सीएम धामी हुए नाराज: अफसरों ने जबरन बंद कीं 22 हजार शिकायतें, आंकड़ा देख हुए गुस्सा; अफसरों को दी ये चेतावनी

देवभूमि उत्तराखंड में अफसरों की लापरवाही पर मुख्यमंत्री धामी गुस्सा हो गए। दरअसल, अफसरों ने 22 हजार शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम ने कहा कि जिस अफसर ने जनता की शिकायत जबरन बंद की, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

उत्तराखंड के अफसरों ने जनता की 22,246 शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने ये आंकड़ा आया तो वे नाराज हो गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर किसी अफसर ने शिकायत को जबरन बंद किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कहा कि जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के बिना किसी भी स्तर पर शिकायतों को जबरन बंद करने की कार्रवाई न की जाए।
शुक्रवार को सचिवालय में सीएम धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन केवल एक दूरभाष संख्या नहीं बल्कि जनता की अपेक्षाओं और विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम है। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता की पूर्ण संतुष्टि सुनिश्चित होने तक किया जाए।

देहरादून में 6,084 शिकायतें शहरी विकास और 2,980 पेयजल विभाग से जुड़ी हैं। ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन से जुड़ी शिकायतें सर्वाधिक हैं। हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक है।

सीएम ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी स्तर पर हर सप्ताह और सचिव स्तर पर प्रत्येक माह में कम से कम दो बार शिकायतों की समीक्षा की जाए। कहा कि हेल्पलाइन की सफलता का वास्तविक आकलन तभी संभव है जब शिकायतकर्ता यह अनुभव करें कि सरकार ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध समाधान प्रदान किया है।

सीएम ने सभी की सराहना की
सीएम ने अधिकतम शिकायतों का निस्तारण करने वाले अधिकारियों से फोन पर बात की। इनमें यूपीसीएल के उत्तरकाशी में तैनात अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं ने 99.09%, पौड़ी में अभिनव रावत ने 98.34%, ऋषिकेश के पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली ने 98.30%, एडीओ विकासनगर दीपक थापली ने 98.23% और एसएचओ पटेलनगर विनोद गुसाईं ने 97.41% समाधान किया है। सीएम ने सभी की सराहना की।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक ने 2043 शिकायतें बंद कीं
राज्य में कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 शिकायतों (लगभग 18.68%) को अनुचित रूप से बंद कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, विभाग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए गंभीर शिकायतों को भी दूसरी श्रेणियों में बदल रहे हैं।
जल संस्थान के अफसरों ने पानी न आने की 861 शिकायतों को जबरन बंद कर दिया। सिलिंडर रिफिल और राशन कार्ड की मांग को शिकायतों के बजाए सिर्फ डिमांड मानकर छोड़ दिया। बिजली के अत्यधिक बिल और खराब मीटरों की समस्या को भी तकनीकी उलझनों में फंसा दिया।

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के पास पेयजल संबंधी 2,074 शिकायतें थीं, जिनमें से उन्होंने 2043 (98.5 प्रतिशत) को बिना ठोस समाधान के जबरन बंद कर दिया। पर्यटन विकास अधिकारी ललित मोहन तिवारी ने 328 में से केवल 41 का निस्तारण किया।
6287 शिकायतें 180 दिनों से लंबित
साल 2021 से अब तक 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। राजस्व विभाग (472), वन विभाग (445) और लोक निर्माण विभाग (401) इस सूची में सबसे ऊपर हैं। कुछ शिकायतें तो साल 2021 से प्रक्रिया में ही अटकी हुई हैं।
अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में लंबित शिकायतों में 107% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, प्रक्रिया में वाली शिकायतों में 2290% का उछाल आया है।

Uttarakhand: बढ़ेगी विधवा, दिव्यांग, तीलू रौतेली और बौना पेंशन, मंत्री ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

विभागीय मंत्री ने कहा, दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान को 700 से बढ़ाकर 1000 रुपये करने के लिए भी अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

प्रदेश में विधवा, दिव्यांग, तीलू रौतेली और बौना पेंशन बढ़ेगी। समाज कल्याण मंत्री खजानदास के मुताबिक विधवा और दिव्यांग पेंशन को 1500 से बढ़ाकर 1875 रुपये किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा बौना पेंशन व तीलू रौतेली पेंशन को 1200 से बढ़ाकर 1500 रुपये किए जाने का प्रस्ताव है।

समाज कल्याण मंत्री ने विधान सभा स्थित सभागार में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागीय मंत्री ने कहा, दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान को 700 से बढ़ाकर 1000 रुपये करने के लिए भी अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं में किसी भी तरह की गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह ध्यान रखा जाए कि जरूरतमंद लाभार्थी छात्रवृत्ति योजनाओं से वंचित न रहे।

उन्होंने विभाग की संचालित अनुदान योजनाओं समीक्षा करते हुए कहा, छात्रवृत्ति योजनाओं से संबंधित सत्यापन के तरीके को और सुदृढ़ बनाया जाए। राजकीय औद्योगिक संस्थानों में नए ट्रेड शुरू किए जाएं और इनमें अनुभवी शिक्षकों, प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाए।

मंत्री ने डॉ. बीआर अंबेडकर अनुसूचित जाति छात्रावास की समीक्षा करते हुए कहा, अगले तीन महीने के भीतर बालिका इंटर कॉलेज मसूरी के छात्रावास भवन का पुनर्निर्माण कार्य पूरा करते हुए इसी साल सितंबर से इसका संचालन शुरू किया जाए। पेंशन एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं की आय सीमा 4000 से बढ़ाकर 6000 रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए। अंतरजातीय विवाह में सामान्य जाति की विधवा एवं एससी-एसटी परिवारों को दिए जाने वाली शासकीय सहायता की समय सीमा वित्तीय वर्ष न रखते हुए 365 दिन (डेट टू डेट) की अवधि किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में विभागीय मंत्री ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के तहत संचालित आदर्श ग्राम योजना की समीक्षा में कहा, इस तरह की योजनाओं को विभाग बढ़ावा दे। जिससे जनकल्याण का प्रयास पूरा हो सके। मंत्री ने राष्ट्रीय वयो श्री योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को प्रदान किए जाने वाले मुफ्त सहायक उपकरणों जैसे छड़ी, व्हील चेयर, श्रवण यंत्र, चश्मा आदि का प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए। दिव्यांग कल्याण योजना के तहत कार्यों पर मंत्री ने निर्देश दिए कि 13 जिलों के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया जाए। बैठक में सचिव श्रीधर बाबू, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र, निदेशक संदीप तिवारी, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया आदि मौजूद रहे।

Doon-Delhi Expressway: वाहनों की गिनती के लिए गठित होगी डाटा विश्लेषण टीम, आकलन के बाद बनेगी यातायात रणनीति

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गिनती के लिए डाटा विश्लेषण टीम गठित होगी। वाहनों की संख्या के आकलन के बाद यातायात रणनीति बनाई जाएगी। टोल बैरियर पर होने वाली गिनती को भी टीम शामिल करेगी।

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यातायात पुलिस ने अगली चुनौतियों पर पार पाने के लिए रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जल्द ही एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों की गिनती शुरू की जाएगी। इसमें टोल बैरियर के डाटा को भी शामिल किया जाएगा।

सामान्य दिनों और फिर सप्ताहांत (वीकेंड) में आने वाले वाहनों की संख्या पता करने के बाद ही देहरादून शहर के लिए एक विशेष यातायात प्लान तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में लगने वाले जाम से बचने की कोशिश की जा सकेगी। वाहनों की गिनती के लिए यातायात पुलिस एक विशेष डाटा विश्लेषण टीम का गठन करने जा रही है। यह टीम एक्सप्रेसवे के मुहाने पर वाहनों की हर घंटे गिनती करेगी। इसमें पीक आवर के समय को भी शामिल किया जाएगा। रात और दिन के आधार पर वाहनों का डाटा इकट्ठा किया जाएगा।

प्रत्येक घंटे आने वाले वाहनों का डाटा नोट करते हुए यह टीम संबंधित कंट्रोल रूम और डायवर्जन प्वाइंट पर तैनात अधिकारियों को सूचित करेगी। इससे समय-समय पर यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिल सकेगी। एसपी ट्रैफिक लोकजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल एक सप्ताह तक टीम वाहनों का डाटा इकट्ठा करेगी। यह टीम टोल बैरियर के संपर्क में भी रहेगी। इसके बाद हर सप्ताह एक प्लान बनाया जाएगा ताकि शहर को जाम से बचाया जा सके।

एसपी ट्रैफिक के अनुसार वाहनों के प्रवाह के आधार पर ही भविष्य में एक रणनीति बनाई जा सकती है। भारी और हल्के वाहनों का अलग-अलग डाटा इसमें इकट्ठा किया जाएगा। भारी वाहनों के लिए जो समय सीमा शहर में बनी हुई है उसमें भी बदलाव इसी डाटा के आधार पर किया जा सकता है।

ड्रोन के माध्यम से भी की जाएगी निगरानी

एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों की निगरानी ड्रोन के माध्यम से भी की जाएगी। इसके माध्यम से यातायात का लाइव फीड लेकर कंट्रोल रूम को सूचित किया जाएगा। ताकि समय रहते एक यातायात प्लान तत्काल बनाया जा सके। इस प्लान को विभिन्न माध्यमों से प्रसारित किया जाएगा। इसमें यातायात रूट, पार्किंग, डायवर्जन स्थल की जानकारी सोशल मीडिया, एफएम और एलईडी सूचना बोर्ड के माध्यम से प्रसारित की जाएगी।

Dehradun–Delhi Expressway: सबसे अधिक चर्चा में रहा वन्यजीवों के दृष्टिगत बना अंडरपास, जानिए क्या है खूबियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का शुभारंभ किया। इस दौरान वन्यजीवों के दृष्टिगत बना अंडरपास फोकस में रहा।

213 किमी देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस वे तैयार हुआ है, इसमें सबसे अधिक चर्चा वन्यजीवों के दृष्टिगत बने अंडरपास को लेकर भी हुई। कैसे जैव विविधता का ख्याल रखते हुए विकास योजना तैयार की जा सकती है, इस परियोजना के जरिए संदेश भी दिया गया है।

राज्य में 70% से अधिक वन भूमि है। ऐसे में विकास योजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण होता है, साथ ही योजनाओं के लिए पेड़ भी कटते हैं, लेकिन एक्सप्रेस वे पर 12 किमी अंडरपास बनाया गया। इसके निर्माण से वन्यजीवों का आवागमन सुगम हुआ।

एलिवेटेड सड़क बनाने के लिए पेड़ कम कटें इसको लेकर योजना को नदी के तल के बीच में रखा गया। इससे 45 हजार की जगह केवल 11,160 वृक्ष ही कटे। ऐसे में राज्य में प्रकृति संरक्षण करते हुए विकास कार्य किया जा सकता है, उसका मॉडल पेश किया है। परियोजना में वन्यजीवों के लिए बने अंडरपास और उससे हो रहे आवागमन को लेकर काफी चर्चा हुई है।

 

योजना की खूबी

213 किमी एक्सप्रेस की लंबाई

93 अंडर पास का निर्माण हुआ है

9 बड़े और 43 छोटे पुल बनाए गए

10 वन्यजीव व अंडरपास बने

गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की योजना

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस वे को गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की भी योजना है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार गोरखपुर-शामली नया प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। जिसमें इस एक्सप्रेस वे को शामली में जोड़ा जाएगा। इसके बाद लोगों को पूर्वांचल जाने का विकल्प मिल सकेगा। इसके अलावा दून- दिल्ली एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से भी जुड़ेगा। इसके लिए सहरानपुर बाईपास के पास 50 किमी लंबाई का स्पर(मार्ग) बन रहा है, इसका 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ऐसे में लोगों को हरिद्वार जाने के लिए भी एक और विकल्प मिल जाएगा।

Earthquake: रुद्रप्रयाग में भूकंप के झटके, 3.06 रही तीव्रता; लोगों में दहशत, घरों से बाहर निकले लोग

रुद्रप्रयाग में शनिवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर 3.06 की तीव्रता मापी गई है। भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में शनिवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.06 मापी गई है। भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

भूकंप के झटके सुबह 5:02 बजे महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इसकी जानकारी दी। भूकंप का केंद्र रुद्रप्रयाग से करीब 10 किलोमीटर पूर्व में था। इसकी गहराई धरती से लगभग 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई।

झटके करीब 10 से 15 सेकंड तक महसूस किए गए। हालांकि, अभी तक किसी बड़े जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। 

क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।
 जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?
भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?
भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।

PM Modi: नारी शक्ति वंदन बिल से पहले प्रधानमंत्री के स्वागत में महकेगा देहरादून, महिला कार्यकर्ताओं में उत्साह

नारी शक्ति वंदन बिल से पहले प्रधानमंत्री के स्वागत में देहरादून महकेगा। रैली में महिला पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं का जलवा दिखेगा। संगठन ने जिम्मेदारी तय की है। संगठनात्मक जिलों को भीड़ जुटाने के लक्ष्य दिए गए है।

तेरे आने की जब खबर महके, तेरी खुशबू से सारा घर महके…जगजीत सिंह की इस गजल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून आगमन से जोड़कर देखें तो नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) के संसद में आने से पहले भाजपा इसी अंदाज में उत्साहित नजर आ रही है। पीएम मोदी के स्वागत की खुशबू से पूरा शहर महकेगा।

लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र होगा। इससे ठीक पहले पीएम मोदी का देहरादून में रोड शो होने जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने भाषण में भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र कर सकते हैं। इस नाते राज्य भाजपा संगठन खासा उत्साहित है। रैली में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संगठन ने अलग से योजना तैयार की है।

बृहस्पतिवार को तैयारियों के लिए भाजपा की बैठक हुई, जिसमें महामंत्री संगठन अजेय कुमार, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, रैली के संयोजक कुंदन परिहार व अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। तय किया गया कि सभी महिला पदाधिकारियों को रैली के लिए महिलाओं की एक-एक गाड़ी लानी होगी। इसकी जिम्मेदारी महिला मोर्चा को सौंपी गई है, जो कि अपने स्तर से तैयारी में जुट गया है।

देहरादून की हर विधानसभा से 6000 लोग लाने होंगे

बैठक में तय किया गया कि देहरादून महानगर को हर विधानसभा से छह-छह हजार कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटानी है। देहरादून ग्रामीण को 10 हजार, ऋषिकेश को 10 हजार का लक्ष्य दिया गया है। देहरादून नगर निगम के सभी पार्षदों को पार्टी ने 500-500 की भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया है। संगठन ने 12 किमी के रोड शो की जिम्मेदारी कैंट विधानसभा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को सौंपी है। ये रोड शो के दौरान पीएम मोदी पर पुष्प वर्षा करेंगे। यह भी तय किया गया कि कार्यक्रम स्थल पर सिख व अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था की जाएगी।

 

Dehradun: 14 को दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी, शंखनाद से होगा स्वागत, रोड शो भी करेंगे

मुख्यमंत्री ने सीएम आवास में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा, इस भव्य आयोजन में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, जिससे कार्यक्रम जन उत्सव का रूप ले सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर (देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे) कॉरिडोर का उद्घाटन करने 14 अप्रैल को उत्तराखंड आ रहे पीएम का स्वागत शंखनाद व घंटानाद से होगा। वह डाट काली मंदिर में पूजा करेंगे और सभा स्थल गढ़ीकैंट जाते वक्त रोड शो में भी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम को उत्सव जैसा मनाने की तैयारियां की जा रही हैं।

मंगलवार को मुख्यमंत्री ने सीएम आवास में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा, इस भव्य आयोजन में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, जिससे कार्यक्रम जन उत्सव का रूप ले सके। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रम की रूपरेखा को अत्यंत आकर्षक एवं सुव्यवस्थित बनाया जाए। उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत गढ़वाली, कुमाऊंनी व जौनसारी लोकनृत्य, संगीत की झलक आयोजन में भव्य रूप से दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग अपने घरों से निकलकर राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रधानमंत्री के रोड शो के दौरान कार्यक्रम में शामिल हों और पूरे राज्य में उत्सव जैसा माहौल बनाया जाए।

सीएम ने कहा कि यह परियोजना उत्तराखंड के विकास को नई दिशा देने वाली सिद्ध होगी। इस कॉरिडोर से राज्य में पर्यटन, रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।

कॉरिडोर लॉजिस्टिक्स, परिवहन व निवेश के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। परियोजना का शुभारंभ राज्य विकास के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा और प्रदेश को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त बनाएगा। बैठक में राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सचिव शैलेश बगौली, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे, जिलाधिकारी सविन बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी मौजूद रहे।

Chardham Yatra: जौलीग्रांट से बदरी-केदार धाम के लिए 26 अप्रैल से शुरू हो सकती है हेली सेवा, इतना रहेगा किराया

 जौलीग्रांट हेलीपैड से रुद्राक्ष एविएशन अपने एमआई-17 हेलीकॉप्टर से पिछले तीन वर्षों से लगातार बदरी-केदार के लिए उड़ानें संचालित कर रहा है। इस बार कंपनी 26 अप्रैल से 15 जून बरसात शुरू होने से पहले तक दो धामों के लिए यात्रा शुरू करने की तैयारियों में जुटी हुई है।

जौलीग्रांट हेलीपैड से दो धामों बदरीनाथ और केदारनाथ के लिए आगामी 26 अप्रैल से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने की संभावनाएं हैं। रुद्राक्ष एविएशन अपने एमआई-17 डबल इंजन हेलीकॉप्टर से सेवा को शुरू करने जा रहा है। सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही सेवा शुरू कर दी जाएगी।

जौलीग्रांट हेलीपैड से रुद्राक्ष एविएशन अपने एमआई-17 हेलीकॉप्टर से पिछले तीन वर्षों से लगातार बदरी-केदार के लिए उड़ानें संचालित कर रहा है। इस बार कंपनी 26 अप्रैल से 15 जून बरसात शुरू होने से पहले तक दो धामों के लिए यात्रा शुरू करने की तैयारियों में जुटी हुई है। बरसात के बाद सितंबर माह में फिर से इस हेली सेवा को शुरू किया जाएगा।

जौलीग्रांट हेलीपैड से हेलीकॉप्टर सुबह साढ़े छह बजे उड़ान भरेगा। एक ही दिन में दो धामों की यात्रा पूरी की जा सकेगी। वहीं रात्रि विश्राम की सुविधा भी श्रद्धालुओं को दी जाएगी। मौसम ठीक होने पर हेलीकॉप्टर जौलीग्रांट से एक दिन में दो बार उड़ान भरेगा। फिलहाल कंपनी के अधिकारी मंजूरी और अन्य औपचारिकताओं में जुटे हुए हैं। जिसके बाद ही इस सेवा को शुरू किया जाएगा।

एक लाख पैंतीस हजार रुपये प्रति व्यक्ति होगा किराया

जौलीग्रांट से दो धामों के लिए एमआई 17 हेलीकॉप्टर से यात्रा करने के लिए इस बार श्रद्धालुओं को प्रति व्यक्ति करीब एक लाख पैंतीस हजार रुपये खर्च करने होंगे। वहीं रात्रि विश्राम के साथ प्रति व्यक्ति किराया करीब डेढ़ लाख रुपये होगा। पिछले वर्ष किराया एक लाख 21 हजार और एक लाख 41 हजार के करीब था।

22 और 23 अप्रैल को केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट खुल रहे हैं। इस वर्ष भी चारधाम यात्रा में दो धामों के लिए एमआई 17 से हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने जा रही है। 26 अप्रैल से हेलीकॉप्टर सेवा के शुरू किए जाने की संभावनाएं हैं।

Rishikesh: आज पशुलोक बैराज पर सी-प्लेन उतारने की तैयारी, ट्रायल अहम; उत्तराखंड में पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

यूजेवीएन लिमिटेड की ओर से सोमवार सुबह करीब 11 बजे पशुलोक बैराज पर सी-प्लेन उतारने की कवायद की जाएगी। इस ट्रायल को प्रदेश में सी-प्लेन सेवा शुरू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

उत्तराखंड में पर्यटन और परिवहन के क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत होने जा रही है। यूजेवीएन लिमिटेड की ओर से सोमवार सुबह करीब 11 बजे पशुलोक बैराज पर सी-प्लेन उतारने की कवायद की जाएगी। इस ट्रायल को प्रदेश में सी-प्लेन सेवा शुरू करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सी-प्लेन सेवा शुरू होने से उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। खासकर ऐसे दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्र, जहां सड़क या पारंपरिक हवाई सेवाएं पहुंचना मुश्किल है, वहां तक पर्यटकों की आसान पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। इससे न केवल पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सी-प्लेन सेवा शुरू होने से राज्य में हाई-एंड टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक और आकर्षक बनेगी। साथ ही आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को भी तेज गति से संचालित करने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां इस परियोजना को आधुनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के रूप में देख रही हैं। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में प्रदेश के विभिन्न जलाशयों और नदियों पर सी-प्लेन सेवा शुरू की जा सकती है, जिससे उत्तराखंड को पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी।

 

Dehradun: कैबिनेट विस्तार के बाद अब दायित्व बंटने शुरू, 14 वरिष्ठ नेताओं को दी गई जिम्मेदारी; आदेश जारी

सीएम पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सभी नवनियुक्त दायित्वधारियों को शुभकामनाएं दी हैं।

धामी सरकार ने कैबिनेट विस्तार के बाद अब नेताओं को दायित्व बांटने शुरू कर दिए हैं। शुक्रवार को विभिन्न आयोगों, परिषदों और समितियों में 14 लोगों को नियुक्त कर दिया गया है। गृह एवं गोपन सचिव शैलेश बगौली की ओर से इस बाबत आदेश जारी किए गए।

देहरादून से कुलदीप सुटोला को राज्य स्तरीय खेल परिषद में अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है जबकि नैनीताल से ध्रुव रौतेला को मीडिया सलाहकार समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, चंपावत से हरिप्रिया जोशी को राज्य महिला आयोग में, टिहरी से विनोद सुयाल को राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद में, चंपावत से मुकेश महराना को चाय विकास सलाहकार परिषद में स्थान दिया गया है।

देहरादून से चारु कोठारी को राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद में.चमोली से प्रेम सिंह राणा को जनजाति आयोग में, टिहरी से खेमसिंह चौहान को ओबीसी आयोग कल्याण परिषद में, टिहरी से ही सोना सजवाण को जड़ी बूटी सलाहकार समिति में, अल्मोड़ा से गोविंद पिलखवात को हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषाद में, देहरादून से बलजीत सोनी को अल्पसंख्यक आयोग, काशीपुर की सीमा चौहान को मत्स्य विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष बनाया गया है। इनके अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता भावना मेहरा और अशोक वर्मा को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सभी नवनियुक्त दायित्वधारियों को शुभकामनाएं दी हैं।