पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि, शक्ति स्थल पहुंचे सोनिया और राहुल, जानें पूर्व PM से जुड़ा पूरा इतिहास

देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं इंदिरा गांधी ने बाल चरखा संघ और वानर सेना की स्थापना की।

देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और ‘भारत रत्न’ इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि।

इंदिरा गांधी की जयंती पर कांग्रेस ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली में स्थित शक्ति स्थल पर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को उनकी 108वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी।

स्वतंत्रता संग्राम में भी सक्रिय रहीं इंदिरा

बता दें कि इंदिरा गांधी 24 जनवरी 1966 को पहली बार देश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद 14 जनवरी 1980 को दोबारा इस जिम्मेदारी को संभालने का मौका मिला। 19 नवंबर 1917 को इंदिरा गांधी का जन्म देश के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था।

वह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं। इंदिरा गांधी शुरू से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहीं। बचपन में उन्होंने ‘बाल चरखा संघ’ की स्थापना की और असहयोग आंदोलन के दौरान कांग्रेस पार्टी की सहायता के लिए 1930 में बच्चों के सहयोग से ‘वानर सेना’ बनाई। सितंबर 1942 में उन्हें जेल में डाल दिया गया। 1947 में इन्होंने महात्मा गांधी के मार्गदर्शन में दिल्ली के दंगा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य किया।

कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी रहीं इंदिरा

कांग्रेस पार्टी के संगठनात्मक पदों पर पहुंचने के साथ-साथ उनकी राजनीतिक जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं। 1955 में वे कांग्रेस कार्य समिति और पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य बनीं। 1958 में, वे कांग्रेस के केंद्रीय संसदीय बोर्ड में शामिल हुईं। उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय एकता परिषद की अध्यक्ष, अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की अध्यक्ष और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महिला विभाग की प्रमुख के रूप में भी कार्य किया। इंदिरा गांधी 1959 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं और 1960 तक और फिर जनवरी 1978 से इस पद पर रहीं।

पीएम के साथ विदेश मंत्री भी रहीं इंदिरा

इंदिरा गांधी का मंत्री पद का कार्यकाल 1964 से 1966 तक सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में कार्य करने के साथ शुरू हुआ। जनवरी 1966 में वे भारत की प्रधानमंत्री बनीं और मार्च 1977 तक और फिर जनवरी 1980 से अक्टूबर 1984 में उनकी हत्या होने तक इस पद पर रहीं। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने एक साथ कई प्रमुख विभागों का कार्यभार संभाला, जिनमें 1967 से 1977 तक परमाणु ऊर्जा मंत्री, 1967 से 1969 तक विदेश मंत्री, 1970 से 1973 तक गृह मंत्री और 1972 से 1977 तक अंतरिक्ष मंत्री शामिल हैं। जनवरी 1980 में, वे योजना आयोग की अध्यक्ष बनीं।

यूपी और आंध प्रदेश से हासिल की जीत

इंदिरा गांधी चौथे, पांचवें और छठे आम चुनावों में लोकसभा के लिए निर्वाचित होने से पहले 1964 से 1967 तक राज्यसभा सदस्य रहीं। जनवरी 1980 में, उन्होंने उत्तर प्रदेश के रायबरेली और आंध्र प्रदेश के मेडक, दोनों सीटों से जीत हासिल की। हालांकि बाद में उन्होंने मेडक सीट बरकरार रखने का फैसला किया। उन्होंने 1967 से 1977 तक और फिर 1980 से कांग्रेस संसदीय दल की नेता के रूप में भी कार्य किया।

 

Delhi Blast: दो कारों से आए थे ‘आतंकी’, एक कार अभी भी राजधानी में घूम रही; दिल्ली ब्लास्ट में एक और नया खुलासा

फरीदाबाद जैश आतंकी मॉड्यूल का संदिग्ध आतंकी दिल्ली में अभी भी घूम रहा है। संदिग्ध दो कारों से दिल्ली पहुंचे थे। चांदनी चौक पार्किंग में भी एक ही साथ थीं। आतंकियों की दूसरी ईको स्पोटर्स कार अभी भी दिल्ली में घूम रही है। 

राष्ट्रीय राजधानी में आतंकी हमले का खतरा अभी टला नहीं हैं। अभी भी एक संदिग्ध आतंकी दिल्ली में बेलगाम घूम रहा है। ये खुलासा घटनास्थल के पास पार्किंग और घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों से हुआ है। एक आतंकी लाल रंग की ईको स्पोटर्स कार से घूम रहा है। 

इस कार का रजिस्ट्रेशन नंबर दिल्ली का है। ऐसे में दिल्ली पुलिस समेत देश की सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच में आई इस बात के बाद पूरी दिल्ली में हाई अलर्ट कर दिया गया है। दिल्ली में सभी वीवीआईपी, एतिहासिक व बाजारों खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस सूत्रों ने बताया कि आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद का फरीदाबाद मोड्यूल के संदिग्ध फरीदाबाद में पुलिस की दबिश बढ़ने के बाद दिल्ली में दो कारों से पहुंचे थे। एक कार, जोकि हरियाणा नंबर की है, से लालकिले के सामने बम धमाका किया गया है।

जबकि दूसरी कार अभी दिल्ली में बेलगाम घूम रही है। इस कार का रजिस्ट्रेशन नंबर-डीएल-10 सीके 045.. हैं। ये ईको स्पोर्टस कार हैं और इसका रंग लाल है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि दोनों कारें एक साथ दिल्ली पहुंची थी और चांदनी चौक पार्किंग में भी एक ही साथ थीं।

इस कार में एक संदिग्ध सवार था और वह आई-20 कार में सवार संदिग्धों से बात भी कर रहा था। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि ये दोनों कारें बदरपुर बॉर्डर से एक साथ ही दिल्ली घुसी थीं। साथ ही चांदनी चौक व लालकिले के आसपास एक साथ घूम रही थी।

दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार देर रात तक इस कार व उसमें सवार संदिग्ध के बारे में कोई सुराग हाथ नहीं लगा था। जांच में ये बात सामने आने के बाद दिल्ली में जगह-जगह पिकेट लगाकर वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी गई थी।

दूसरी तरफ इस अधिकारी ने भी बताया कि बम धमाके पास से जो दो कारतूस मिले हैं वह सरकारी नहीं है। यानि की कारतूस पुलिस के नहीं है। ऐसे में दिल्ली पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां और ज्यादा सकते में आ गई है।

देश को दहलाने की बड़ी साजिश नाकाम, दिल्ली से कश्मीर तक जुड़े आतंक के तार
सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच में लाल किला के पास बम धमाके को डर और लापरवाही का नतीजा बताया जा रहा है। आतंकी भले ही दिल्ली को दहलाने में कामयाब हो गए हो लेकिन देश की सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की देश को दहलाने या देश में बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया।

धमाके के तार फरीदाबाद और लखनऊ जैश के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ते नजर आ रहे हैं। ये पहला मॉड्यूल है कि जिसने हरियाणा, यूपी, जम्मू कश्मीर और दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया था। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ा डॉक्टर उमर मोहम्मद अपने मॉड्यूल के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी से डर गया था।

वह पुलिस से बचकर दिल्ली आ गया था और गिरफ्तारी के डर से लाल किला के पास बम धमाका कर खुद को उड़ा लिया, या वह आत्मघाती बम बन गया। लापरवाही ये है कि फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने के बाद बावजूद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं जागीं।

दिल्ली पुलिस ने कहने के लिए राजधानी को हाईअलर्ट पर रखा, मगर कहीं भी चेकिंग नहीं की और न सुरक्षा बढ़ाई। आरोपी डाक्टर मोहम्मद उमर आसानी से दिल्ली आया और अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो गया।

दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लालकिले बम धमाके का फरीदाबाद के जैश के आतंकी मॉड्यूल से सीधा कनेक्शन आ रहा है। पुलिस सूत्रों ने आरोप लगाया कि पेशे से डॉक्टर उमर मोहम्मद फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ा एक और डॉक्टर था।

डॉ. मुजम्मिल अहमद को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उमर मोहम्मद कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा था। जम्मू कश्मीर के पुलवामा के एक व्यक्ति तारिक को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसने कथित तौर पर उमर मोहम्मद को आई-20 कार दी थी।

जैश के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है
सूत्रों से जानकारी मिली है कि दिल्ली लाल किले बम धमाके में पुलवामा के डॉ. मुजम्मिल अहमद शामिल हो सकता है। डॉ. मुजम्मिल अहमद जैश ए मोहम्मद के उस आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, जिसके नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ था। उसके पास से 2900 किलो अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक, टाइमर, वॉकी टॉकी और अन्य सामान बरामद हुआ था। जांच एजेंसियों का मानना है कि फरीदाबाद में दो साथी डॉक्टरों के पकड़े जाने के बाद उमर मोहम्मद ने घबराहट में लाल किले के पास ये धमाका कर दिया है। ये प्रारंभिक जांच में सामने आ रहा है।

कंधार हाईजैक से भी तार जुड़े
कार खरीदने वाला आमिर आरोपी उमर का भाई है। फरीदाबाद से सोमवार को गिरफ्तार डॉ. शाहीन को लेकर बड़ा खुलासा है। डॉ शाहीन आतंकी संगठन जैश की महिला विंग की प्रमुख है। भारत में भर्ती की जिम्मेदारी मिली थी। जैश ने भारत में संगठन में भर्ती करने का जिम्मा सौंपा था।

पाकिस्तान स्थित जमात उल मोमीनात जैश की महिला विंग है, जिसकी भारत में कमान डॉक्टर शाहीन को सौंपी गई है। सादिया अजहर मसूद की बहन है, जो पाकिस्तान में जैश की महिला विंग की हेड है। सादिया अजहर का पति यूसुफ अजहर कंधार हाईजैक का मास्टरमाइंड था।

विस्फोटक मिलने के कुछ घंटों बाद ही लालकिला धमाका हुआ
लाल किला बम धमाका फरीदाबाद के पास एक कश्मीरी डॉक्टर के किराये के मकान से लगभग 360 किलोग्राम संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट, हथियारों एवं गोलाबारूद का जखीरा बरामद होने के कुछ घंटों बाद हुआ।

हरियाणा पुलिस ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर फरीदाबाद के धौज इलाके से डॉ. मुजम्मिल गनई को गिरफ्तार किया था और उसके किराये के मकान से विस्फोटक सामग्री, हथियार और टाइमर बरामद किए थे। दिल्ली पुलिस अधिकारी ने बताया कि यूपी एटीएस ने लखनऊ से जिस डा. परवेज अंसारी को पकड़ा है उससे भी लिंक सामने आए हैं।

 

Airport Glitch: क्या ATC ने जुलाई में मिली चेतावनी की अनदेखी की? अहमदाबाद एअर इंडिया हादसे के बाद आया था अलर्ट

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एयरपोर्ट पर उड़ान सेवाएं अब धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं। लगभग 36 घंटे पहले हुई बड़ी तकनीकी खराबी के बाद शनिवार को हालात में सुधार देखा गया। शुक्रवार को देशभर में सैकड़ों उड़ानों के ठप होने का कारण बने सिस्टम क्रैश को समय रहते टाला जा सकता था। यह दावा एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के संगठन एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने किया है। गिल्ड का कहना है कि उसने कई महीने पहले ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को सिस्टम की खराब स्थिति और अपग्रेड की जरूरत के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन उस पर कोई कदम नहीं उठाया गया।

अहमदाबाद एअर इंडिया हादसे के बाद आया था अलर्ट
गिल्ड ने अहमदाबाद एअर इंडिया हादसे के बाद जुलाई में जारी एक पत्र में कहा था कि दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर मौजूदा ऑटोमेशन सिस्टम की कार्यक्षमता में गिरावट देखी जा रही है। सिस्टम स्लो होने और बार-बार लैग आने की वजह से उड़ानों के संचालन की सुरक्षा और दक्षता प्रभावित हो रही है। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने सांसदों को भी पत्र लिखकर आग्रह किया था कि भारत में उपयोग किए जा रहे एयर नेविगेशन सिस्टम्स का समय-समय पर रिव्यू और अपग्रेड जरूरी है, ताकि वे यूरोकंट्रोल और FAA जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रह सकें। पत्र में यह भी कहा गया था कि भारत के ऑटोमेशन सिस्टम में “AI-सक्षम कॉन्फ्लिक्ट डिटेक्शन और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग” जैसी सुविधाओं का अभाव है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ जाते हैं।

लापरवाही के चलते आई तकनीकी खामियां
गिल्ड के अधिकारियों के अनुसार हमने बार-बार इन तकनीकी खामियों की ओर ध्यान दिलाया, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार को जो सिस्टम क्रैश हुआ, वह इसी लापरवाही का नतीजा है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते सिस्टम अपग्रेड कर दिया गया होता, तो न केवल उड़ानें बाधित होने से बच जातीं बल्कि देश की विमानन सुरक्षा प्रणाली भी अधिक मजबूत होती।

क्या आई थी दिक्कत?
गुरुवार शाम को दिल्ली एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) सिस्टम में तकनीकी दिक्कत आ गई थी। यह समस्या ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (एएमएसएस )में आई, जो उड़ानों की योजना (फ्लाइट प्लानिंग) से जुड़ा एक अहम हिस्सा है। इस सिस्टम के फेल होते ही उड़ानों के संदेश और डेटा अपने-आप कंट्रोल टावर तक नहीं पहुंच रहे थे। नतीजतन, एयरलाइंस को मैन्युअल तरीके से उड़ान योजनाएं बनानी पड़ीं।

तकनीकी खराबी पर अधिकारियों की सफाई
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने कहा कि यह एक तकनीकी समस्याथी, लेकिन किसी भी उड़ान की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा।जो विमान हवा में थे, वे सामान्य रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचे। दिक्कत केवल उड़ान से पहले के संदेश और योजना प्रक्रिया में आई थी।

FATF ने भारत की संपत्ति पुनर्प्राप्ति प्रणाली की सराहना की, ED को वैश्विक आदर्श एजेंसी बताया

एफएटीएफ ने कहा कि भारत ने संपत्ति वसूली के लिए एक सुव्यवस्थित और तकनीक-संचालित तंत्र बनाया है, जिसमें कानूनी उपकरणों को कई एजेंसियों के बीच परिचालन सहयोग के साथ जोड़ा गया है।

मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के प्रयासों की निगरानी करने वाली वैश्विक संस्था, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) ने भारत की संपत्ति वसूली प्रणाली की सराहना करते हुए इसे अपने सदस्य देशों में सबसे प्रभावी बताया है।

अपनी नई जारी रिपोर्ट, “संपत्ति वसूली मार्गदर्शन और सर्वोत्तम अभ्यास” में, FATF ने आपराधिक आय का पता लगाने, कुर्की करने और जब्त करने में अपनी दक्षता के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक आदर्श एजेंसी के रूप में रेखांकित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रणाली आर्थिक और वित्तीय अपराधों से प्राप्त संपत्तियों की वसूली करने में सक्षम एक मजबूत ढाँचे का प्रतिनिधित्व करती है।

एफएटीएफ रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
एफएटीएफ ने पाया कि भारत ने संपत्ति वसूली के लिए एक सुव्यवस्थित और तकनीक-संचालित तंत्र विकसित किया है, जिसमें कानूनी उपकरणों को विभिन्न एजेंसियों के बीच परिचालन सहयोग के साथ जोड़ा गया है। इसने भारत के दोहरे दृष्टिकोण की विशेष रूप से प्रशंसा की, जो दोषसिद्धि-आधारित और गैर-दोषसिद्धि-आधारित, दोनों तरह की ज़ब्ती की अनुमति देता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आपराधिक मुकदमे पूरे होने से पहले ही संपत्ति ज़ब्त की जा सके।

रिपोर्ट में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत भारत की विधायी शक्ति की भी सराहना की गई, जो अधिकारियों को आपराधिक गतिविधि से जुड़ी संदिग्ध संपत्तियों को तुरंत ज़ब्त, कुर्क और ज़ब्त करने में सक्षम बनाता है। एफएटीएफ ने कहा कि इसने भारत के प्रवर्तन मॉडल को सदस्य देशों में सबसे अधिक उत्तरदायी और अनुकूलनीय बना दिया है।

एफएटी

उदाहरण के तौर पर, रिपोर्ट में भारत में कई उच्च-मूल्य वाली वसूली का उल्लेख किया गया है, जिनमें कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, सहकारी बैंक घोटाले और निवेश योजनाओं से जुड़े मामले शामिल हैं, जहाँ हज़ारों करोड़ रुपये की संपत्ति ज़ब्त की गई और बाद में सार्वजनिक लाभ के लिए पुनर्व्यवस्थित की गई। इनमें से कई मामलों में, संरचित क्षतिपूर्ति उपायों के माध्यम से पीड़ितों को धनराशि सफलतापूर्वक वापस कर दी गई।

जिन पहलुओं का विशेष उल्लेख किया गया, उनमें से एक भारत द्वारा मूल्य-आधारित ज़ब्ती का उपयोग था, जो मूल संपत्ति का पता न चलने पर भी समतुल्य संपत्ति को ज़ब्त करने की अनुमति देता है। FATF के अनुसार, यह दृष्टिकोण वित्तीय अपराधियों के विरुद्ध निवारक प्रभाव को महत्वपूर्ण रूप से मज़बूत करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी अवैध लाभ पहुँच से बाहर न रहे।

एफ ने भारत के मज़बूत अंतर-एजेंसी सहयोग पर प्रकाश डाला
एफएटीएफ रिपोर्ट में वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू-आईएनडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सहित प्रमुख भारतीय संस्थानों के बीच समन्वय की सराहना की गई है। इसमें कहा गया है कि इन एजेंसियों के बीच तालमेल ने “अन्य देशों के लिए अध्ययन और अनुकरण हेतु एक व्यावहारिक मॉडल” तैयार किया है।

 

National Unity Day 2025: आज राष्ट्रीय एकता दिवस, देश की एकता के उस नायक को याद करें जिसने भारत को जोड़ा!

National Unity Day 2025 पर जानिए सरदार पटेल की जयंती का महत्व, उनके विचार और भारत को एक करने की प्रेरक कहानी। पढ़ें क्यों कहा जाता है उन्हें भारत का लौह पुरुष।

National Unity Day 2025: हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान व्यक्तित्व वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित है जिसने बिखरे रियासतों के भारत को एक सूत्र में पिरोया। वे सिर्फ भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री नहीं थे, बल्कि ‘भारत के लौह पुरुष’ के रूप में उस एकता के प्रतीक बने, जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी।

राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व

सरदार पटेल की जयंती को 2014 में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और संगठनों में “Run for Unity”, निबंध प्रतियोगिताएं और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस का संदेश है, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत।”

सरदार पटेल भारत को एक सूत्र में पिरोने वाले शिल्पकार

आजादी के बाद भारत 562 रियासतों में बंटा था। ऐसे समय में, सरदार पटेल ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, राजनीतिक कुशलता और दृढ़ नेतृत्व से इन रियासतों का भारत संघ में विलय कराया। उनके प्रयास से,  हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी बड़ी रियासतों का भारत में एकीकरण संभव हुआ। उन्होंने “स्टेट्स रीऑर्गनाइजेशन कमेटी” की नींव रखी, जिससे भारत एक मज़बूत प्रशासनिक ढांचे में संगठित हुआ।

आज की पीढ़ी के लिए संदेश 

आज जब सोशल मीडिया, राजनीति और विचारधाराएं लोगों को बांट रही हैं, राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता में निहित है यानी भाषा, संस्कृति, धर्म, परिधान सब अलग, लेकिन आत्मा एक। यह दिन हर भारतीय के भीतर यह भावना जगाता है कि हम सब मिलकर ही भारत हैं और एकता में ही शक्ति है।

कैसे मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस

  •     ‘Run for Unity’ का आयोजन किया जाता है। लोगों में एकता का संदेश फैलाने के लिए देशभर में रन आयोजित की जाती है।
  • स्कूल और कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। जिसमें निबंध लेखन, भाषण, पोस्टर मेकिंग, क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन होता है।
  • प्रतिज्ञा समारोह होता है, जिसमें देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने की शपथ ली जाती है।
  • ‘Statue of Unity’ पर जा सकते हैं। गुजरात में स्थित 182 मीटर ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी जाती है।

Election: नेकां की तीन सीटों पर राह आसान, सत शर्मा वाली सीट पर घमासान; भाजपा को दो वोटों का करना होगा जुगाड़

राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की तीन सीटों पर राह आसान है। सत शर्मा वाली सीट पर घमासान है। भाजपा को एक सीट जीतने के लिए दो वोटों का जुगाड़ करना होगा। सज्जाद लोन को छोड़कर सभी विधायकों के वोट डालने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर में वीरवार को राज्यसभा की चार सीटों पर मतदान है, लेकिन सियासी घमासान इनमें से चौथी सीट पर ही है। वोटों के गणित के अनुसार अगर क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो तीन सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की राह आसान दिख रही है।

चौथी सीट पर नेकां और भाजपा दोनों के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है। 28 विधायकों वाली भाजपा को यह सीट जीतने के लिए दो और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। इस सीट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा चुनाव मैदान में हैं। पीडीपी और कांग्रेस के खुलकर नेकां के पक्ष में आने से भाजपा की जीत पूरी तरह से क्रॉस वोटिंग या निर्दलीयों के वोट पर टिकी है।

राज्यसभा चुनाव के लिए जारी पहली और दूसरी अधिसूचना वाली दोनों सीटों के चुनावी नतीजों पर कोई बड़ी उलझन नहीं दिखती। इन दोनों सीटों पर जीत के लिए पहली वरीयता के 45-45 वोट चाहिए।

फिलहाल जो समीकरण हैं उनके हिसाब से यह दोनों सीटें 41 विधायकों वाली नेकां आसानी से जीतती दिख रही है। बता दें कि सज्जाद लोन को छोड़कर राज्यसभा चुनाव में सभी विधायकों के वोट डालने की उम्मीद है।
तीसरी सीट : क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो नेकां मार सकती है बाजी
तीसरी अधिसूचना वाली दोनों सीटों पर जीत के लिए 30-30 वोट चाहिए। क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो इनमें से एक सीट नेकां आसानी से जीतती नजर आ रही है। इस अधिसूचना के तहत तीसरी सीट पर जीत के लिए वोटिंग के बाद नेकां के पास 11 विधायक चौथी सीट के लिए शेष रह जाएंगे। बता दें कि इस सीट पर पीडीपी ने नेकां के उम्मीदवार शम्मी ओबेरॉय को वोट देने के लिए समर्थन दिया है।
चौथी सीट : उलझ रहे सियासी समीकरण
जीत के लिए 30 वोट जुटाने के सियासी समीकरण चौथी सीट पर आकर उलझ रहे हैं। भाजपा के पास 28 विधायक हैं और उसे यह सीट जीतने के लिए दो और वोट चाहिए। कांग्रेस के छह और पीडीपी के सभी तीन विधायकों का समर्थन मिलने से नेकां के पास 20 वोट हो जाते हैं। इसलिए यह सीट जीतने के लिए नेकां और भाजपा दोनों को वोटों का जुगाड़ करना होगा। बता दें कि इस सीट पर भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा को उतारा है। वहीं, नेकां ने इमरान नबी डार पर दांव लगाया है।
निर्दलीय विधायकों की भूमिका रहेगी सबसे अहम
विधानसभा में 88 सदस्य हैं। इनमें से 41 नेकां, 28 भाजपा, छह कांग्रेस, तीन पीडीपी, एक माकपा, एक आप, एक जेकेपीसी और सात निर्दलीय हैं। चुनाव से ठीक पहले बनी राजनीतिक परिस्थितियों और समीकरणों के हिसाब से एनसी को अपने 41 के अलावा कांग्रेस के छह, सीपीआई और आप के एक-एक विधायक का वोट मिलने की उम्मीद है।
पीडीपी भी अपने तीन विधायकों के वोट एनसी प्रत्याशी शम्मी ओबरॉय को देने की घोषणा कर चुकी है। जेकेपीसी के एकमात्र विधायक सज्जाद लोन चुनाव में हिस्सा न लेने का एलान कर चुके हैं। ऐसे में चौथी सीट के लिए सारा दारोमदार निर्दलीय सात विधायकों पर आकर टिक गया है।
सरकार में शामिल निर्दलीय विधायकों को वोट दिखाने की छूट नहीं
सात में से पांच निर्दलीय विधायक नेकां सरकार को समर्थन दे रहे हैं। इनमें छंब से विधायक सतीश शर्मा, बनी से रामेश्वर सिंह, इंदरवल से प्यारेलाल शर्मा, सुरनकोट से चौधरी अकरम और थन्नामंडी से विधायक मुजफ्फर इकबाल खान शामिल हैं। सतीश शर्मा सरकार में मंत्री भी हैं। शोपियां से निर्दलीय विधायक शाबिर अहमद ने सरकार को समर्थन तो नहीं दिया लेकिन वह ज्यादातर मुद्दों पर सरकार के साथ ही खड़े नजर आते हैं।
लंगेट से निर्दलीय विधायक एवं सांसद इंजीनियर रशीद के भाई खुर्शीद अहमद शेख को किसी भी खेमे का नहीं माना जाता। पांच निर्दलीय एनसी सरकार को समर्थन जरूर दे रहे हैं लेकिन नियमों के तहत उन्हें मतदान करते समय वोट दिखाने की छूट नहीं है। अगर वह दिखा देते हैं कि किसे वोट दे रहे हैं तो उनका वोट अमान्य हो जाएगा। ऐसे में दो अतिरिक्त वोटों के इंतजाम के लिए भाजपा की निगाहें निर्दलीय विधायकों पर टिकी हैं।

‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर आधिकारिक बातचीत के लिए यह सही समय नहीं है।’

वाणिज्य राजेश अग्रवाल का कहना है कि भारत से एक टीम टैरिफ पर चर्चा करने के लिए अमेरिका में है; लेकिन शटडाउन के कारण अमेरिका में कर्मचारियों की कमी है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, भारत की एक टीम वर्तमान में टैरिफ से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अमेरिका में है।

हालाँकि, अमेरिकी सरकार में चल रहे कामबंदी के कारण, द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर अगले आधिकारिक दौर की वार्ता आयोजित करने का यह “सही समय” नहीं है, उन्होंने कहा। श्री अग्रवाल, जो वर्तमान में बीटीए पर भारत के मुख्य वार्ताकार हैं, ने आगे कहा कि भारत को अमेरिका से अपने ऊर्जा आयात को बढ़ाने में “बहुत खुशी” होगी। अमेरिकी सरकार वर्तमान में “कामबंदी” के दौर से गुजर रही है क्योंकि वह उस देश में चालू वित्तीय वर्ष के लिए आवश्यक वित्त पोषण कानून लागू नहीं कर पाई है।

“हमारी वार्ता टीम अमेरिका में है और यह देखने की कोशिश कर रही है कि क्या हम दोनों पक्षों के बीच एक ऐसा समाधान निकाल सकते हैं जो टैरिफ से जुड़े कुछ मुद्दों को सुलझा सके,” श्री अग्रवाल ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता में कहा। “इस पर पहले से ही चर्चा चल रही है और समाधान निकलने की हमेशा उम्मीद है।”

“औपचारिक वार्ता के दौर के संबंध में, अमेरिका वर्तमान में बंद है और उनकी जनशक्ति कम है, इसलिए यह पूर्ण व्यापार वार्ता करने का सही समय नहीं है,” वाणिज्य सचिव ने द हिंदू द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष सक्रिय रूप से इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा व्यापार तनाव का समाधान कैसे निकाला जाए। उन्होंने कहा, “एक देश के रूप में, हमें अमेरिका से और अधिक ऊर्जा खरीदने में बहुत खुशी होगी, बशर्ते वह सही कीमत पर उपलब्ध हो।”

भारत काबुल मिशन को पूर्ण दूतावास में अपग्रेड करेगा, तालिबान के साथ गहरे संबंधों का संकेत

भारत के विदेश मंत्री ने शुक्रवार को नई दिल्ली में अपने अफ़ग़ान समकक्ष से मुलाकात के बाद घोषणा की कि भारत काबुल में अपने तकनीकी मिशन को एक पूर्ण दूतावास में उन्नत कर रहा है। यह घोषणा दो दशकों की अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के बाद 2021 में तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद पहली उच्च-स्तरीय राजनयिक बातचीत के दौरान की गई।

भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का वादा किया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए प्रतिबद्ध है। नई दिल्ली में अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताकी के साथ बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, “हमारे बीच घनिष्ठ सहयोग आपके राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और लचीलेपन में भी योगदान देता है।”

मुत्ताकी, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों, जिनमें यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति ज़ब्त करना शामिल है, के तहत कई अफ़ग़ान तालिबान नेताओं में से एक हैं, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति द्वारा उन्हें अस्थायी यात्रा छूट दिए जाने के बाद गुरुवार को नई दिल्ली पहुँचे। यह यात्रा मुत्ताकी द्वारा मंगलवार को रूस में अफ़ग़ानिस्तान पर एक अंतरराष्ट्रीय बैठक में भाग लेने के बाद हुई है, जिसमें चीन, भारत, पाकिस्तान और कुछ मध्य एशियाई देशों के प्रतिनिधि शामिल थे।

तालिबान तक भारत की व्यावहारिक पहुंच

यह कदम भारत और तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान के बीच ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के प्रति शत्रुता के बावजूद गहरे होते संबंधों को रेखांकित करता है।

दोनों को कुछ न कुछ हासिल करना है। तालिबान प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है। इस बीच, भारत अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों पाकिस्तान और चीन का मुकाबला करना चाहता है, जो अफ़ग़ानिस्तान में गहराई से शामिल हैं।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जनवरी में दुबई में मुत्तकी से मुलाकात की थी, और अफ़ग़ानिस्तान में भारत के विशेष दूत ने अप्रैल में राजनीतिक और व्यापारिक संबंधों पर चर्चा के लिए काबुल का दौरा किया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि तालिबान के साथ उच्च स्तर पर बातचीत करने का भारत का निर्णय एक रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन को दर्शाता है, जो आंशिक रूप से पिछली गैर-संलग्नता के परिणामों के साथ-साथ अपने रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से पिछड़ने से बचने के लिए किया गया है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण दोंती ने कहा, “नई दिल्ली दुनिया को चीन, पाकिस्तान या दोनों के साथ अपनी प्रतिद्वंद्विता के चश्मे से देखती है। तालिबान की संतुलित विदेश नीति, जिसमें प्रतिद्वंद्वी देशों और समूहों के साथ संबंध स्थापित करना शामिल है, नई दिल्ली की अपनी रणनीति को प्रतिबिंबित करती है।”

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अफ़ग़ानिस्तान के पाकिस्तान के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं, खासकर शरणार्थियों के निर्वासन और सीमा तनाव को लेकर, और भारत की भागीदारी को पाकिस्तान के प्रभाव के रणनीतिक प्रतिकार के रूप में देखा जा रहा है। भारत का लक्ष्य बुनियादी ढाँचे और राजनयिक उपस्थिति के माध्यम से अफ़ग़ानिस्तान में चीनी प्रभुत्व को सीमित करना भी है।

दोंती ने कहा, “बीजिंग द्वारा तालिबान के साथ सक्रिय रूप से बातचीत करने के साथ, नई दिल्ली नहीं चाहेगी कि उसका मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी काबुल पर विशेष प्रभाव रखे।”

उन्होंने कहा कि अतीत में पाकिस्तान का तालिबान पर भी ऐसा ही प्रभाव था, लेकिन इस्लामाबाद के साथ उसके बिगड़ते संबंधों के कारण, नई दिल्ली “काबुल पर थोड़ा प्रभाव विकसित करने और एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को मज़बूत करने” का अवसर देख रही है।

 

कैंटीन कर्मचारी से मारपीट पर संजय गायकवाड़ को फडणवीस की फटकार, कहा- विधायक का ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य

News web media uttarakhand :  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ द्वारा एमएलए हॉस्टल कैंटीन कर्मचारी पर हमला करने की निंदा की है, इसे “गंभीर मामला” बताते हुए कहा कि ऐसी हरकतें जनता के बीच गलत संदेश जाती हैं। फडणवीस ने कहा कि कोई भी विधायक पूर्ण छूट का दावा नहीं कर सकता, खाने से जुड़ी शिकायत पर उचित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए—लेकिन यह हमला विधायिका की छवि को धूमिल करता है।

उन्होंने विधानसभा में यह भी कहा कि “गैर जिम्मेदाराना व्यवहार विधायक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है” और कहा कि ऐसे मामलों की फिक्र करने की ज़रूरत है—अगर किसी को समस्या हो, तो औपचारिक शिकायत करें, हिंसा नहीं करनी चाहिए ।

इस टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि गायकवाड़ पर वायरल हुए वीडियो के जरिए उनकी हिंसा की प्रवृत्ति सामने आई। पिछले विवादों—जिनमें राहुल गांधी को ज़ख्मी करने की ऑफर से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणियाँ—के आधार पर अब विधायकों और जनता के बीच विश्वास की समस्या उठी है ।

फडणवीस ने विधानसभा अध्यक्ष और स्पीकर से आग्रह किया है कि इस घटना की गंभीरता से समीक्षा हो और आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि विधायक समुदाय की सार्वजनिक विश्वसनीयता बनी रहे।

व्यापार समझौते की अनिश्चितता और मुनाफावसूली से भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के अंत में गिरावट पर बंद

News web media Uttarakhand : भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह का समापन गिरावट के साथ किया, निवेशकों में अमेरिकी-भारत व्यापार समझौते की अनिश्चितता और मुनाफा वसूली के कारण सावधानी बनी रही। बीते हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 0.7% तक टूटे: निफ्टी 25,461 पर और सेंसेक्स 83,432.89 के स्तर पर बंद हुआ ।

हफ्ते की शुरुआत में खरीदारी देखी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे जुलाई 9 की अमेरिकी-भारतीय व्यापार समझौते की समयसीमा नजदीक आई, बाजार में मुनाफावसूली तेज हुई। बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी सेक्टर में दबाव रहने को मिला, जबकि आईटी और हेल्थकेयर में निवेशकों की रुचि बनी रही ।

विदेशी फंड (FIIs) ने उच्च मात्राओं के कारण सतर्क रुख अपनाया, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने थोड़ी राहत दी । रिटेल ब्रोकिंग हाउस Religare के अजीत मिश्रा ने बताया, “व्यापार समझौते के आसपास अनिश्चितता देखने को मिली, लेकिन समझौते की उम्मीद मुनाफा वसूली को सीमित करने में मददगार साबित हुई” ।

मौद्रिक स्थितियों की मजबूती भी बनी रही — RBI से लगभग ₹2.69 लाख करोड़ लाभांश हस्तांतरण और जून में GST संग्रह 6.2% वृद्धि पर रहा ।