अंकिता हत्याकांड: सुरेश राठौर की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश प्रभारी की ओर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के खिलाफ डालनवाला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें दोनों आरोपियों पर जानबूझकर सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो जारी कर उनकी छवि खराब करने व दंगे फैलाने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। वहीं हाईकोर्ट ने सुरेश राठौर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।

अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम उजागर करने के आरोपी भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ हरिद्वार और देहरादून जिले में दर्ज चार एपआईआर में से दो पर उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।

हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता हरिद्वार के धर्मेंद्र कुमार और यमकेश्वर की पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

मामले के अनुसार बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार के झबरेड़ा, बहादराबाद और देहरादून की नेहरू कॉलोनी, डालनवाला में यह कह कर एफआईआर दर्ज की गई थी कि आरोपितों ने भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम की छवि खराब करने के लिए फेसबुक सहित सोशल मीडिया पर वीडियो और ऑडियो वायरल किए जा रहे हैं।

Uttarakhand: ट्रैकिंग और पर्वतारोहण की एकीकृत नीति को दस दिनों में अंतिम रूप दें, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि प्रदेश में इको टूरिज्म की संभावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्पॉट चिह्नित कर विकसित किया जाए जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करे। चौरासी कुटिया के जीर्णाेद्धार का कार्य जल्द पूरा किया जाए।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इको टूरिज्म की उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में कहा कि ट्रैकिंग (लंबी पैदल यात्रा) और पर्वतारोहण के लिए एकीकृत नीति को दस दिनों में अंतिम रूप देकर शासन को उपलब्ध कराएं। इस नीति काे तैयार करते समय सभी हितधारकों के साथ वार्ता करें, जिससे व्यावहारिक समस्याओं से बचा जा सके।

सीएस ने कहा कि नई चोटियां खोले जाने के लिए पर्यावरण ऑडिट सहित अन्य सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी ली जाएं। इसके लिए एसओपी भी जारी की जाए। प्रदेश में इको टूरिज्म की संभावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्पॉट चिह्नित कर विकसित किया जाए जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करे। चौरासी कुटिया के जीर्णाेद्धार का कार्य जल्द पूरा किया जाए। इसके लिए कार्यदायी संस्था हर कार्य के लिए समय तय करे फिर लक्ष्य में तय समय सीमा में काम किया जाए।

जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू करें

मुख्य सचिव ने कहा कि इको टूरिज्म के लिए जबरखेत मॉडल को अन्य चिह्नित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किया जाए। इसके अलावा सभी डीएफओ को लक्ष्य दिया जाए कि वह अपने क्षेत्र में कैसे इको टूरिज्म को विकसित कर सकते हैं। अधिकारी 10 चिह्नित स्थान का प्लान एक माह में तैयार करके शासन को को भेजें। ईको टूरिज्म की उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक हर महीने की जाए। साथ ही प्रदेशभर में पर्यटन के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करें और प्रशिक्षण के बाद प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाए। प्रशिक्षण प्रमाणीकरण के लिए पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी दी जाए।

यूटीडीबी की तरह ईटीडीबी को भी बजट मिल सकेगा

वन क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए एक तय व्यवस्था बनाई जाए। इसके संचालन की जिम्मेदारी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसका गठन ही इसी उद्देश्य से किया गया है। सीएस ने ईटीडीबी के लिए नया हैड खोले जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इससे यूटीडीबी की तरह ईटीडीबी को भी बजट दिया जा सकेगा। इको टूरिज्म साइट्स के इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड के माध्यम से संचालन के लिए जल्द ही एमओयू करने को भी कहा।

 

Uttarakhand: महंगे होटलों में शादी पर रोक, महिलाएं ज्यादा गहने नहीं पहनेंगी, उल्लंघन पर लगेगा एक लाख जुर्माना

फिजूलखर्ची रोकने के लिए जौनसार बावर के महंगे होटलों में विवाह नहीं करेंगे। बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया। महिलाओं के अत्यधिक गहने पहनने को भी प्रतिबंधित कर दिया गया।

शादी-विवाह व अन्य आयोजनों में फिजूलखर्ची को रोकने के लिए खत शिलगांव के पंचरा-भंजरा स्थित महासू देवता मंदिर में ग्रामीणों ने बैठक की। बैठक में महंगे होटलों, पार्क आदि में विवाह का आयोजन करने पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा महिलाओं के अत्यधिक गहने पहनने को भी प्रतिबंधित कर दिया गया।

खत स्याणा तुलसी राम शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न बैठक में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने पर चर्चा हुई। बैठक में सबकी सहमति से यह तय किया गया कि शादी-विवाह के सभी आयोजन गांव व घरों में ही संपन्न कराए जाएंगे। आयोजन विवाह स्थल, महंगे पार्क, होटल व फार्म आदि में संपन्न नहीं कराए जाएंगे। इसके अलावा महिलाओं को विवाह में तीन गहने पहनने की इजाजत दी गई है। डीजे, फास्ट फूड व बीयर पर भी आयोजनों में रोक लगाई गई है।

पहली शादी में न्यौते के तौर पर अधिकतम 100 रुपये दिए जाने और कन्यादान में अपनी इच्छा के अनुसार देने का निर्णय बैठक में लिया गया। बैठक में यह चेतावनी भी दी गई यदि कोई भी ग्रामीण फैसले को नहीं मानेगा तो उसपर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

Chamoli: स्पेन की जेमा अपनी पीठ पर ढो रहीं हिमालय का कचरा, 2023 में योग सीखने और पहाड़ घूमने थी आई

स्पेन की जेमा अपनी पीठ पर हिमालय का कचरा ढो रहीं हैं। वह वर्ष 2023 में योग सीखने व पहाड़ घूमने आईं थी, लेकिन यहां कूड़ा देखकर हैरान रह गई।

स्पेन में ग्राफिक डिजाइनर जेमा कोलेल पहाड़ घूमने के लिए उत्तराखंड आईं लेकिन जब यहां हिमालयी क्षेत्र में फैले कूड़े को देखा तो वह हैरान रह गईं। उसने उसी पल तय कर लिया कि हिमालय को न सिर्फ साफ करेंगी बल्कि इसके लिए लोगों को भी जागरूक करेंगी। दो साल से यहां रह रहीं जेमा हिमालय में फैलाए कचरे को एकत्रित कर अपनी पीठ पर ढोकर सड़क तक लाती हैं।

जेमा (30) स्पेन कोलेल में ग्राफिक डिजाइनर हैं। वर्ष 2023 में वह योग सीखने और पहाड़ घूमने के लिए उत्तराखंड आईं। ऋषिकेश में उन्होंने योग सीखा और फिर पहाड़ घूमने के लिए निकल पड़ीं। इसके लिए उन्होंने चमोली जिले के लोहाजंग निवासी मनोज राणा से संपर्क किया। वह पर्वतारोहण करवाते हैं।

जेमा पहाड़ों में आईं तो यहां छोटे से लेकर ऊंची चोटियों पर फैले कूड़े को देखकर हैरान रह गईं। इसके बाद उन्होंने यहां की सफाई की ठानी और हिमालयी क्षेत्र में सफाई का अभियान शुरू कर दिया। मनोज राणा इस अभियान में उनके साथ आ गए। अभी तक वे उच्च हिमालय से 300 किलो से अधिक प्लास्टिक कचरा पीठ पर ढोकर नीचे ला चुकी हैं। लोहाजंग में रहकर जेमा स्थानीय लोगों को भी हिमालय को साफ रखने के लिए जागरूक कर रही हैं। 

संभले नहीं तो तस्वीरों में ही रह जाएगा हिमालय

– जेमा कहती हैं कि हिमालय में इस तरह का कूड़ा फेंकना बहुत खतरनाक हो सकता है। यदि इसके प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ी हिमालय को वास्तविक रूप में नहीं देख पाएगी। वह बस तस्वीरों तक ही सीमित रह जाएगा।

स्पेन में साथ लेकर चलते हैं अपना कूड़ा

– जेमा कहती हैं कि उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है लेकिन लोग जिसे देवभूमि मानते हैं उसे ही गंदा कैसे कर सकते हैं। स्पेन में हम अपना कूड़ा अपने साथ लेकर चलते हैं लेकिन यहां लोगों में यह आदत नहीं दिखी। यदि हम अपना कूड़ा अपने साथ ले आएं तो सभी पहाड़ खुद ही साफ हो जाएंगे। हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि जहां एक बार सफाई करते हैं वहां दोबारा जाने पर फिर कूड़ा फैला मिल जाता है।

स्कूलों में चला रहे जागरूकता कार्यक्रम

– जेमा और मनोज राणा ने एक ग्रुप बनाया है जिसे नाम दिया है द 108 पीक क्लीन माउंटेन सेफ माउंटेन। इस ग्रुप के माध्यम से वे पर्वतारोहण भी करवाते हैं। लोग इसमें वालंटियर के तौर पर जुड़कर उनके साथ सफाई में सहयोग भी करते हैं। साथ ही जेमा और मनोज स्कूलों में जाकर बच्चों को और गांवों में लोगों को भी हिमालय की सफाई और ग्लोबल वार्मिंग के बारे में जागरूक कर रहे हैं। वह अभी तक लोहाजंग की आसपास की चोटियों के साथ ही लार्ड कर्जन ट्रैक, ऑली व वेदनी बुग्याल, चंद्रशिला, धर्मावली आदि जगह पर सफाई अभियान चला चुकी हैं। इसके अलावा 7120 मीटर ऊंचाई पर स्थित त्रिशूल, 7242 मीटर पर स्थित मुकुट पर्वत को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं।

मसूरी चल रहा है विंटरलाइन कार्निवाल, आमजन के साथ पर्यटक भी ले रहे हैं इसका आनंद

मसूरी विंटरलाइन कार्निवाल में गांधी चौक, अटल उद्यान और लंढौर चौक पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें लोक कलाकारों ने दर्शकों का मनोरंजन किया। नगर पालिका टाउनहाल में रात्रि कार्यक्रम हुए। देहरादून से मसूरी तक साइकिल रैली आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसका उद्देश्य खेल को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था।

मसूरी विंटरलाइन कार्निवाल के दूसरे दिन गुरुवार को गांधी चौक, अटल उद्यान और लंढौर चौक पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोक कलाकारों के साथ पर्यटकों ने भी आयोजन का आनंद लिया। रात्रि कार्यक्रम नगर पालिका टाउनहाल में आयोजित किए गए, जो देर रात तक चले।

लंढौर चौक पर लोक गायक अर्जुन सेमल्याट ग्रुप ने गीतों और लोकनृत्य से दर्शकों का मनोरंजन किया। गांधी चौक पर लोक गायिका कविता रावत ग्रुप, जय बद्रीनाथ आजीविका समूह और लोकगायक बिक्रम कपरवाण ग्रुप ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोहा।

लोकगायिका कुसुम नेगी ग्रुप ने पांडव नृत्य और हारूल, रासौ-तांदी की शानदार प्रस्तुतियां दीं। गढ़वाल सभा के कलाकारों ने भस्मासुर नृत्य नाटिका का शानदार मंचन किया।

हालांकि, शहीद स्थल पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में विलंब हुआ, क्योंकि धरना दे रहे स्ट्रीट वैंडर्स ने मंच खाली करने से मना कर दिया। इसके कारण कार्यक्रम गांधी चौक पर आयोजित किए गए। विंटरलाइन कार्निवाल के तहत नगर पालिका टाउनहाल में मिजाज बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी। इसके बाद उत्तराखंड के लोकप्रिय गायक रूहान भारद्वाज और करिश्मा शाह का नाइट कार्यक्रम हुआ।

देहरादून से मसूरी तक साइकिल रैली

विंटरलाइन कार्निवाल के तहत देहरादून से मसूरी तक साइकिल रैली आयोजित की गई। इस रैली में सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिन्होंने देहरादून से मसूरी तक लगभग 35 किलोमीटर की दूरी तय की।

यह आयोजन न केवल खेल को बढ़ावा देने के लिए था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक प्रयास था। रैली का उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना और साइकिलिंग को एक लोकप्रिय गतिविधि बनाना है। इस अवसर पर आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार वितरित किए।

SIR: उत्तराखंड के 90 हजार मतदाताओं को लेना होगा बड़ा फैसला, दो जगह वोट होने पर बढ़ेगी मुसीबत

एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है।

उत्तराखंड के करीब 90 हजार मतदाताओं को चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने से पहले ही अहम फैसला लेना होगा। उन्हें बतौर सर्विस मतदाता या अपने गांव की वोटर लिस्ट में से कोई एक चुनना होगा। वहीं, सामान्य मतदाता, जिनके वोट शहरों के साथ ही गांव की मतदाता सूची में भी हैं, उन्हें भी कोई एक वोट कटवाना होगा।

प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से फिलहाल प्री एसआईआर गतिविधियों के तहत मतदाताओं की मैपिंग का काम किया जा रहा है। एक जनवरी 2025 को जारी हुई मतदाताओं की जानकारी के हिसाब से प्रदेश में 89,812 सर्विस मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 87,103 पुरुष और 2709 महिला मतदाता थे। ये ऐसे मतदाता हैं जो कि सेना या अर्द्ध सैनिक बलों में सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी की सर्विस के दौरान ही बतौर सर्विस मतदाता वोट बने हुए हैं।

अब एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने इन सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है। अगर कोई सर्विस मतदाता बनकर गांव या शहर का अपना वोट हटवाना चाहता तो उसे चुनाव आयोग की वेबसाइट http://voters.eci.gov.inमें फॉर्म-7 भरना होगा।

अगर कोई गांव-शहर में अपना वोट चाहता है और सर्विस मतदाता की सूची से नाम हटाना चाहता है तो उसे सर्विस वोटर पोर्टलhttp://svp.eci.gov.in के माध्यम से अपना सर्विस वोट हटवाना होगा। जनवरी में जारी हुई मतदाता सूची के हिसाब से प्रदेश में कुल 84,29,459 मतदाता हैं, जिनमें 43,64,667 पुरुष मतदाता, 40,64,488 महिला मतदाता और 304 थर्ड जेंडर शामिल हैं।

प्रधान चुनाव, निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट अलग
कई मतदाताओं को ये भी कंफ्यूजन है कि गांव से नाम कटने पर वह प्रधान या नगर पालिका चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, एसआईआर का काम केवल चुनाव आयोग की मतदाता सूची के लिए हो रहा है, जिससे लोकसभा या विधानसभा के चुनाव में वोट डाला जाता है। पंचायत या नगर निकायों के चुनाव की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग संभालता है, जिसकी वोटर लिस्ट अलग बनती है। उसका इससे कोई लेना देना नहीं है।

दो जगह वोट होने पर फंस सकते हैं कानूनी पचड़े में
अगर आपका वोट दो जगह होगा तो आप कानूनी पचड़े में भी फंस सकते हैं। लिहाजा, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि गांव या शहर में से किसी एक ही मतदाता सूची मे अपना नाम रखें। किसी एक जगह से हटवा लें। एसआईआर के दौरान पकड़ में आने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें सजा का भी प्रावधान है।

जितने भी सर्विस मतदाता हैं, वह किसी एक जगह ही अपना वोट सुनिश्चित कर लें। नियम के हिसाब से किसी का भी वोट दो जगह नहीं हो सकता है। हटवाने के बाद जरूरत पड़ने पर नए सिरे से कभी भी वोट बनवाया जा सकता है।
-डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड

Uttarakhand News: प्रदेश में रिजॉर्ट की तर्ज पर बनेंगे नेचुरोपैथी अस्पताल, वेलनेस टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

Uttarakhand: प्रदेश में रिजॉर्ट की तर्ज पर बनेंगे नेचुरोपैथी अस्पताल, वेलनेस टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा,जमीन चिह्नित

– चंपावत, पिथौरागढ़ में जमीन चिह्नित, बागेश्वर जिले में चल रही प्रक्रिया

– आयुष विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

प्रदेश के वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पहली बार नेचुरोपैथी अस्पताल (प्राकृतिक चिकित्सा) खोलने की तैयारी है। ये अस्पताल रिजॉर्ट की तर्ज पर बनाए जाएंगे। जहां पर बिना दवाइयों के प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से इलाज किया जाएगा। आयुष विभाग ने चंपावत व पिथौरागढ़ जिले में जमीन चयनित कर ली है। जबकि बागेश्वर में जमीन तलाशी जा रही है।

उत्तराखंड में आयुष व वेलनेस से पर्यटन को जोड़ने के लिए पहले चरण में प्रदेश के तीन जिलों में नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने की तैयारी की रही है। पिथौरागढ़ के बलवा कोट व चंपावत के कोली ढेक में जमीन का चयन किया गया। इसके अलावा बागेश्वर जिले में जमीन चयनित करने की प्रक्रिया चल रही है। आयुष विभाग की ओर से नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने का प्रस्ताव बना रहा है। जल्द ही केंद्र सरकार को वित्तीय सहायता के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। आयुष मिशन के तहत केंद्र सरकार नेचुरोपैथी अस्पताल के लिए वित्तीय सहायता देगी

दवाइयों की जगह प्राकृतिक तरीके से होगा इलाज

नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धति में जड़ी-बूटियों, आहार, व्यायाम, मालिश, जल चिकित्सा, योग और एक्यूपंक्चर का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति से बीमारी के मूल कारण को ठीक करना व समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है न कि सिर्फ लक्षणों का इलाज करना है। नेचुरोपैथी में आहार और पोषण, जल चिकित्सा, मृदा चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, योग और व्यायाम चिकित्सा, जड़ी-बूटी, एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर, मालिश चिकित्सा, उपवास, मन शरीर चिकित्सा की सुविधा रहेगी।

आयुष ग्राम योजना को केंद्र सरकार ने किया बंद

केंद्र सरकार ने बीते वर्ष आयुष मिशन के तहत आयुष ग्राम योजना को शुरू किया था। इस योजना के तहत उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में एक-एक आयुष ग्राम बनाए जाने थे, लेकिन अब केंद्र सरकार ने आयुष ग्राम योजना बंद कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना कि आयुष ग्राम की जगह केंद्र सरकार नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने के लिए वित्तीय सहायता देगी। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

पहले चरण में तीन जिलों में नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। ये अस्पताल रिजॉर्ट की तर्ज पर स्थापित होंगे। जहां पर प्राकृतिक चिकित्सा के साथ ठहरने की बेहतर सुविधा मिलेगी। इससे प्रदेश में वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। -दीपेंद्र चौधरी, सचिव आयुष

उत्तरांचल जन विकास समिति की पहल: नैनबाग में सीयूईटी काउंसलिंग और योग अभ्यास

नैनबाग (टिहरी  गढ़वाल)। उत्तरांचल जन विकास समिति  (देहरादून)द्वारा 13 तारीख को नैनबाग स्थित सरदार सिंह राजकीय इंटर कॉलेज और

एसएसआर मॉडल इंटर कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक शैक्षिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा के प्रति जागरूक करना तथा योग के माध्यम से मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य का महत्व समझाना रहा।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सीयूईटी परीक्षा की महत्ता, पात्रता, परीक्षा पैटर्न, विषय चयन, तैयारी की रणनीति और करियर अवसरों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा की गई काउंसलिंग से विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान हुआ और उन्हें उच्च शिक्षा के नए अवसरों की जानकारी मिली।

सुबह सत्र में विद्यार्थियों को योग अभ्यास भी कराया गया, जिससे उनमें एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। योग के लाभों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि नियमित योग अभ्यास से परीक्षा तनाव कम होता है और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

इस कार्यक्रम का सफल आयोजन चेतना उपाध्याय (उत्तरांचल जन विकास समिति की CEO) के नेतृत्व में किया गया, जिनके समर्पण और मेहनत से यह पहल संभव हो सकी। उनके साथ वालंटियर्स अनीश, अंकिता, पीयूष, लावांशी और आवृति ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यालय के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल सीयूईटी परीक्षा के प्रति जागरूक किया, बल्कि योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी दी। यह आयोजन छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध हुआ।

Uttarakhand: सख्ती…163 प्रमोटर्स को रेरा का नोटिस, प्रोजेक्ट आरडब्ल्यूए को सौंपे, बढ़े धोखाधड़ी के मामले

प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद आरडब्ल्यूए को न साैंपने वाले 163 प्रमोटर्स को रेरा ने नोटिस दिया है।तीन माह में मालिकाना हक देना होता है पर मनमानी से लगातार धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं।

प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद नियमानुसार आरडब्ल्यूए के नाम न करने वाले प्रमोटर्स के खिलाफ अब रेरा में मुकदमा चलाया जाएगा। रेरा के सदस्य नरेश मठपाल की पीठ ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए ऐसे 163 प्रमोटर्स को नोटिस भेजा है।

रेरा अधिनियम के तहत प्रमोटर्स जब आवासीय प्रोजेक्ट पूरा कर लेते हैं तो उन्हें पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के तीन महीने के भीतर इसका मालिकाना हक आरडब्ल्यूए को देना होता है लेकिन अधिकतर प्रमोटर्स ऐसा नहीं करते हैं। इससे धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा हो जाता है और लोग इसमें रहने लगते हैं। एक अधिकृत आरडब्ल्यूए भी बन जाती है।

इसके बावजूद मालिकाना हक नहीं दिया जाता। इससे कई बार प्रमोटर्स या अन्य जालसाज लोग इन संपत्तियों को दूसरे लोगों को भी बेच देते हैं जिसका आरडब्ल्यूए को पता भी नहीं चलता। इसके बाद जब पता चलता है तो उसके खिलाफ शिकायत लेकर रेरा के पास पहुंचते हैं। फिर रेरा संबंधित प्रमोटर्स के खिलाफ कार्रवाई करता है।

यही कारण है कि अब रेरा ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया है। फिलहाल प्रदेश में 643 प्रोजेक्ट चल रहे हैं जो कि रेरा में पंजीकृत हैं। इनमें से 163 ऐसे हैं जिनका काम पूरा हो चुका है लेकिन इन्होंने नियमानुसार मालिकाना हक एसोसिएशन को नहीं दिया है। अब इनके खिलाफ वाद दायर किया जाना है। इसके पहले इन सभी को नोटिस जारी किए गए हैं।

पहले से आसान हुई व्यवस्था पर नियमों की अनदेखी जारी

पहले मालिकाना हक सौंपने में प्रमोटर्स को भारी भरकम स्टांप ड्यूटी चुकानी होती थी। हालांकि, रेरा के प्रयासों से इसका भी हल निकाल लिया गया है। शासन ने अब इसके लिए एकमुश्त राशि 10 हजार रुपये शुल्क के रूप में तय किया है। इतना कम शुल्क होने के बाद भी कोई प्रमोटर्स नियमों का पालन नहीं कर रहा है।

UK: हाईकोर्ट ने दो हजार आउटसोर्स कर्मियों की सेवा समाप्त करने संबंधी मामले में सुनवाई की, कहा- सेवा जारी रहेगी

हाईकोर्ट ने वन विभाग के करीब दो हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने संबंधी विभागीय निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वन विभाग के करीब दो हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने संबंधी विभागीय निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि विभाग कर्मचारियों से सशर्त नियमित सेवा लेता रहे।

वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में यह मामला सुना गया। याचिका में दिनेश चौहान सहित लगभग तीन सौ आउटसोर्स कर्मचारियों ने कहा था कि वन विभाग ने उनका वेतन जिस मद से दिया जाता था उसमें बदलाव होने की वजह से उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। साथ ही विभाग उनकी नियमित सेवाएं भी नहीं ले रहा था।

राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि इन कर्मचारियों के वेतन के लिए किसी वित्तीय मद का प्रावधान नहीं है। इस कारण सेवाएं जारी रखना संभव नहीं है। फरवरी 2023 में न्यायालय ने इस निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने कर्मचारियों के हक में फैसला देते हुए उनकी सेवाएं बनाए रखने के निर्देश जारी किए। इस निर्णय का लाभ वन विभाग में आउटसोर्स के रूप में कार्यरत लगभग दो हजार कर्मचारियों को मिलेगा।