उत्तराखंड: सीएम हेल्पलाइन को हेल्पलेस बना रहे अफसर, समाधान की रफ्तार गिरी, अगस्त में आईं सबसे ज्यादा शिकायतें

अगस्त में शिकायतों का आंकड़ा पिछले तीन वर्षों के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, लेकिन उनके समाधान की रफ्तार बेहद धीमी रही। 25 हजार से अधिक शिकायतों के बीच महज 3,171 मामलों का पूर्ण निस्तारण हो सका, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पिछले तीन वर्षों में इस साल अगस्त में सीएम हेल्पलाइन 1905 पर शिकायतों का रिकॉर्ड बन गया है। वहीं, इनके निपटारे की दर में तेजी से गिरावट आ रही है। मार्च में जो निपटारे की दर 69 प्रतिशत थी, वह अगस्त में 12 प्रतिशत पर पहुंच गई। अधिकारी ही इस पर समाधान करने में सुस्त नजर आ रहे हैं।

इस साल अगस्त में रिकॉर्ड 25,432 जन-शिकायतें दर्ज की गईं। अगस्त 2024 में 14,980, अगस्त 2025 में 16,311 शिकायतें आई थीं। जुलाई के मुकाबले भी अगस्त में शिकायतों में 13.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई लेकिन उसी अनुपात में मामलों का निपटारा नहीं हो सका। पिछले तीन महीनों से शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ी है, जबकि निपटारे की दर लगातार घट रही है। मार्च में समाधान की दर 69 प्रतिशत, अप्रैल में 63 प्रतिशत, मई में 52 प्रतिशत, जून में 42 प्रतिशत, जुलाई में 26 प्रतिशत और अगस्त में केवल 12 प्रतिशत दर्ज की गई। 25,432 में से केवल 3,171 शिकायतों का पूर्ण निस्तारण हो पाया है।

शिकायतों में देहरादून, निस्तारण में चंपावत सबसे आगे

अगस्त में दर्ज कुल शिकायतों में मैदानी जिलों का हिस्सा सबसे बड़ा रहा। देहरादून में सर्वाधिक 7,469 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें मुख्यत: शहरी विकास, गृह व ऊर्जा विभाग से जुड़ी समस्याएं हैं। 5,214 शिकायतों के साथ ऊधमसिंह नगर दूसरे, 4,417 शिकायतों के साथ हरिद्वार तीसरे और 2,894 शिकायतों के साथ नैनीताल जिला चौथे स्थान पर रहा। निस्तारण की बात करें तो 80.92 प्रतिशत के साथ चंपावत पहले, 79.32 प्रतिशत के साथ अल्मोड़ा दूसरे स्थान पर रहा। नैनीताल (60.20 प्रतिशत) और उत्तरकाशी (62.09 प्रतिशत) निचले पायदान पर रहा।

180 दिनों से सिस्टम में अटकी पड़ीं शिकायतें

अधिकारियों की सुस्ती का आलम यह है कि तमाम शिकायतें ऐसी हैं जो अलग-अलग स्तर पर अटकी हैं। करीब छह माह से उनका कोई समाधान ही नहीं किया गया। इनमें सूचना एवं लोक संपर्क विभाग की 470 शिकायतें लंबित हैं, जिनमें 457 शिकायतें एल-3 स्तर पर अटकी हैं। राजस्व विभाग की 286, नगर निगम की 262, आयुर्वेद विश्वविद्यालय की 222, संस्कृति विभाग की 211, वन विभाग की 199, लोक निर्माण विभाग की 159, नगर पालिकाओं की 157, प्राथमिक शिक्षा की 110, पंचायती राज विभाग की 93 शिकायतें शामिल हैं।

शिकायतों पर दिखा मानसून की मार का असर

अगस्त में बिजली, पानी, सड़क और बारिश की मार सीधे सीएम हेल्पलाइन के आंकड़ों में झलकी है। बिजली कटौती के 678 मामले, अधिक बिल के 556 मामले और पेयजल संकट के 549 मामले प्रमुख रहे। देहरादून और हरिद्वार में पानी-बिजली से जुड़े मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई। सड़कों व गड्ढों से संबंधित कुल 1,432 शिकायतें आईं। इनमें से सर्वाधिक 339 मामले शहरी विकास और 328 मामले लोक निर्माण विभाग से जुड़े थे। देहरादून में 404, हरिद्वार में 284 सड़कों की बदहाली से लोग सबसे ज्यादा परेशान रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *