उत्तराखंड: राज्यसभा सीट पर चेहरा बदल भी सकती है भाजपा, वैश्य समाज से ही हो सकता है चेहरा, रिपीट की परंपरा नहीं

उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनावी हलचल शुरू हो गई है। भाजपा के सामने अब नए चेहरे के चयन के साथ सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की चुनौती भी है

उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव का बिगुल बज चुका है। भाजपा के लिए राज्यसभा सांसद चुनने की राह आसान है। यहां भाजपा चेहरा बदल भी सकती है लेकिन ये तो साफ माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के नाते वैश्य समाज से ही कोई राज्यसभा पहुंचे। इसमें कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी चर्चाओं में हैं।

राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होने जा रहा है। वह संघ, भाजपा के वरिष्ठ नेता है। राष्ट्रीय व राज्य संगठन में अहम पदों पर रहे हैं। उनकी सीट खाली होने के साथ ही अब सवाल उठ रहा है कि भाजपा का नया चेहरा कौन होगा। इतिहास देखें तो भाजपा उत्तराखंड में हमेशा नए चेहरों और सामाजिक, क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए हर बार नए प्रत्याशी को ही मौका देती रही है। कोई चेहरा रिपीट नहीं किया गया। लिहाजा, सबकी नजरें इस बात पर हैं कि परंपरा टूटेगी या कायम रहेगी।उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में वैश्य समाज शहरी प्रभाव के कारण निर्णायक है।

देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी की करीब 15-20 विधानसभा सीटों पर इनकी पांच से 12 प्रतिशत हिस्सेदारी करीबी मुकाबलों में स्विंग फैक्टर साबित होती है। पारंपरिक तौर पर यह समाज भाजपा का मजबूत कोर वोटर माना जाता रहा है। लिहाजा, ये माना जा रहा है कि भाजपा को जो भी चेहरा अब राज्यसभा जाएगा, वह वैश्य समाज का ही प्रतिनिधि ही होगा। इसमें वर्तमान सांसद के अलावा कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। 

भाजपा से कौन कब रहा राज्यसभा सांसद

सुषमा स्वराज(2000–2006) : राज्य गठन के समय आवंटित सीट पर रहीं, बाद में मध्य प्रदेश से राज्यसभा गईं।

मनोहर कांत ध्यानी (1996–2002) : उत्तराखंड बनने के बाद का बचा हुआ कार्यकाल पूरा किया, दोबारा मौका नहीं मिला।

भगत सिंह कोश्यारी (2008–2014) : कार्यकाल पूरा होने के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव लड़े और नैनीताल से सांसद बने।

तरुण विजय (2010–2016) : छह साल का कार्यकाल पूरा किया, दोबारा रिपीट नहीं किए गए।

अनिल बलूनी (2018–2024) : राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने पर 2024 में पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे।

नरेश बंसल (2020–2026): 2020 में निर्वाचित हुए। 25 नवंबर को कार्यकाल पूरा होगा।

डॉ. कल्पना सैनी (2022 से वर्तमान): 2022 में उच्च सदन पहुंचीं।

महेंद्र भट्ट (2024 से वर्तमान): 2024 में निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे।

भाजपा से कौन कब रहा राज्यसभा सांसद

सुषमा स्वराज(2000–2006) : राज्य गठन के समय आवंटित सीट पर रहीं, बाद में मध्य प्रदेश से राज्यसभा गईं।

मनोहर कांत ध्यानी (1996–2002) : उत्तराखंड बनने के बाद का बचा हुआ कार्यकाल पूरा किया, दोबारा मौका नहीं मिला।

भगत सिंह कोश्यारी (2008–2014) : कार्यकाल पूरा होने के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव लड़े और नैनीताल से सांसद बने।

तरुण विजय (2010–2016) : छह साल का कार्यकाल पूरा किया, दोबारा रिपीट नहीं किए गए।

अनिल बलूनी (2018–2024) : राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने पर 2024 में पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे।

नरेश बंसल (2020–2026): 2020 में निर्वाचित हुए। 25 नवंबर को कार्यकाल पूरा होगा।

डॉ. कल्पना सैनी (2022 से वर्तमान): 2022 में उच्च सदन पहुंचीं।

महेंद्र भट्ट (2024 से वर्तमान): 2024 में निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे।

हरिद्वार: अवैध संबंध रखने का दबाव बना रहा था गोपाल, पत्नी-बच्चों को छोड़ने से इनकार पर दी धमकी; फिर हत्या

अवैध संबंध में बढ़ते दबाव और धमकियों के बीच हरिद्वार में एक युवक की हत्या कर दी गई।
पुलिस ने मामले की जांच के बाद पति-पत्नी को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा किया है।

हरिद्वार नगर कोतवाली क्षेत्र में सर्वानंद घाट और दूधियाबंद बस्ती के पास हुई बिजनौर के गोपाल कुमार की हत्या का खुलासा करते हुए पुलिस और सीआईयू की टीम ने पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अवैध संबंध के बाद महिला पर गोपाल पति और बच्चों को छोड़कर अपने साथ चलने का दबाव बना रहा था। विरोध करने पर अश्लील वीडियो वायरल करने और जान से मारने की धमकी दे रहा था।

परेशान होकर महिला ने पति को पूरी बात बताई, जिसके बाद पति ने पत्नी और अपने भाई के साथ हत्या की साजिश रची। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया। फरार आरोपियों की तलाश में टीमें जुटी हैं। सोमवार को पुलिस कार्यालय सभागार में एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने प्रेस वार्ता कर हत्याकांड का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर की सुबह कोतवाली नगर क्षेत्र में दूधियाबंद बस्ती के पास जंगल में एक अज्ञात पुरुष का शव मिला था। शव के पास बिजनौर जाने वाली बस का टिकट मिला था, लेकिन पहचान से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं था।
आसपास के थानों और सीमावर्ती जनपदों में शव की फोटो और जानकारी भेजकर शिनाख्त के प्रयास शुरू किए। 20 सितंबर को हरिद्वार पहुंचे परिजनों ने शव की पहचान गोपाल कुमार (50) निवासी नई बस्ती, आबकारी चौकी के पास, बिजनौर यूपी के रूप में की थी। मृतक के बेटे आशु कुमार ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस-सीआईयू की टीमें गठित कर खुलासे में लगाई गई।
एसएसपी ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे व अन्य माध्यमों से खोजबीन करते हुए सोमवार को मोतीचूर रेलवे स्टेशन से दर्गो भारेरा बिजनौर निवासी आरोपी और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में दोनों ने हत्या करने की बात कबूली। बताया कि महिला के भाई के अलावा गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति के साथ मिलकर हत्या की थी। प्रेस वार्ता में एसपी क्राइम निशा यादव, सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी, सीओ सदर सुरेंद्र प्रसाद बलूनी मौजूद रहे।पति के बीमार होने पर गोपाल से बढ़ी थी नजदीकी

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि इसी वर्ष आरोपी के फेफड़ों में पानी भरने के कारण मेरठ के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। इसी दौरान गोपाल की उससे जान पहचान हुई। आरोप है कि गोपाल ने किसी तरह उसकी पत्नी का मोबाइल नंबर हासिल कर उससे बातचीत शुरू कर दी। बातचीत बढ़ने के बाद दोनों के बीच संबंध बन गए। गोपाल महिला की आर्थिक मदद भी करने लगा था। बाद में गोपाल महिला पर अपना परिवार छोड़कर उसके साथ आने का दबाव बनाने लगा। महिला बच्चों से लगाव होने के कारण इसके लिए तैयार नहीं थी। रक्षाबंधन के दौरान महिला बिजनौर में गोपाल से मिलने पहुंची थी। इसी दौरान पति ने दोनों को पकड़ लिया। आरोप है कि गोपाल ने उसके पति के साथ मारपीट भी की थी, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।

साजिश कर हरिद्वार बुलाया, फिर मौत के घाट उतारा

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि गोपाल लगातार महिला को फोन कर अपने साथ चलने के लिए दबाव बना रहा था। आरोप है कि वह अश्लील वीडियो वायरल करने और जान से मारने की धमकी भी दे रहा था। परेशान होकर महिला ने अपने पति को पूरी बात बता दी। महिला ने पति को यह भी बताया कि गोपाल आपराधिक प्रवृत्ति का है और कई बार जेल जा चुका है। पुलिस के पास जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देता है। इसके बाद पति ने अपनी पत्नी व उसके भाई और गांव के एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर गोपाल को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

गांव के एक व्यक्ति को हत्या में साथ देने के लिए 50 हजार देने की बात तय हुई।साजिश के तहत 16 सितंबर को महिला ने गोपाल को मिलने के लिए हरिद्वार बुलाया। दूधियाबंद के पास रात में वह उसे गंगा घाट के पास ले गई। यहां गोपाल ने शराब पी और खाना खाया। इसके बाद जब वह गंगा घाट पर सो गया तो पहले से घात लगाकर बैठे पति और उसके साथियों ने चापड़ और छुरी से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी गोपाल का मोबाइल फोन और पर्स निकालकर गंगा में फेंककर मौके से फरार हो गए थे। घटना में इस्तेमाल लोहे का चापड़ बरामद कर लिया है।

 

देहरादून क्राइम: पत्नी को मारी गोली, फिर पुलिस को किया फोन; बोला-मैंने हत्या कर दी, वारदात के बाद पति फरार

देहरादून के क्लेमेनटाइन क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को गोली मार दी। गोली मारने के बाद पति फरार हो गया।

क्लेमेनटाउन थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। महिला का शव एक प्लॉट के अंदर बने कमरे से बरामद हुआ। पत्नी को गोली मारने के बाद पति ने खुद पुलिस को फोन किया और बताया कि मैंने हत्या कर दी है। घटना के बाद से उसका पति धीरज पंवार फरार है।

पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद एक प्लॉट के अंदर बने कमरे की जांच की। कमरे में काजल (26) पत्नी धीरज पंवार मृत अवस्था में मिली। पुलिस के मुताबिक महिला की मौत गोली लगने से हुई है। सूचना के बाद फील्ड यूनिट को भी मौके पर बुलाया गया और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए।

कई दिन से चल रहा था विवाद
पुलिस के अनुसार काजल अपने पति धीरज के साथ ईदगाह रोड, सुभाष नगर क्षेत्र में रह रही थी। उसके भाई अभिषेक का घर भी बगल में है। अभिषेक ने पुलिस को बताया कि उसकी बहन और जीजा के बीच कई दिनों से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बीच सोमवार सुबह गोली मारकर हत्या की घटना सामने आई।

मृतका मूल रूप से मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी थाना क्षेत्र के ग्राम मेघा शकरपुर की रहने वाली थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के बाद से फरार पति की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित की हैं। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

 

उत्तराखंड: अब राजाजी टाइगर रिजर्व में फुल डे सफारी की तैयारी, हर गेट से दो वाहनों को मिल सकेगी अनुमति

अब राजाजी टाइगर रिजर्व प्रबंधन मध्य प्रदेश की तर्ज पर फुल डे सफारी कराने की योजना को लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसमें हर गेट पर दो-दो वाहनों के माध्यम से फुल डे सफारी कराई जा सकेगी।

राजाजी टाइगर रिजर्व में फुल डे सफारी की तैयारी है। इसके प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में राजाजी टाइगर रिजर्व प्रबंधन जुटा है।प्रदेश में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बीते वर्षों में कई नए जोन भी खोले गए हैं। इसके अलावा अन्य विकल्पों को बढ़ाया गया है। अगर राजाजी टाइगर रिजर्व की बात की जाए तो यहां पर चीला, मोतीचूर, चिलावाली और रानीपुर गेट के माध्यम से सुबह और शाम दो शिफ्टों में तय वाहनों के माध्यम से सफारी की पर्यटक कर सकते हैं।यह दोनों शिफ्ट चार- चार घंटे की होती है। अब राजाजी टाइगर रिजर्व प्रबंधन मध्य प्रदेश की तर्ज पर फुल डे सफारी कराने की योजना को लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इसमें हर गेट पर दो-दो वाहनों के माध्यम से फुल डे सफारी कराई जा सकेगी। इसका शुल्क भी अधिक होगा। अधिकारियों के अनुसार राज्य में अभी तक कहीं पर भी फुल डे सफारी की व्यवस्था नहीं है।

पर्यटकों की संख्या बढ़ी

राज्य में सफारी में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2022-2023 में 658613, 2023-2024 में 717939 और 2024-2025 में 808324 पर्यटक पहुंचे।

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा टाइगर रिजर्व में फुल डे सफारी कराई जाती है। इसी तरह राजाजी टाइगर रिजर्व में सफारी शुरू करने की योजना है। यह सफारी सूर्याेदय से सूर्यास्त तक होगी। इसका प्रस्ताव तैयार कर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव के पास भेजा जाएगा। अगर अनुमति मिलती है और इसका शुल्क तय हो जाता है, इसके बाद जब अगला पर्यटन सीजन शुरू होगा, तो उसमें यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
-कोको रोसे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व

उत्तराखंड में बर्फबारी: धूप खिलते ही चमक उठीं चोटियां, बदरीनाथ-हेमकुंड की पहाड़ियों ने ओढ़ी बर्फ की सफेद चादर

बर्फ से ढकी चोटियों ने बदरीनाथ धाम का नजारा बदल दिया। आज धूप खिलते ही निखरा बर्फ से ढकी चोटियों का मनमोहक नजारा दिखा।

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने करवट ली है। बदरीनाथ धाम में कल बृहस्तपतिवार को हुई बारिश के बाद आज शुक्रवार सुबह मौसम साफ हुआ और चटख धूप खिली। धूप के बीच धाम की ऊंची पर्वत चोटियां बर्फ से ढकी नजर आईं। नीलकंठ, उर्वशी और माना पर्वत समेत आसपास की चोटियों पर बर्फ की सफेद चादर बिछी हुई है।

बर्फबारी के बाद बदरीनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में ठंड बढ़ गई है। धाम में तापमान करीब दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से सुबह और शाम कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है। हालांकि दिन में धूप निकलने से मौसम सुहावना बना हुआ है। बर्फ से ढकी चोटियों पर पड़ रही धूप का नजारा श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। बदरीनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालु प्राकृतिक सुंदरता को देखकर रोमांचित नजर आए।

उत्तरकाशी के बड़कोट में भी मौसम खुशनुमा बना हुआ है। यहां मौसम अनुकूल रहने के साथ चटख धूप खिली है। जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। मां यमुना के जयकारों के बीच श्रद्धालु पैदल मार्ग पर आते-जाते नजर आ रहे हैं। यात्रा से जुड़े लोगों के चेहरे भी खिले हुए हैं। श्रद्धालु खुशनुमा मौसम के बीच पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता का नजदीक से आनंद ले रहे हैं।

बृहस्पतिवार को मौसम खराब होने पर हेमकुंड साहिब और बदरीनाथ धाम के ऊंचाई वाले स्थानों पर जमकर बर्फबारी हुई। हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट आने से कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। बृहस्पतिवार को सुबह से मौसम बदला रहा। कुछ देर बाद हेमकुंड साहिब परिसर और बदरीनाथ धाम की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी शुरू हो गई। इससे हेमकुंड साहिब क्षेत्र में ठंड बहुत बढ़ गई है। वहीं बदरीनाथ धाम में भी सुबह शाम ठंड तेज हो गई है।  होने के संकेत मिलने लगे हैं।

रुद्रप्रयाग जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में व निचले क्षेत्रों में हो रही बारिश के बाद तापमान में गिरावट आई है। केदारनाथ, मद्महेश्वर व तुंगनाथ में ठंड बढ़ गई है। रुद्रप्रयाग जिले में सुबह से हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट आ गई है। जहां अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 21 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं केदारनाथ में अधिकतम तापमान 3 डिग्री से 5 डिग्री तक रहा और न्यूनतम तापमान माइनस 2 डिग्री से 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। केदारनाथ में बारिश हो रही है और बर्फबारी की संभावना भी बनी हुई है।

सीएम धामी का पीएम को पत्र: खास अंदाज में दी जन्मदिन की शुभकामनाएं,’राष्ट्र-शिल्पी मोदीजी, जीवेम शरदः शतम्’

सीएम धामी ने लिखा कि भारतीय समाज की विकास यात्रा में पीढ़ियों का यह कालखंड एक बड़े बदलाव का साक्षी रहा है। बेबी बूमर्स की वरिष्ठ पीढ़ी के संघर्षों को मोदी जी ने देश की शक्ति में बदला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक भावपूर्ण पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि श्रीमद्भगवद्गीता का उद्घोष है कि कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन-अर्थात् फल की आसक्ति से मुक्त होकर लोक-कल्याण के लिए समर्पित होना ही वास्तविक तपस्या है। महात्मा बुद्ध, आचार्य चाणक्य, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और बाबासाहेब आंबेडकर से लेकर आज के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, प्रत्येक ने वैश्विक पटल पर भारत के नवनिर्माण में अहम भूमिका निभाई है। एक साधारण पृष्ठभूमि और चाय की केतली के संघर्ष से देश के शीर्ष नेतृत्व तक की उनकी यात्रा प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुझे भली-भांति स्मरण है, जब संगठन ने मुझे पहली बार उत्तराखंड के मुख्य सेवक का दायित्व सौंपा था। नई दिल्ली स्थित पीएमओ में जब मैं पहली भेंट के लिए पहुंचा, तो मन में उत्साह के साथ संकोच और थोड़ा डर भी था। परंतु मोदी जी ने अत्यंत आत्मीयता से मुझे अपने पास बिठाया। उनका हृदय बरगद की भांति विशाल और सागर की तरह गहरा है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान करुणा और कर्तव्य का भाव है।

भारतीय समाज की विकास यात्रा में पीढ़ियों का यह कालखंड एक बड़े बदलाव का साक्षी रहा है। बेबी बूमर्स की वरिष्ठ पीढ़ी के संघर्षों को मोदी जी ने देश की शक्ति में बदला। सैनिक कल्याण, वृद्धावस्था पेंशन और आयुष्मान कार्ड जैसी समावेशी नीतियों से उन्होंने प्रगतिशील जेन जी और आधुनिक जेन गामा के जीवन को नई दिशा दी है। कौशल भारत, स्टार्ट-अप इंडिया और मुद्रा योजना ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाया है। परीक्षा पे चर्चा, युवा संवाद और पीएम श्री स्कूलों के माध्यम से वे युवाओं के सच्चे मार्गदर्शक बने हैं। पुरानी पीढ़ी के त्याग की नींव पर आज की डिजिटल युवा पीढ़ी वैश्विक पटल पर उत्कर्ष का आगाज कर रही है।

रामायण में भगवान राम ने सुग्रीव को संरक्षण देकर किष्किंधा के शिखर पर प्रतिष्ठित किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने समकालीन राजनीति में उसी तर्ज पर मुझ जैसे साधारण कार्यकर्ताओं को संबल प्रदान किया है। ऋग्वेद के सूक्त समानी व आकूति : समाना हृदयानि व: अर्थात् हमारे संकल्प एक हों और हमारे हृदय एक हों की भावना को यदि आधुनिक भारत में किसी ने चरितार्थ किया है, तो वह प्रधानमंत्री मोदी हैं। वह किसी व्यक्ति विशेष, वर्ग विशेष जाति-धर्म या क्षेत्र विशेष के नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र के एक सजग अभिभावक हैं। मातृशक्ति के प्रति उनके सम्मान का जीवंत प्रमाण नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पूर्ण बहुमत से पारित होना है। इसके साथ ही लखपति दीदी, उज्ज्वला योजना और जनधन खातों ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता दी है। किसान सम्मान निधि के जरिए अन्नदाताओं को आर्थिक संबल मिला है। 

उत्तराखंड: नदियों में खनिज निकासी फिलहाल सीमित,मानसून के बाद खनन राजस्व का नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी

मानसून के दौरान नदियों में खनिज निकासी सीमित रहने के बाद अब विभाग की नजर बरसात के बाद की गतिविधियों पर है। पिछले वित्तीय वर्ष में तय लक्ष्य से कहीं अधिक राजस्व मिलने के बाद खनन विभाग नए रिकॉर्ड की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।

मानसून के चलते प्रदेश की नदियों में खनिज निकासी फिलहाल सीमित है। बरसात के बाद अब खनन गतिविधियां दोबारा शुरू कर राजस्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। उत्तराखंड ने खनन से वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक 1217 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था।

प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 950 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, इसके मुकाबले 1217 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। कोषागार में 1130 करोड़ रुपये, जिला खनिज फाउंडेशन न्यास में 80 करोड़ रुपये और राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एसएमईटी) के तहत 7 करोड़ रुपये शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभाग ने 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1,041 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था। खनन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में खनन राजस्व में पिछले 4.5 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2012-13 में जहां खनन विभाग से करीब 110 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा 1217 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

खनन व्यवस्था में बदलाव और तकनीक पर जोर

सरकार ने खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नीतिगत और तकनीकी स्तर पर कई बदलाव किए गए हैं। खनिज नीति और नियमावली में किए गए सरलीकरण के साथ वैध खनन को बढ़ावा देने और अवैध खनन, परिवहन व भंडारण पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है। खनन प्रक्रिया की निगरानी के लिए माइनिंग डिजिटल ट्रांसफार्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम लागू किया गया। इसके तहत देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में 45 ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं। इनमें वाहनों की निगरानी के लिए एएनपीआर कैमरा और आरएफआईडी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

खनन सुधारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना

खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों से उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में एमटीटीएसएस और और ई-खन्ना सिक्योरिटी पेपर परियोजनाओं को स्कॉच अवार्ड (गोल्ड) से सम्मानित किया गया। खान मंत्रालय की माइनर मिनरल रिफॉर्म श्रेणी में उत्तराखंड को ‘सी’ श्रेणी के राज्यों में दूसरा स्थान मिला। इसके तहत राज्य को 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली। स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में प्रदर्शन के आधार पर भी 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।

उत्तराखंड: सीएम हेल्पलाइन को हेल्पलेस बना रहे अफसर, समाधान की रफ्तार गिरी, अगस्त में आईं सबसे ज्यादा शिकायतें

अगस्त में शिकायतों का आंकड़ा पिछले तीन वर्षों के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, लेकिन उनके समाधान की रफ्तार बेहद धीमी रही। 25 हजार से अधिक शिकायतों के बीच महज 3,171 मामलों का पूर्ण निस्तारण हो सका, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पिछले तीन वर्षों में इस साल अगस्त में सीएम हेल्पलाइन 1905 पर शिकायतों का रिकॉर्ड बन गया है। वहीं, इनके निपटारे की दर में तेजी से गिरावट आ रही है। मार्च में जो निपटारे की दर 69 प्रतिशत थी, वह अगस्त में 12 प्रतिशत पर पहुंच गई। अधिकारी ही इस पर समाधान करने में सुस्त नजर आ रहे हैं।

इस साल अगस्त में रिकॉर्ड 25,432 जन-शिकायतें दर्ज की गईं। अगस्त 2024 में 14,980, अगस्त 2025 में 16,311 शिकायतें आई थीं। जुलाई के मुकाबले भी अगस्त में शिकायतों में 13.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई लेकिन उसी अनुपात में मामलों का निपटारा नहीं हो सका। पिछले तीन महीनों से शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ी है, जबकि निपटारे की दर लगातार घट रही है। मार्च में समाधान की दर 69 प्रतिशत, अप्रैल में 63 प्रतिशत, मई में 52 प्रतिशत, जून में 42 प्रतिशत, जुलाई में 26 प्रतिशत और अगस्त में केवल 12 प्रतिशत दर्ज की गई। 25,432 में से केवल 3,171 शिकायतों का पूर्ण निस्तारण हो पाया है।

शिकायतों में देहरादून, निस्तारण में चंपावत सबसे आगे

अगस्त में दर्ज कुल शिकायतों में मैदानी जिलों का हिस्सा सबसे बड़ा रहा। देहरादून में सर्वाधिक 7,469 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें मुख्यत: शहरी विकास, गृह व ऊर्जा विभाग से जुड़ी समस्याएं हैं। 5,214 शिकायतों के साथ ऊधमसिंह नगर दूसरे, 4,417 शिकायतों के साथ हरिद्वार तीसरे और 2,894 शिकायतों के साथ नैनीताल जिला चौथे स्थान पर रहा। निस्तारण की बात करें तो 80.92 प्रतिशत के साथ चंपावत पहले, 79.32 प्रतिशत के साथ अल्मोड़ा दूसरे स्थान पर रहा। नैनीताल (60.20 प्रतिशत) और उत्तरकाशी (62.09 प्रतिशत) निचले पायदान पर रहा।

180 दिनों से सिस्टम में अटकी पड़ीं शिकायतें

अधिकारियों की सुस्ती का आलम यह है कि तमाम शिकायतें ऐसी हैं जो अलग-अलग स्तर पर अटकी हैं। करीब छह माह से उनका कोई समाधान ही नहीं किया गया। इनमें सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की 470 शिकायतें लंबित हैं, जिनमें 457 शिकायतें एल-3 स्तर पर अटकी हैं। राजस्व विभाग की 286, नगर निगम की 262, आयुर्वेद विश्वविद्यालय की 222, संस्कृति विभाग की 211, वन विभाग की 199, लोक निर्माण विभाग की 159, नगर पालिकाओं की 157, प्राथमिक शिक्षा की 110, पंचायती राज विभाग की 93 शिकायतें शामिल हैं।

शिकायतों पर दिखा मानसून की मार का असर

अगस्त में बिजली, पानी, सड़क और बारिश की मार सीधे सीएम हेल्पलाइन के आंकड़ों में झलकी है। बिजली कटौती के 678 मामले, अधिक बिल के 556 मामले और पेयजल संकट के 549 मामले प्रमुख रहे। देहरादून और हरिद्वार में पानी-बिजली से जुड़े मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई। सड़कों व गड्ढों से संबंधित कुल 1,432 शिकायतें आईं। इनमें से सर्वाधिक 339 मामले शहरी विकास और 328 मामले लोक निर्माण विभाग से जुड़े थे। देहरादून में 404, हरिद्वार में 284 सड़कों की बदहाली से लोग सबसे ज्यादा परेशान रहे।

उत्तराखंड: डोईवाला से मैदान में उतरने की तैयारी में कर्नल कोठियाल, बोले-सैन्य बहुल होने के कारण इस सीट को चुना

भाजपा नेता व पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल डोईवाला से मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सैन्य बहुल होने के कारण उन्होंने इस सीट को चुना है।

भाजपा नेता व पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.) ने आगामी विधानसभा चुनाव के रण में उतरने के लिए डोईवाला सीट को चुना है। सैन्य बहुल होने के उनकी इस सीट ज्यादा उम्मीदें हैं। हालांकि चुनाव के लिए अभी टिकट तय नहीं है लेकिन कोठियाल ने तैयारी तेज कर दी है।

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम पर साक्षात्कार में कर्नल कोठियाल ने राजनीतिक व सैनिकों के मुद्दों पर पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, भाजपा में बड़ा अच्छा सिस्टम है कि क्षमता और आवश्यकता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाती है। मुझे भी यह जताना है कि मैं राजनीतिक तरीके से जिम्मेदारी लेने के लिए इच्छुक हूं।

इसके लिए मुझे कहीं न कहीं से तैयारी करनी थी, तो मैंने डोईवाला विधानसभा क्षेत्र को चुना है। इस सीट पर फौजियों की अधिक संख्या है, यूथ फाउंडेशन से प्रशिक्षण लेकर यहां से 1450 युवा सेना में शामिल हुए हैं। मैंने तैयारी शुरू कर दी है, आगे पार्टी जैसा उचित समझेगी, उस पर काम करेंगे।

अग्निवीर योजना के बारे में भ्रांतियां फैलाई गई
बताया कि केदारनाथ पुनर्निर्माण योजना के दौरान कुछ अभिभावक उनके पास आकर बोलने लगे कि उनके बच्चों को फौज में भर्ती करा दीजिए। तब उन्होंने यूथ फाउंडेशन का गठन कर सेना में भर्ती के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज 15 से 16 हजार युवा सेना में हैं। कहा कि अग्निवीर योजना भारतीय सेना का फैसला है, जो सोच-समझकर लिया गया है लेकिन कुछ लोगों ने इस योजना के बारे में भ्रांतियां फैलाई हैं।

इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की और चार साल बाद सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को रोजगार दिलाने का अनुरोध किया। कोठियाल का कहना है यदि प्रशिक्षण और अच्छा अनुभव लेकर आ रहे अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों या अन्य दूसरे विभागों में नौकरी का अवसर दिया जाए तो इससे भ्रांतियां खत्म होंगी। सरकार ने इनके रोजगार के लिए अग्निवीर रोजगार सेल गठित कर दिया है।

देहरादून: नए रिकॉर्ड की ओर चारधाम यात्रा, 15 सितंबर से शुरू होने जा रहा है दूसरा चरण; चुनौतियां लेंगी परीक्षा

15 सितंबर से यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है, लेकिन यात्रा मार्गों पर जगह-जगह भूस्खलन जोन की चुनौतियां भी परीक्षा लेंगी। यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 50 लाख पार कर चुका है। सरकार को उम्मीद है कि यह संख्या 60 लाख तक पहुंच सकती है।

चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ रही है। 15 सितंबर से यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है, लेकिन यात्रा मार्गों पर जगह-जगह भूस्खलन जोन की चुनौतियां भी परीक्षा लेंगी। यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 50 लाख पार कर चुका है। सरकार को उम्मीद है कि यह संख्या 60 लाख तक पहुंच सकती है।

19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ। 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद यात्रा पूर्ण रूप से संचालित हुई। इस बार मानसून सीजन में श्रद्धालुओं की संख्या में भले ही कमी आई, लेकिन यात्रा निर्बाध रूप से चलती रही।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 10 सितंबर तक चारधाम यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख पार हो चुकी है। यात्रा नवंबर तक चलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख तक पहुंच सकती है। बीते वर्ष पूरे यात्रा काल में 51 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।
यात्रा मार्ग पर कई भूस्खलन जोन
ऋषिकेश से बदरीनाथ, केदारनाथ मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन जोन हैं। बदरीनाथ मार्ग पर कमेड़ा, पर्थाटीप, मैठाणा, बांजपुर, विरही, भनेरपानी, हाथी पहाड़ में भूस्खलन की बड़ी चुनौती है। हालांकि यात्रा के दूसरे चरण के लिए सरकार ने मलबा हटाने के साथ अस्थायी काम शुरू कर दिए। लेकिन दीर्घकालीन काम में समय लगेगा। 15 सितंबर के बाद यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आएगी। ऐसे में भूस्खलन क्षेत्रों में यातायात जाम की समस्या एक चुनौती रहेगी।
चारधाम यात्रा मार्गों में पूरी तरह से यातायात के लिए बहाल रहेगा। जिन स्थानों पर भूस्खलन हो रहा है, वहां पर काम शुरू किया गया। यात्रियों को किसी तरह की परेशान न हो, यह सरकार की प्राथमिकता है।
-पंकज कुमार पांडे, सचिव, लोक निर्माण विभाग