Doon-Delhi Expressway: दिल्ली से दून ढाई घंटे में पहुंचे सीएम धामी, कहा-ये कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली दौरे के बाद सड़क मार्ग से लौटते हुए दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे का अनुभव साझा किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने दिल्ली से देहरादून का सफर महज ढाई घंटे में पूरा किया, जो पहले की तुलना में बेहद कम है।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में जिस गति से सड़क और परिवहन सुविधाओं का विकास हो रहा है, यह उसी का परिणाम है।

अब उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को कम कर रहा है, बल्कि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।

इससे चारधाम यात्रा समेत राज्य के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच और अधिक सुगम होगी। मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत की नई रफ्तार बताते हुए कहा कि इस तरह की परियोजनाएं उत्तराखंड के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

 

Heatwave: पहली बार हुई लू के चलते देहरादून में स्कूलों की छुट्टी, आमतौर पर बारिश-सर्दी में किया जाता है अवकाश

देहरादून जिले में आज, सोमवार को अत्यधिक गर्मी और लू और गर्मी का अलर्ट जारी किया गया है। इसके चलते डीएम सविन बंसल ने सभी आंगनवाड़ी केंद्र, शासकीय, गैर-शासकीय और निजी स्कूलों (कक्षा 01 से 12 तक) में एक दिन की छुट्टी का आदेश जारी किया है। आमतौर पर बारिश और सर्दियों के सीजन में बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर  छुट्टी का फैसला लिया जाता है।

राज्य बनने के ढाई दशक के इतिहास में अगर कहीं मौसम का सबसे ज्यादा असर पड़ा तो वह देहरादून पर रहा। कभी छोटी सी बदली बरसने का सिलसिला अब खत्म हो गया। नौबत यहां तक आ गई कि गर्म प्रदेशों की तरह यहां भी प्रशासन को बच्चों की छुट्टी का निर्णय लेना पड़ा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने रविवार दोपहर को ही सोमवार को स्कूलों की छुट्टी के आदेश जारी कर दिए। ताकि, बच्चों की लू से सुरक्षा की जा सके।

दरअसल, यहां बारिश और सर्दी के मौसम में तो अक्सर स्कूलों की छुट्टी के आदेश जारी होते हैं लेकिन गर्मियों में ऐसा आदेश पहली बार हुआ है। हालांकि, कुछ स्कूलों ने अपने स्तर से इससे पहले ऐसे प्रयास किए हैं कि उन्होंने ग्रीष्मकालीन अवकाश की संख्या बढ़ा दी। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मौमस का पूर्वानुमान है कि सोमवार को दिन भर गर्मी रहेगी। लू भी चल सकती हैं। ऐसे में जिले के एक से 12वीं कक्षा तक के सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी के आदेश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि स्कूलों को पहले से निर्देश भी दिए गए हैं कि वहां पर पर्याप्त ठंडे पानी की व्यवस्था होनी आवश्यक है। इसके साथ ही शहर के विभिन्न जगहों पर लगे प्याऊ और वाटर कूलर आदि को भी नियमित चेक करने के निर्देश प्रशासन के अधिकारियों को दिए गए हैं।

 

UK Board Result: परिणाम घोषित,10वीं का परीक्षाफल इस साल 92.10% , इंटरमीडिएट का रहा 85.11%, ये बने टॉपर

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की मौजूदगी में रामनगर में आज उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित किए गए।

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम आज घोषित कर दिए गए हैं। उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं का परीक्षा फल इस साल 92.10% रहा, जबकि इंटरमीडिएट का परीक्षाफल 85.11% रहा। हाईस्कूल में रामनगर के एमपी इंटर कॉलेज के अक्षत गोपाल ने 500 में से 491 अंक लाकर प्रदेश में टॉप किया। वहीं इंटरमीडिएट में सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज बागेश्वर की गीतका पंत और भानजुराम इंटर कॉलेज यूएस नगर के सुशीला मेहंदीरत्ता ने संयुक्त रूप से 500 में से 490 अंक लाकर प्रदेश में टॉप किया।

शनिवार को शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने परीक्षा परिणाम घोषित किए। कुल सम्मिलित परीक्षार्थियों में 92.10% छात्र पास हुए हैं। बालिकाओं का पास प्रतिशत 96.07 फीसदी रहा, जबकि बालकों का 88.03 फीसदी।

कुल 1,12,266 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 1,08,983 सम्मिलित हुए और 1,00,373 उत्तीर्ण हुए। टॉप थ्री में देहरादून जिले के एक लड़के ने अपनी जगह बनाई।

 

Uttarakhand: प्रदेश के पांच नगर निकायों में चुनाव का हो रहा है इंतजार, परिसीमन समेत सभी औपचारिकताएं पूरी

उत्तराखंड के पांच नगर निकायों में चुनाव का इंतजार हो रहा है।  परिसीमन व ओबीसी आरक्षण के सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

पांच नगर निकायों में चुनाव का इंतजार है। शहरी विकास विभाग के स्तर से परिसीमन समेत सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। निर्वाचन आयोग को अब इस पर फैसला लेना है। हालांकि इनमें से दो निकायों का मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। नरेंद्रनगर नगर पालिका का चुनाव वर्ष 2003 में होना था। परिसीमन से पहले सरकार ने एक गांव को पहले तो इसमें शामिल किया और फिर हटा दिया था।

लिहाजा, समय से परिसीमन न होने के कारण यहां पिछले साल चुनाव नहीं हो पाए थे। अब परिसीमन व ओबीसी आरक्षण के सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसी प्रकार, वर्ष 2018 में किच्छा नगर पालिका के विस्तार के समय सिरौली कलां, बंडिया, देवरिया और आजाद नगर को इसमें शामिल किया गया था। सिरौली कलां में तीन वार्ड (18, 19, 20) और वार्ड 17 के कुछ हिस्से बनाए गए थे। बाद में, 2024 में एक नोटिफिकेशन के जरिए सिरौली कलां को पालिका से अलग कर फिर से रेवेन्यू विलेज बनाने का प्रयास किया गया।

सिरौली कलां को सरकार ने अलग से नगर पालिका बना दिया
स्थानीय निवासियों (मोहम्मद यासीन और अन्य) ने इसके विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि पिछले छह वर्षों से यह हिस्सा नगर पालिका का है और यहां लगभग पांच करोड़ रुपये के विकास कार्य हो चुके हैं। मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सिरौली कलां को पालिका से बाहर करने वाले तीन सितंबर 2024 के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। हालांकि सिरौली कलां को सरकार ने अलग से नगर पालिका बना दिया है।

अभी दोनों का चुनाव भी लटका हुआ है। इसी प्रकार, सरकार ने ऊधमसिंह नगर में गढ़ी नेगी और चंपावत में पाटी नगर पंचायत बनाए थे। इनकी भी परिसीमन आदि की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब राज्य निर्वाचन आयोग को इनका चुनाव तय करना है। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार का कहना है कि दो निकायों किच्छा-सिरौली कलां का मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

 

Uttarakhand: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आज ऋषिकेश दौरा, एम्स परिसर तक क्षेत्र तीन सुरक्षा जोन में विभाजित

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के प्रस्तावित दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। पुलिस महकमे ने पूरी तरह से अलर्ट जारी कर दिया है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रस्तावित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दौरे को लेकर एम्स ऋषिकेश में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लेकर एम्स परिसर तक पूरे क्षेत्र को तीन विशेष सुरक्षा जोन में विभाजित किया गया है।

पहला जोन जौलीग्रांट एयरपोर्ट, दूसरा जोन एम्स हेलीपैड और तीसरा जोन मुख्य कार्यक्रम स्थल को बनाया गया है। तीनों जोन की सुरक्षा की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है।

सीओ नीरज सेमवाल ने बताया कि दौरे के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखते हुए चेकिंग अभियान भी तेज कर दिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो।

 

Uttarakhand: इस महीने राज्य में दस बार आ चुका भूकंप, तीन जिलों में डाेली धरती, वैज्ञानिकों बोले-सजगता जरूरी

उत्तराखंड में इस महीने दस बार भूकंप आज चुका है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक बताते हैं कि राज्य भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है, ऐसे में सजगता जरूरी है।

इस महीने राज्य में 10 बार भूकंप आया है। जो भूकंप आएं हैं, उनकी तीव्रता कम रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह के कम तीव्रता के भूकंप आते रहे हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इस महीने सबसे पहले 11 अप्रैल को पौड़ी गढ़वाल में रिक्टर स्केल पर 3.3 और 3.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसके तीन दिन बाद ही 14 अप्रैल पिथौरागढ़ की धरती डोली और यहां पर 3.4 तीव्रता का भूकंप आया।

दो दिन बाद भी फिर 16 को पिथौरागढ़ में 2.4 तीव्रता का भूकंप आया। 19 को बागेश्वर में 10.32 से 11.31 के बीच एक नहीं बल्कि कुछ तीन बार धरती में हलचल हुई। इस अवधि में 2.8, 2.6 और 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। 20 को बागेश्वर में रिक्टर स्केल पर 2.5 और पौड़ी गढ़वाल में 3.0 तीव्रता का भूकंप आया। 21 अप्रैल को बागेश्वर जिले में एक बार फिर धरती में हलचल हुई, इस बार रिक्टर स्केल पर 2.6 तीव्रता का भूकंप आया है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ.विनीत गहलोत बताते हैं कि राज्य भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है, ऐसे में सजगता जरूरी है। रही बात भूकंप आने की तो इस तरह के छोटे भूकंप आते रहे हैं, इसमें कोई पैर्टन अभी नहीं दिखाई देता है। इसी संस्थान के वैज्ञानिक डॉ.नरेश बताते हैं कि पूर्व में भी इस तरह के छोटे भूकंप आए हैं।

 

सीएम धामी हुए नाराज: अफसरों ने जबरन बंद कीं 22 हजार शिकायतें, आंकड़ा देख हुए गुस्सा; अफसरों को दी ये चेतावनी

देवभूमि उत्तराखंड में अफसरों की लापरवाही पर मुख्यमंत्री धामी गुस्सा हो गए। दरअसल, अफसरों ने 22 हजार शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम ने कहा कि जिस अफसर ने जनता की शिकायत जबरन बंद की, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

उत्तराखंड के अफसरों ने जनता की 22,246 शिकायतें जबरन बंद कर दीं। सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने ये आंकड़ा आया तो वे नाराज हो गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर किसी अफसर ने शिकायत को जबरन बंद किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कहा कि जिलाधिकारी, विभागाध्यक्ष या संबंधित सचिव की संस्तुति के बिना किसी भी स्तर पर शिकायतों को जबरन बंद करने की कार्रवाई न की जाए।
शुक्रवार को सचिवालय में सीएम धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन केवल एक दूरभाष संख्या नहीं बल्कि जनता की अपेक्षाओं और विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम है। हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता की पूर्ण संतुष्टि सुनिश्चित होने तक किया जाए।

देहरादून में 6,084 शिकायतें शहरी विकास और 2,980 पेयजल विभाग से जुड़ी हैं। ऊधम सिंह नगर में राजस्व और खनन से जुड़ी शिकायतें सर्वाधिक हैं। हरिद्वार में खाद्य आपूर्ति और पुलिस विभाग से संबंधित शिकायतें सबसे अधिक है।

सीएम ने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी स्तर पर हर सप्ताह और सचिव स्तर पर प्रत्येक माह में कम से कम दो बार शिकायतों की समीक्षा की जाए। कहा कि हेल्पलाइन की सफलता का वास्तविक आकलन तभी संभव है जब शिकायतकर्ता यह अनुभव करें कि सरकार ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध समाधान प्रदान किया है।

सीएम ने सभी की सराहना की
सीएम ने अधिकतम शिकायतों का निस्तारण करने वाले अधिकारियों से फोन पर बात की। इनमें यूपीसीएल के उत्तरकाशी में तैनात अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं ने 99.09%, पौड़ी में अभिनव रावत ने 98.34%, ऋषिकेश के पूर्ति निरीक्षक सुनील देवली ने 98.30%, एडीओ विकासनगर दीपक थापली ने 98.23% और एसएचओ पटेलनगर विनोद गुसाईं ने 97.41% समाधान किया है। सीएम ने सभी की सराहना की।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक ने 2043 शिकायतें बंद कीं
राज्य में कुल 1,19,077 शिकायतों में से 22,246 शिकायतों (लगभग 18.68%) को अनुचित रूप से बंद कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, विभाग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए गंभीर शिकायतों को भी दूसरी श्रेणियों में बदल रहे हैं।
जल संस्थान के अफसरों ने पानी न आने की 861 शिकायतों को जबरन बंद कर दिया। सिलिंडर रिफिल और राशन कार्ड की मांग को शिकायतों के बजाए सिर्फ डिमांड मानकर छोड़ दिया। बिजली के अत्यधिक बिल और खराब मीटरों की समस्या को भी तकनीकी उलझनों में फंसा दिया।

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके सिंह के पास पेयजल संबंधी 2,074 शिकायतें थीं, जिनमें से उन्होंने 2043 (98.5 प्रतिशत) को बिना ठोस समाधान के जबरन बंद कर दिया। पर्यटन विकास अधिकारी ललित मोहन तिवारी ने 328 में से केवल 41 का निस्तारण किया।
6287 शिकायतें 180 दिनों से लंबित
साल 2021 से अब तक 6,287 शिकायतें ऐसी हैं जो 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। राजस्व विभाग (472), वन विभाग (445) और लोक निर्माण विभाग (401) इस सूची में सबसे ऊपर हैं। कुछ शिकायतें तो साल 2021 से प्रक्रिया में ही अटकी हुई हैं।
अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तुलना में जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में लंबित शिकायतों में 107% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, प्रक्रिया में वाली शिकायतों में 2290% का उछाल आया है।

Uttarakhand: बढ़ेगी विधवा, दिव्यांग, तीलू रौतेली और बौना पेंशन, मंत्री ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

विभागीय मंत्री ने कहा, दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान को 700 से बढ़ाकर 1000 रुपये करने के लिए भी अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

प्रदेश में विधवा, दिव्यांग, तीलू रौतेली और बौना पेंशन बढ़ेगी। समाज कल्याण मंत्री खजानदास के मुताबिक विधवा और दिव्यांग पेंशन को 1500 से बढ़ाकर 1875 रुपये किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा बौना पेंशन व तीलू रौतेली पेंशन को 1200 से बढ़ाकर 1500 रुपये किए जाने का प्रस्ताव है।

समाज कल्याण मंत्री ने विधान सभा स्थित सभागार में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में विभागीय मंत्री ने कहा, दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान को 700 से बढ़ाकर 1000 रुपये करने के लिए भी अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रवृत्ति योजनाओं में किसी भी तरह की गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह ध्यान रखा जाए कि जरूरतमंद लाभार्थी छात्रवृत्ति योजनाओं से वंचित न रहे।

उन्होंने विभाग की संचालित अनुदान योजनाओं समीक्षा करते हुए कहा, छात्रवृत्ति योजनाओं से संबंधित सत्यापन के तरीके को और सुदृढ़ बनाया जाए। राजकीय औद्योगिक संस्थानों में नए ट्रेड शुरू किए जाएं और इनमें अनुभवी शिक्षकों, प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाए।

मंत्री ने डॉ. बीआर अंबेडकर अनुसूचित जाति छात्रावास की समीक्षा करते हुए कहा, अगले तीन महीने के भीतर बालिका इंटर कॉलेज मसूरी के छात्रावास भवन का पुनर्निर्माण कार्य पूरा करते हुए इसी साल सितंबर से इसका संचालन शुरू किया जाए। पेंशन एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं की आय सीमा 4000 से बढ़ाकर 6000 रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए। अंतरजातीय विवाह में सामान्य जाति की विधवा एवं एससी-एसटी परिवारों को दिए जाने वाली शासकीय सहायता की समय सीमा वित्तीय वर्ष न रखते हुए 365 दिन (डेट टू डेट) की अवधि किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में विभागीय मंत्री ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के तहत संचालित आदर्श ग्राम योजना की समीक्षा में कहा, इस तरह की योजनाओं को विभाग बढ़ावा दे। जिससे जनकल्याण का प्रयास पूरा हो सके। मंत्री ने राष्ट्रीय वयो श्री योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को प्रदान किए जाने वाले मुफ्त सहायक उपकरणों जैसे छड़ी, व्हील चेयर, श्रवण यंत्र, चश्मा आदि का प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए। दिव्यांग कल्याण योजना के तहत कार्यों पर मंत्री ने निर्देश दिए कि 13 जिलों के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया जाए। बैठक में सचिव श्रीधर बाबू, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र, निदेशक संदीप तिवारी, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया आदि मौजूद रहे।

Doon-Delhi Expressway: वाहनों की गिनती के लिए गठित होगी डाटा विश्लेषण टीम, आकलन के बाद बनेगी यातायात रणनीति

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गिनती के लिए डाटा विश्लेषण टीम गठित होगी। वाहनों की संख्या के आकलन के बाद यातायात रणनीति बनाई जाएगी। टोल बैरियर पर होने वाली गिनती को भी टीम शामिल करेगी।

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यातायात पुलिस ने अगली चुनौतियों पर पार पाने के लिए रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जल्द ही एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों की गिनती शुरू की जाएगी। इसमें टोल बैरियर के डाटा को भी शामिल किया जाएगा।

सामान्य दिनों और फिर सप्ताहांत (वीकेंड) में आने वाले वाहनों की संख्या पता करने के बाद ही देहरादून शहर के लिए एक विशेष यातायात प्लान तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में लगने वाले जाम से बचने की कोशिश की जा सकेगी। वाहनों की गिनती के लिए यातायात पुलिस एक विशेष डाटा विश्लेषण टीम का गठन करने जा रही है। यह टीम एक्सप्रेसवे के मुहाने पर वाहनों की हर घंटे गिनती करेगी। इसमें पीक आवर के समय को भी शामिल किया जाएगा। रात और दिन के आधार पर वाहनों का डाटा इकट्ठा किया जाएगा।

प्रत्येक घंटे आने वाले वाहनों का डाटा नोट करते हुए यह टीम संबंधित कंट्रोल रूम और डायवर्जन प्वाइंट पर तैनात अधिकारियों को सूचित करेगी। इससे समय-समय पर यातायात के दबाव को कम करने में मदद मिल सकेगी। एसपी ट्रैफिक लोकजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल एक सप्ताह तक टीम वाहनों का डाटा इकट्ठा करेगी। यह टीम टोल बैरियर के संपर्क में भी रहेगी। इसके बाद हर सप्ताह एक प्लान बनाया जाएगा ताकि शहर को जाम से बचाया जा सके।

एसपी ट्रैफिक के अनुसार वाहनों के प्रवाह के आधार पर ही भविष्य में एक रणनीति बनाई जा सकती है। भारी और हल्के वाहनों का अलग-अलग डाटा इसमें इकट्ठा किया जाएगा। भारी वाहनों के लिए जो समय सीमा शहर में बनी हुई है उसमें भी बदलाव इसी डाटा के आधार पर किया जा सकता है।

ड्रोन के माध्यम से भी की जाएगी निगरानी

एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों की निगरानी ड्रोन के माध्यम से भी की जाएगी। इसके माध्यम से यातायात का लाइव फीड लेकर कंट्रोल रूम को सूचित किया जाएगा। ताकि समय रहते एक यातायात प्लान तत्काल बनाया जा सके। इस प्लान को विभिन्न माध्यमों से प्रसारित किया जाएगा। इसमें यातायात रूट, पार्किंग, डायवर्जन स्थल की जानकारी सोशल मीडिया, एफएम और एलईडी सूचना बोर्ड के माध्यम से प्रसारित की जाएगी।

Dehradun–Delhi Expressway: सबसे अधिक चर्चा में रहा वन्यजीवों के दृष्टिगत बना अंडरपास, जानिए क्या है खूबियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का शुभारंभ किया। इस दौरान वन्यजीवों के दृष्टिगत बना अंडरपास फोकस में रहा।

213 किमी देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस वे तैयार हुआ है, इसमें सबसे अधिक चर्चा वन्यजीवों के दृष्टिगत बने अंडरपास को लेकर भी हुई। कैसे जैव विविधता का ख्याल रखते हुए विकास योजना तैयार की जा सकती है, इस परियोजना के जरिए संदेश भी दिया गया है।

राज्य में 70% से अधिक वन भूमि है। ऐसे में विकास योजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण होता है, साथ ही योजनाओं के लिए पेड़ भी कटते हैं, लेकिन एक्सप्रेस वे पर 12 किमी अंडरपास बनाया गया। इसके निर्माण से वन्यजीवों का आवागमन सुगम हुआ।

एलिवेटेड सड़क बनाने के लिए पेड़ कम कटें इसको लेकर योजना को नदी के तल के बीच में रखा गया। इससे 45 हजार की जगह केवल 11,160 वृक्ष ही कटे। ऐसे में राज्य में प्रकृति संरक्षण करते हुए विकास कार्य किया जा सकता है, उसका मॉडल पेश किया है। परियोजना में वन्यजीवों के लिए बने अंडरपास और उससे हो रहे आवागमन को लेकर काफी चर्चा हुई है।

 

योजना की खूबी

213 किमी एक्सप्रेस की लंबाई

93 अंडर पास का निर्माण हुआ है

9 बड़े और 43 छोटे पुल बनाए गए

10 वन्यजीव व अंडरपास बने

गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की योजना

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस वे को गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की भी योजना है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार गोरखपुर-शामली नया प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है। जिसमें इस एक्सप्रेस वे को शामली में जोड़ा जाएगा। इसके बाद लोगों को पूर्वांचल जाने का विकल्प मिल सकेगा। इसके अलावा दून- दिल्ली एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से भी जुड़ेगा। इसके लिए सहरानपुर बाईपास के पास 50 किमी लंबाई का स्पर(मार्ग) बन रहा है, इसका 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ऐसे में लोगों को हरिद्वार जाने के लिए भी एक और विकल्प मिल जाएगा।