल पहुंचने की उम्मीद है। वाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति बंधकों के परिवारों से बात करेंगे और इजरायली संसद, नेसेट को संबोधित करेंगे। इसके बाद ट्रंप मिस्र के लिए रवाना होंगे, जहां वे सोमवार को ही क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नेताओं के साथ एक वैश्विक “शांति शिखर सम्मेलन” की सह-अध्यक्षता करेंगे, जिसमें युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति का आह्वान किया जाएगा।

– गाजा में जिन 20 इजरायली बंधकों के जीवित होने की आशंका है, उन्हें कुछ ही घंटों में रिहा कर दिया जाएगा। अमेरिका की मध्यस्थता वाले युद्धविराम समझौते के पहले महत्वपूर्ण चरण के तहत, इजरायल में लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों और बंदियों को भी रिहा किया जाएगा। युद्ध शुरू होने के बाद से, 148 बंधकों को जीवित इजराइल वापस लाया गया है, जबकि 140 को रिहा कर दिया गया और आठ को इजराइली सेना ने बचा लिया। हमास ने कई मृत बंधकों के शव भी लौटाए हैं।
गाजा में युद्धविराम को लेकर मिस्र में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसमें दुनिया के करीब 20 नेता शामिल हो रहे हैं। इनमें फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर शामिल हैं। डोनाल्ड ट्रंप, कार्यक्रम की सह अध्यक्षता करेंगे।
उत्तरी गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुंचने के साथ ही फिलिस्तीनी अपने बचे-खुचे घरों की ओर लौट रहे हैं। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि भोजन, दवा और अन्य जरूरी चीजों की आपूर्ति अभी भी गंभीर रूप से कम है।
बंदियों और कैदियों की अदला-बदली कैसे होगी?
इजरायली सरकार ने आज बंधकों की रिहाई की योजनाएं तैयार कर ली हैं। यह बंधकों और कैदियों की पहली अदला-बदली नहीं है। इससे पहले भी हमास ने अपहृत लोगों को सौंपने से पहले समारोह आयोजित किए थे। लेकिन इस बार, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता शोश बेड्रोसियन ने रविवार को कहा कि हमास का कोई प्रोपेगेंडा नहीं होगा और न ही फिलिस्तीनी उग्रवादी समूह को कोई “प्रदर्शन” करने दिया जाएगा। इसके बजाय, बेड्रोसियन ने कहा कि गाजा में बंधक बनाए गए 20 जीवित बंधकों को रेड क्रॉस को सौंप दिया जाएगा “और छह से आठ वाहनों में उन्हें वापस इजरायल जाया जाएगा।”
सीएनएन के मुताबिक, इजराइल इस दौरान आजीवन कारावास की सजा काट रहे 250 फिलिस्तीनी कैदियों के साथ-साथ 7 अक्टूबर 2023 के बाद हिरासत में लिए गए गाजा के 1,700 फिलिस्तीनियों को भी रिहा करेगा। इजराइली जेल सेवाओं के एक प्रवक्ता ने कहा कि रिहा होने वाले आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को शनिवार को इजराइल के दक्षिण में ओफर और केट्ज़ियोट जेलों में निर्वासन परिसरों में ले जाया गया है। इजराइल के अनुसार, इनमें से 142 कैदियों को निर्वासित किया जाएगा। बाकी या तो वेस्ट बैंक या पूर्वी यरुशलम लौट जाएंगे।
तेल अवीव में सूर्योदय के साथ ही होस्टेज स्क्वायर पर भीड़ जमा हो गई है, कुछ लोग रात से ही रूके हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि कुछ ही घंटों में 20 जीवित बंधकों की रिहाई हो जाएगी। यह चौक 700 से ज्यादा दिनों से बंधकों के प्रदर्शनों का केंद्र रहा है और भीड़ में से कई लोग एक साथ बैठकर गाने गा रहे थे और स्क्रीन पर बंधकों की वापसी की तस्वीरें देख रहे थे। बंधक और लापता परिवार फोरम की स्वास्थ्य टीम ने चेतावनी दी है कि बंधकों और उनके परिवारों के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है।
युद्धविराम कार्यक्रम के लिए मिस्र पहुंच रहे ग्लोबल लीडर्स
गाजा के भविष्य को लेकर होने वाले शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 20 से ज्यादा देशों के विश्व नेता मिस्र के लाल सागर स्थित शर्म अल-शेख रिसॉर्ट पहुंच रहे हैं। इस सम्मेलन की अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी सोमवार को करेंगे, जिसमें एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर समारोह भी शामिल होने की उम्मीद है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने रविवार को X पर एक पोस्ट में मिस्र पहुंचने की पुष्टि की हैं। ब्रिटेन गाजा में सहायता के लिए 2.6 करोड़ डॉलर की सहायता दे रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सोमवार तड़के मिस्र पहुच गये हैं। उनके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगान और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो भी विश्व नेताओं में शामिल हैं, जिनके इसमें भाग लेने की उम्मीद है। इस शिखर सम्मेलन में भारत की तरफ से राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह हिस्सा ले रहे हैं।

भारत काबुल मिशन को पूर्ण दूतावास में अपग्रेड करेगा, तालिबान के साथ गहरे संबंधों का संकेत

भारत के विदेश मंत्री ने शुक्रवार को नई दिल्ली में अपने अफ़ग़ान समकक्ष से मुलाकात के बाद घोषणा की कि भारत काबुल में अपने तकनीकी मिशन को एक पूर्ण दूतावास में उन्नत कर रहा है। यह घोषणा दो दशकों की अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के बाद 2021 में तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद पहली उच्च-स्तरीय राजनयिक बातचीत के दौरान की गई।

भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का वादा किया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए प्रतिबद्ध है। नई दिल्ली में अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताकी के साथ बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, “हमारे बीच घनिष्ठ सहयोग आपके राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और लचीलेपन में भी योगदान देता है।”

मुत्ताकी, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों, जिनमें यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति ज़ब्त करना शामिल है, के तहत कई अफ़ग़ान तालिबान नेताओं में से एक हैं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति द्वारा उन्हें अस्थायी यात्रा छूट दिए जाने के बाद गुरुवार को नई दिल्ली पहुँचे। यह यात्रा मुत्ताकी द्वारा मंगलवार को रूस में अफ़ग़ानिस्तान पर एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में भाग लेने के बाद हुई है, जिसमें चीन, भारत, पाकिस्तान और कुछ मध्य एशियाई देशों के प्रतिनिधि शामिल थे।

तालिबान तक भारत की व्यावहारिक पहुंच

यह कदम भारत और तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान के बीच ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के प्रति शत्रुता के बावजूद गहरे होते संबंधों को रेखांकित करता है।

दोनों को कुछ न कुछ हासिल करना है। तालिबान प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है। इस बीच, भारत अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों पाकिस्तान और चीन का मुकाबला करना चाहता है, जो अफ़ग़ानिस्तान में गहराई से शामिल हैं।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जनवरी में दुबई में मुत्तकी से मुलाकात की थी, और अफ़ग़ानिस्तान में भारत के विशेष दूत ने अप्रैल में राजनीतिक और व्यापारिक संबंधों पर चर्चा के लिए काबुल का दौरा किया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि तालिबान के साथ उच्च स्तर पर बातचीत करने का भारत का निर्णय एक रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन को दर्शाता है, जो आंशिक रूप से पिछली गैर-संलग्नता के परिणामों के साथ-साथ अपने रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से पिछड़ने से बचने के लिए किया गया है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण दोंती ने कहा, “नई दिल्ली दुनिया को चीन, पाकिस्तान या दोनों के साथ अपनी प्रतिद्वंद्विता के चश्मे से देखती है। तालिबान की संतुलित विदेश नीति, जिसमें प्रतिद्वंद्वी देशों और समूहों के साथ संबंध स्थापित करना शामिल है, नई दिल्ली की अपनी रणनीति को प्रतिबिंबित करती है।”

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तान के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं, खासकर शरणार्थियों के निर्वासन और सीमा तनाव को लेकर, और भारत की भागीदारी को पाकिस्तान के प्रभाव के रणनीतिक प्रतिकार के रूप में देखा जा रहा है। भारत का लक्ष्य बुनियादी ढाँचे और राजनयिक उपस्थिति के माध्यम से अफ़ग़ानिस्तान में चीनी प्रभुत्व को सीमित करना भी है।

दोंती ने कहा, “बीजिंग द्वारा तालिबान के साथ सक्रिय रूप से बातचीत करने के साथ, नई दिल्ली नहीं चाहेगी कि उसका मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी काबुल पर विशेष प्रभाव रखे।”

उन्होंने कहा कि अतीत में पाकिस्तान का तालिबान पर भी ऐसा ही प्रभाव था, लेकिन इस्लामाबाद के साथ उसके बिगड़ते संबंधों के कारण, नई दिल्ली “काबुल पर थोड़ा प्रभाव विकसित करने और एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को मज़बूत करने” का अवसर देख रही है।

 

म्यांमार भूकंप के बाद बैंकॉक में 30-मंजिला इमारत गिरने से 3 की मौत, 80 से ज्यादा लोग फंसे

News web media Uttarkhand : 28 मार्च 2025 को म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप का असर थाईलैंड के बैंकॉक में भी देखा गया। भूकंप के बाद, बैंकॉक के एक निर्माणाधीन 30-मंजिला हाई-राइज इमारत गिर गई, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई और 80 से अधिक लोग मलबे में फंसे हुए हैं। भूकंप का केंद्र म्यांमार के मंडले शहर के पास था, और इसने थाईलैंड के अन्य हिस्सों में भी झटके महसूस किए।

बैंकॉक में इमारत के गिरने के बाद, स्थानीय बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए त्वरित बचाव कार्य शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि मलबे में कई लोग फंसे हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर हो सकती है। घटनास्थल पर बचाव और चिकित्सा टीमों को भेजा गया है, और सहायता कार्य जारी है।

म्यांमार में भी भूकंप के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, और सरकार ने आपातकाल की घोषणा की है। भूकंप के प्रभाव से अन्य देशों में भी हलचल मच गई, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान थाईलैंड और म्यांमार में हुआ है। अंतरराष्ट्रीय संगठन और सरकारें राहत कार्यों में सहायता प्रदान कर रहे हैं।

रूसी राष्ट्रपति से भारत को मिल रहा एक और तोहफा, अगले साल भारतीय बिना बीजा कर सकेगे रूस की यात्रा

News web media Uttarakhand : भारतीय नागरिकों के लिए रूस यात्रा को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों देशों के रिश्ते अब और प्रगाढ़ होने जा रहे हैं. क्योंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत को एक और तोहफा देने जा रहे हैं. दरअसल, अगले साल से भारतीय बिना बीजा के रूस की यात्रा कर सकेंगे.

ऐसा माना जा रहा है कि 2025 के वसंत में शुरू होने वाली एक नई प्रणाली के साथ भारतीय जल्द ही रूस में वीज़ा-मुक्त यात्रा कर पाएंगे. इससे पहले जून में, रिपोर्टें सामने आई थीं कि रूस और भारत ने एक-दूसरे के लिए वीजा प्रतिबंधों को कम करने के लिए द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा की थी. वीजा-मुक्त समूह पर्यटक आदान-प्रदान लागू करें.

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बता दें कि, वर्तमान में रूस भारतीयों के लिए ई-वीजा जारी करता है. ये सुविधा अगस्त 2023 से मिल रही है. ई-वीजा प्राप्त करने के लिए लगभग चार दिनों का वक्त लगता है. पिछले साल जारी किए गए ई-वीजा की संख्या के मामले में भी भारत ने शीर्ष पांच देशों में अपनी जगह बनाई. तब रूस ने भारतीय यात्रियों को 9,500 ई-वीजा जारी किए थे.

बता दें कि वर्तमान में भारतीय नागरिकों को रूसी में प्रवेश करने, रहने और बाहर निकलने के लिए देश में रूसी दूतावास/वाणिज्य दूतावास द्वारा जारी वीजा की जरूरत होती है. इनमें ज्यादातर भारतीय व्यवसाय, पर्यटन या फिर आधिकारिक उद्देश्यों के लिए रूस की यात्रा करते हैं. साल 2023 में रिकॉर्ड 60,000 से अधिक भारतीयों ने मास्को की यात्रा की थी, जो 2022 की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में व्यावसायिक पर्यटन के लिए गैर-सीआईएस देशों में भारतीय तीसरे स्थान पर रहे हैं. 2024 की पहली तिमाही में रूस ने भारतीयों के लिए लगभग 1,700 ई-वीजा जारी किए गए थे.

बता दें कि फिलहाल रूस वर्तमान में अपने वीज़ा-मुक्त पर्यटक विनिमय कार्यक्रम के तहत चीन और ईरान के यात्रियों को वीज़ा-मुक्त प्रवेश की अनुमति दे रखी है. यह पहल मॉस्को के लिए सफल साबित हुई है, जिसे भारत के साथ भी इसे दोहराने की उम्मीद है. वहीं वर्तमान में भारत के लोग दुनियाभर के 62 देशों में बिना वीज़ा के यात्रा कर सकते हैं. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत 82वें स्थान पर है. एक भारतीय पासपोर्ट धारक इंडोनेशिया, मालदीव और थाईलैंड जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर बिना वीजा के यात्रा कर सकता है.