उत्तराखण्ड को मिली बड़ी सौगात, सिरकारी भ्योल रूपसिया बगड जल विद्युत परियोजना को मिली मंजूरी

News web media Uttarakhand : पिथौरागढ़ जनपद में गौरीगंगा नदी पर प्रस्तावित 120 मेगावाट क्षमता की सिरकारी भ्योल रूपसिया बगड जल विद्युत परियोजना के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी की लगातार कोशिशें आज रंग लाई. इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 29.997 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव पर आज वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (Forest Advisory Committee) द्वारा विचार किया गया. नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में परियोजना को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई.

यह परियोजना पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रूप से डिजाइन की गई है. लगभग एक किलोमीटर सुरंग निर्माण और अधिकांश संरचनाएं भूमिगत होने के कारण वन भूमि पर प्रभाव नगण्य रहेगा. परियोजना क्षेत्र में कोई राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य या ईको-सेंसिटिव जोन नहीं है, और न ही इससे किसी प्रकार का विस्थापन होगा.

परियोजना से प्रतिवर्ष अनुमानित 529 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिससे उत्तराखण्ड की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा. साथ ही स्थानीय लोगों को स्थायी एवं अस्थायी रोजगार, आधारभूत ढांचे का विकास और पलायन पर नियंत्रण जैसे अनेक लाभ होंगे.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परियोजना को स्वीकृति मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह परियोजना उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है. प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन और समर्थन से राज्य को ऊर्जा और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि मिली है. राज्य सरकार जनकल्याण के प्रति पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. यह परियोजना उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनेगी.”

गौरतलब है कि विगत में मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से अपनी भेंट के दौरान इस परियोजना की स्वीकृति का अनुरोध किया था.

अब उत्तराखंड के मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल होगा ‘ऑपरेशन सिंदूर’

News web media Utttarakhand : एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य के मदरसों के पाठ्यक्रम में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को शामिल करने की घोषणा की है. उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के इस बड़े फैसले के तहत, राज्य के लगभग 450 रजिस्टर्ड मदरसों में पढ़ने वाले छात्र अब भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम की कहानी को अपने पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में पढ़ेंगे. इस पहल का उद्देश्य युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देना और उन्हें भारतीय सेना के बलिदान और वीरता से परिचित कराना है.

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि ऑपरेशन सिंदूर का एक विशेष चैप्टर इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 11 और 12) तक के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.

यह कदम न केवल छात्रों को आधुनिक इतिहास और राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में जागरूक करेगा, बल्कि उन्हें देश के प्रति गर्व और सम्मान की भावना से भी जोड़ेगा. मुफ्ती कासमी ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे छात्र न केवल धार्मिक और पारंपरिक शिक्षा प्राप्त करें, बल्कि देश की वीर गाथाओं से भी प्रेरणा लें. ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की बहादुरी का प्रतीक है, और इसे पाठ्यक्रम में शामिल करना हमारे लिए गर्व की बात है.”

ऑपरेशन सिंदूर, जो हाल ही में भारतीय सेना द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया गया, पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और लॉन्च पैड्स को निशाना बनाने का एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान था. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने अपनी सामरिक कुशलता और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया, जिसमें स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम ने भी अहम भूमिका निभाई. इस अभियान ने न केवल भारत की सैन्य ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया, बल्कि राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्भरता के संदेश को भी मजबूत किया.

मुख्य सेवक संवाद के तहत युवक एवं महिला मंगल दलों के साथ सीएम धामी ने किया संवाद

News web media Uttarakhand : सीएम पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक संवाद के तहत प्रदेशभर से आए युवक एवं महिला मंगल दलों के प्रतिनिधियों के साथ सीएम धामी आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में संवाद किया. इस अवसर पर सीएम धामी ने घोषणा की कि मंगल दलों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 04 हजार रूपये से बढ़ाकर 05 हजार रूपये की जायेगी. मंगल दलों को आत्मनिर्भर बनाने और ऋण सुविधा प्रदान करने के लिए नीति बनाई जायेगी. मंगल दलों को डिजिटल मिशन के अन्तर्गत प्रशिक्षण दिया जायेगा. राज्य स्तर पर एक पोर्टल बनाया जायेगा, जिससे प्रत्येक युवा और महिला मंगल दल को एक दूसरे से जोड़ा जायेगा.

सीएम धामी ने मंगल दलों द्वारा सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मंगल दल उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. युवक एवं महिला मंगल दल प्रदेश की सामाजिक चेतना को मजबूत करने, लोक परंपराओं को संजोने और गांव-गांव में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि आपदाओं के समय मंगल दल ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाते हैं और जनजागरूकता अभियानों में भी आगे रहते हैं. सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार मंगल दलों को सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है. उन्होंने कहा कि मंगल दलों को स्वरोजगार के लिए 50 हजार रुपये से 3.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है.

सीएम धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा मंगल दल स्वावलंबन योजना के अन्तर्गत 5 करोड रूपये, मुख्यमंत्री ग्रामीण खेलकूद एवं स्वास्थ्य संवर्धन योजना के अन्तर्गत 2 करोड़ रूपये से अधिक, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत 60 करोड़ रूपये का प्राविधान किया गया है. मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के अन्तर्गत 10 करोड़ रूपये की धनराशि की व्यवस्था की गई है. युवाओं को तकनीकि और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए पं० दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना 21 करोड़ रूपये से अधिक का प्राविधान किया गया है. सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार लोक संस्कृति के संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रयासरत है और स्थानीय मेलों व पर्वों के आयोजन के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है.

मंगल दलों के सुझाव

उत्तरकाशी के आजाद डिमरी ने कहा कि मंगल दलों को मिलने वाली राशि 04 हजार रूपये से बढ़नी चाहिए. बागेश्वर की खृष्टि कोरंगा ने कहा कि लोगों को सरकारी योजनाओं का पूरा फायदा मिल सके इसके लिए ब्लॉक एवं जनपद स्तर पर होने वाली विभिन्न बैठकों में मंगल दलों को भी शामिल किया जाना चाहिए. चम्पावत की मोनिका ने कहा कि जनहित में महत्वपूर्ण जानकारियों एवं सूचनाओं के लिए पोर्टल बनाया जाना चाहिए. चमोली के सुरजीत सिंह बिष्ट ने कहा कि ग्राम स्तर पर मंगल दलों को डिजिटल प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए. हरिद्वार के मनोज चौहान ने कहा कि योग और फिटनेस पर राज्य में अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

उत्तराखंड पुलिस का ‘ऑपरेशन प्रहार’, सीएम धामी के नेतृत्व में साइबर अपराधियों पर करारा वार

News web media Uttarakhand : उत्तराखंड की शांत वादियों से एक तेज़ संदेश पूरे देश में गूंजा है, “अपराधी चाहे देश के किसी कोने में छिपा हो, उत्तराखंड पुलिस उसे ढूंढ निकालेगी.” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस ने एक ऐतिहासिक अभियान चलाकर यह सन्देश न केवल प्रदेश, बल्कि पूरे राष्ट्र को दिया है. ‘ऑपरेशन प्रहार’, साइबर अपराधियों पर करारा प्रहार करने वाला यह अभियान अपने आप में एक मिसाल बन गया है. देश के इतिहास में पहली बार उत्तराखंड पुलिस के निर्देशन में एक साथ 17 राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरल, गोवा आदि में बड़ी छापेमारी की गई. इस सघन और रणनीतिक कार्रवाई में 290 से अधिक साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई.

यह कोई सामान्य पुलिसिया कार्रवाई नहीं थी. यह उस दूरदर्शिता और साहसिक निर्णय का परिणाम है, जिसकी नींव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साइबर हमले की एक बड़ी घटना के बाद रखी थी. कुछ माह पूर्व उत्तराखंड साइबर हमलों का शिकार बना था, तब मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट संदेश दिया था साइबर अपराधी अब सुरक्षित नहीं रहेंगे. उन्होंने पुलिस महकमे को टेक्नोलॉजिकल रूप से सशक्त करने के आदेश दिए, साइबर थानों की पुनर्रचना की और इंटेलिजेंस नेटवर्क को विस्तार दिया.

इसका प्रत्यक्ष परिणाम ‘ऑपरेशन प्रहार’ के रूप में सामने आया, जिसमें न केवल उत्तराखंड बल्कि अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से यह दिखाया गया कि उत्तराखंड अब केवल पर्यटन और तीर्थाटन का केन्द्र ही नहीं, बल्कि साइबर क्राइम से लड़ने में भी एक मॉडल स्टेट बन चुका है. मुख्यमंत्री धामी का गुड गवर्नेंस मॉडल सिर्फ योजनाओं या घोषणाओं तक सीमित नहीं है, यह उनके हर एक्शन में भी साफ नजर आता है. उनके नेतृत्व में शासन की सक्रियता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तीनों ही स्तरों पर परिलक्षित होती है. इस सफल कार्रवाई ने जहां उत्तराखंड पुलिस की कार्यकुशलता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है, वहीं मुख्यमंत्री धामी के मजबूत नेतृत्व और त्वरित निर्णय क्षमता को भी फिर से प्रमाणित किया है.

राजधानी देहरादून में तेज आवाज वाले 15 सायरन लगाए जाएंगे, डीएम ने 25 लाख का बजट किया जारी

News web media Uttarakhand : दून में तेज आवाज वाले 15 इलेक्ट्रानिक सायरन लगाने के लिए डीएम सविन बंसल ने 25 लाख का बजट जारी कर दिया। इससे जल्द शहर में तेज आवाज वाले 15 नए सायरन लग जाएंगे। यह न सिर्फ हवाई आपातकाल बल्कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भी काम आएंगे। डीएम सविन बंसल ने बताया कि मॉक ड्रिल में यह सामने आया कि दून में लगे सायरन की आवाज काफी कम है।

इसके बाद निर्णय लिया गया कि शहर की जरूरत के हिसाब से ऊंची आवाज वाले सायरन लगवाए जाएं। इसके लिए शनिवार को बैठक कर शहर में 15 नए इलेक्ट्रानिक सायरन लगाने को मंजूरी दी गई। इसमें 10 सायरन आठ किमी  दूरी की क्षमता वाले होंगे, जबकि पांच सायरनों की आवाज 16 किमी तक जा सकेगी।

इन सायरनों को पुलिस थानों व चौकियों पर लगाया जाएगा। इन्हें कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा, जहां से सभी सायरन एक साथ बज सकेंगे। डीएम ने बताया कि यह रकम अनटाइड फंड से दी गई है। सायरन की खरीद के लिए क्रय आदेश जारी कर दिया गया है।

उधर रैपिड कम्युनिकेशन सिस्टम लगाने के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।इसके लिए भी जल्द बजट जारी कर दिया जाएगा। त्वरित संचार प्रणाली से सूचनाओं को बहुत तेजी से और प्रभावी ढंग  से प्रसारित किया जा सकेगा।

उत्तरकाशी: गंगनानी के पास एक हेलीकॉप्टर क्रैश, 5 यात्रियों की मौत-2 घायल

News web media Uttarakhand : इस समय उत्तरकाशी के गंगनानी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है. हेलीकॉप्टर में 6 से 7 यात्री सवार थे. 5 यात्रियों की मौत की सूचना है, वहीं दो घायल बताए जा रहे हैं. उत्तरकाशी के डीएम मौके के लिए रवाना हो गए हैं. यात्रियों से भरा हेलीकॉप्टर देहरादून से हर्षिल हेलीपैड के लिए निकाला था. गंगनानी से आगे नाग मंदिर के नीचे भागीरथी नदी के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना बताई जा रही है.

घटनास्थल के लिए पुलिस, सेना के जवान, आपदा प्रबंधनटीम, एंबुलेंस, तहसीलदार भटवाड़ी और BDO भटवाड़ी के साथ ही राजस्व टीम की रवाना हो गई है. घटना सुबह 9 बजे की बताई जा रही है. हेलीकॉप्टर प्राइवेट कंपनी का बताया जा रहा है.

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने लिया केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा

News web media Uttarakhand : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने केदारनाथ धाम पहुंचकर आगामी चारधाम यात्रा की तैयारियों और व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया. अपने इस दौरे में उन्होंने सबसे पहले केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.

मुख्य सचिव ने मंदाकिनी और सरस्वती नदियों पर बनाए गए बेली ब्रिज का भी निरीक्षण किया. उन्होंने जानकारी दी कि इस पुल का कार्य पूरा हो चुका है, जिससे यात्रियों को आने-जाने में और अधिक सुविधा और सुगमता प्राप्त होगी. उन्होंने आस्था पथ पर बने रेन शेल्टरों का भी निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए इन रेन शेल्टरों में एलईडी साइनेज लगाए जाने चाहिए, ताकि यात्रियों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सके कि शौचालय, मेडिकल सहायता और अन्य जरूरी सुविधाएं किस स्थान पर उपलब्ध हैं.

मुख्य सचिव ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कतार में खड़े यात्रियों को गर्म पानी की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि वे ठंडे मौसम में भी आरामदायक अनुभव प्राप्त कर सकें. उन्होंने मंदिर परिसर से लेकर सरस्वती नदी के किनारे बने आस्था पथ तक की स्वच्छता व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और वहां स्थापित शौचालयों की स्थिति को परखा. इसके साथ ही उन्होंने गढ़वाल मंडल विकास निगम (ळडटछ) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग में बने सभी कॉटेजों की मरम्मत समय पर पूरी की जाए और उनकी साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान किसी भी यात्री को असुविधा न हो, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध और सुचारू रूप से पूरी कर ली जाएं.

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने रुद्र प्वाइंट और घोड़ा पड़ाव का भी निरीक्षण किया. इन स्थलों पर उन्होंने यात्रियों की भीड़ प्रबंधन, पेयजल, चिकित्सा, विश्राम और सफाई व्यवस्था की समीक्षा की.

जिलाधिकारी सौरभ गहरवार ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि केदारनाथ यात्रा से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं. यात्रा मार्ग से लेकर धाम क्षेत्र तक सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली गई हैं. जो कुछ शेष कार्य हैं, उन्हें भी यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व पूर्ण कर लिया जाएगा.

जिलाधिकारी ने बताया कि पैदल मार्ग, ठहरने की व्यवस्था, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, संचार सुविधा एवं आपातकालीन व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त किया गया है. तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए सभी पड़ावों पर मूलभूत सुविधाओं को भी सुनिश्चित कर दिया गया है.

पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बताया कि सुरक्षा दृष्टि से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं. यात्रा मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित कर दी गई है. अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को नियमित रूप से यात्रा मार्ग की चेकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि यात्रा अवधि के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पूर्व से ही विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है, ताकि किसी भी स्थान पर जाम की स्थिति न बने.पुलिस एवं प्रशासन द्वारा आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें भी यात्रा मार्ग पर सक्रिय रहेंगी, ताकि किसी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके.

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद धामी सरकार ने उठाए सख्त कदम, पाकिस्तानी नागरिकों के पहचान की कार्रवाई तेज

News web media Uttarakhand : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के संबंध में सीसीएस की बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रम में प्रदेश में पाकिस्तानी नागरिकों के पहचान की कार्रवाई तेज कर दी गई है। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा सभी पाकिस्तानी वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं।
जिसमें सामान्य पाकिस्तानी वीजा धारकों को 27 अप्रैल रविवार और मेडिकल वीजा धारकों को 29 अप्रैल, 2025 तक पाकिस्तान वापसी के आदेश जारी हुए हैं। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखण्ड में देहरादून, हरिद्वार एवं नैनीताल में वर्तमान में लगभग 250 पाकिस्तानी नागरिक प्रवास पर हैं।
जिनमें से 247 Long Term Visa पर भारत आए हुए। अधिकांशतः पाक हिंदू नागरिक हैं और 3 पाकिस्तानी नागरिक Short Term Visa पर प्रवास पर हैं। उत्तराखंड में Short Term Visa पर रह रहे 03 पाक नागरिकों में से 2 को वापस भेज दिया गया है एवं 1 को वापस भेजने की कार्यवाही की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर डीजीपी द्वारा समस्त जनपदों के एसएसपी/एसपी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। शॉर्ट टर्म वीजा (अल्पावधि वीजा) और मेडिकल वीजा पर आए पाकिस्तानियों को जल्द से जल्द वापस भेजने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय को इस बाबत पत्र लिखा है। इससे पहले बृहस्पतिवार को देहरादून में शॉर्ट टर्म वीजा पर देहरादून में रह रहे दो पाकिस्तानियों वापस भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि अभी हरिद्वार में एक पाकिस्तानी रह रहा है। उसे भी जल्द ही वापस भेज दिया जाएगा।

प्रदेश में पाकिस्तानी नागरिकों को जारी वीजा के संबंध में मुख्यमंत्री के निर्देश में अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती की ओर से पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक अभिसूचना व सुरक्षा के साथ आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल व कुमाऊं को प्रेषित पत्र भेजा गया है। पत्र में बताया गया है कि विदेश मंत्रालय भारत सरकार ने आतंकी घटना के मद्देनजर पाकिस्तानी नागरिकों के लिए जारी वीजा सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों को दिए गए सभी वैध वीजा को 27 अप्रैल से निरस्त कर दिया है। जबकि, मेडिकल वीजा केवल 29 अप्रैल तक वैध रहेंगे। डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सभी कार्रवाई तेज कर दी गई हैं। सभी जिलों से लगातार रिपोर्ट भी ली जा रही है।

काशीपुर में नवनिर्मित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का लोकार्पण, निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ

News web media uttarakhand : सहायक सम्भागीय परिवहन कार्यालय (ARTO), काशीपुर में हाल ही में नवनिर्मित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर एक निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का भी शुभारंभ किया गया, जिसे अधिकारियों ने फ्लैग ऑफ किया।​

नवीन ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की स्थापना से ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। ऑटोमेटेड प्रणाली के माध्यम से टेस्टिंग प्रक्रिया अधिक सटीक और निष्पक्ष होगी, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।​

निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ क्षेत्रीय नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सेवा आपातकालीन स्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करेगी, जिससे जीवन रक्षा में मदद मिलेगी।​

इस पहल से काशीपुर क्षेत्र में परिवहन सेवाओं में सुधार और नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तराखंड के मदरसों में अब राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू, हिंदी-उर्दू अनिवार्य, संस्कृत वैकल्पिक

Dehradun Milap : ​उत्तराखंड सरकार ने राज्य के मदरसों में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। अब सभी मदरसे उत्तराखंड राज्य शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम का पालन करेंगे, जिसमें हिंदी और उर्दू अनिवार्य विषय होंगे, जबकि संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा।

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने बताया कि मदरसों के प्रधानाचार्यों को राज्य शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य मदरसा छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है, जिससे वे विज्ञान, गणित और सामाजिक अध्ययन जैसे विषयों में भी दक्षता प्राप्त कर सकें।​

इस कदम के तहत, राज्य के सभी 416 पंजीकृत मदरसों में संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में पेश किया जाएगा। इसके अलावा, कंप्यूटर शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना है, ताकि छात्रों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त हो सके। ​

इस निर्णय का उद्देश्य मदरसा छात्रों को समग्र शिक्षा प्रदान करना है, जिससे वे धार्मिक अध्ययन के साथ-साथ आधुनिक विषयों में भी पारंगत हो सकें। यह पहल राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।