हरिद्वार कुंभ :- कोरोना संकट के बीच हरिद्वार में आज कुंभ का दूसरा शाही स्नान, हर की पैड़ी पर ब्रह्म कुंड को अखाड़ों के लिए आरक्षित

कोरोना संकट के बीच हरिद्वार में आज कुंभ का दूसरा शाही स्नान है। शाही स्नान को लेकर पुलिस प्रशासन से लेकर अखाड़ों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है।सोमवती अमावस्या पर होने वाले कुंभ के पहले शाही स्नान के लिए निरंजनी अखाड़े का काफिला हरकी पैड़ी पहुंचा। सबसे पहले इसी अखाड़े ने शाही स्नान किया। इसके बाद श्री पंचदशानम् जूना अखाड़ा शाही स्नान के लिए पहुंचा। इसके साथ अग्नि, आह्वान, किन्नर अखाड़ा स्नान कर रहे हैं। आपको बता दें कि हरकी पैड़ी पर ब्रह्म कुंड को अखाड़ों के लिए आरक्षित रखा गया है। इस दौरान आम श्रद्धालु हरकी की पैड़ी पर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हें अन्य घाटों पर स्नान करना होगा। शाही स्नान सुबह साढ़े आठ बजे से शुरू होकर शाम साढ़े पांच बजे तक चलेगा। सभी तेरह अखाड़ों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।

नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह देव ने भी सोमवती अमावस्या पर शाही स्नान किया। वह निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के साथ शाही स्नान जुलूस में शामिल हुए। वह रथ पर सवार रहे और शाही स्नान किया।

शाही स्नान से एक दिन पहले उत्तराखंड में कोरोना के डरावने वाले आंकड़े सामने आए हैं. पिछले 24 घंटे में 1,333 संक्रमण के नए केस सामने आए जबकि 8 लोगों की मौत हो गई। वहीं देहरादून में 582, हरिद्वार में 386, नैनीताल में 122 कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। हर की पौड़ी पर रविवार को स्थलीय परीक्षण के दौरान नौ लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए।

ये है शाही स्नान का क्रम
1. सबसे पहले निरंजनी अखाड़ा अपने साथी आनंद के साथ अपनी छावनी से सुबह 8.30 बजे चलेगा। हर की पौड़ी पर पहुंचकर निरंजनी अखाड़े के संत शाही स्नान करेंगे।
2. उसके बाद 9 बजे का समय जूना अखाड़ा व अग्नि अखाड़ा, आवाहन और किन्नर अखाड़ा को स्नान के लिए दिया गया है। जूना अखाड़े से निकलकर हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड में स्नान करेगा।
3. उसके बाद महानिर्वाणी अपने साथी अटल के साथ कनखल से हर की पौड़ी की ओर रुख करेगा। इस अखाड़े के संत यहां से 9.30 बजे शाही स्नान के लिए निकलेंगे।
4. उसके बाद तीनों बैरागी अखाड़े श्री निर्मोही अणी, दिगंबर अणी, निर्वाणी अणी 10:30 बजे अपने हाथों से चलकर हर की पौड़ी पहुंचेंगे।
5. उसके बाद श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा 12:00 बजे अपने अखाड़े से हर की पौड़ी की ओर रुख करेगा।
6. श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा लगभग 2:30 बजे अपने अखाड़े से हर की पौड़ी की ओर रुख करेगा।
7. आखिर में श्री निर्मल अखाड़ा 3 बजे के करीब अपने अखाड़े से हर की पौड़ी की ओर रूख करेगा।

कुंभ मेला आईजी संजय गुंजयान ने बताया कि हम लोगों से लगातार कोविड नियमों के पालन का आग्रह कर रहे हैं लेकिन भारी भीड़ के कारण यह व्यावहारिक रूप से असंभव है। आईजी का कहना है कि भारी भीड़ को देखते हुए यहां घाट पर सामाजिक दूरी जैसे नियम का पालन करा पाना नामुमकिन है। अगर हमने ऐसा कराने की कोशिश की तो भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है इसलिए हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।

उत्तराखंड में स्कूल कुछ समय के लिए फिर हो सकते हैं बंद,रात्रिकालीन कर्फ्यू पर भी विचार

कोरोना संक्रमण बढ़ता देख सरकार एक बार फिर स्कूलों को कुछ समय के लिए बंद करने पर विचार कर रही है। शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है जो शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। उच्च पदस्थ सूत्रों ने इसकी पुष्टि की।  सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग ने बोर्ड कक्षाओं को छोड़ बाकी कक्षाएं कुछ समय को बंद करने की सिफारिश की है। विभाग का मानना है कि बोर्ड परीक्षा होने से 10वीं और 12 वीं कक्षाएं को जारी रखना छात्रहित में उचित होगा।  साथ ही उम्र में बड़े होने से बोर्ड के छात्रों से कोरोना के मानकों का पालन आसानी से कराया जा सकता है।

रात्रिकालीन कर्फ्यू पर भी सरकार गंभीर: सरकारी प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि कोरोना के चलते रात्रिकालीन कर्फ्यू पर भी विचार है। कुछ राज्यों ने कोरोना काबू करने को नाइट कर्फ्यू का प्रयोग लागू भी किया है। स्कूलों पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी पहलुओं का लगातार अध्ययन किया जा रहा है। जनहित में जो भी उचित होगा, सरकार वही निर्णय करेगी।उत्तराखंड में गुरुवार को कोरोना के 787 नए मरीज मिले और तीन संक्रमितों की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में कुल मरीजों की संख्या 105498 हो गई है। जबकि मरने वालों का आंकड़ा 1744 पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार गुरुवार को देहरादून में 239, हरिद्वार में 277, अल्मोड़ा में 16, बागेश्वर में छह, चमोली में दस, चम्पावत में एक, नैनीताल में 132, पौड़ी में आठ, पिथौरागढ़ में छह, रुद्रप्रयाग में 12, टिहरी में 39, यूएस नगर में 34 और उत्तरकाशी में सात नए संक्रमित मरीज मिले हैं।

टीकाकरण का रिकार्ड, एक ही दिन में एक लाख से अधिक लोगों का टीकाकरण
देहरादून। 
राज्य में कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ ही टीकाकरण कराने वालों की संख्या में अप्रत्याशित बढोत्तरी हो गई है। गुरुवार को टीकाकरण के पुराने सभी रिकार्ड ध्वस्त हो गए और रिकार्ड एक लाख से अधिक लोगों ने कोरोना से बचाव के लिए टीका लगाया। ंस्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को राज्य भर में बनाए गए 718 टीकाकरण बूथों पर कुल 107658 लोगों को टीके लगाए गए। 16 जनवरी को टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद से यह पहली बार है जब राज्य में एक ही दिन में एक लाख से अधिक लोगों को कोरोना के टीके लगाए गए हैं। इसके साथ ही राज्य में टीके की एक डोज लगाने वालों की संख्या एक लाख 66 हजार के पार पहुंच गई है। जबकि एक डोज लगाने वालों का आंकड़ा 10 लाख को पार कर गया है। राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ कुलदीप सिंह मार्तोलिया ने बताया कि टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाई जा रही है ताकि कम से कम समय में राज्य की ज्यादा से ज्यादा आबादी को कवर किया जा सके।

कुंभ:हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर 11 अप्रैल से ट्रेनों पर रहेगी रोक, जानें कब तक रहेगा प्रतिबंध, शाही स्नान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर 11 अप्रैल से ट्रेनें नहीं आएंगी। ट्रेनों को ज्वालापुर, रुड़की और लक्सर के रेलवे स्टेशन पर रोका जाएगा। 12 और 14 अप्रैल के शाही स्नान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। 14 अप्रैल तक यह व्यवस्था रहेगी। एसपी जीआरपी मंजूनाथ टीसी ने शुक्रवार को ब्रीफिंग में जवानों को बताया कि इस दौरान श्रद्धालुओं को ज्वालापुर रेलवे स्टेशन पर उतारा जाएगा। ज्वालापुर स्टेेशन फुल होने पर लक्सर और रुड़की में ट्रेनों को रोका जाएगा। यहां से शटल बसों से यात्रियों को लाया जाएगा पर वापसी हरिद्वार स्टेशन से होगी। जीआरपी ने मुरादाबाद मंडल में पत्र भेज अपील की है कि 11 से 14 अप्रैल के बीच देहरादून और ऋषिकेश जाने वाली ट्रेनों को ज्वालापुर में ही रोका जाए। लेकिन अभी तक इसकी अनुमति नहीं मिल पाई है।

बता दें कि कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में वृद्धि के बीच उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार को 12 राज्यों से आने वाले लोगों के लिए आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य कर दिया है। यह रिपोर्ट 72 घंटे से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने परामर्श जारी करते हुए कहा कि यह नियम महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान से सड़क, हवाई मार्ग और रेलगाड़ियों से आने वाले लोगों पर एक अप्रैल से लागू होगा। कुंभ मेले में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल तैयार कर लिया गया है। रजिस्ट्रेशन के लिए कुंभ की ऑफिसियल वेबसाइट www.haridwarkumbhmela2021.com ऑनलाइन आवेदन प्रकिया को पूरा करना होगा। अनुमति मिलने के बाद ही हरिद्वार की सीमा से एंट्री हो सकेगी।

हरिद्वार कुंभ 2021 के शाही स्नान
पहला शाही स्नान: 11 मार्च, दिन गुरुवार, महाशिवरात्रि के दिन हो चुका है।
दूसरा शाही स्नान: 12 अप्रैल, दिन सोमवार, सोमवती अमावस्या के दिन।
तीसरा मुख्य शाही स्नान: 14 अप्रैल, दिन बुधवार, मेष संक्रांति के दिन।
चौथा शाही स्नान: 27 अप्रैल, दिन मंगलवार, बैसाख पूर्णिमा के दिन।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कुंभ मेला क्षेत्र में कोविड जांच की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिये।

कुंभ मेले में कोरोनावायरस के मामले बढ़ने की आशंका को देखते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट लगातार गंभीर है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए प्रदेश सरकार को कुंभ मेला क्षेत्र में रोजाना 50 हजार कोविड जांचें कराने के दिशानिर्देश दिए। साथ ही संबंधित रिपोर्ट को नियमित रूप से सरकारी वेबसाइट पर भी अपलोड करने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने दो सप्ताह बाद की तिथि निर्धारित की है। बुधवार को क्वारंटाइन सेंटरों की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कुंभ मेला क्षेत्र में कोविड जांच की संख्या बढ़ाकर रोजाना 50 हजार करने के निर्देश दिये।

इसके अलावा हाईकोर्ट ने कुंभ मेला क्षेत्र अंतर्गत रोडवेज, बस स्टैंड समेत अन्य सार्वजनिक स्थलों पर जांच शिविर लगाने को कहा। साथ ही ऋषिकेश, बेस अस्पताल, गौरीशंकर हॉस्पिटल समेत बैरागी कैंप में सुविधाएं सुधारने और आवश्यक स्थानों पर स्वागत द्वार लगाने के भी निर्देश दिए।  हाईकोर्ट बीते दिनों भी मुख्यमंत्री की घोषणा के उलट कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कोरोना जांच की नेगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता का फैसला सुना चुका है।

राज्य सरकार ने भी कोर्ट में रखा पक्ष
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की तरफ से भी कुंभ मेले को लेकर पक्ष रखा गया। सरकार ने बताया कि स्वर्गाश्रम के छह घाटों के लिए 30 लाख और नीलकंठ स्वर्गाश्रम रोड के सौन्दर्यीकरण के लिए 3.35 करोड़ स्वीकृत कर दिए गए हैं। जिसमें प्राथमिक कार्य कुंभ से पूर्व शेष बाद में किए जाएंगे। इससे पूर्व याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि अभी भी कई घाटों में कार्य पूरा नहीं हुआ है। शौचालयों की हालत भी अच्छी नहीं है।

उत्तराखण्ड राज्य सरकार द्धारा कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता से कुंभ और चारधाम यात्रा पर पड़ सकता है असर

कोरेाना रेाकने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू किए सख्त प्रतिबंध का असर कुंभ मेल और चारधाम यात्रा पर असर पड़ सकता है। उत्तराखंड में प्रवेश के लिए 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता से श्रद्धालुओं की संख्या घटने की आशंका है। सरकार भी इस पहलू को लेकर चिंतित है, लेकिन जिस प्रकार कोरोना संक्रमण दोबारा सिर उठाने लगा है, उसमें सख्ती करना भी लाजिमी हो गया है। वर्तमान में कुंभ मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार आ रहे हैं।  सरकारी आंकड़ृों के अनुसार हर दिन एक लाख के करीब श्रद्धालु पवित्र गंगा में डुबकी लगाने आ रहे हैं।

11 मार्च को हुए शाही स्नान में करीब 35 लाख श्रद्धालु हरिद्वार आए थे। पर, अब एक अप्रैल से आरटीपीसीआर टेस्ट की बाध्यता लागू होने जा रही है। जिन 12 राज्यों के श्रद्धालुओं, पर्यटकों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उन्हीं में से कुंभ और चारधाम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग आते हैं। दिल्ली, यूपी, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के श्रद्धालुओं को उत्तराखंड में प्रवाह सबसे ज्यादा रहता है। न केवल कुंभ बल्कि चार धाम यात्रा और मानसून के दौरान कांवड़ यात्रा में भी इन राज्यों से लोग उत्तराखंड में उमड़ पड़ते हैं।

कुंभ तो अभी चल ही रहा है। मई के महीने से चारधाम यात्रा भी शुरू होने जा रही है। मई के दूसरे पखवाड़े में केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख तय हो चुकी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरटीपीसीआर टेस्ट की अनिवार्यता की शर्त से लोग हिचकेंगे। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी भी है। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति प्रवेश कर जाता है तो औरों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है।

इन राज्यों पर सख्ती: दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तमिलनाड़ु, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान

यात्री घटे तो पर्यटन-ट्रांसपोर्ट कारोबार को लगेगा झटका
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा सीजन को पर्यटन और ट्रांसपोर्ट कारोबार के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले साल कोरोना लॉकडाउन के कारण यह सेक्टर करीब करीब चौपट ही हो गया था। अब इस सेक्टर में थोड़ी रौनक लौटी है। अब डर है कि कहीं कोरोना ने दोबारा सिर उठा लिया तो फिर से मुश्किलों का वही दौर शुरू हो सकता है।

‘कुछ राज्यों में कोरेाना संक्रमण दोबारा बढ़ रहा है। इस संक्रमण का दायरा सीमित रखने के लिए ऐहतियात बरतना जरूरी है। कुंभ स्नान के लिए पूरे देश भर से श्रद्धालु हरिद्वार आ रहे हैं। ऐसे में लोगों को कोरोना के संक्रमण बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जाने जरूरी है। इसीलिए आज एडवाइजरी जारी की गई है। मेरी अपील है कि कोरेाना से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोग स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों का पालन करें। सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के मानक को कड़ाई से पालन किया जाए।
सुबोध उनियाल, काबीना मंत्री/सरकारी प्रवक्ता

आज ब्राह्मण समाज उत्थान परिषद के तत्वावधान में महात्मा खुशीराम सार्वजनिक पुस्तकालय में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया।

आज दिनांक २७.०३.२०२१ दिन शनिवार ब्राह्मण समाज उत्थान परिषद के तत्वावधान में महात्मा खुशीराम सार्वजनिक पुस्तकालय में होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। उक्त अवसर पर भजन कीर्तन एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा रंगारंग होली मनाई गई। उक्त अवसर पर संस्था के अध्यक्ष श्री सिद्ध नाथ उपाध्याय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एस पी पाठक, महासचिव डी पी पाण्डेय एवं प्रवक्ता तथा सचिव श्री वी डी शर्मा, दिनेश मिश्र एवं अन्य महानुभाव उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक उद्देश्य भारत को 21वीं सदी में वैश्विक ज्ञान की महाशक्ति बनाना है और एनआईटी राउरकेला जैसे संस्थानों को इस राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगीः राष्ट्रपति कोविंद राष्ट्रपति ने एनआईटी राउरकेला के 18वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शिरकत की

भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक उद्देश्य भारत को 21वीं सदी में वैश्विक ज्ञान की महाशक्ति बनाना है और एनआईटी राउरकेला जैसे संस्थानों को इस राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। वह ओडिशा के राउरकेला में आज (21 मार्च, 2021) एनआईटी राउरकेला के 18वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने कहा कि पूर्वी भारत में सरकार द्वारा संचालित दूसरे सबसे बड़े प्रौद्योगिकी संस्थान, एनआईटी राउरकेला ने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। छह दशकों से ज्यादा समय से यह संस्थान देश में तकनीकी पेशेवरों के समूह को समृद्ध कर रहा है।

राष्ट्रपति ने इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए कि एनआईटी राउरकेला में पूरे देश और अन्य देशों के छात्र भी हैं, कहा कि इस 700 एकड़ के कैम्पस में पढ़ रहे 7000 से अधिक छात्रों का समुदाय समृद्ध विविधता का प्रतिनिधित्व करता है। यह सीखने की प्रक्रिया को समृद्ध करता है और विभिन्न संस्कृतियों के बीच तालमेल को प्रोत्साहित करता है। यह राष्ट्रों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को भी मजबूत करता है।

तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की कम भागीदारी के मुद्दे को उठाते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि पूरे देश के जिन दीक्षांत समारोह में वह शामिल हुए हैं, उनमें से ज्यादातर में देखा कि छात्राएं छात्रों को लिबरल आर्ट्स, मानविकी, चिकित्सा विज्ञान, विधि और अन्य क्षेत्रों में पछाड़ रही हैं। फिर भी यह पाया गया कि प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक विषयों में महिलाओं का नामांकन कम है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, पूरे देश के इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में महिलाओं का नामांकन केवल 20 प्रतिशत है। उन्होंने जोर दिया कि लड़कियों को तकनीकी शिक्षा और उसमें विशिष्टता ग्रहण करने के लिए उसी तरह प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जैसे कि अन्य क्षेत्रों में वह कर रही हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की प्रगति और उत्कृष्टता राष्ट्रीय विकास में एक नया आयाम जोड़ेगी। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च स्तरों पर लैंगिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करेगी। यह महिलाओं को 21वीं सदी की दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक में मौजूदा बाधाओं से पार पाने में मदद करेगा।

“कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व” की तर्ज पर “विश्वविद्यालय के सामाजिक दायित्व” की आवश्यकता पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों और संस्थानों को अपने आसपास के समुदाय को सशक्त करने में योगदान अवश्य देना चाहिए। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि एनआईटी राउरकेला ने ‘उन्नत भारत अभियान’ के हिस्से के रूप में पांच गांवों को गोद लिया है और उन गांवों में कम्प्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ विज्ञान प्रयोगशालाओं को भी अपग्रेड कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस कैम्पस में स्थित पवार्टी एलिवेशन रिसर्च सेंटर, ओडिशा के कालाहांडी, बालांगिर और कोरापुट क्षेत्र के कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए काम कर रहा है। उन्होंने इन सराहनीय पहलों के लिए एनआईटी राउरकेला की प्रशंसा की।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वन का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नीति में परिकल्पना की गई है कि इंजीनियरिंग संस्थानों को मानविकी और कला पर जोर देने के साथ समग्र और बहुविषयक शिक्षा की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनआईटी राउरकेला कुछ हद तक इस दृष्टिकोण को अपना चुका है। उन्होंने भरोसा व्यक्त किया कि यह संस्थान इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अन्य प्रमुख विशेषताओं को लागू करने के लिए भी काम करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक उद्देश्य भारत को 21वीं सदी में वैश्विक ज्ञान की महाशक्ति बनाना है और एनआईटी राउरकेला जैसे संस्थानों को इस राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

 

प्रधानमंत्री ने श्री मन्नथु पद्मनाभन जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्री मन्नथु पद्मनाभन जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा,“श्री मन्नथु पद्मनाभन जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। हम समाज कल्याण और युवा सशक्तीकरण में उनके लंबे समय तक दिए गए योगदान का भी स्मरण करते हैं। उनके उच्च विचार अनेक लोगों को लगातार प्रेरित कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने किया हिमालय आजीविका कलस्टर स्तरीय फैडरेशन वेब पोर्टल का विधिवत लोकार्पण

हिमालय आजीविका कलस्टर स्तरीय फैडरेशन द्वारा संचालित वेब पोर्टल www.himalayankart.in का विधिवत लोकार्पण मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा सर्किट हाउस में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय आजीविका कलस्टर स्तरीय द्वारा संचालित वेब पोर्टल में यथा संभव सहयोग किया जायेगा जिससे महिलाओं में इस कार्य क्षेत्र में अधिक रूचि होगी और अन्य महिलाऐं भी इस पोर्टल के माध्यम से अपने उत्पादों को आमजन तक पहुचा पायेंगी, इससे महिलाओं का आर्थिक विकास होगा तथा वे आत्मनिर्भर भी बनेंगी तथा पोर्टल के जरिये महिलाओं द्वारा उत्पादित उत्पादों की पहुच जन-जन तक हो सकेगी। मुख्यमंत्री द्वारा सभी जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं तथा फैडरेशन के पदाधिकारियों को इस वेब पोर्टल के संचालन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए मुख्य विकास अधिकारी नरेन्द्र सिंह भण्डारी ने बताया कि कोविड-19 से पूर्व स्वयं सहायता समूह के उत्पादों को बाजार में आसानी से बेचा जा रहा था, लेकिन कोविड-19 में लाॅकडाउन के कारण स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के बनाये गये उत्पादों को बाजार में लाना मुश्किल था, जिस कारण इन उत्पादों को बाजार में लाने के लिए ई-मार्केटिंग से जोड़ने के लिए ई-कामर्स वेब पोर्टल बनाया गया, जिसमें स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के द्वारा बनाये गये उत्पादों को आनलाईन मार्केट के माध्यम से बेचा जायेगा। जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा बताया गया कि ई-मार्केटिंग के द्वारा महिलाओं में तकनीकी क्षेत्र के बारे में जानकारी के साथ-साथ अपने उत्पादों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाकर पूरे देश में बेचा जा सकता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वर्तमान के प्रतिस्पर्धा के दौर में खुद को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

लोकार्पण समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री डा.धन सिंह रावत, विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा बंशीधर भगत, विधायक संजीव आर्य, नवीन दुम्का, राम सिंह कैड़ा, जिला अध्यक्ष भाजपा प्रदीप बिष्ट, मण्डलायुक्त अरविन्द सिंह ह्यांकी, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल के अलावा फैडरेशन पदाधिकारी श्रीमती विनीता आर्य, इन्दिरा देवी, सरीता जोशी आदि उपस्थित थे।

उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज को मिली नए सत्र में प्रवेश की अनुमति

उत्तराखंड में निजी क्षेत्र में 2001 से स्थापित प्रथम आयुर्वेदिक कॉलेज राजपुर रोड स्थित उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज को बीएएमएस एवं एमडी आयुर्वेद पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु 60 सीटों के प्रवेश हेतु आयुष मंत्रालय ने मान्यता प्रदान कर दी है। जिसमें आयुर्वेद, स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों को प्रवेश का मौका मिलेगा।
उक्त जानकारी देते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्य मानव दयाल शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में भविष्य बनाने के प्रति युवाओं में क्रेज बढ़ा है। सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित भवन अस्पताल एवं सुरम्य घाटी में स्थित उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज में प्रवेश हेतु अभ्यर्थी उत्साहित है। नीट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को संस्था में नियमानुसार प्रवेश की कार्यवाही 28 फरवरी तक पूर्ण कर ली जाएगी। कॉलेज को द्वितीय चरण की काउंसलिंग में शामिल कर लिया गया है।
उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुरेश चौबे ने दी जानकारी में बताया कि राज्य में आयुर्वेदिक कॉलेजों में प्रवेश हेतु प्रथम चरण की काउंसिलिंग पूर्ण हो चुकी है एवं द्वितीय चरण की काउंसिलिंग अंतिम चरण में है। मोप अप राउंड काउंसलिंग 24 से अनंतिम निर्धारित है। डॉ. चौबे ने बताया कि राज्य में 3 राजकीय व निजी क्षेत्र के 9 आयुर्वेदिक कॉलेजों को आगामी सत्र में प्रवेश हेतु मान्यता प्राप्त हुई है।
एक कॉलेज को मान्यता मिलने की संभावना है। अगले प्रवेश प्रक्रिया की घोषणा जल्द ही की जाएगी। विश्ववविद्यालय ने काउंसलिंग शेडयूल में आंशिक फ़ेरबदल किया है। डॉ. चौबे ने बताया कि द्वितीय चरण की काउंसलिंग के उपरांत विगत दिवस विश्वविद्यालय द्वारा मेरिट लिस्ट जारी कर दी जायेगी। जिसमें अभ्यर्थियों को नीट की मेरिट के आधार पर राज्य के विभिन्न आयुर्वेदिक कॉलेजों में दाखिले का मौका मिलेगा। 19 व 20 को अभ्यर्थी अपनी सूची के अनुसार महाविद्यालयों का चयन (choice filling) कर सकेंगे। उपलब्ध सीटों के आधार पर 22 को विश्वविद्यालय द्वारा सीटें आवंटित कर परिणाम घोषित किया जाएगा। आवंटित सीटों पर अभ्यर्थी 23 व 24 फरवरी को प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे।
उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज के एमडी एवं उत्तराखंड मेडिकल कॉलेज एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ अश्विनी काम्बोज ने आयुष मंत्रालय एवं सी.सी.आई.एम नई दिल्ली का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस वर्ष को महामारी के चलते आयुर्वेदिक पाठ्यक्रम का सत्र विलंबित हुआ है। प्रतिवर्ष 30 अक्टूबर उक्त प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाती थी, परंतु कोरोना के चलते इस वर्ष आयुष कॉलेजों में नए सत्र का शिक्षण-प्रशिक्षण मार्च 2021 से प्रारंभ होगा। डॉ. कांबोज ने बताया कि राज्य के कुछ कॉलेजों को अभी भी प्रवेश की अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। उनको भारत सरकार द्वारा शीघ्र अनुमति मिलने की संभावना है। ऐसे कॉलेजों में रिक्त सीटों के लिए अलग से काउंसलिंग हेतु भारत सरकार को एसोसिएशन के माध्यम से पत्र प्रेषित किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा एवं केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद नई दिल्ली द्वारा उत्तराखंड के आयुष कॉलेजों में नए सत्र में प्रवेश हेतु निजी क्षेत्र के 9 कॉलेजों को मान्यता प्रदान करते हुए सूची जारी कर दी है। इनके अतिरिक्त राज्य के तीन राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेजों ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज व गुरुकुल आयुर्वेदिक कॉलेज (हरिद्वार) एवं आयुर्वेद विश्वविद्यालय मैन केंपस हर्रावाला देहरादून को भारत सरकार ने पूर्व में ही मान्यता प्रदान कर दी थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के जिन 9 निजी कॉलेजों को मान्यता मिली है, उनमें पतंजलि आयुर्वेदिक कॉलेज (100 सीट), उत्तरांचल आयुर्वेदिक कॉलेज (60), हिमालय आयुर्वेदिक कॉलेज (60) दून इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (60), क्वाड्रा इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद(30), मदरहुड आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज(60), शिवालिक इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद एंड रिसर्च (60), मंजीरा देवी आयुर्वैदिक मेडिकल कॉलेज (30), चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज (50) सीट शामिल है।
देवभूमि मेडिकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेद को भी जल्द मान्यता मिलने की संभावना है। राज्य के तीन कॉलेजों हरिद्वार आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, उत्तरांचल युनानी मेडिकल कॉलेज एवं आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज को कोर्ट के आदेश से मान्यता प्राप्त होने की जानकारी मिली है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तीन कॉलेजों बिहाइव मेडिकल कॉलेज, विशंभर सहाय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं परम हिमालयन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को मान्यता मानक (टीचिंग फैकल्टी) पूरे न किए जाने पर रद्द कर दी गई है।