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उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, खत्म की स्थाई निवास प्रमाण पत्र की बाध्यता, आदेश जारी

News web media Uttarakhand :  उत्तराखंड में धामी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। ये फैसला स्थाई निवास प्रमाण पत्र को लेकर लिया है। बताया जा रहा है कि मूल निवास प्रमाण-पत्र धारकों को अब स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने की बाध्यता नहीं होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव विनोद सुमन ने किया आदेश जारी।

मिली जानकारी के अनुसार जारी आदेश में कहा गया है कि शासन के संज्ञान में यह तथ्य लाया गया था कि राज्य में सेवायोजन, शैक्षणिक संस्थाओं, प्रदेश में अन्य विभिन्न कार्यों हेतु उत्तराखण्ड के मूल निवास प्रमाण पत्र धारकों को सम्बन्धित विभागों, संस्थाओं व संस्थानों द्वारा स्थाई निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये जाने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जबकि इस सम्बन्ध में सामान्य प्रशासन विभाग के शासनादेश संख्या 60/CM/xxxi (13)G/07-87(3)/2007 दिनांक 28 सितम्बर 2007 के द्वारा मूल निवास प्रमाण पत्र धारकों के लिये स्थायी निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता न होने के सम्बन्ध में स्पष्ट निर्देश पूर्व में ही दिये गये हैं। जिन प्रयोजनों के लिये स्थाई निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता है, उन प्रयोजनों के लिये मूल निवास प्रमाण पत्र धारकों को स्थाई निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किये जाने हेतु बाध्य न किया जाए। उक्त आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

वहीं सचिव विनोद सुमन ने बताया कि राज्य में सेवायोजन, शैक्षणिक संस्थाओं, प्रदेश में अन्य विभिन्न कार्यों हेतु अब स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने की बाध्यता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जिन प्रयोजनों के लिए स्थाई निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता है, उनके लिए मूल निवास प्रमाण पत्र धारकों को स्थाई निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने हेतु बाध्य न किया जाए।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में एस.एस.बी. द्वारा प्रशिक्षित राज्य के गुरिल्ला स्वयं सेवकों की समस्याओं को सुना

 

News web media uttarakhand : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में एस.एस.बी. द्वारा प्रशिक्षित राज्य के गुरिल्ला स्वयं सेवकों की समस्याओं को सुना। विभिन्न जनपदों से गुरिल्ला स्वयं सेवक वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि विभिन्न विभागों में प्रशिक्षित गुरिल्ला स्वयं सेवकों को आजीविका से जोड़ने के लिए प्रयास किये जाएं। उन्होंने कहा कि गुरिल्ला स्वयं सेवकों की जिन समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकता है, वे किये जाएं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से भी गुरिल्ला प्रशिक्षकों के लिए मदद के लिए प्रस्ताव भेजकर अनुरोध किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, निजी सुरक्षा एजेंसियों में सुरक्षा कर्मी, होमगार्ड में प्रशिक्षक, फॉरेस्ट फायर वॉचर, पुलिस विभाग के अन्तर्गत ग्राम चौकीदार, लोक निर्माण विभाग में विभिन्न कार्यों, वन विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं अन्य क्षेत्रों में गुरिल्ला स्वयं सेवकों की सेवाओं का लाभ कैसे लिया जा सकता है, इस दिशा में ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी को निर्देश दिये कि सबंधित विभागों द्वारा राज्य के प्रशिक्षित गुरिल्ला स्वयं सेवकों को आजीविका से जोड़ने और उनके प्रशिक्षण का लाभ राज्य को भी मिल सके, इस दिशा में जो भी कार्यवाही की जा सकती है, इसके अनुपालन में समय-समय पर बैठक ली जाए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, आनन्द बर्द्धन, डीजीपी अभिनव कुमार, कमांडेंट जनरल होमगार्ड केवल खुराना, डीआईजी/ अपर सचिव गृह श्रीमती निवेदिता कुकरेती, अपर सचिव विनीत कुमार, ललित मोहन रयाल, अत्तर सिंह, संबंधित विभागीय अधिकारी और वर्चुअल माध्यम से एस.एस.बी. द्वारा प्रशिक्षित गुरिल्ला स्वयंसेवक उपस्थित थे।

 

उत्तराखंड में जायरोकॉप्टर सफारी का ट्रायल सफल, जल्द होगी शुरूआत

News web media uttarakhand :  उत्तराखंड की पहली जायरोकॉप्टर सफारी का ट्रायल सफल हो गया है। जायरोकॉप्टर एडवेंचर शुरू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है।

उत्तराखंड से देश की पहली हिमालयी एयर सफारी की शुरूआत की है। उत्तराखंड की पहली जायरोकॉप्टर सफारी का ट्रायल सफल हो गया है। बता दें कि शनिवार को हरिद्वार के बैरागी कैंप में जायरोक्राप्टर की उड़ान का ट्रायल किया गया जो कि सफल हो गया है। अब प्रदेश में जल्द ही इसकी शुरूआत की जाएगी। पर्यटक इसका आनंद ले पाएंगे।

पर्यटन विभाग को जायरोकॉप्टर से एयर सफारी के लिए डीजीसीए की मंजूरी मिल गई है। जायरोकॉप्टर सफारी की शुरूआत प्रदेश में सासिक पर्यटन को बढा़वा देने के लिए अनोखी पहल है। बता दें कि जिलाधिकारी हरिद्वार ने खुद इसका ट्रायल किया। जायरोकॉप्टर से आप पहाड़ और नदियों को और ज्यादा करीब से देख सकते हैं।

आपको बता दें कि जाइरोकॉप्टर सफारी एक अनोखा दौरा है। जाइरोकॉप्टर किसी भी स्थान को रोमांचक और मजेदार तरीके से देखने का मौका देता है। बता दें कि जाइरोप्लेन का आविष्कार 1923 में जुआन डे ला सिर्वा द्वारा किया गया था। इसे कई और नामों जैसे जाइरोकॉप्टर, ऑटोगाइरो या रोटोप्लेन के नाम से भी जाना जाता है।

जाइरोकॉप्टर एक छोटे हेलीकॉप्टर की तरह दिखता है लेकिन इसमें रोटर्स को घुमाने वाला कोई इंजन नहीं होता है। रोटर्स बस स्व-चालित होते हैं जिसे ‘ऑटोरोटेट’ कहा जाता है। जाइरोकॉप्टर उड़ान के सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक है। जाइरोकॉप्टर किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सक्षम हैं।

 

अयोध्या में राम मंदिर से सात किमी दूर बनेगा उत्तराखंड का अतिथि गृह, चिह्नित जगह पर सीएम की सहमति

News web media Uttarakhand :  अयोध्या में बनाए जा रहे भगवान राम के भव्य मंदिर के पास ही उत्तराखंड सरकार राज्य अतिथि गृह का निर्माण करेगी। राज्य अतिथि गृह के लिए राज्य सरकार ने जो भूमि चिह्नित की है, वह राम मंदिर से करीब सात किमी की दूरी पर है।

करीब साढ़े तीन किमी की एरियल दूरी पर स्थित चिह्नित स्थान के लिए उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने ले आउट तैयार कर लिया है। इसी ले आउट के मुताबिक राज्य सरकार ने भूखंड का चयन किया है। यूपी सरकार ने सभी राज्यों के अतिथि गृह बनाने के लिए एक ही स्थान तय किया है। राज्य संपत्ति विभाग की एक टीम पिछले दिनों अयोध्या से इस स्थान का निरीक्षण करके लौट आई है।

टीम ने करीब पांच भूखंड देखे हैं, जिनमें से किसी एक भूखंड पर सरकार को अतिथि गृह का निर्माण करना है। सीएम को भूखंड का प्रस्ताव दिखा दिया है। सीएम ने अनुमोदन दे दिया है। उन्होंने भूखंड आवंटन के बाद अतिथि गृह निर्माण के लिए तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अतिथि गृह का निर्माण होने के बाद उत्तराखंड से अयोध्या जाने वाले राज्य के लोगों को सुविधा होगी।

4000 वर्ग मीटर भूमि पर बनेगा अतिथि गृह

राज्य अतिथि के लिए उत्तराखंड सरकार ने 4000 वर्ग मीटर भूमि की डिमांड की है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भूमि आवंटन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी। आवंटन से पहले उत्तरप्रदेश आवास विकास परिषद वहां मास्टर प्लान के तहत अवस्थापना तैयार कर रहा है।

जनवरी तक आवंटित हो जाएगी भूमि

राज्य सरकार अपेक्षा कर रही कि जनवरी माह तक उत्तराखंड को भूखंड का आवंटन हो जाएगा। राज्य सरकार को इसके लिए कीमत देनी होगी। चूंकि ले आउट और अवस्थापना के साथ भूखंडों का आवंटन हो रहा, इसलिए इसकी दरें भी सामान्य से अधिक होगी।

भूखंड आवंटन होने के बाद अतिथि गृह के निर्माण की डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। हम जल्द भूमि मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। जिस स्थान पर भूमि चिह्नित की गई है, वहां से अयोध्या के लिए दो मार्ग हैं। पहले करीब साढ़े किमी और दूसरे करीब सात किमी है। अतिथि गृह के लिए सभी राज्यों को एक ही स्थान पर भी भूमि मिलेगी।

 

पीएम ने उमराहा में स्वर्वेद महामंदिर का किया उद्घाटन

News web media Uttarakhand : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काशी दौरे के दूसरे दिन आज प्रदेश की जनता को 19, 150 करोड़ की 37 परियोजनाओं की सौगात देंगे। इसी के साथ पीएम मिशन-2024 का शंखनाद करते हुए बरकी में जनसभा को संबोधित करेंगे। सोमवार को सीएम योगी ने कालभैरव मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे।

पीएम मोदी ने 180 फीट ऊंचे सात मंजिला स्वर्वेद महामंदिर का उद्घाटन किया। यह मंदिर दुनिया का सबसे अनोखा मंदिर है। स्वर्वेद महामंदिर की संगमरमरी दीवारों पर स्वर्वेद के चार हजार दोहे लिखे हैं। 19 साल तक लगातार छह सौ कारीगर, दो सौ मजदूर और 15 इंजीनियर की मेहनत आज महामंदिर के पूर्ण स्वरूप में साकार हो चुकी है। हालांकि मंदिर का प्रथम तल ही आम लोगों के लिए खुलेगा और इसे पूरी तरह शुरू होने में दो साल का समय और लगेगा। इसे आज से पीएम नरेंद्र मोदी ने आम जनता को समर्पित किया।

पीएम नरेंद्र मोदी उमरहा पहुंच गए हैं। वे स्वर्वेद महामंदिर में यज्ञ के समापन में शामिल होने के बाद करीब 11:30 बजे एक सार्वजनिक समारोह में इसका उद्घाटन करेंगे।

 

 

भजनलाल शर्मा बने राजस्थान के नए मुख्यमंत्री, दीया और बैरवा ने ली डिप्टी सीएम पद की शपथ

News web media uttarakhand :  भजनलाल शर्मा ने आज से राजस्थान की कमान संभाल ली। राज्यपाल कलराज मिश्र ने जयपुर में अल्बर्ट हॉल के बाहर मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में भजनलाल को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। भजनलाल के साथ ही दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सीपी जोशी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और अशोक गहलोत भी उपस्थित थे।

शपथ समारोह से पहले भजनलाल शर्मा ने सुबह गोविंद देवजी मंदिर में दर्शन किये और टोंक रोड पर पिंजरापोल गोशाला में गायों को चारा खिलाया। उन्होंने अपने दिन की शुरुआत प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की। परिवार के सदस्यों और समर्थकों के साथ शर्मा बाद में गोशाला पहुंचे। उसके बाद उन्होंने घर पहुंचकर अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया।

हम आपको बता दें कि भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक चुने गये हैं। उन्होंने जयपुर की सांगानेर सीट से चुनाव जीता है। 12 दिसंबर को भाजपा विधायक दल की बैठक में शर्मा को विधायक दल का नेता चुना गया था। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रखा जिसे विधायक दल ने स्वीकार कर लिया था।

दूसरी ओर, दीया कुमारी की बात करें तो आपको बता दें कि राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी दो बार विधायक और एक बार सांसद रह चुकी हैं। दीया कुमारी राजसमंद से भाजपा की सांसद थीं और उन्हें विधानसभा चुनाव में जयपुर की विद्याधर नगर सीट से मैदान में उतारा गया था। दीया कुमारी 2013 में सवाई माधोपुर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक बनीं थीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह राजसमंद निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुनी गईं। 51 वर्षीय दीया कुमारी जयपुर के पूर्व राजपरिवार के सवाई भवानी सिंह की बेटी हैं। भवानी सिंह ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 10वीं पैराशूट रेजिमेंट के पैरा कमांडो के लेफ्टिनेंट कर्नल और कमांडिंग ऑफिसर के रूप में गौरव हासिल किया था। दीया कुमारी कई स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संगठनों से जुड़ी हुई हैं।

वहीं, राजस्थान के नए उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा दूदू विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। उन्हें पार्टी की राजस्थान इकाई के दलित चेहरे के रूप में देखा जाता है। बैरवा राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से पीएचडी डिग्री धारक हैं। इस विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बाबूलाल नागर को 35,743 वोटों के अंतर से हराया है।

पेड़ों का अवैध कटान, हाईकोर्ट ने वन सचिव से कहा- क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाए

News web media Uttarakhand : हाईकोर्ट ने कालाढूंगी-बाजपुर के बीच किए जा रहे पेड़ों के अवैध कटान पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई की। कोर्ट ने पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने पर सचिव से पूछा कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाए।

कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 21 दिसंबर की तिथि नियत की है। पूर्व में कोर्ट ने सचिव को 2006 के केंद्र सरकार के वनाधिकार अधिनियम में किन लोगों को इसका लाभ दिया जा सकता है या किसको नहीं, इस बाबत शपथपत्र पेश करने को कहा था लेकिन उनके द्वारा पेश किए गए शपथपत्र में लकड़ी चूगान करने पर जिन लोगों का चालान किया गया उनका ही जिक्र किया गया था, वनाधिकार अधिनियम 2006 का नहीं।

उत्तराखंड: कल से दो दिन राजधानी में जुटेंगे देशभर के साहित्यकार, 36 सत्रों का होगा आयोजन

News web media Uttarakhand : राजधानी दून में आयोजित होने वाले वैली ऑफ वर्ड्स इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का शनिवार से आगाज होगा। दो दिवसीय फेस्टिवल में देशभर के साहित्यकार जुटेंगे और विभिन्न विषयों में आयोजित होने वाले 36 सत्रों में अपने विचार रखेंगे।

फेस्टिवल के निदेशक व पूर्व आईएएस डॉ. संजीव चोपड़ा ने बताया, 16 और 17 दिसंबर को राजपुर रोड स्थित मधुबन होटल में आयोजित होने वाले लिटरेचर फेस्टिवल 100 लेखक प्रतिभाग करेंगे। इस मौके पर 12 पुस्तकों का विमोचन किया जाएगा। साथ ही तीन प्रदर्शनी भी लगाई जाएंगी। फेस्टिवल का मकसद शब्दों के उत्सव को सबके साथ मिलकर मनाना है। बीते वर्षों की तरह इस बार भी फेस्टिवल को खास बनाने के लिए विभिन्न विषयों के सत्रों को जोड़ा गया है। फेस्टिवल में हर उम्र के व्यक्ति के लिए निशुल्क प्रवेश है।

फेस्टिवल में इंग्लिश फिक्शन और नॉन फिक्शन का पुरस्कार नो वे आउट और द जर्नी ऑफ हिंदी लैंग्वेज जर्नलिज्म इन इंडिया को दिया जाएगा, जबकि हिंदी फिक्शन और नॉन फिक्शन का पुरस्कार ‘शहर से 10 किलोमीटर’ और ‘दिनांक के बिना’ को दिया जाएगा।

उत्तराखंड: राष्ट्रीय खेलों में चमकेंगे राज्य ओलंपिक के सितारे

News web media Uttarakhand : उत्तराखंड में अगले साल राष्ट्रीय खेलों से पहले राज्य ओलंपिक होंगे। जिसमें सीनियर वर्ग के लिए ओपन प्रतियोगिता होगी। इसमें दम दिखाने वालों को राष्ट्रीय खेलों में सीधे एंट्री मिलेगी। बेशक वे किसी एसोसिएशन से संबंद्धता रखते हों या नहीं।

उत्तराखंड में अगले साल राष्ट्रीय खेलों से पहले राज्य ओलंपिक होंगे। जिसमें सीनियर वर्ग के लिए ओपन प्रतियोगिता होगी। इसमें दम दिखाने वालों को राष्ट्रीय खेलों में सीधे एंट्री मिलेगी। बेशक वे किसी एसोसिएशन से संबंद्धता रखते हों या नहीं।विभिन्न प्रतियोगिता में जो पहले, दूसरे, तीसरे व चौथे स्थान पर रहे हैं, उनमें से भी खिलाड़ियों को चयनित कर उन्हें खेलने का अवसर दिया जाएगा। विशेष प्रमुख सचिव ने कहा, उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी कर रहा है। जिसे देखते हुए बेहतर खेलने वाला राज्य का कोई भी खिलाड़ी प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर सकेगा।

विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य ओलंपिक खेल जनवरी और फरवरी में होने हैं। देहरादून सहित विभिन्न जिलों में सुविधा के अनुसार इन खेलों का आयोजन किया जाएगा। इसी के आधार पर खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। इसके बाद 25 से 30 दिन के बाद चार से पांच चरणों में कैंप लगेंगे।

पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की सराहना की

न्यूज़ वेब मीडिया उत्तराखंड :  सुप्रीम कोर्ट द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करके जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा छीनने और इसे केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखने के एक दिन बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि शीर्ष अदालत ने अपने फैसले के माध्यम से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत किया।” फैसले के बाद एक लेख में, पीएम मोदी ने लिखा, “11 दिसंबर को अपने फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत किया है – इसने हमें याद दिलाया है कि जो चीज हमें परिभाषित करती है वह एकता के बंधन और साझा प्रतिबद्धता है। सुशासन के लिए।”

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने आदेश दिया कि जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करने का राष्ट्रपति का 2019 का आदेश वैध था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र के हर कदम को चुनौती नहीं दी जा सकती और अदालत सरकारी आदेश की वैधता पर फैसला नहीं दे सकती, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “न्यायालय ने अपने फैसले के माध्यम से भारत की संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखा है, जिसकी हर भारतीय सराहना करता है। न्यायालय ने सही कहा कि 5 अगस्त, 2019 को लिया गया निर्णय संवैधानिकता को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था।” एकीकरण और विघटन नहीं।” प्रधान मंत्री ने कहा कि “बहुत बुनियादी चीजों पर स्पष्ट स्थिति” लेने के बजाय, देश ने द्वंद्व की अनुमति दी, जिससे भ्रम पैदा हुआ।

उन्होंने कहा “दुख की बात है कि जम्मू-कश्मीर इस तरह की मानसिकता का बड़ा शिकार बन गया। आजादी के समय, हमारे पास राष्ट्रीय एकता के लिए एक नई शुरुआत करने का विकल्प था। इसके बजाय, हमने भ्रमित-समाज दृष्टिकोण को जारी रखने का फैसला किया, भले ही इसका मतलब यह हो दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की अनदेखी हुई। लेख में प्रधान मंत्री ने यह भी कहा कि “यह हमेशा मेरा दृढ़ विश्वास था कि जम्मू-कश्मीर में जो कुछ हुआ वह हमारे देश और वहां रहने वाले लोगों के साथ एक बड़ा विश्वासघात था”।

यह दावा करते हुए कि 2019 के बाद से भारत के सबसे उत्तरी हिस्से में माहौल अच्छे के लिए बदल गया है, पीएम ने कहा, “आज, लोगों के सपने अतीत के कैदी नहीं हैं बल्कि भविष्य की संभावनाएं हैं। आखिरकार, विकास, लोकतंत्र , और गरिमा ने मोहभंग, निराशा और हताशा का स्थान ले लिया है।”