सीएम धामी का पीएम को पत्र: खास अंदाज में दी जन्मदिन की शुभकामनाएं,’राष्ट्र-शिल्पी मोदीजी, जीवेम शरदः शतम्’

सीएम धामी ने लिखा कि भारतीय समाज की विकास यात्रा में पीढ़ियों का यह कालखंड एक बड़े बदलाव का साक्षी रहा है। बेबी बूमर्स की वरिष्ठ पीढ़ी के संघर्षों को मोदी जी ने देश की शक्ति में बदला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक भावपूर्ण पत्र लिखा। उन्होंने लिखा कि श्रीमद्भगवद्गीता का उद्घोष है कि कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन-अर्थात् फल की आसक्ति से मुक्त होकर लोक-कल्याण के लिए समर्पित होना ही वास्तविक तपस्या है। महात्मा बुद्ध, आचार्य चाणक्य, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और बाबासाहेब आंबेडकर से लेकर आज के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, प्रत्येक ने वैश्विक पटल पर भारत के नवनिर्माण में अहम भूमिका निभाई है। एक साधारण पृष्ठभूमि और चाय की केतली के संघर्ष से देश के शीर्ष नेतृत्व तक की उनकी यात्रा प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुझे भली-भांति स्मरण है, जब संगठन ने मुझे पहली बार उत्तराखंड के मुख्य सेवक का दायित्व सौंपा था। नई दिल्ली स्थित पीएमओ में जब मैं पहली भेंट के लिए पहुंचा, तो मन में उत्साह के साथ संकोच और थोड़ा डर भी था। परंतु मोदी जी ने अत्यंत आत्मीयता से मुझे अपने पास बिठाया। उनका हृदय बरगद की भांति विशाल और सागर की तरह गहरा है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान करुणा और कर्तव्य का भाव है।

भारतीय समाज की विकास यात्रा में पीढ़ियों का यह कालखंड एक बड़े बदलाव का साक्षी रहा है। बेबी बूमर्स की वरिष्ठ पीढ़ी के संघर्षों को मोदी जी ने देश की शक्ति में बदला। सैनिक कल्याण, वृद्धावस्था पेंशन और आयुष्मान कार्ड जैसी समावेशी नीतियों से उन्होंने प्रगतिशील जेन जी और आधुनिक जेन गामा के जीवन को नई दिशा दी है। कौशल भारत, स्टार्ट-अप इंडिया और मुद्रा योजना ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाया है। परीक्षा पे चर्चा, युवा संवाद और पीएम श्री स्कूलों के माध्यम से वे युवाओं के सच्चे मार्गदर्शक बने हैं। पुरानी पीढ़ी के त्याग की नींव पर आज की डिजिटल युवा पीढ़ी वैश्विक पटल पर उत्कर्ष का आगाज कर रही है।

रामायण में भगवान राम ने सुग्रीव को संरक्षण देकर किष्किंधा के शिखर पर प्रतिष्ठित किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने समकालीन राजनीति में उसी तर्ज पर मुझ जैसे साधारण कार्यकर्ताओं को संबल प्रदान किया है। ऋग्वेद के सूक्त समानी व आकूति : समाना हृदयानि व: अर्थात् हमारे संकल्प एक हों और हमारे हृदय एक हों की भावना को यदि आधुनिक भारत में किसी ने चरितार्थ किया है, तो वह प्रधानमंत्री मोदी हैं। वह किसी व्यक्ति विशेष, वर्ग विशेष जाति-धर्म या क्षेत्र विशेष के नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र के एक सजग अभिभावक हैं। मातृशक्ति के प्रति उनके सम्मान का जीवंत प्रमाण नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पूर्ण बहुमत से पारित होना है। इसके साथ ही लखपति दीदी, उज्ज्वला योजना और जनधन खातों ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता दी है। किसान सम्मान निधि के जरिए अन्नदाताओं को आर्थिक संबल मिला है। 

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