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Rajya Sabha Election: राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव की तारीखों का एलान, इन 10 राज्यों में खाली हुई सीटें

सियासी लिहाज से इन चुनावों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में दलों की संख्या भविष्य में विधेयकों के पारित होने और राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकती है। ऐसे में विभिन्न दलों ने उम्मीदवारों के चयन और समर्थन जुटाने की तैयारियां तेज कर दी हैं।

10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों को लेकर चुनाव होना है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। चुनाव आयोग की ओर से जानकारी दी गई है कि 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर 18 जून 2026 को चुनाव कराया जाएगा. चुनाव आयोग की घोषणा के बाद संबंधित राज्यों में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम शामिल हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में सबसे अधिक चार-चार सीटों पर मतदान कराया जाएगा।

किस राज्य की कितनी सीटों पर होना है राज्यसभा चुनाव?
चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राज्यसभा से 21 जून से 19 जुलाई तक अलग-अलग तारीखों पर 10 राज्यों के वर्तमान सांसद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। राज्यसभा चुनाव आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में चार-चार सीटों, मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटों, झारखंड में दो सीटों और मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में एक-एक सीट पर होंगे।

राज्यसभा से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, दिग्विजय सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवोगौड़ा जैसे प्रमुख नेता सेवानिवृत्त होंगे।। राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, नीरज डांगी और रवनीत सिंह की सीटें भी खाली होने जा रही हैं। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 11 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे।

चुनाव आयोग ने जारी किए विशेष निर्देश
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराया गया बैंगनी रंग का विशेष स्केच पेन ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।

 

Cyber Crime: चारधाम यात्रियों को ‘लूट’ रहे बिहार के ठग, केदारनाथ हेली सेवा के नाम पर सबसे ज्यादा शिकायतें

जांच में सामने आया है कि केदारनाथ हेली सेवा और यात्रा बुकिंग के नाम पर सबसे ज्यादा साइबर ठगी बिहार के नवादा, पटना, गया और बिहारशरीफ जिलों से संचालित गिरोह कर रहे हैं। सबसे ज्यादा फेक आईपी एड्रेस इन्हीं चार जिलों में सक्रिय मिले हैं।

चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले गिरोहों पर उत्तराखंड एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि केदारनाथ हेली सेवा और यात्रा बुकिंग के नाम पर सबसे ज्यादा साइबर ठगी बिहार के नवादा, पटना, गया और बिहारशरीफ जिलों से संचालित गिरोह कर रहे हैं। सबसे ज्यादा फेक आईपी एड्रेस इन्हीं चार जिलों में सक्रिय मिले हैं।

एसटीएफ के अनुसार, चारधाम यात्रा शुरू होते ही साइबर अपराधियों ने फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज और मोबाइल नंबरों के जरिये श्रद्धालुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। सबसे अधिक शिकायतें केदारनाथ हेली सेवा की ऑनलाइन बुकिंग को लेकर मिलीं, जहां ठग कम कीमत और तत्काल टिकट उपलब्ध कराने का झांसा देकर लोगों से हजारों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा रहे। कई मामलों में फर्जी होटल और गेस्ट हाउस बुकिंग के नाम पर भी लोगों से रकम ऐंठी गई।

एसटीएफ ने अब तक 200 से अधिक फर्जी वेबसाइट, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट और बुकिंग लिंक बंद कराए हैं। इसके अलावा 50 से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबरों को भी ब्लॉक कराया गया है जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहे थे और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए यात्रियों तक पहुंच बना रहे थे।

चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। साइबर टीमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी ट्रैवल पोर्टल और संदिग्ध ऑनलाइन पेमेंट गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। कई फर्जी वेबसाइट सरकारी पोर्टल जैसी दिखने के कारण श्रद्धालु आसानी से धोखे का शिकार हो रहे। अब तक 200 से अधिक साइटें बंद कराई गई हैं।

-अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ

सिर्फ अधिकृत वेबसाइट से करें बुकिंग
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने यात्रियों से अपील की है कि हेली सेवा, होटल या यात्रा पंजीकरण केवल अधिकृत पोर्टल से ही कराएं। किसी भी अनजान मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया लिंक या व्हाट्सएप मैसेज के जरिए भुगतान न करें। उत्तराखंड सरकार ने केदारनाथ हेली सेवा बुकिंग के लिए सिर्फ आईआरसीटीसी को ही अधिकृत किया है। सिर्फ वहीं से टिकट बुक करें। अगर किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर अपराधियों पर एसटीएफ का प्रहार
साइबर अपराधियों के खिलाफ उत्तराखंड एसटीएफ ऑपरेशन प्रहार के तहत कड़ी कार्रवाई कर रही है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि बीते चार महीनों में पीड़ितों के 10 करोड़ रुपये बचाए गए। इसके अलावा 147 अंतरराज्यीय लिंक ऑपरेटरों और 27 फर्जी मोबाइल धारकों पर वैधानिक कार्यवाही की गई।

 

Uttarakhand: एसआईआर; पहले से तैयार कर लें कुछ कागजात तो नहीं होगी मुश्किल, आयोग ने जारी की 12 दस्तावेज की सूची

एसआईआर के लिए लोग पहले से ही कुछ कागजात तैयार कर लें तो मुश्किल नहीं होगी। आयोग ने 12 दस्तावेजों की सूची जारी की है।

उत्तराखंड में चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने को है। 70 लाख मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है, जिनका वोट सुरक्षित है लेकिन नौ लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका 2003 का वोट नहीं मिला। लिहाजा, घबराने की जरूरत नहीं है, उनके लिए भी चुनाव आयोग ने 12 दस्तावेज की सूची जारी की हुई है।

एसआईआर शुरू होने के बाद वर्तमान मतदाता सूची के आधार पर संबंधित मतदाताओं के पास बीएलओ गणना प्रपत्र पहुंचाएंगे। इस पर बीएलओ का नाम व मोबाइल नंबर भी होगा। प्रपत्र में आपको वर्ष 2003 के अपने वोट की जानकारी देनी होगी। अगर तब आपका वोट नहीं था तो अपने माता-पिता के वोट की जानकारी देनी होगी। अगर उनका भी वोट नहीं होगा तो दादा-दादी के वोट की जानकारी देनी होगी। कोई रास्ता नजर नहीं आएगा तो 12 दस्तावेज में कोई भी काम आ सकता है। इन दस्तावेज को पहले से तैयार रखेंगे तो परेशानी से बच सकते हैं। मतदाता सूची आप सीईओ उत्तराखंड की वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर देख सकते हैं।

एसआईआर के लिए ये 12 दस्तावेज हैं वैध

केंद्र, राज्य सरकार या पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश। एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी, पीएसयू की ओर से जारी कोई भी पहचान पत्र, प्रमाण पत्र या दस्तावेज। आधार कार्ड। जन्म प्रमाण पत्र। पासपोर्ट। मान्यता प्राप्त बोर्ड या विवि की ओर से जारी मैट्रिकुलेशन या शैक्षिक प्रमाण पत्र। स्थायी निवास प्रमाण पत्र। वन अधिकार प्रमाण पत्र। ओबीसी/एससी/एसटी या कोई भी जाति प्रमाण पत्र। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर। राज्य या स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर। सरकार की ओर से जारी कोई भी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र।

ये होगी एसआईआर की प्रक्रिया

सबसे पहले आपके पास एसआईआर का गणना प्रपत्र आएगा। इस पर आपके वर्तमान वोट की जानकारी होगी। 2003 की जानकारी भरनी होगी। साथ ही एक नया फोटो चिपकाना होगा। वापस बीएलओ के पास जमा कराएंगे। अगर आप 2003 का डाटा नहीं है तो उस पर यही बात लिखकर आपको वापस देना है। फिर आपके पास नोटिस आएगा। नोटिस के आधार पर ईआरओ कार्यालय में आप अपने दस्तावेज जमा करा सकते हैं।

 

Uttarakhand: बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में दिव्यांगों व बुजुर्गों को अलग से होंगे दर्शन, बीकेटीसी ने बनाई व्यवस्था

बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में दिव्यांगों व बुजुर्गों को लेकर बीकेटीसी ने नई व्यवस्था बनाई है। सुबह व शाम के समय आधा-आधा घंटे का समय दर्शन के लिए निर्धारित होगा। 70 वर्ष व उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को आधार कार्ड दिखाना होगा।

चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में दिव्यांगों व बुजुर्गों को दर्शन के लिए लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। पहली बार बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) दिव्यांगाें व बुजुर्गों के लिए अलग से दर्शन की व्यवस्था कर रही है। इसके लिए एसओपी भी तैयार कर ली गई है।

बदरीनाथ व केदारनाथ में अभी तक दिव्यांगाें व बुजुर्गों के लिए दर्शन की कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। उन्हें भी आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में दर्शन करने पड़ते हैं। बीकेटीसी ने दिव्यांग व 70 वर्ष व उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के सुगम दर्शन की व्यवस्था बनाई है। इससे धामों में दिव्यांगों व बुजुर्गों को दर्शन करने में बड़ी राहत मिलेगी। बीकेटीसी ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए मानव प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर ली है। जल्द ही नई व्यवस्था धामों में लागू की जाएगी।

एसओपी के अनुसार शारीरिक व मानसिक रूप से दिव्यांग, बुजुर्ग श्रद्धालुओं को दर्शन करने से पहले अनिवार्य रूप से मंदिर समिति के काउंटर पर पंजीकरण कराया जाएगा। बुजुर्गों को आधार कार्ड व दिव्यांगों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिखाना होगा। बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में सुबह व शाम को आधा घंटे का समय निर्धारित किया जाएगा।

जल्द व्यवस्था लागू होगी
बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में आने वाले दिव्यांग व बुजुर्ग श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए बीकेटीसी ने नई व्यवस्था बनाने की पहल की है। इससे दिव्यांगों व बुजुर्गों को आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन करने के लिए लाइन में इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उनके दर्शन के लिए अलग से समय निर्धारित किया जाएगा। जल्द ही इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। -हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बीकेटीसी

Uttarakhand: पीएम मोदी के सोना न खरीदने की अपील से सराफा कारोबारी नाराज, प्रदेशभर में आज विरोध प्रदर्शन

प्रधानमंत्री मोदी के आभूषणों की खरीदारी न करने की अपील का असर स्वर्ण कारोबारियों और निर्माताओं पर पड़ता दिख रहा है। सोना न खरीदने की बात ने कारोबार को आर्थिक नुकसान की ओर धकेल दिया है।नाराज सराफा कारोबारी आज प्रदेशभर में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोना न खरीदने के बयान के विरोध में प्रदेशभर में सराफा कारोबारी सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। बुधवार को ज्वैलर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तरांचल ने इसका ऐलान किया। दून में भी सराफा मंडल में विरोध जताया जाएगा।

प्रदेश महासचिव गुरजीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के आभूषणों की खरीदारी न करने की अपील का विपरीत असर स्वर्ण कारोबारियों और निर्माताओं पर पड़ता दिख रहा है। सोना न खरीदने की बात ने इस कारोबार को आर्थिक नुकसान की ओर धकेल दिया है। सोना भारत की सभ्यता का प्रतीक है और हर त्योहार में सोने-चांदी की खरीदारी को शुद्धता और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।

उत्तराखंड के सभी सराफा कारोबारी बृहस्पतिवार को अपने-अपने क्षेत्रों में मोमबत्ती जलाकर इस आयात शुल्क की बढ़ोतरी और सोना न खरीदने की अपील के प्रति सांकेतिक विरोध करेंगे। सराफा मंडल देहरादून के अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने बताया कि देहरादून में शाम सात बजे धामावाला स्थित सराफा बाजार में कैंडल जलाकर विरोध जताया जाएगा।

सोना हुआ 10 हजार महंगा, व्यापारियों की बढ़ी चिंता

बुधवार को एक ही दिन में सोने के दाम 10 हजार रुपये तक बढ़ गए। दरअसल, सोने पर आयात शुल्क छह से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक बढ़ाया गया। इसके कारण सोना दस हजार रुपये तक महंगा हो गया। सराफा मंडल, दून के अनुसार, बुधवार को 24 कैरेट सोने के दाम 1.66 लाख 500 रुपये तक पहुंच गए। जबकि एक दिन पहले इसके दाम 1.55 लाख रुपये तक थे। इसे लेकर व्यापारियों में भी चिंता बढ़ गई। सराफा मंडल के अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने बताया कि एक ही दिन में आयात शुल्क बढ़ने के कारण 10 हजार रुपये तक बढ़ गए। इससे लोगों को सोना खरीदने में दिक्कतें होंगी। आगे सोने के दाम और बढ़ने की संभावना रहेगी।

 

खौफ के पंजों में पौड़ी: वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही, आंकड़े चिंताजनक, तीन साल में 246 मामले

गढ़वाल वन प्रभाग में वन्यजीवों के हमले में मौत और घायलों की संख्या बढ़ती गई है। सरकारी सिस्टम के रवैये से हालात बेकाबू हो रहे हैं।

राज्य में वन्यजीवों के हमलों की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इसमें गढ़वाल वन प्रभाग भी शामिल है। पिछले वर्ष इस प्रभाग में प्रदेश में सबसे अधिक मानव- वन्यजीव संघर्ष के मामले रिपोर्ट हुए हैं। यहां पर लगातार तीन वर्षों में वन्यजीवों के हमलों में लोगों की मौत और घायल होने के मामले बढ़े हैं।

बच्चों की सुरक्षा की दृष्टिगत स्कूलों को अस्थाई तौर पर बंद तक करना पड़ा है। हालत यह है कि वन्यजीवों की संख्या बढ़ने पर तारीफ बटोरने वाला तंत्र प्रभागों का पुनर्गठन करने के साथ संसाधन नहीं बढ़ा सका है, बल्कि जिस वन प्रभाग में सबसे अधिक घटनाएं हो रही हैं, वहां पर दशकों से जो स्वीकृत पद हैं? उसके सापेक्ष वन रक्षक, वन दरोगा से लेकर रेंजर तक तक के पद खाली चल रहे हैं।

इस प्रभाग में एक भी ट्रांजिट या रेस्क्यू सेंटर तक नहीं बन सका है। यह तब है, जब गढ़वाल मंडल के सबसे बड़े अधिकारी मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल का कार्यालय पौड़ी में है। वन संरक्षक का कार्यालय भी पौड़ी में स्थित है। गढ़वाल वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले पौड़ी जिले में मानव- वन्यजीव संघर्ष पर विजेंद्र श्रीवास्तव की रिपोर्ट। 

आंकड़े चिंताजनक, तीन साल में 246 घटनाएं

गढ़वाल वन प्रभाग के मानव- वन्यजीव संघर्ष के चिंताजनक हालात की तस्दीक वन महकमे के आंकड़े भी कर रहे हैं। 2023 से 2025 तक गढ़वाल वन प्रभाग में वन्यजीवों के हमले की 246 घटनाएं हुई हैं। इसमें 14 लोगों की असमय मृत्यु और 232 घायल हुए हैं। इसमें वन्यजीवों के फसल, पशु और भवन क्षति के मामले अलग हैं। वर्ष 2025 में राज्य में सबसे अधिक वन्यजीवों के हमले के मामले (116) गढ़वाल वन प्रभाग में सामने आए थे। इस वर्ष जनवरी-2026 से 15 मार्च तक भी 16 घटनाएं हुई हैं।

वन्यजीवों के हमले की घटनाएं

वर्ष-मृत्य- घायल

2023-04-40

2024-05-81

2025-05-111

घटनाएं बढ़ रही, पर स्वीकृत पद के सापेक्ष भी नहीं पूरे कर्मचारी

राज्य बनने के बाद आवश्यकता अनुसार पुलिस विभाग में नए थाने, चौकी खोले गए और संसाधनों को बढ़ाया गया। इसी तरह परिवहन विभाग में नए चेकिंग के लिए आरटीओ के पद स्वीकृत करने के साथ नए एआरटीओ कार्यालय खोले गए। पर राज्य में 70 प्रतिशत से अधिक वन भूमि है और जहां पर वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ मानव- वन्यजीव संघर्ष के मामले बढ़े हैं, वहां पर प्रभागों का पुनगर्ठन तक नहीं हुआ है। करीब तीन साल से मामले को लेकर केवल कागजी कार्रवाई ही चल रही है। वहीं, जिस गढ़वाल वन प्रभाग में सबसे अधिक घटना हो रही है, वहां पर जो भी स्वीकृत पद हैं, उसके सापेक्ष भी रेंजर से लेकर वन आरक्षी तक वन कर्मियों की संख्या कम है।इसके अलावा गढ़वाल वन प्रभाग में वन्यजीवों की संख्या कितनी है? जंगल की कितनी धारण क्षमता है? वास स्थल की स्थिति कैसी है, उसको जानने को लेकर भी कोई वैज्ञानिक अध्ययन तक नहीं हुआ है।

प्रभाग में स्टाफ की स्थिति

पद- स्वीकृत पद- रिक्त पद

रेंजर-06-01

डिप्टीरेंजर-12-08

वन दरोगा-54-15

वन आरक्षी-89-20

एक भी रेस्क्यू सेंटर नहीं

इंसानी जिंदगी के लिए खतरा बने वन्यजीवों को पकड़ने का अभियान चलता है। पर इनको रखने के लिए पूरे गढ़वाल में कोई भी रेस्क्यू या ट्रांजिट सेंटर तक नहीं है। अभी गढ़वाल वन प्रभाग में योजना का खाका खींचा जा रहा है। इस प्रभाग में रेस्क्यू आपरेशन के लिए चलाने के लिए कोई स्थायी तौर पर पशु चिकित्सक भी तैनात नहीं है।

पूरे वन प्रभाग में केवल 12 बंदूक

वन प्रभाग में 12 बंदूक है। इसके अलावा पांच ट्रैंक्यूलाइजर गन है। इसके अलावा एक त्वरित प्रतिक्रिया बल है। सबसे अधिक तेंदुए को पकड़ने के 27 पिंजरे हैं। बाघ के चार और भालू के दो पिंजरे हैं। फील्ड टीम को छह वाहन उपलब्ध कराएं गए हैं।

सूचना दर्ज करते, बजट भी देते पर उपयोग को लेकर सवाल?

आपदा प्रबंधन विभाग जो बुलेटिन जारी करता है, उसमें वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को भी शामिल किया जाता है। इसके अलावा वन विभाग को उपकरण खरीदने और संसाधनों को बढ़ाने में राशि भी दी। पर आपदा प्रबंधन विभाग युवा आपदा मित्र, आपदा मित्र आदि को आपदा की दृष्टि से ट्रेंड करता है, उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम में फारेस्ट फायर, सांप काटने, वन्यजीवों के काटने का प्रशिक्षण का उल्लेख है। पर मानव- वन्यजीव संघर्ष में प्रशिक्षित लोगों का सूचना देने, विभागीय समन्वय करने से लेकर स्थिति संभालने में उपयोग हो पा रहा है? यह भी बड़ा सवाल है।

वन्यजीवों की दहशत बनी

पौड़ी जिले में वन्यजीवों के हमलों की घटनाओं को लेकर दहशत बनी हुई है। कमेड़ा ग्राम सभा की सावित्री ममगाईं बताती हैं कि पहले बंदर नहीं थी, अब इनकी संख्या बढ़ गई है। बचाव के लिए छत पर लोहे की जाली को लगाना पड़ा है। गुलदार का भी मूवमेंट लगातार बना हुआ है। खिर्सू के मदन रावत बताते हैं कि जब बर्फ पड़ी थी, तो घर के पास गुलदार सड़क पर चलता हुआ दिखा। भालू को लेकर भी चिंता है। बरसात के समय जब सब्जी को तैयार किया जाता है, तो उस समय भी भालू पहुंच जाता है। राजेश्वरी देवी बताती हैं कि वन्यजीवों से जुड़ी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। बलवंत सिंह पंवार भी बताते हैं कि वन्यजीवों का भय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि पहाड़ में अन्य जगह भी होने वाली घटनाओं से चिंता लोगों की बढ़ी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसारभालू के हमले की पांच घटनाएं हुई। इसमें भालू ने दो लोगों को घायल किया, एक गाय को मारा और एक का दरवाजा तोड़ा था। वर्ष-2024 में तेंदुए के हमले में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी।

क्या कहते हैं अधिकारी

प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने बताया कि प्रभागों का पुनर्गठन को लेकर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही प्रभाग में कर्मियों की संख्या के साथ अन्य संसाधन को भी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव बताते हैं कि मानव- वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। संवेदनशील जगह पर टीमों को तैनात किया गया है। खतरनाक हो चुके वन्यजीवों को पकड़ने समेत अन्य कदम उठाए जाते हैं। जन जागरूकता भी की जा रही है। प्रभाग में एक रेस्क्यू या ट्रांजिट सेंटर बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। बच्चों की सुरक्षा के लिए एस्कोर्ट भी दिया जा रहा है।

बड़ा है गढ़वाल वन प्रभाग

सौ साल पुराने गढ़वाल वन प्रभाग का 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल है। इसकी सीमा धूमाकोट, कीर्ति नगर, लैंसडौन वन प्रभाग की सीमा तक फैली हुई है। वनाधिकारियों की अन्य क्षेत्रों में भी मानव वन्यजीव संघर्ष के दृष्टिगत कार्य करने की भी जिम्मेदारी होती है।

बदरीनाथ हाईवे पर हादसा: हरिद्वार जा रही तीर्थयात्रियों की बस सड़क पर पलटी, 27 लोग थे सवार, मची चीख पुकार

बस बदरीनाथ से हरिद्वार जा रही थी। चलते-चलते ड्राइवर की साइड की खिड़की खुल गई। उसे बंद करने के दौरान बस अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई।

बदरीनाथ हाईवे पर चारधाम यात्रा से लौट रहे यात्रियों की एक बस रविवार शाम मुनिकीरेती थाना अंतर्गत शिवपुरी क्षेत्र में हाईवे पर पलट गई। हादसा शिवपुरी के पास कलथरी डंपिंग प्वाइंट नजदीक हुआ। बस में ड्राइवर-कंडक्टर समेत 25 यात्री, ड्राइवर और कंडक्टर सवार थे। हादसे में सात यात्री घायल हो गए। अन्य सुरक्षित हैं।

पुलिस के अनुसार, बस (UK14PA0605) बदरीनाथ से हरिद्वार जा रही थी। चलते-चलते ड्राइवर की साइड की खिड़की खुल गई। उसे बंद करने के दौरान बस अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे में सात लोग  घायल हो गए। 108 एंबुलेंस से उन्हें राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश भेजा गया।

बस में सवार बाकी यात्रियों को मामूली खरोंचें आईं, सभी सुरक्षित हैं। थाना मुनि की रेती पुलिस मौके पर पहुंच गई है। यातायात सुचारू कराया जा रहा है। यात्रियों को दूसरी बस से गंतव्य के लिए रवाना किया गया। पुलिस ने बस को सड़क से हटवा दिया है

ये हुए घायल

1-सोनम गुप्ता(28) पुत्री ज्ञानचंद।
2-मुन्नी देवी(56) पत्नी ज्ञानचंद
3-चंद्र प्रकाश (62)  गुप्ता पुत्र रामचरण उम्र  वर्ष
4-संजय चौरसिया  ( 59) पुत्र पन्नालाल उम्र वर्ष
5-सीता देवी (38) पत्नी  राम प्रसाद  उम्र वर्ष
6-कुमारी शबनम (32) पत्नी अभिमन्यु उम्र वर्ष
7-मनीष गिरी  (44)
समस्त निवासीगण लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश l।

UKSSSC: खुल गया नौकरियों का पिटारा; समूह ग की 2000 से अधिक पदों पर 14 भर्ती परीक्षाओं का कलेंडर जारी

उत्तराखंड में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए राहत की खबर है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने समूह के पदों पर भर्ती निकाली है।

प्रदेश में बेरोजगारों के लिए समूह-ग की भर्तियों का पिटारा खुल गया है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 14 भर्तियों का कैलेंडर जारी किया है, जिनसे 2390 पदों पर नौकरी का मौका मिलेगा।

आयोग के सचिव एनएस डुंगरियाल ने बताया कि विभिन्न विभागों से मिले भर्ती प्रस्तावों के आधार पर यह कैलेंडर जारी किया गया है। इसमें इस महीने से लेकर दिसंबर तक होने वाली 14 परीक्षाओं को शामिल किया गया है। पेपर लीक प्रकरण के चलते रद्द हुई स्नातक स्तरीय की जो भर्ती परीक्षा 17 मई को प्रस्तावित थी, वह अब 14 जून को कराई जाएगी। विशेष तकनीकी अर्हता के 57 पदों की जो भर्ती परीक्षा तीन मई को प्रस्तावित थी, वह अब 28 जून को होगी। आयोग इस साल इंटरमीडिएट स्तरीय और स्नातक स्तरीय नई भर्तियां भी निकालेगा।

 

Uttarakhand News: सप्ताहभर के मौसम के ठंडे मिजाज से यूपीसीएल को बड़ी राहत, बिजली की मांग में भारी गिरावट

प्रदेश में पिछले एक सप्ताह के मौसम से बिजली की मांग में भारी गिरावट आई है। एक करोड़ यूनिट तक मांग कम हुई है।अब कहीं भी बिजली कटौती नहीं है।

प्रदेश में पिछले सप्ताहभर से मौसम के ठंडे मिजाज ने यूपीसीएल को बड़ी राहत दी है। बिजली की मांग जो रोजाना औसत पांच से 10 लाख यूनिट बढ़ रही थी, वह गिर गई है। अब प्रदेश में बिजली की मांग 4.4 करोड़ यूनिट के आसपास चल रही है।

अप्रैल के आखिरी दिनों में यूपीसीएल के लिए बिजली की आपूर्ति बड़ा सिरदर्द बनी थी। मांग 5.5 करोड़ यूनिट से भी ऊपर चली गई थी। इसके सापेक्ष उपलब्धता करीब 2.6 करोड़ यूनिट तक ही थी। बाजार से रोजाना करीब डेढ़ करोड़ यूनिट बिजली खरीदकर भी आपूर्ति पूरी नहीं हो पा रही थी। इस कारण यूपीसीएल को दो से तीन घंटे की कटौती करनी पड़ी। स्टील इंडस्ट्री में तो कटौती आठ घंटे तक हुई।

मई की शुरुआत से ही मौसम बदलना शुरू हुआ। लगातार बारिश और पारा गिरने से यूपीसीएल की मुश्किलें भी आसान हो गई। बिजली की मांग करीब एक करोड़ यूनिट तक नीचे चली गई। बुधवार को बिजली की मांग 4.4 करोड़ यूनिट थी, जिसके सापेक्ष राज्य पूल से 1.2 करोड़, केंद्रीय पूल से 1.9 करोड़ यूनिट बिजली मिलाकर 3.1 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध थी। बाकी बाजार व पावर बैंकिंग से इंतजाम किया गया। इस तरह मांग के सापेक्ष पूरी बिजली उपलब्ध थी और कहीं भी घोषित कटौती नहीं की गई।

गर्मी बढ़ी तो फिर बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अभी बिजली की मांग गिरने से राहत जरूरी मिल गई है लेकिन आने वाले समय में जैसे ही मांग में इजाफा होगा तो यूपीसीएल की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं। प्रदेश में आमतौर पर जून माह में बिजली की सर्वाधिक छह करोड़ यूनिट मांग होती है। इसके सापेक्ष उपलब्धता के लिए यूपीसीएल अभी से तैयारी में जुटा है।

Uttarakhand: आईएएस अधिकारियों ने किया भ्रष्टाचार तो आरटीआई से मिल सकेगी जानकारी, आयोग ने दिया आदेश

आईएएस अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया तो आरटीआई से इसकी जानकारी मिल सकेगी। यदि कोई जानकारी देने से भ्रष्टाचार के मामले की जांच में बाधा पैदा हो तो विभाग जानकारी देने से मना कर सकता है।

राज्य सूचना आयोग ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि यदि लोकसेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के किसी मामले में केस दर्ज किया जा चुका है, या राज्य सरकार के द्वारा जांच की अनुमति दी जा चुकी है तो उसकी जानकारी सूचना के अधिकार के अंतर्गत नागरिकों को दी जा सकती है। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मामले की जांच जारी है और उससे संबंधित कोई सूचना देने से जांच में बाधा पैदा होने की आशंका है तो संबंधित अधिकारी ऐसी सूचना देने से इनकार कर सकते हैं।

राज्य सूचना आयुक्त कुशला नंद ने संजीव चतुर्वेदी की एक अपील पर निर्णय देते हुए कहा है कि यदि लोकसेवकों के किसी भ्रष्टाचार के मामले में अदालत में मुकदमा दर्ज हो चुका है तो इसकी जानकारी भी आम नागरिकों को उपलब्ध कराई जा सकती है। हालांकि, फाइल नोटिंग को आयोग ने विभागीय आंतरिक कार्रवाई का हिस्सा माना है और इसकी जानकारी उपलब्ध कराने को सही नहीं ठहराया है।

अनावश्यक दबाव पैदा करने की कोशिश 
अब तक यह धारणा रही है कि लोकसेवकों को किसी दबाव से मुक्त होकर कार्य करने के लिए उनसे संबंधित मामलों की जानकारी आम नागरिकों को नहीं उपलब्ध करानी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उन पर अनावश्यक दबाव पैदा करने की कोशिश की जा सकती है। इससे उनका कामकाज प्रभावित हो सकता है। लेकिन आयोग के इस निर्णय से भ्रष्टाचार में लिप्त लोकसेवकों की जानकारी आम लोगों को उपलब्ध हो सकेगी।

दूसरी एजेंसी की जानकारी देने से पहले अनुमति लेना जरूरी आयोग ने कहा है कि यदि आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई जानकारी जांच करने वाली एजेंसी को किसी अन्य एजेंसी के द्वारा उपलब्ध कराई गई है तो ऐसी जानकारी देने के पूर्व संबंधित जांच एजेंसी से अनुमति लेनी होगी।