Pithoragarh: लिपुलेख मार्ग से पहली जून से शुरू होगा भारत-चीन के बीच व्यापार, सीमित सामान से होगी शुरुआत

धारचूला में व्यापारी अपने सामान की पैकिंग में जुट गए हैं। प्रशासन ने व्यापारियों और हेल्परों के लिए 300 पास मांगे हैं। एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि व्यापारियों के आवेदन आने शुरू हो गए हैं।

कोरोनाकाल के बाद इस वर्ष एक जून से फिर भारतीय कारोबारी तिब्बत से चीनी सामान भारत ला सकेंगे। धारचूला में व्यापारी अपने सामान की पैकिंग में जुट गए हैं। प्रशासन ने व्यापारियों और हेल्परों के लिए 300 पास मांगे हैं। एसडीएम धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि व्यापारियों के आवेदन आने शुरू हो गए हैं।

व्यापारी नाभीढांग या उससे आगे लिपुलेख पास तक वाहनों से जाएंगे। इस दौरान आईटीबीपी के जवान व्यापारियों के साथ रहेंगे। करीब 800 मीटर पैदल चलने के बाद व्यापारी चीन में प्रवेश करेंगे। वहां से वाहनों के जरिये वे व्यापारिक मंडी तिब्बत पहुंचेंगे। इस बार चीन सरकार ने भारतीय व्यापारियों के लिए तिब्बत में अलग से मंडी बनाई है।

सीमित सामान लेकर जाएंगे अभी व्यापारी…
व्यापारी अभी भारी सामान ले जाने से भी गुरेज कर रहे हैं। अभी वे यहां से गुड़, मिश्री, मसाला, छुआरा, मिर्च, चायपत्ती, मिठाइयां आदि लेकर जाएंगे। तिब्बत से वे चंवर गाय की पूंछ, रेशम, ऊन जैसी सामग्री लेकर आएंगे। गौरतलब है कि 2019 में 265 पास जारी हुए थे।

 

Uttarakhand: बकरीद आज, कड़ी सुरक्षा के बीच अदा की जा रही नमाज, देहरादून को पांच जोन और 11 सेक्टर में बांटा गया

ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर मुस्लिम समुदाय में उत्साह है। देहरादून समेत प्रदेशभर की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा की जा रही है। पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए दून पुलिस ने शहर को पांच जोन और 11 सेक्टर में बांटकर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं, जबकि बाजारों में बुधवार देर रात तक खरीदारी की रौनक बनी रही।

त्याग और बलिदान का प्रतीक ईद-उल-अजहा का पर्व आज मनाया जा रहा है। इसे लेकर मुस्लिम समुदाय में उल्लास का माहौल रहा। बुधवार को बाजार में दिनभर खरीदारी हुई। मंडियों में बकरों की दिनभर लोगों ने खरीदारी की। आज सुबह से अलग-अलग समय पर ईद की नमाज हो रही है।

बकरीद के लिए बुधवार को देहरादून के बाजारों में देर रात तक खासी रौनक देखने को मिली। पलटन बाजार, धामावाला और चकराता रोड स्थित दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। कपड़ों, सेवइयों और इत्र की दुकानों पर भी खूब खरीदारी हुई। इसे लेकर शहर की प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज की तैयारियां पूरी की गई

मुख्य नमाज चकराता रोड स्थित ऐतिहासिक ईदगाह में अदा की जा रही है। जहां हजारों की संख्या में अकीदतमंद जुटे। देहरादून के शहर काजी मुफ्ती हशीम अहमद कासमी ने अपील करते हुए कहा कि ईद की नमाज, कुर्बानी और तमाम दीनी अमल शरीअत, सफाई और कानून के दायरे में करे। उन्होंने कहा कि कुर्बानी के बाद सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए और जानवरों के अवशेष खुले स्थानों पर न डाले।

यहां इतने बजे होगी नमाज 

जगह  समय
चकराता रोड स्थित ईदगाह 7:30
सुभाष नगर, माजरा ईदगाह  7:00
मुस्लिम कॉलोनी ईदगाह 7:15
पल्टन बाजार जामा मस्जिद ईदगाह 8:00
धामावाला बाजार जामा मस्जिद 7:00
नया नगर, इनामुल्लाह बिल्डिंग जामा मस्जिद  7:45
माजरा जामा मस्जिद 7:30
बड़ी मस्जिद कारगी 7:00
मस्जिद दिलाराम बाजार  7:00
जामा मस्जिद ईसी रोड 7:00

 

बकरीद पर सख्त  सुरक्षा, शहर को पांच जोन और 11 सेक्टर में बांटा
ईद-उल-जुहा पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए देहरादून पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरे नगर क्षेत्र को 5 जोन, 11 सेक्टर और 35 सब सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है, जबकि सेक्टरों में निरीक्षक और थानाध्यक्ष तथा सब सेक्टरों में उपनिरीक्षकों को तैनात किया गया है। पुलिस ने खुले में कुर्बानी देने और अवशेष को खुले में परिवहन करने पर भी रोक लगाई है।

दून पुलिस द्वारा संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। सभी थाना प्रभारियों, चौकी प्रभारियों और हल्का प्रभारियों को लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील रहकर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने पर्व से पहले सभी थाना क्षेत्रों में सर्वधर्म समुदाय के गणमान्य लोगों के साथ बैठकें आयोजित कर आपसी भाईचारे और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। साथ ही कुर्बानी स्थलों का निरीक्षण कर मुस्लिम समुदाय से निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी देने और सड़क पर नमाज न पढ़ने का अनुरोध किया गया है।

एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि पूर्व में विवादों में शामिल रहे तथा गौकशी और अवैध पशु कटान से जुड़े लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना फैलाकर माहौल खराब करने की कोशिशों को समय रहते रोका जा सके। पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें प्रसारित करने या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

आईजी गढ़वाल ने भी जारी किए निर्देश

बकरीद पर्व के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था एवं शांति समिति की बैठकों के संबंध में आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा, किसी भी प्रकार की अफवाह या माहौल बिगाड़ने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस का सोशल मीडिया सेल सक्रिय रूप से काम करे। भ्रामक या आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले अवांछित तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। यदि कोई भी व्यक्ति या असामाजिक तत्व क्षेत्र का माहौल खराब करने या शांति भंग करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, त्योहारों के दौरान किसी भी नई परंपरा या प्रथा की अनुमति नहीं दी जाएगी। पूर्व के वर्षों से चली आ रही मान्यताओं और निर्धारित एसओपी के अनुसार ही सभी कार्यक्रम संपन्न कराए जाएंगे।

 

उत्तराखंड: आदिबदरी के बूंगा गांव में जंगल की आग की लपटों में घिरी महिला, हुई मौत; नारायणबगड़ में महिला झुलसी

आदिबदरी तहसील के बूंगा गांव के बदाढ़गाड जंगल में लगी भीषण आग ने मंगलवार शाम को एक महिला की जान ले ली। आग की लपटों में घिरने से 50 वर्षीय सुरेशी देवी बुरी तरह झुलस गईं और अस्पताल ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

आदिबदरी तहसील के बूंगा नामक गांव के बदाढ़गाड जंगल में मंगलवार दोपहर से आग लगी थी। ग्रामीण पुष्कर लाल ने बताया कि मंगलवार शाम सात बजे बूंगा गांव के मदन लाल की पत्नी 50 वर्षीय सुरेशी देवी जब गांव से 200 मीटर दूर स्थित अपनी गौशाला जा रही थी तो वह रास्ते  में आग की लपटों में घिर गई तब बहुत तेज हवा चल रही थी, वह आग से बुरी तरह झुलस गई।

जलने पर जब महिला चिल्लाई तो गांव के लोग घटना स्थल पर पहुंचे और किसी तरह उसे आग से निकालकर घर ले आए। जब वे उसे हास्पिटल ले जाने की तैयारी कर रहे थे तो तभी उसने दम तोड दिया। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय पटवारी और वन विभाग के अधिकारियों को रात को ही सूचित कर दिया था।

बताया जाता है वन विभाग की टीम रात को गांव पहुंच गई थी। वहीं दूसरी और नारायणबगड़ के रेस चोपता गांव में एक महिला जंगल की आग में झुलस गई। झुलसी महिला कश्मीरा देवी का उपचार कर्णप्रयाग उपजिला अस्पताल में चल रहा है।

 

उत्तराखंड में दो दिन तेज गर्मी का अलर्ट: सभी जिलों को किया सतर्क, मैदानी जिलों में हीट वेव जैसी स्थिति के आसार

सोमवार को जारी पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के मैदानी जिलों में सोमवार से 27 मई, 2026 तक लू (हीट वेव) जैसी स्थिति की संभावना व्यक्त की गई है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने अगले दो दिनों में लू जैसी स्थिति की संभावना के दृष्टिगत सभी जिलों को पत्र भेजते हुए सतर्क रहने और सभी आवश्यक एहतियाती व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा है।

भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून ने सोमवार को जारी पूर्वानुमान के अनुसार राज्य के मैदानी जिलों में सोमवार से 27 मई, 2026 तक लू (हीट वेव) जैसी स्थिति की संभावना व्यक्त की गई है। विशेष रूप से हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून, पौड़ी, नैनीताल और चंपावत जिलों के कुछ स्थानों पर हीट वेव जैसी स्थिति बन सकती है। ऐसे में जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र व नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा जाए।

स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां, ओआरएस और लू व शरीर में पानी की कमी से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। राज्य आपातकालीन परिचालन केंंद्र ने ऊर्जा निगम, पेयजल विभागों को निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने तथा पानी की कमी वाले क्षेत्रों में टैंकरों की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

श्रमिकों और बाहरी कार्यस्थलों पर कार्यरत कर्मियों के लिए कार्य समय को सुबह और शाम तक सीमित रखने की भी सलाह दी गई है। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने आम जनमानस से अधिक गर्मी के दौरान दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ का सेवन करने की अपील की है।

 

Uttarakhand: पूर्व सीएम कोश्यारी को आज मिलेगा पद्मभूषण सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी सम्मानित

पूर्व सीएम कोश्यारी को आज पद्मभूषण सम्मान से नवाजा जाएगा। वर्ष 1966 में उन्होंने उत्तराखंड के एक सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों को मजबूत किया गया।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को 25 मई को पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में होने वाले सम्मानित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मान प्रदान करेंगी। 17 जून, 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में जन्मे कोश्यारी ने अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद दृढ़ संकल्प के साथ उच्च शिक्षा प्राप्त की और 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री पूरी की।

उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर कासगंज (उत्तर प्रदेश) में पढ़ाना शुरू किया, जहां उन्होंने छोटे बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय मूल्य प्रदान करने का काम किया। वर्ष 1966 में उन्होंने उत्तराखंड के एक सीमावर्ती जिले पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा के अवसरों को मजबूत किया गया। वर्ष 1997 में कोश्यारी को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया था।

नवंबर 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद, वह राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने, उसके मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 2008 में वह राज्य सभा के लिए चुने गए और 2014 में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर निर्वाचन क्षेत्र से लोक सभा के लिए चुने गए। पांच सितंबर 2019 को उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया। अगस्त 2020 में, उन्हें गोवा के राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

 

पहाड़ी जिलों में बढ़ रहे मनोरोगी: सामान्य डिप्रेशन की चपेट में हर शख्स, आपदा, जानवरों के हमलों से जीवन नर्क

प्राकृतिक आपदा, बाघ के हमले, खाई में गिरते वाहन आदि घटनाएं तो लोगों के अवसाद का प्रत्यक्ष कारण बन ही रहीं हैं साथ ही न दिखने वाली विपरीत परिस्थितियां भी मानसिक रोग की वजह बन रहीं हैं।

पहाड़ की जिन वादियों में दुनिया सुकून तलाशने पहुंचती है वहां के बाशिंदों के लिए वही वादियां अब खौफ और बेबसी की वजह बन चुकी हैं। यह विरोधाभास ही है कि जो शांत फिजाएं पर्यटकों का मन लुभाती हैं वे वहां के निवासियों को खालीपन के अंधेरे और मानसिक बीमारियों के जाल में धकेल रही हैं। पहाड़ के लोगों का मन टटोलने वाले मनोवैज्ञानिकों की मानें तो यहां रहने वाला लगभग हर व्यक्ति सामान्य अवसाद से जूझ रहा है।

प्राकृतिक आपदा, बाघ के हमले, खाई में गिरते वाहन आदि घटनाएं तो लोगों के अवसाद का प्रत्यक्ष कारण बन ही रहीं हैं साथ ही न दिखने वाली विपरीत परिस्थितियां भी मानसिक रोग की वजह बन रहीं हैं। इसकी वजह से लोग सोमाटाइजेशन विकार, पीटीएसडी, सिजोफ्रेनिया, बाईपोलर डिसॉर्डर, साइकोसिस और डिमेंशिया की चपेट में आ रहे हैं। डर के साये में जी रहे इन इक्का-दुक्का लोगों के घरों में अब परिंदों की चहचहाहट ही बची है। वीरान पड़े घर की दहलीज पर बैठी वो बुजुर्ग आंखें किसी परिचित या अपरिचित को अपनी ओर आते देख चमक उठती हैं। गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली आदि पहाड़ी जिलों के दूरस्थ गांवों में ऐसे कई मामले हैं।

गोली से ज्यादा डॉक्टर साहब की बोली असरदार : 
पौड़ी के चैलूसैंण में तैनात चिकित्सक डॉ. आशीष गोसाईं के मुताबिक मनोरोग से जूझ रहे करीब 25 लोग उनके पास हर रोज पहुंचते हैं। इनमें से 10 से 12 लोग ऐसे होते हैं जो अकेलेपन से जूझते हैं। वे कहते हैं कि डॉक्टर साहब दवाई बाद में देना पहले बात कर लो। वे अपने परिवार और घरों के पुराने किस्से डॉक्टर के साथ साझा कर अपने मन को हल्का करते हैं।

आपदा में बेटा और घर दोनों गए
उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में अगस्त 2025 में आई आपदा ने कामेश्वरी देवी की दुनिया उजाड़ दी। वह कहती हैं, आपदा ने मुझसे मेरा घर तो छीना ही मेरा बेटा भी हमेशा के लिए दूर कर दिया। अब मैं अपने जीजा के घर पर रहती हूं। रात को किसी भी समय नींद टूट जाती है। मस्तिष्क में हमेशा तनाव रहता है। रक्तचाप बढ़ने-घटने की भी परेशानी है। इस तरह की मनोस्थिति को विशेषज्ञ पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर नाम दे रहे हैं। उस इलाके से पीटीएसडी के कई मरीज पहुंच रहे हैं।

घरों के आसपास दबे हैं शव, डर में गुजर रहा जीवन
धराली में आपदा के बाद 70 परिवार में से सिर्फ पांच-छह परिवार ही बचे हैं। आपदा में गांव के ही आठ लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा बड़ीसंख्या में वहां के होटलों में काम करने वालों और पर्यटकों की भी मौत हुई थी। गांव वालों का मानना है कई शव उनके घर के आसपास मौजूद मलबे में अब तक दबे हैं। ग्रामीण पूरणा देवी, परमानंद, शूरवीर समेत वहां रहने वाले सभी लोगों का दावा है कि उनके घरों के आसपास मलबे में कई शव दबे हैं।

पड़ोसी छोड़कर चले गए अब सिर्फ हम बचे हैं 
पौड़ी जिले के तकल्लां गांव में दो लोगों का सिर्फ एक ही परिवार बचा है। इसमें विमला देवी और उनका बेटा शांति प्रसाद है। विमला बताती हैं कि पूरा गांव खाली है। चार बजे के बाद बाघ आंगन तक पहुंच जाते हैं। अकेलेपन से घबराहट रहती है।

मानसिक रोग को शारीरिक बीमारी के रूप में बता रहे 
पौड़ी के श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में तैनात वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. मोहित सैनी कहते हैं कि पहाड़ पर ज्यादातर लोग विपरीत हालात की वजह से मनोरोग की चपेट में आते हैं। हर महीने 25 से अधिक मरीज ऐसे भी आते हैं जो मनोरोगी के साथ अन्य मर्ज से परेशान हैं।

हर माह इतने मनोरोगी पहुंचते हैं 
उत्तरकाशी जिला चिकित्सालय : 120
टिहरी जिला चिकित्सालय : 250
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज (रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के भी मरीज) : 750

 

Cyber Crime: चारधाम यात्रियों को ‘लूट’ रहे बिहार के ठग, केदारनाथ हेली सेवा के नाम पर सबसे ज्यादा शिकायतें

जांच में सामने आया है कि केदारनाथ हेली सेवा और यात्रा बुकिंग के नाम पर सबसे ज्यादा साइबर ठगी बिहार के नवादा, पटना, गया और बिहारशरीफ जिलों से संचालित गिरोह कर रहे हैं। सबसे ज्यादा फेक आईपी एड्रेस इन्हीं चार जिलों में सक्रिय मिले हैं।

चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले गिरोहों पर उत्तराखंड एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि केदारनाथ हेली सेवा और यात्रा बुकिंग के नाम पर सबसे ज्यादा साइबर ठगी बिहार के नवादा, पटना, गया और बिहारशरीफ जिलों से संचालित गिरोह कर रहे हैं। सबसे ज्यादा फेक आईपी एड्रेस इन्हीं चार जिलों में सक्रिय मिले हैं।

एसटीएफ के अनुसार, चारधाम यात्रा शुरू होते ही साइबर अपराधियों ने फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया पेज और मोबाइल नंबरों के जरिये श्रद्धालुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। सबसे अधिक शिकायतें केदारनाथ हेली सेवा की ऑनलाइन बुकिंग को लेकर मिलीं, जहां ठग कम कीमत और तत्काल टिकट उपलब्ध कराने का झांसा देकर लोगों से हजारों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा रहे। कई मामलों में फर्जी होटल और गेस्ट हाउस बुकिंग के नाम पर भी लोगों से रकम ऐंठी गई।

एसटीएफ ने अब तक 200 से अधिक फर्जी वेबसाइट, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट और बुकिंग लिंक बंद कराए हैं। इसके अलावा 50 से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबरों को भी ब्लॉक कराया गया है जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये गिरोह संगठित तरीके से काम कर रहे थे और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए यात्रियों तक पहुंच बना रहे थे।

चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। साइबर टीमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फर्जी ट्रैवल पोर्टल और संदिग्ध ऑनलाइन पेमेंट गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। कई फर्जी वेबसाइट सरकारी पोर्टल जैसी दिखने के कारण श्रद्धालु आसानी से धोखे का शिकार हो रहे। अब तक 200 से अधिक साइटें बंद कराई गई हैं।

-अजय सिंह, एसएसपी, एसटीएफ

सिर्फ अधिकृत वेबसाइट से करें बुकिंग
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने यात्रियों से अपील की है कि हेली सेवा, होटल या यात्रा पंजीकरण केवल अधिकृत पोर्टल से ही कराएं। किसी भी अनजान मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया लिंक या व्हाट्सएप मैसेज के जरिए भुगतान न करें। उत्तराखंड सरकार ने केदारनाथ हेली सेवा बुकिंग के लिए सिर्फ आईआरसीटीसी को ही अधिकृत किया है। सिर्फ वहीं से टिकट बुक करें। अगर किसी प्रकार की साइबर ठगी होती है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।

साइबर अपराधियों पर एसटीएफ का प्रहार
साइबर अपराधियों के खिलाफ उत्तराखंड एसटीएफ ऑपरेशन प्रहार के तहत कड़ी कार्रवाई कर रही है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि बीते चार महीनों में पीड़ितों के 10 करोड़ रुपये बचाए गए। इसके अलावा 147 अंतरराज्यीय लिंक ऑपरेटरों और 27 फर्जी मोबाइल धारकों पर वैधानिक कार्यवाही की गई।

 

Uttarakhand: एसआईआर; पहले से तैयार कर लें कुछ कागजात तो नहीं होगी मुश्किल, आयोग ने जारी की 12 दस्तावेज की सूची

एसआईआर के लिए लोग पहले से ही कुछ कागजात तैयार कर लें तो मुश्किल नहीं होगी। आयोग ने 12 दस्तावेजों की सूची जारी की है।

उत्तराखंड में चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने को है। 70 लाख मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है, जिनका वोट सुरक्षित है लेकिन नौ लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका 2003 का वोट नहीं मिला। लिहाजा, घबराने की जरूरत नहीं है, उनके लिए भी चुनाव आयोग ने 12 दस्तावेज की सूची जारी की हुई है।

एसआईआर शुरू होने के बाद वर्तमान मतदाता सूची के आधार पर संबंधित मतदाताओं के पास बीएलओ गणना प्रपत्र पहुंचाएंगे। इस पर बीएलओ का नाम व मोबाइल नंबर भी होगा। प्रपत्र में आपको वर्ष 2003 के अपने वोट की जानकारी देनी होगी। अगर तब आपका वोट नहीं था तो अपने माता-पिता के वोट की जानकारी देनी होगी। अगर उनका भी वोट नहीं होगा तो दादा-दादी के वोट की जानकारी देनी होगी। कोई रास्ता नजर नहीं आएगा तो 12 दस्तावेज में कोई भी काम आ सकता है। इन दस्तावेज को पहले से तैयार रखेंगे तो परेशानी से बच सकते हैं। मतदाता सूची आप सीईओ उत्तराखंड की वेबसाइट ceo.uk.gov.in पर देख सकते हैं।

एसआईआर के लिए ये 12 दस्तावेज हैं वैध

केंद्र, राज्य सरकार या पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश। एक जुलाई 1987 से पहले सरकार, स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी, पीएसयू की ओर से जारी कोई भी पहचान पत्र, प्रमाण पत्र या दस्तावेज। आधार कार्ड। जन्म प्रमाण पत्र। पासपोर्ट। मान्यता प्राप्त बोर्ड या विवि की ओर से जारी मैट्रिकुलेशन या शैक्षिक प्रमाण पत्र। स्थायी निवास प्रमाण पत्र। वन अधिकार प्रमाण पत्र। ओबीसी/एससी/एसटी या कोई भी जाति प्रमाण पत्र। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर। राज्य या स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर। सरकार की ओर से जारी कोई भी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र।

ये होगी एसआईआर की प्रक्रिया

सबसे पहले आपके पास एसआईआर का गणना प्रपत्र आएगा। इस पर आपके वर्तमान वोट की जानकारी होगी। 2003 की जानकारी भरनी होगी। साथ ही एक नया फोटो चिपकाना होगा। वापस बीएलओ के पास जमा कराएंगे। अगर आप 2003 का डाटा नहीं है तो उस पर यही बात लिखकर आपको वापस देना है। फिर आपके पास नोटिस आएगा। नोटिस के आधार पर ईआरओ कार्यालय में आप अपने दस्तावेज जमा करा सकते हैं।

 

Uttarakhand: बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में दिव्यांगों व बुजुर्गों को अलग से होंगे दर्शन, बीकेटीसी ने बनाई व्यवस्था

बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में दिव्यांगों व बुजुर्गों को लेकर बीकेटीसी ने नई व्यवस्था बनाई है। सुबह व शाम के समय आधा-आधा घंटे का समय दर्शन के लिए निर्धारित होगा। 70 वर्ष व उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को आधार कार्ड दिखाना होगा।

चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में दिव्यांगों व बुजुर्गों को दर्शन के लिए लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। पहली बार बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) दिव्यांगाें व बुजुर्गों के लिए अलग से दर्शन की व्यवस्था कर रही है। इसके लिए एसओपी भी तैयार कर ली गई है।

बदरीनाथ व केदारनाथ में अभी तक दिव्यांगाें व बुजुर्गों के लिए दर्शन की कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। उन्हें भी आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में दर्शन करने पड़ते हैं। बीकेटीसी ने दिव्यांग व 70 वर्ष व उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के सुगम दर्शन की व्यवस्था बनाई है। इससे धामों में दिव्यांगों व बुजुर्गों को दर्शन करने में बड़ी राहत मिलेगी। बीकेटीसी ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए मानव प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर ली है। जल्द ही नई व्यवस्था धामों में लागू की जाएगी।

एसओपी के अनुसार शारीरिक व मानसिक रूप से दिव्यांग, बुजुर्ग श्रद्धालुओं को दर्शन करने से पहले अनिवार्य रूप से मंदिर समिति के काउंटर पर पंजीकरण कराया जाएगा। बुजुर्गों को आधार कार्ड व दिव्यांगों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिखाना होगा। बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में सुबह व शाम को आधा घंटे का समय निर्धारित किया जाएगा।

जल्द व्यवस्था लागू होगी
बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में आने वाले दिव्यांग व बुजुर्ग श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए बीकेटीसी ने नई व्यवस्था बनाने की पहल की है। इससे दिव्यांगों व बुजुर्गों को आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन करने के लिए लाइन में इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उनके दर्शन के लिए अलग से समय निर्धारित किया जाएगा। जल्द ही इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। -हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बीकेटीसी

Uttarakhand: पीएम मोदी के सोना न खरीदने की अपील से सराफा कारोबारी नाराज, प्रदेशभर में आज विरोध प्रदर्शन

प्रधानमंत्री मोदी के आभूषणों की खरीदारी न करने की अपील का असर स्वर्ण कारोबारियों और निर्माताओं पर पड़ता दिख रहा है। सोना न खरीदने की बात ने कारोबार को आर्थिक नुकसान की ओर धकेल दिया है।नाराज सराफा कारोबारी आज प्रदेशभर में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोना न खरीदने के बयान के विरोध में प्रदेशभर में सराफा कारोबारी सांकेतिक प्रदर्शन करेंगे। बुधवार को ज्वैलर्स एसोसिएशन ऑफ उत्तरांचल ने इसका ऐलान किया। दून में भी सराफा मंडल में विरोध जताया जाएगा।

प्रदेश महासचिव गुरजीत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के आभूषणों की खरीदारी न करने की अपील का विपरीत असर स्वर्ण कारोबारियों और निर्माताओं पर पड़ता दिख रहा है। सोना न खरीदने की बात ने इस कारोबार को आर्थिक नुकसान की ओर धकेल दिया है। सोना भारत की सभ्यता का प्रतीक है और हर त्योहार में सोने-चांदी की खरीदारी को शुद्धता और धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।

उत्तराखंड के सभी सराफा कारोबारी बृहस्पतिवार को अपने-अपने क्षेत्रों में मोमबत्ती जलाकर इस आयात शुल्क की बढ़ोतरी और सोना न खरीदने की अपील के प्रति सांकेतिक विरोध करेंगे। सराफा मंडल देहरादून के अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने बताया कि देहरादून में शाम सात बजे धामावाला स्थित सराफा बाजार में कैंडल जलाकर विरोध जताया जाएगा।

सोना हुआ 10 हजार महंगा, व्यापारियों की बढ़ी चिंता

बुधवार को एक ही दिन में सोने के दाम 10 हजार रुपये तक बढ़ गए। दरअसल, सोने पर आयात शुल्क छह से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक बढ़ाया गया। इसके कारण सोना दस हजार रुपये तक महंगा हो गया। सराफा मंडल, दून के अनुसार, बुधवार को 24 कैरेट सोने के दाम 1.66 लाख 500 रुपये तक पहुंच गए। जबकि एक दिन पहले इसके दाम 1.55 लाख रुपये तक थे। इसे लेकर व्यापारियों में भी चिंता बढ़ गई। सराफा मंडल के अध्यक्ष सुनील मैंसोन ने बताया कि एक ही दिन में आयात शुल्क बढ़ने के कारण 10 हजार रुपये तक बढ़ गए। इससे लोगों को सोना खरीदने में दिक्कतें होंगी। आगे सोने के दाम और बढ़ने की संभावना रहेगी।