स्थायीकरण के नाम पर प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति को फिर लटका दिया गया है। जबकि विभाग में पहले ही प्रधानाध्यापकों के 93 और प्रधानाचार्यों के 90 फीसदी पद खाली हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से स्थायीकरण का प्रस्ताव मांगा है।
प्रदेश के राजकीय हाईस्कूलों के प्रधानाध्यापकों का पांच साल बाद भी स्थायीकरण नहीं हो पाया है। जिससे उनके प्रमोशन लटक गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से उनके स्थायीकरण का प्रस्ताव मांगा है। शिक्षा विभाग में वर्ष 2018 के बाद से शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों की पदोन्नतियां लटकी हैं। यही वजह है कि कई शिक्षक 30 से 35 साल की सेवा के बाद एक ही पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
एलटी से प्रवक्ताओं के पदों पर नहीं हुई पदोन्नति
शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ता के 3500 पदों पर पदोन्नति लटकी है। शिक्षकों के मुताबिक वर्ष 2018 से पदोन्नति न होने से कई शिक्षक एक ही पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
विभाग में पदोन्नति को लेकर जो सूची तैयार की जा रही है, इससे सबसे अधिक नुकसान आरक्षित वर्ग के प्रवक्ताओं को होगा। जिनकी वरिष्ठता सैकड़ों क्रमांक पीछे हो जाएगी। मामले को लेकर संगठन शिक्षा सचिव से मिलेगा। -आरएल आर्य, प्रांतीय अध्यक्ष, एससी,एसटी, ओबीसी वैचारिक महासंघ
