हरिद्वार: ज्वालापुर में बेकाबू बस का कहर, पांच वाहनों को मारी टक्कर, चालक का हाथ कटकर अलग, एक कुत्ते की भी मौत

ज्वालापुर में सोमवार सुबह एक तेज रफ्तार बस अचानक नियंत्रण खो बैठी और निजी अस्पताल के बाहर खड़े वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में ऑटो चालक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया।

हरिद्वार के ज्वालापुर में सोम्वार को तेज रफ्तार बस के अनियंत्रित होने से बड़ा हादसा हो गया। दुर्गा चौक के पास बेकाबू बस ने एक ऑटो और चार कारों को टक्कर मार दी। हादसे में ऑटो चालक त्रिलोक सिंह गुसाईं गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उनका एक हाथ कटकर अलग हो गया। उन्हें उपचार के लिए जौलीग्रांट हायर सेंटर रेफर किया गया है।

जानकारी के अनुसार, हादसा ज्वालापुर के दुर्गा चौक के पास हुआ। तेज रफ्तार बस अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे निजी अस्पताल के बाहर खड़े वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। बस ने वहां खड़े एक ऑटो और चार कारों को टक्कर मार दी। हादसे के दौरान एक कुत्ता भी बस की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

बस चालक को हिरासत में लिया
हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। आसपास मौजूद लोग घायलों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे। दुर्घटना के कारण सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ। घटना की सूचना मिलने पर ज्वालापुर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति संभाली।

पुलिस ने बस चालक को हिरासत में ले लिया है। साथ ही दुर्घटनाग्रस्त बस को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटी है। प्रारंभिक तौर पर बस के अनियंत्रित होने की बात सामने आई है। गंभीर रूप से घायल ऑटो चालक त्रिलोक सिंह गुसाईं को उपचार के लिए जौलीग्रांट हायर सेंटर रेफर किया गया है।

 

उत्तराखंड: 556 किमी दूर से देहरादून पहुंचा नीली आंखों वाला सफेद बाघ, 20 दिन का एकांतवास; महीने भर बाद दीदार

सफेद रंग, गहरी धारियों और नीली आंखों वाला तेजस उत्तराखंड का पहला सफेद बाघ बताया जा रहा है।

ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क से सफेद बाघ ‘तेजस’ को बाघ विनिमय कार्यक्रम के तहत देहरादून चिड़ियाघर लाया गया है। सफेद रंग, गहरी धारियों और नीली आंखों वाला तेजस उत्तराखंड का पहला सफेद बाघ बताया जा रहा है। तेजस ने सड़क मार्ग से करीब 556 किलोमीटर की दूरी 12 से 14 घंटे में तय की। उसे विशेष रेस्क्यू वाहन से 13 सदस्यीय टीम, जिसमें पशु चिकित्सक और वन विभाग के अधिकारी शामिल थे, देहरादून लेकर पहुंचे।

नए वातावरण में स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी के लिए तेजस को करीब 20 दिनों तक क्वारंटीन में रखा जाएगा। इस दौरान केवल केयरटेकर और पशु चिकित्सक ही उसकी देखभाल करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, पर्यटक करीब एक माह बाद उसका दीदार कर सकेंगे। कार्यक्रम के तहत देहरादून चिड़ियाघर से करीब पांच वर्षीय रॉयल बंगाल टाइगर भोला को ग्वालियर भेजा गया है।

अलग प्रजाति नहीं है सफेद बाघ
सफेद बाघ कोई अलग प्रजाति या नस्ल नहीं है। उसका सफेद रंग एक दुर्लभ आनुवंशिक विशेषता के कारण होता है। अल्बिनो जानवरों के विपरीत सफेद बाघों के शरीर पर धारियां बनी रहती हैं। यह बंगाल टाइगर में पाई जाने वाली प्राकृतिक रंग विविधता है।आठ साल बाद बक्सा में फिर गूंजेगी बाघ की दहाड़
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व में आठ साल बाद स्थायी बाघ आबादी बसाने की मुहिम शुरू हो गई है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई तीन वर्षीय रॉयल बंगाल बाघिन को शुक्रवार को प्राकृतिक घेरे में छोड़ा गया। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में शुरू हुआ यह बंगाल का पहला बाघ पुनर्वास कार्यक्रम है। बाघिन को फिलहाल सॉफ्ट रिलीज के तहत प्राकृतिक घेरे में रखा गया है। यहां उसके स्वास्थ्य, शिकार क्षमता और व्यवहार की निगरानी होगी।
दो साल में छह और बाघ लाने की योजना
बक्सा में 2018 के बाद स्थायी बाघ आबादी नहीं रही। हालांकि कैमरा ट्रैप में बाद के वर्षों में बाघों की मौजूदगी दर्ज हुई, लेकिन माना गया कि ये आसपास के भूटान या असम के मानस क्षेत्र से यहां पहुंचे थे। बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अगले दो महीनों में तीन और बाघ छोड़े जाएंगे, जबकि अगले दो वर्षों में कुल छह और बाघ लाने की तैयारी है। 

उत्तराखंड: लॉन्ग वीकेंड पर उमड़ेगा पर्यटकों का सैलाब, दून-मसूरी-ऋषिकेश में पुलिस का खास ट्रैफिक प्लान तैयार

गांधी जयंती के चलते इस बार लगातार छुट्टियों का मौका मिलने से पर्यटन स्थलों पर वाहनों का दबाव बढ़ने की आशंका है। भीड़ बढ़ने की स्थिति में यातायात को सुचारु रखने के लिए पुलिस ने प्रमुख मार्गों और चौराहों पर अतिरिक्त इंतजाम किए हैं।

गांधी जयंती के साथ ही लॉग वीकेंड पर दो से चार अक्तूबर तक देहरादून, मसूरी और ऋषिकेश में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए यातायात पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। दबाव बढ़ने पर वैकल्पिक मार्गों से वाहन भेजे जाएंगे।  यह विशेष व्यवस्था दो से चार अक्तूबर तक प्रभावी रहेगी। प्रमुख चौराहों, बाजारों, पर्यटन स्थलों और संवेदनशील मार्गों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

मसूरी में पार्किंग क्षमता का 90 फीसदी उपयोग होने पर प्लान-बी लागू होगा। इसके तहत पर्यटकों के वाहन किंक्रेग पार्किंग में खड़े कराए जाएंगे। आगे जाने के लिए स्थानीय टैक्सी का उपयोग करना होगा। यदि यह पार्किंग भी भर जाती है, तो प्लान-सी लागू होगा।
तब वाहनों को गज्जी बैंड से हाथीपांव रोड की ओर भेजा जाएगा। ऋषिकेश में भी भीड़ बढ़ने पर प्लान-बी लागू होगा। हरिद्वार और देहरादून से आने वाले वाहनों के लिए नेपाली फार्म, रायवाला, नटराज चौक, ढालवाला और बाईपास मार्गों का उपयोग होगा।
मसूरी के लिए वैकल्पिक मार्ग और पार्किंग व्यवस्था : दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और रुड़की से आने वाले वाहनों को डाटकाली, आईएसबीटी, शिमला बाईपास, बल्लूपुर और कैंट क्षेत्र से भेजा जाएगा। ऋषिकेश और डोईवाला से मसूरी जाने वाले वाहनों को थानो रोड, महाराणा प्रताप चौक, पुलिया नंबर छह से भेजा जाएगा। वे सहस्रधारा क्रॉसिंग और आईटी पार्क होते हुए मसूरी पहुंचेंगे।

उत्तराखंड: बदरीनाथ धाम में क्यों नहीं बजता शंख? भगवान विष्णु को है प्रिय; आतापी-बातापी से जुड़ी है ये कथा

भगवान विष्णु के धाम में पूजा-अभिषेक से लेकर भोग की शुद्धि तक शंख का विशेष महत्व है। फिर भी बदरीनाथ मंदिर में शंखनाद नहीं होता, इसके पीछे हिमालय की एक प्राचीन मान्यता और राक्षसों से जुड़ी रोचक कथा है।

बदरीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है और शंख भगवान काे अत्यंत प्रिय है। विष्णु भगवान के सभी मंदिरों में शंख ध्वनि होती है, मगर बदरीनाथ मंदिर में शंख ध्वनि नहीं होती है। जबकि बदरीनाथ मंदिर में नित्य पूजा, अभिषेक व महाभिषेक शंख से ही की जाती है और भगवान बदरीनाथ, महालक्ष्मी, नर-नारायण व कुबेर देवता का भोग शंख के द्वारा ही पवित्र किया जाता है और तब ही भगवान भोग स्वीकार करते हैं।

किवदंती है कि बदरीनाथ मंदिर में शंख बजाने पर बातापी नाम का राक्षस जागृत हो जाएगा। बताते हैं कि इसी मान्यता के चलते धाम में शंख बजाना वर्जित माना गया है। कथा व्यास आचार्य अनसूया प्रसाद नौटियाल बताते हैं कि आदिकाल में जब हिमालय क्षेत्र में राक्षसों का बोलबाला हो गया था, तब महर्षि अगस्त्य ने अपनी क्रोधाग्नि से कुसमांडा देवी का ध्यान किया।
शंख बजा तो दैंत (राक्षस) प्रकट हो जाएगा
देवी मां के प्रकट होने पर राक्षसों का वध किया गया। इसी दौरान आतापी और बातापी नाम के दो राक्षस भागने में सफल हुए। आतापी नाम का राक्षस मंदाकिनी नदी में और बातापी राक्षस बदरीनाथ मंदिर में शंख में जा छिपा। तब से यहां शंख नहीं बजता है। किवदंती है कि यदि यहां शंख बजा तो दैंत (राक्षस) प्रकट हो जाएगा।
वहीं, बदरीनाथ मंदिर में शंख न बजने के पीछे शंखचूड़ राक्षस की कथा भी जुड़ी हुई है। बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि हनुमान चट्टी के बाद शंख ध्वनि नहीं की जाती है। कहा कि भगवान आज भी बदरीनाथ धाम में साक्षात विराजमान हैं। जब भगवान यहां साक्षात विराजमान हैं तो आवाहन की (शंख वादन की) आवश्यकता ही नहीं रह जाती है। आवाहन के लिए शंख बजाना निष्प्रयोज्य हो जाता है।

देहरादून: भाजपा प्रभारी-सह प्रभारियों का पहला दौरा दो अक्तूबर से, पहले दिन पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों संग बैठक

भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी राम माधव और सह प्रभारी अरविंद मेनन व बांसुरी स्वराज दो अक्तूबर से दो दिवसीय दौरे पर देहरादून आएंगे। दौरे में प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और सातों मोर्चों की टीम के साथ बैठक कर संगठन की तैयारियों पर चर्चा होगी।

भारतीय जनता पार्टी के प्रभारी राम माधव, सह-प्रभारी अरविंद मेनन व बांसुरी स्वराज का पहला दौरा दो अक्तूबर से देहरादून का होगा। दो दिवसीय प्रवास के दौरान तीनों नेता संगठन के नेताओं संग बैठक कर आगामी विस चुनाव के मद्देनजर रणनीति पर चर्चा करेंगे।

कोर कमेटी की बैठक में प्रभारी, सह प्रभारी का आना प्रस्तावित था लेकिन उनके पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से वे नहीं आ पाए। अब उनका दौरा तय हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि दो अक्तूबर को गांधी जयंती पर कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद पहले दिन प्रदेश पदाधिकारियों और सभी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे।

बैठक में संगठन की जिलावार गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा होगी। दूसरे दिन, सात मोर्चों की प्रदेश टीमों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में मोर्चों के स्तर पर चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा की जाएगी। आगामी चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर उनका दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उत्तराखंड: प्रदेश में एसआईआर खत्म, डाटा फ्रीज हुआ, तीन अक्तूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

पहले अंतिम सूची 15 सितंबर को जारी होनी थी, पर पांच जिलों के मतदाताओं के यूपी से सत्यापन के कारण तिथि बदली गई।

उत्तराखंड में चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सोमवार रात 12 बजे समाप्त हो गया। इसके साथ ही आयोग ने पूरा डाटा फ्रीज कर दिया है। अब तीन अक्तूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

इससे स्पष्ट होगा कि कितने वोट कटे और कितने नए मतदाता जुड़े। चुनाव आयोग ने आठ जून से एसआईआर की शुरुआत की थी। मतदाताओं को गणना प्रपत्र भेजे गए, जो सात जुलाई तक भरकर वापस लिए गए। 14 जुलाई को आयोग ने ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। दावे और आपत्तियां 14 जुलाई से 13 अगस्त तक दर्ज करने का मौका दिया गया। इनकी सुनवाई और निस्तारण 10 जुलाई से 28 सितंबर तक हुआ।
पहले अंतिम सूची 15 सितंबर को जारी होनी थी, पर पांच जिलों के मतदाताओं के यूपी से सत्यापन के कारण तिथि बदली गई। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि अब पूरा डाटा फ्रीज हो चुका है। इसमें किसी भी तरह का कोई बदलाव संभव नहीं है। छूटे हुए, नए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरकर दोबारा मतदाता बनने का मौका दिया जाएगा।

कई बार मतदाताओं तक पहुंचा आयोग

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से चलाया गया मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान लगातार मतदाताओं से जुड़ने का माध्यम बना रहा। प्री-एसआईआर के दौरान करीब पांच लाख ऐसे वोट हटाए गए जो शिफ्ट हो चुके थे या निधन हो गया था। एसआईआर में बीएलओ ने घर-घर गणना प्रपत्र पहुंचाए। ड्राफ्ट सूची के बाद करीब आठ लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।

राजनीतिक दलों संग हुई बैठक

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देश पर सोमवार को बैठक हुई। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने इसकी अध्यक्षता की। इसमें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को एसआईआर कार्यक्रम की जानकारी दी गई। डॉ. जोगदंडे ने बताया कि दावे-आपत्तियों का निस्तारण सोमवार को पूरा हो गया। नागरिक ऑनलाइन ईसीआई-नेट या बीएलओ के माध्यम से फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। बैठक में भारतीय जनता पार्टी से राजकुमार पुरोहित, इंडियन नेशनल कांग्रेस से राजेंद्र सिंह भंडारी और प्रशांत खंडूरी, बसपा से सत्यपाल और सतेंद्र चोपड़ा, आम आदमी पार्टी से अशोक सेमवाल तथा सीपीआई(एम) से अनंत आकाश उपस्थित रहे।

उत्तराखंड: यमुनोत्री धाम के आसपास की चोटियों पर बर्फबारी, क्षेत्र में बढ़ी ठंड, दिखा खूबसूरत नजारा

यमुनोत्री धाम के आसपास की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। बर्फबारी के बाद क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है। चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर दिखाई दे रही है। बर्फबारी से धाम और आसपास का मौसम सुहावना हो गया। क्षेत्र में मौसम का मिजाज बदला नजर आया। बर्फ से ढकी चोटियों का खूबसूरत नजारा देखने को मिला।

वहीं बारिश से नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया। रुद्रप्रयाग में शाम चार बजे अलकनंदा नदी और मंदाकिनी नदी, हरिद्वार में गंगा नदी का जल स्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया था। पिथौरागढ़ में काली, गोरी और सरयू नदी का जल स्तर भी खतरे के निशान के पास पहुंच गया था।

उत्तराखंड में रेड अलर्ट: प्रदेश में आज और कल भारी बारिश के आसार, सीएम के निर्देश-24 घंटे सतर्क रहें अधिकारी

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रदेश में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।  मुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं।

मौसम विभाग की ओर से भारी बारिश के रेड अलर्ट को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन से वार्ता कर सभी संबंधित जिलों और विभागों को जरूरी एहतियाती कदम उठाने को कहा।

उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और संभावित आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की सभी तैयारियां पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को सक्रिय रखने और मौसम संबंधी चेतावनियों का तत्काल स्थानीय स्तर तक प्रसार सुनिश्चित करने को भी कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से जारी सूचना में देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी जनपदों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा तथा कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड के नौ अन्य जनपदों में भी गर्जन, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के साथ येलो अलर्ट जारी किया गया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने खराब मौसम में अनावश्यक रूप से नदी-नालों एवं संवेदनशील क्षेत्रों की ओर न जाने का आग्रह किया।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आपदा प्रबंधन सेवाओं को तत्पर रखने के निर्देश दिए हैं। किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। सभी विभागों को मौसम की स्थिति को देखते हुए उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभावी प्रतिवादन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। किसी भी प्रकार की आपदा अथवा आपात स्थिति की सूचना तत्काल जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र, हरिद्वार को उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए 01334-223999, 1077 (टोल फ्री), 7055258800 और 9528250926 पर संपर्क किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से सूचनाएं समय पर केंद्र तक पहुंचाने को कहा है। इससे आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिलेगी।

देहरादून: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेसहारा महिलाओं को देगा मुफ्त आवास, प्रस्ताव अगले माह

बोर्ड ने इन पीड़ित और बेसहारा महिलाओं को मुफ्त आवास उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा, अगले महीने बोर्ड बैठक में इसके लिए प्रस्ताव लाया जाएगा।

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं की शिकार हुई महिलाओं के पुनर्वास की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने इन पीड़ित और बेसहारा महिलाओं को मुफ्त आवास उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा, अगले महीने बोर्ड बैठक में इसके लिए प्रस्ताव लाया जाएगा।

शादाब शम्स के मुताबिक बोर्ड के पास हर जिले में हजारों बीघा जमीन उपलब्ध है। इस जमीन का उपयोग जरूरतमंद महिलाओं के लिए किया जाएगा। बोर्ड की जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को सख्ती से हटाया जाएगा। इसके बाद खाली कराई गई जमीनों और भवनों पर पीड़ित बेटी और बहनों का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।
शादाब शम्स के मुताबिक मुस्लिम समाज में कई बार तीन तलाक के बाद पति दूसरा विवाह कर लेता है। जिसके चलते ऐसी बहनें और बेटियां दर्द और दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाती हैं। ऐसे में यह योजना उन्हें संबल प्रदान करेगी।
इस पहल के तहत सरकार का उद्देश्य समाज की उन पीड़ित महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सुरक्षित आशियाना देना है, जो तीन तलाक के बाद बेसहारा हो चुकी हैं। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के मुताबिक सरकार ने यूसीसी लागू कर तीन तकाल पर रोक लगाई है, इसके बावजूद समाज में बड़ी संख्या में इस तरह की पीड़ित महिलाएं हैं।

अभी यह योजना प्रस्तावित है, वक्फ बोर्ड की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा।
-खजानदास, मंत्री समाज कल्याण

रुड़की: आईआईटी परिसर में ई-रिक्शा ने प्रोफेसर की पत्नी को मारी टक्कर, देहरादून में इलाज के दौरान दम तोड़ा

आईआईटी रुड़की परिसर में हुए हादसे ने संस्थान की आंतरिक सुरक्षा और वाहनों की आवाजाही की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुबह की सैर पर निकलीं रूपा राय गंभीर रूप से घायल हुई थीं, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए देहरादून लाया गया था।

आईआईटी रुड़की परिसर में सुबह की सैर पर निकलीं प्रोफेसर की पत्नी को ई-रिक्शा ने टक्कर मार दी। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें पहले रुड़की सिविल अस्पताल और फिर देहरादून के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद आईआईटी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की आवाजाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।

आईआईटी के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में प्रोफेसर पार्थ राय की पत्नी रूपा राय सोमवार सुबह अपने आवास से मॉर्निंग वॉक के लिए निकली थीं। इसी दौरान कैमेस्ट्री विभाग के बाहर वाली सड़क पर एक ई-रिक्शा ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में उनके सिर में गंभीर चोट आई।

लोगों की सुरक्षा को लेकर चर्चा
घटना के बाद उन्हें तत्काल रुड़की सिविल अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उन्हें देहरादून के मैक्स अस्पताल ले गए जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आईआईटी अधिकारियों, फैकल्टी सदस्यों और छात्र-छात्राओं में शोक की लहर दौड़ गई।

आईआईटी प्रशासन की सूचना पर पुलिस ने ई-रिक्शा और चालक को कब्जे में ले लिया। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। साथ ही चालक के नशे में होने की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है। हादसे के बाद परिसर में रहने वाले छात्रों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।