कर्नाटक में बर्ड फ्लू का कहर: H5N1 वायरस से 40 मोरों की मौत,

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का उत्तराखंड दौरा टला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष 5 राज्यों की मतगणना के बाद आएंगे। जल्दी ही उनके आगमन की तिथियां तय होंगी।

उत्तराखंड में राज्य भाजपा के दो सर्वे, पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अप्रत्यक्ष रूप से कार्यकर्ताओं में जोश भरने के बाद अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के तीन दिवसीय दौरे की तैयारी तेज हो गई है। इस दौरान सभी 70 विधानसभा सीटों पर जीत के दावेदारों पर मंथन होगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष का आगमन आगामी चुनावी तैयारियों के नजरिए से राज्य भाजपा के लिए अहम है। इस बार भाजपा समय रहते एक-एक सीट पर मंथन करेगी। विधायक को फिर से टिकट देना है या नए मजबूत दावेदार होंगे। कुछ सीटों पर ये भी देखा जाएगा कि दूसरे दलों के मजबूत दावेदारों को भाजपा से टिकट दिया जाए। इन सभी संभावनाओं पर तीन दिन तक राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मंथन करने वाले हैं।

मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद समेत कोर कमेटी के सदस्य शामिल होंगे
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद होने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस प्रवास में मंडल से लेकर प्रदेश और सरकार में कैबिनेट मंत्रियों की बैठक लेंगे। इस दौरान वे बलबीर रोड स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक लेंगे। जिसमें मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद समेत कोर कमेटी के सदस्य शामिल होंगे।

आगामी विधानसभा चुनाव रणनीति को लेकर विस्तृत चर्चा होगी। प्रदेश संगठन की ओर से राज्य के वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य का खाका खींचते हुए, विधानसभावार पार्टी की तैयारियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार के कामों का जनता पर प्रभाव, विधायकों के प्रदर्शन और क्षेत्रवार मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

पार्टी पदाधिकारियों की बैठक होगी। इसमें सांगठनिक कार्यक्रमों की समीक्षा और 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर आवश्यक रणनीतिक विशेष सुझाव भी दिए जाएंगे। पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से मुलाकात के साथ साथ एक जिले और एक मंडल स्तर की पदाधिकारी बैठक लेकर वह जमीनी तैयारी को भी परखेंगे।

 

Labour Day: उत्तराखंड में लाखों श्रमिकों को सौगात; पीएफ-बीमा मिलेगा, पांच के बजाए एक साल में मिलेगी ग्रेच्युटी

केंद्र सरकार की मजदूरी संहिता, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा संहिताओं को राज्य में पिछले साल अपनाया गया था। अब श्रम विभाग इन्हें धरातल पर उतारने के लिए नियमावली तैयार करने में जुटा है।

उत्तराखंड में लाखों श्रमिकों को जल्द ही पांच के बजाए एक साल में ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सौगात मिलेगी। इसके लिए केंद्र की चार श्रम संहिताओं को लागू करने के बाद अब श्रम विभाग इनकी नियमावली तैयार कर रहा है। इनमें से औद्योगिक संबंध संहिता का ड्राफ्ट बृहस्पतिवार को जारी किया गया।

केंद्र सरकार की मजदूरी संहिता, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और व्यावसायिक सुरक्षा संहिताओं को राज्य में पिछले साल अपनाया गया था। अब श्रम विभाग इन्हें धरातल पर उतारने के लिए नियमावली तैयार करने में जुटा है। इनमें से उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026 का ड्राफ्ट श्रम विभाग ने 18 मार्च 2026 को जारी किया था। इस पर 17 अप्रैल तक प्रदेशभर से आपत्ति व सुझाव लेने के बाद श्रम विभाग इसे अंतिम रूप दे रहा है जो कि जल्द ही कैबिनेट में लाई जाएगी।

दूसरी, उत्तराखंड औद्योगिक संबंध संहिता नियमावली 2026 का ड्राफ्ट श्रम विभाग ने बृहस्पतिवार को जारी कर दिया, जिस पर 30 मई तक सुझाव व आपत्ति सचिव, श्रम विभाग, उत्तराखंड सचिवालय देहरादून या ई-मेल secretaryswp125@gmail.com, lcukhld0@gmail.com पर भेज सकते हैं। बाकी दो संहिताओं सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा की नियमावली का ड्राफ्ट भी तैयार करके जल्द जनता के लिए जारी किया जाएगा। श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बताया कि चारों संहिता प्रदेश ने एडॉप्ट कर ली हैं। अब नियमावली लागू की जा रही हैं, जिससे इनका अनुपालन आसान हो जाएगा।

ग्रेच्युटी, पीएफ, बीमा का मिलेगा लाभ

चारों श्रम संहिता की नियमावली लागू होने के बाद राज्य के हर श्रमिक के लिए एक समान न्यूनतम मजदूरी तय होगी। वेतन भुगतान समय पर और डिजिटल माध्यम से होगा। पहले पांच साल की सेवा के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी अब अनुबंध पर काम करने वाले श्रमिकों को मात्र एक साल की नौकरी के बाद भी मिल सकेगी। पहली बार ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और गिग वर्कर्स (डिलीवरी और राइडिंग पार्टनर) को भी भविष्य निधि (पीएफ) और बीमा जैसी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। महिला श्रमिक अब अपनी सहमति से रात की शिफ्ट में काम कर सकेंगी बशर्ते नियोक्ता उनकी सुरक्षा और घर तक छोड़ने की जिम्मेदारी उठाए। नई संहिताओं के अनुसार, मूल वेतन कुल वेतन का 50 प्रतिशत होगा। इससे श्रमिकों के पीएफ और ग्रेच्युटी फंड में बढ़ोतरी होगी। 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए साल में एक बार मुफ्त मेडिकल चेकअप का प्रावधान किया जाएगा।

 

ICSE Board Exam: परिणाम घोषित, रुड़की के सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के चेतन और शुभेंद्र ने लहराया परचम

आईसीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित हो गया है। रुड़की के सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इंटर में चेतन ने 85 प्रतिशत अंक लाकर टॉप किया। वहीं हाईस्कूल में शुभेंद्र प्रताप यादव 89 प्रतिशत पर रहे अव्वल रहे। दोनों स्कूल टॉपर रहे।

आईसीएसई बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। परिणाम आते ही छात्रों और अभिभावकों में खुशी की लहर दौड़ गई। शहर के सेंट जॉन्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कूल का नाम रोशन किया।

टरमीडिएट विज्ञान वर्ग में छात्र चेतन ने 85 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल टॉप किया। वहीं हाईस्कूल परीक्षा में शुभेंद्र प्रताप यादव ने 89 प्रतिशत सर्वाधिक अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। स्कूल के प्रधानाचार्य केनेथ सैमुअल ने मेधावी छात्रों की इस उपलब्धि पर गर्व जताया है।

प्रधानाचार्य ने कहा कि यह सफलता छात्रों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने अन्य छात्रों को भी इनसे प्रेरणा लेने की बात कही। परिणाम घोषित होते ही स्कूल परिसर में जश्न का माहौल रहा। सहपाठियों और शिक्षकों ने टॉपर्स को मिठाई खिलाकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

 

Doon-Delhi Expressway: दिल्ली से दून ढाई घंटे में पहुंचे सीएम धामी, कहा-ये कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली दौरे के बाद सड़क मार्ग से लौटते हुए दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम है।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में जिस गति से सड़क और परिवहन सुविधाओं का विकास हो रहा है, यह उसी का परिणाम है।

अब उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को कम कर रहा है, बल्कि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।

इससे चारधाम यात्रा समेत राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और अधिक सुगम होगी। मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत की नई रफ्तार बताते हुए कहा कि इस तरह की परियोजनाएं उत्तराखंड के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

 

Heatwave: पहली बार हुई लू के चलते देहरादून में स्कूलों की छुट्टी, आमतौर पर बारिश-सर्दी में किया जाता है अवकाश

देहरादून जिले में आज, सोमवार को अत्यधिक गर्मी और लू और गर्मी का अलर्ट जारी किया गया है। इसके चलते डीएम सविन बंसल ने सभी आंगनवाड़ी केंद्र, शासकीय, गैर-शासकीय और निजी स्कूलों (कक्षा 01 से 12 तक) में एक दिन की छुट्टी का आदेश जारी किया है। आमतौर पर बारिश और सर्दियों के सीजन में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर  छुट्टी का फैसला लिया जाता है।

राज्य बनने के ढाई दशक के इतिहास में अगर कहीं मौसम का सबसे ज्यादा असर पड़ा तो वह देहरादून पर रहा। कभी छोटी सी बदली बरसने का सिलसिला अब खत्म हो गया। नौबत यहां तक आ गई कि गर्म प्रदेशों की तरह यहां भी प्रशासन को बच्चों की छुट्टी का निर्णय लेना पड़ा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने रविवार दोपहर को ही सोमवार को स्कूलों की छुट्टी के आदेश जारी कर दिए। ताकि, बच्चों की लू से सुरक्षा की जा सके।

दरअसल, यहां बारिश और सर्दी के मौसम में तो अक्सर स्कूलों की छुट्टी के आदेश जारी होते हैं लेकिन गर्मियों में ऐसा आदेश पहली बार हुआ है। हालांकि, कुछ स्कूलों ने अपने स्तर से इससे पहले ऐसे प्रयास किए हैं कि उन्होंने ग्रीष्मकालीन अवकाश की संख्या बढ़ा दी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मौमस का पूर्वानुमान है कि सोमवार को दिन भर गर्मी रहेगी। लू भी चल सकती हैं। ऐसे में जिले के एक से 12वीं कक्षा तक के सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी के आदेश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि स्कूलों को पहले से निर्देश भी दिए गए हैं कि वहां पर पर्याप्त ठंडे पानी की व्यवस्था होनी आवश्यक है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न जगहों पर लगे प्याऊ और वाटर कूलर आदि को भी नियमित चेक करने के निर्देश प्रशासन के अधिकारियों को दिए गए हैं।

 

UK Board Result: परिणाम घोषित,10वीं का परीक्षाफल इस साल 92.10% , इंटरमीडिएट का रहा 85.11%, ये बने टॉपर

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की मौजूदगी में रामनगर में आज उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित किए गए।

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम आज घोषित कर दिए गए हैं। उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं का परीक्षा फल इस साल 92.10% रहा, जबकि इंटरमीडिएट का परीक्षाफल 85.11% रहा। हाईस्कूल में रामनगर के एमपी इंटर कॉलेज के अक्षत गोपाल ने 500 में से 491 अंक लाकर प्रदेश में टॉप किया। वहीं इंटरमीडिएट में सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज बागेश्वर की गीतका पंत और भानजुराम इंटर कॉलेज यूएस नगर के सुशीला मेहंदीरत्ता ने संयुक्त रूप से 500 में से 490 अंक लाकर प्रदेश में टॉप किया।

शनिवार को शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने परीक्षा परिणाम घोषित किए। कुल सम्मिलित परीक्षार्थियों में 92.10% छात्र पास हुए हैं। बालिकाओं का पास प्रतिशत 96.07 फीसदी रहा, जबकि बालकों का 88.03 फीसदी।

कुल 1,12,266 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 1,08,983 सम्मिलित हुए और 1,00,373 उत्तीर्ण हुए। टॉप थ्री में देहरादून जिले के एक लड़के ने अपनी जगह बनाई।

 

Uttarakhand: प्रदेश के पांच नगर निकायों में चुनाव का हो रहा है इंतजार, परिसीमन समेत सभी औपचारिकताएं पूरी

उत्तराखंड के पांच नगर निकायों में चुनाव का इंतजार हो रहा है।  परिसीमन व ओबीसी आरक्षण के सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

पांच नगर निकायों में चुनाव का इंतजार है। शहरी विकास विभाग के स्तर से परिसीमन समेत सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। निर्वाचन आयोग को अब इस पर फैसला लेना है। हालांकि इनमें से दो निकायों का मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। नरेंद्रनगर नगर पालिका का चुनाव वर्ष 2003 में होना था। परिसीमन से पहले सरकार ने एक गांव को पहले तो इसमें शामिल किया और फिर हटा दिया था।

लिहाजा, समय से परिसीमन न होने के कारण यहां पिछले साल चुनाव नहीं हो पाए थे। अब परिसीमन व ओबीसी आरक्षण के सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसी प्रकार, वर्ष 2018 में किच्छा नगर पालिका के विस्तार के समय सिरौली कलां, बंडिया, देवरिया और आजाद नगर को इसमें शामिल किया गया था। सिरौली कलां में तीन वार्ड (18, 19, 20) और वार्ड 17 के कुछ हिस्से बनाए गए थे। बाद में, 2024 में एक नोटिफिकेशन के जरिए सिरौली कलां को पालिका से अलग कर फिर से रेवेन्यू विलेज बनाने का प्रयास किया गया।

सिरौली कलां को सरकार ने अलग से नगर पालिका बना दिया
स्थानीय निवासियों (मोहम्मद यासीन और अन्य) ने इसके विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि पिछले छह वर्षों से यह हिस्सा नगर पालिका का है और यहां लगभग पांच करोड़ रुपये के विकास कार्य हो चुके हैं। मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सिरौली कलां को पालिका से बाहर करने वाले तीन सितंबर 2024 के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। हालांकि सिरौली कलां को सरकार ने अलग से नगर पालिका बना दिया है।

अभी दोनों का चुनाव भी लटका हुआ है। इसी प्रकार, सरकार ने ऊधमसिंह नगर में गढ़ी नेगी और चंपावत में पाटी नगर पंचायत बनाए थे। इनकी भी परिसीमन आदि की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब राज्य निर्वाचन आयोग को इनका चुनाव तय करना है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार का कहना है कि दो निकायों किच्छा-सिरौली कलां का मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

 

Uttarakhand: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आज ऋषिकेश दौरा, एम्स परिसर तक क्षेत्र तीन सुरक्षा जोन में विभाजित

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के प्रस्तावित दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। पुलिस महकमे ने पूरी तरह से अलर्ट जारी कर दिया है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रस्तावित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दौरे को लेकर एम्स ऋषिकेश में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लेकर एम्स परिसर तक पूरे क्षेत्र को तीन विशेष सुरक्षा जोन में विभाजित किया गया है।

पहला जोन जौलीग्रांट एयरपोर्ट, दूसरा जोन एम्स हेलीपैड और तीसरा जोन मुख्य कार्यक्रम स्थल को बनाया गया है। तीनों जोन की सुरक्षा की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है।

सीओ नीरज सेमवाल ने बताया कि दौरे के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखते हुए चेकिंग अभियान भी तेज कर दिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो।

 

Uttarakhand: इस महीने राज्य में दस बार आ चुका भूकंप, तीन जिलों में डाेली धरती, वैज्ञानिकों बोले-सजगता जरूरी

उत्तराखंड में इस महीने दस बार भूकंप आज चुका है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक बताते हैं कि राज्य भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है, ऐसे में सजगता जरूरी है।

इस महीने राज्य में 10 बार भूकंप आया है। जो भूकंप आएं हैं, उनकी तीव्रता कम रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह के कम तीव्रता के भूकंप आते रहे हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इस महीने सबसे पहले 11 अप्रैल को पौड़ी गढ़वाल में रिक्टर स्केल पर 3.3 और 3.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसके तीन दिन बाद ही 14 अप्रैल पिथौरागढ़ की धरती डोली और यहां पर 3.4 तीव्रता का भूकंप आया।

दो दिन बाद भी फिर 16 को पिथौरागढ़ में 2.4 तीव्रता का भूकंप आया। 19 को बागेश्वर में 10.32 से 11.31 के बीच एक नहीं बल्कि कुछ तीन बार धरती में हलचल हुई। इस अवधि में 2.8, 2.6 और 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। 20 को बागेश्वर में रिक्टर स्केल पर 2.5 और पौड़ी गढ़वाल में 3.0 तीव्रता का भूकंप आया। 21 अप्रैल को बागेश्वर जिले में एक बार फिर धरती में हलचल हुई, इस बार रिक्टर स्केल पर 2.6 तीव्रता का भूकंप आया है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ.विनीत गहलोत बताते हैं कि राज्य भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है, ऐसे में सजगता जरूरी है। रही बात भूकंप आने की तो इस तरह के छोटे भूकंप आते रहे हैं, इसमें कोई पैर्टन अभी नहीं दिखाई देता है। इसी संस्थान के वैज्ञानिक डॉ.नरेश बताते हैं कि पूर्व में भी इस तरह के छोटे भूकंप आए हैं।

 

सीएम धामी हुए नाराज: अफसरों ने जबरन बंद कीं 22 हजार शिकायतें, आंकड़ा देख हुए गुस्सा; अफसरों को दी ये चेतावनी

देवभूमि उत्तराखंड में अफसरों की लापरवाही पर मुख्यमंत्री धामी गुस्सा हो गए। दरअसल, अफसरों ने 22 हजार शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम ने कहा कि जिस अफसर ने जनता की शिकायत जबरन बंद की, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

उत्तराखंड के अफसरों ने जनता की 22,246 शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने ये आंकड़ा आया तो वे नाराज हो गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर किसी अफसर ने शिकायत को जबरन बंद किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कहा कि जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के बिना किसी भी स्तर पर शिकायतों को जबरन बंद करने की कार्रवाई न की जाए।
शुक्रवार को सचिवालय में सीएम धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन केवल एक दूरभाष संख्या नहीं बल्कि जनता की अपेक्षाओं और विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम है। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता की पूर्ण संतुष्टि सुनिश्चित होने तक किया जाए।

देहरादून में 6,084 शिकायतें शहरी विकास और 2,980 पेयजल विभाग से जुड़ी हैं। ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन से जुड़ी शिकायतें सर्वाधिक हैं। हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक है।

सीएम ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी स्तर पर हर सप्ताह और सचिव स्तर पर प्रत्येक माह में कम से कम दो बार शिकायतों की समीक्षा की जाए। कहा कि हेल्पलाइन की सफलता का वास्तविक आकलन तभी संभव है जब शिकायतकर्ता यह अनुभव करें कि सरकार ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध समाधान प्रदान किया है।

सीएम ने सभी की सराहना की
सीएम ने अधिकतम शिकायतों का निस्तारण करने वाले अधिकारियों से फोन पर बात की। इनमें यूपीसीएल के उत्तरकाशी में तैनात अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं ने 99.09%, पौड़ी में अभिनव रावत ने 98.34%, ऋषिकेश के पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली ने 98.30%, एडीओ विकासनगर दीपक थापली ने 98.23% और एसएचओ पटेलनगर विनोद गुसाईं ने 97.41% समाधान किया है। सीएम ने सभी की सराहना की।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक ने 2043 शिकायतें बंद कीं
राज्य में कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 शिकायतों (लगभग 18.68%) को अनुचित रूप से बंद कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, विभाग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए गंभीर शिकायतों को भी दूसरी श्रेणियों में बदल रहे हैं।
जल संस्थान के अफसरों ने पानी न आने की 861 शिकायतों को जबरन बंद कर दिया। सिलिंडर रिफिल और राशन कार्ड की मांग को शिकायतों के बजाए सिर्फ डिमांड मानकर छोड़ दिया। बिजली के अत्यधिक बिल और खराब मीटरों की समस्या को भी तकनीकी उलझनों में फंसा दिया।

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के पास पेयजल संबंधी 2,074 शिकायतें थीं, जिनमें से उन्होंने 2043 (98.5 प्रतिशत) को बिना ठोस समाधान के जबरन बंद कर दिया। पर्यटन विकास अधिकारी ललित मोहन तिवारी ने 328 में से केवल 41 का निस्तारण किया।
6287 शिकायतें 180 दिनों से लंबित
साल 2021 से अब तक 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। राजस्व विभाग (472), वन विभाग (445) और लोक निर्माण विभाग (401) इस सूची में सबसे ऊपर हैं। कुछ शिकायतें तो साल 2021 से प्रक्रिया में ही अटकी हुई हैं।
अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में लंबित शिकायतों में 107% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, प्रक्रिया में वाली शिकायतों में 2290% का उछाल आया है।