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Uttarakhand: प्रदेश के राजकीय हाईस्कूलों के प्रधानाध्यापकों का पांच साल बाद भी स्थायीकरण नहीं, प्रमोशन लटके

स्थायीकरण के नाम पर प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति को फिर लटका दिया गया है। जबकि विभाग में पहले ही प्रधानाध्यापकों के 93 और प्रधानाचार्यों के 90 फीसदी पद खाली हैं।  शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से स्थायीकरण का प्रस्ताव मांगा है।

प्रदेश के राजकीय हाईस्कूलों के प्रधानाध्यापकों का पांच साल बाद भी स्थायीकरण नहीं हो पाया है। जिससे उनके प्रमोशन लटक गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से उनके स्थायीकरण का प्रस्ताव मांगा है। शिक्षा विभाग में वर्ष 2018 के बाद से शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों की पदोन्नतियां लटकी हैं। यही वजह है कि कई शिक्षक 30 से 35 साल की सेवा के बाद एक ही पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

शिक्षकों के मुताबिक वर्षों बाद विभाग में अब पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है लेकिन स्थायीकरण के नाम पर प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति को फिर लटका दिया गया है। जबकि विभाग में पहले ही प्रधानाध्यापकों के 93 और प्रधानाचार्यों के 90 फीसदी पद खाली हैं। राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री रमेश पैन्यूली बताते हैं कि प्रधानाध्यापकों की विभाग में 35 साल की सेवा हो चुकी है।

ऐसे में पदोन्नति के लिए अब स्थायीकरण का कोई औचित्य नहीं है। प्रधानाध्यापकों का प्रवक्ता के पद पर रहते स्थायीकरण हो चुका है। यदि विभाग को प्रधानाध्यापक के पद पर रहते स्थायीकरण करना था तो परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) समाप्त होते ही उनका स्थायीकरण किया जाना चाहिए था। राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व महामंत्री के मुताबिक विभाग में वर्ष 2021 में 350 शिक्षक पदोन्नति पाकर प्रधानाध्यापक बने थे। जिसमें से अधिकतर सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

एलटी से प्रवक्ताओं के पदों पर नहीं हुई पदोन्नति

शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ता के 3500 पदों पर पदोन्नति लटकी है। शिक्षकों के मुताबिक वर्ष 2018 से पदोन्नति न होने से कई शिक्षक एक ही पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

विभाग में पदोन्नति को लेकर जो सूची तैयार की जा रही है, इससे सबसे अधिक नुकसान आरक्षित वर्ग के प्रवक्ताओं को होगा। जिनकी वरिष्ठता सैकड़ों क्रमांक पीछे हो जाएगी। मामले को लेकर संगठन शिक्षा सचिव से मिलेगा। -आरएल आर्य, प्रांतीय अध्यक्ष, एससी,एसटी, ओबीसी वैचारिक महासंघ

Dehradun: जालसाज हेमंत ईश्वर शर्मा की 8.54 करोड़ की संपत्ति अटैच; बिटक्वाॅइन के नाम पर की थी करोड़ों की ठगी

हेमंत ईश्वर शर्मा ने बीटीसी फंड डॉट आईएस नाम की आईएसलैंड में पंजीकृत वेबसाइट के माध्यम से लोगों से निवेश कराया था। ठगी का यह खेल उसने 2014-15 में शुरू किया था। उसके खिलाफ राजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसके आधार पर ईडी ने भी जांच शुरू की।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिटक्वाॅइन में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ठगने के आरोपी दून के हेमंत ईश्वर शर्मा की 8.54 करोड़ रुपये की चल अचल संपत्तियों को अटैच किया है। इससे पहले उसकी 4.56 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है। ईश्वर शर्मा वर्तमान में सुद्धोवाला जेल में बंद है।

ईडी से मिली जानकारी के अनुसार हेमंत ईश्वर शर्मा ने बीटीसी फंड डॉट आईएस नाम की आईएसलैंड में पंजीकृत वेबसाइट के माध्यम से लोगों से निवेश कराया था। ठगी का यह खेल उसने 2014-15 में शुरू किया था। उसके खिलाफ राजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसके आधार पर ईडी ने भी जांच शुरू की। इसी फर्जी योजना से जुड़े मामले में दिनेशपुर थाना, जिला ऊधमसिंह नगर में भी हेमंत ईश्वर शर्मा और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शर्मा ने निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच दिया और यह झूठा दावा किया कि कंपनी से कई विदेशी नागरिक जुड़े हैं, जिससे योजना को विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थित बताया जा सके।
ईडी के अनुसार जब उसने लोगों का भरोसा जीत लिया और बड़ी मात्रा में बिटक्वाॅइन एकत्र कर लिए। इसके बाद उसने अचानक वेबसाइट बंद कर दी, जिससे निवेशकों के साथ धोखा हुआ और उनका धन फंस गया। ब्लॉकचेन विश्लेषण में लगभग 856.23 बिटक्वाॅइन (वर्तमान मूल्य लगभग 200 करोड़ रुपये) की अपराध से अर्जित आय का पता चला। जांच में सामने आया कि इन बिटक्वाॅइन को विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर अचल संपत्तियां खरीदने, वाहन लेने और अपने आवास के नवीनीकरण में इस्तेमाल किया गया। ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि हेमंत शर्मा के पास वेबसाइट से प्राप्त धन के अलावा आय का कोई अन्य वैध स्रोत नहीं था।
बंगला और दो बीएमडब्ल्यू कार
आय का कोई और स्रोत न होने पर भी वह बेहद आलीशान जीवन जी रहा था। बिना किसी औपचारिक आय के उसने दो बीएमडब्ल्यू कारें, देहरादून के एक पॉश इलाके में बंगला और देहरादून व आसपास के क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियां खरीदी हैं। गत 20 मई को ईडी ने उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की थी, जिस पर न्यायालय ने 13 जुलाई को संज्ञान लिया।

Sawan Somwar: शिवभक्ति में डूबा हरिद्वार-ऋषिकेश, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय, उमड़ा आस्था का सैलाब

हरिद्वार-ऋषिकेश आज शिवभक्ति में डूबा है। हर-हर महादेव के जयघोष से शिवालय गूंज रहे हैं। धर्मनगरी में आस्था का सैलाब उमड़ा है।

सावन के पहले सोमवार पर हरिद्वार और ऋषिकेश के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तड़के तीन बजे से ही मंदिरों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।

हरिद्वार के कांवड़ मार्ग स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। कांवड़ क्षेत्र स्थित यह मंदिर भगवान शिव की ससुराल माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा दक्ष, जो भगवान ब्रह्मा के पुत्र और भगवान शिव के ससुर थे, उनका राज्य यहीं था। उन्होंने बताया कि सावन माह में भगवान शिव एक माह तक यहां विराजमान रहते हैं।
इसी कारण इस पूरे महीने मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना का महत्व बढ़ जाता है। मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि सोमवार को सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक भीड़ रहती है। इसलिए कई लोग सुबह पांच बजे से पहले ही दर्शन के लिए पहुंच गए।
वहीं ऋषिकेश में भी सावन के पहले सोमवार पर सोमेश्वर महादेव, चंद्रेश्वर महादेव और वीरभद्र महादेव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिरों के कपाट खुलते ही “बोल बम” और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं। पूरे दिन शिवालयों में दर्शन और पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा।

Dehradun: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: तेजस्विन शंकर को सीएम धामी ने दी बधाई, बोले-तिरंगे को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं

ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की डेकाथलॉन स्पर्धा में तेजस्विन शंकर ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि विश्वास है कि आप भविष्य में भी इसी समर्पण और उत्कृष्टता के साथ भारत का तिरंगा विश्व मंच पर निरंतर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते रहेंगे।

तेजस्विन शंकर इस कठिन 10-स्पर्धाओं वाले अनुशासन में राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। 

Uttarakhand: सीएम हेल्पलाइन, रसोई गैस सिलिंडर रिफिल की शिकायतें बढ़ीं, पहली बार टॉप-10 समस्याओं में शामिल

उत्तराखंड में सीएम हेल्पलाइन 1905 पर पहली बार रसोई गैस सिलिंडर रिफिल में देरी और आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें शीर्ष-10 समस्याओं में शामिल हुई हैं। समीक्षा में शिकायतों के निस्तारण में रुद्रप्रयाग सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला जिला रहा, जबकि कई मैदानी जिले इस मामले में पीछे रह गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा की है, उसमें पहली बार शीर्ष-10 में रसोई गैस सिलिंडर न भरने की शिकायतें आईं हैं। यह आंकड़ा 69.3 प्रतिशत पर रिकॉर्ड हुआ है। वहीं, शिकायतों का समाधान करने में रुद्रप्रयाग जिला सबसे आगे है जबकि मैदानी जिले फिसड्डी हैं।

सीएम हेल्पलाइन की रिपोर्ट में इस बार की रिपोर्ट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के तहत रसोई गैस सिलिंडर रिफिल से जुड़ी शिकायतें पहली बार शीर्ष-10 मुख्य समस्याओं में शामिल हुई हैं, जबकि पिछले दो वर्षों में यह कभी प्रमुख शिकायतों का हिस्सा नहीं थीं। इस श्रेणी में 69.3 प्रतिशत तक का निस्तारण दर्ज किया गया है। इसके अलावा पानी न आने, बिजली कटौती और बिल संशोधन से जुड़ी शिकायतें भी बड़ी संख्या में प्राप्त हुई हैं।

रुद्रप्रयाग सबसे आगे, ऊधम सिंह नगर सबसे नीचे

जिलावार सीएम हेल्पलाइन में आई शिकायतों के निपटारे का प्रतिशत देखें तो रुद्रप्रयाग 36.71 प्रतिशत सफल निस्तारण के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद 36.22 प्रतिशत के साथ टिहरी गढ़वाल दूसरे और 35.76 प्रतिशत के साथ पौड़ी गढ़वाल तीसरे स्थान पर है। देहरादून में निस्तारण का प्रतिशत 32.28 प्रतिशत रहा। वहीं, सूची में सबसे निचले पायदान पर 21.80 प्रतिशत के साथ नैनीताल और 21.08 प्रतिशत के साथ ऊधम सिंह नगर रहे।

शिकायतें बढ़ीं, निपटारे का समय घटा

वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के तुलनात्मक आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार कुल शिकायतों की संख्या बढ़ी है (2024-25 में 1,68,511 के मुकाबले 2025-26 में बढ़कर 2,23,001 हुईं)। इसके बावजूद, प्रमुख विभागों में शिकायतों के निस्तारण का औसत समय काफी कम हुआ है। उदाहरण के तौर पर राजस्व विभाग में जो मामले पहले औसतन 90 दिनों में निपटते थे, वे अब 54 दिनों में हल हो रहे हैं।

शीर्ष-10 शिकायतों वाले विभाग

शिकायत विभाग प्रतिशत
रसोई गैस रिफिलिंग खाद्य आपूर्ति 70.7
बिजली कटौती यूपीसीएल 53
जांच की मांग राजस्व विभाग 52.2
पानी न आना जल संस्थान 50.3
मीटर बदलाव यूपीसीएल 44.3
पानी न आना पेयजल निगम 42.1
शिकायती पत्र गृह विभाग 40
क्षेत्र समस्याएं लोक निर्माण 37.3
अत्यधिक बिल यूपीसीएल 37.3
अवैध सेवा समाप्ति श्रम विभाग 37

NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट, 13 आरोपी अब तक गिरफ्तार

पेपर लीक मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। पेपर लीक और इससे जुड़े अन्य मामलों पर सुनवाई के लिए बनी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने भी बुधवार को इसे रिकॉर्ड पर ले लिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की विशेष जज अनु ग्रोवर बालिगा ने मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट को स्वीकार करते हुए एजेंसी को एनेक्सर्स दाखिल करने का समय भी दे दिया है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि करीब 20,000 पन्नों के एनेक्सर्स की स्कैनिंग की जा रही है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें तीन दिनों के भीतर अदालत में जमा कर दिया जाएगा।

 

Uttarakhand: प्रदेश में 11 IAS-IFS अफसरों के तबादले, यहां देखें किसे मिली कहां की जिम्मेदारी

सचिव नितेश कुमार झा से आईटी हटाकर उन्हें पंचायती राज विभाग सौंपा गया है। सचिव रविनाथ रमन से विद्यालयी शिक्षा हटाकर उन्हें परिवहन विभाग और आयुक्त परिवहन बनाया गया है।

धामी सरकार ने शुक्रवार देर शाम 11 आईएएस, आईएफएस अफसरों के विभागों में फेरबदल कर दिया। इनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किए।

प्रमुख सचिव एल फैनई से आबकारी विभाग हटाया गया है। बाकी विभाग बरकरार रहेंगे। सचिव नितेश कुमार झा से आईटी हटाकर उन्हें पंचायती राज विभाग सौंपा गया है। सचिव रविनाथ रमन से विद्यालयी शिक्षा हटाकर उन्हें परिवहन विभाग और आयुक्त परिवहन बनाया गया है। सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय को वर्तमान विभागों के साथ आईटी की जिम्मेदारी भी दी गई है। सचिव बृजेश कुमार संत से परिवहन हटाते हुए उन्हें आबकारी विभाग दिया गया है।
सचिव डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडेय को वर्तमान प्रभार के साथ गन्ना विकास एवं चीनी विभाग भी दिया गया है। हाल ही में प्रतिनियुक्ति से लौटी सचिव ज्योति यादव की बाध्य प्रतीक्षा खत्म करते हुए विद्यालयी शिक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सचिव युगल किशोर पंत को वर्तमान विभाग के साथ सचिवालय प्रशासन भी सौंपा गया है। सचिव रणवीर सिंह चौहान को सचिवालय प्रशासन, गन्ना एवं चीनी विकास से मुक्त करते हुए वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। आईएफएस डॉ. पराग मधुकर धकाते को विशेष सचिव पंचायती राज के पदभार से अवमुक्त कर दिया गया है। बाकी विभाग बने रहेंगे। अपर सचिव अभिषेक रुहेला को वर्तमान विभागों के साथ राज्य संपत्ति भी सौंपा गया है।

उत्तराखंड में आयुष शिक्षा को बढ़ावा: पहाड़ों में खुलेंगे दो आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, केंद्र को भेजेंगे प्रस्ताव

बैठक में आयुष मंत्री मदन कौशिक ने कहा राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात योग अनुदेशकों को दिए जा रहे 250 रुपये प्रति घंटा मानदेय को बढ़ाकर 500 रुपये करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

प्रदेश में आयुष शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में दो नए आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी है। इसके लिए आयुष मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात योग अनुदेशकों का मानदेय दोगुना करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

विधानसभा स्थित कार्यालय में विभागीय समीक्षा बैठक में आयुष मंत्री मदन कौशिक ने कहा राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात योग अनुदेशकों को दिए जा रहे 250 रुपये प्रति घंटा मानदेय को बढ़ाकर 500 रुपये करने का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, पर्वतीय जिलों में आयुर्वेद शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाल व कुमाऊं मंडल में एक-एक आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। हरिद्वार जिले के रुड़की में ऐलोपैथिक विभाग के नए भवन का निर्माण हो गया है। पुराने भवन को आयुष विभाग को सौंपने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए।

मंत्री ने कहा कि आयुर्वेद मेडिकल काॅलेज ऋषिकुल और गुरुकुल के उच्चीकरण के लिए राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत धनराशि की मांग का प्रस्ताव तैयार किया जाए। पिरान कलियर क्षेत्र में यूनानी चिकित्सालय के लिए चिहिन्त भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग की जद में आने के कारण चिकित्सालय भवन का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। लेकिन क्षेत्र में एक व्यक्ति की ओर से यूनानी चिकित्सालय भवन के लिए भूमि दान देने की बात की जा रही है। इस भूमि के लिए अधिकारी कार्यवाही करें। बैठक में आयुष सचिव रजंना राजगुरु, संयुक्त सचिव महावीर सिंह, निदेशक आरके सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यदायी संस्था से धनराशि वापस लेने के निर्देश
आयुष मंत्री ने कहा कि जाखनीधार स्थित 50 बैड के ध्वस्त चिकित्सालय के पुर्ननिर्माण कार्यों को लेकर आवंटित धनराशि के अनुरूप कार्य न करने की शिकायतें मिल रही हैं, अधिकारी जांच समिति गठित कर कार्यदायी संस्था से धनराशि वापस लेने की कार्रवाई करें। कहा, पीपलकोटी में आयुष्मान आरोग्य मंदिर भवन जर्जर अवस्था में है, इसके लिए जिलाधिकारी से वार्ता कर पीपलकोटी में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर को अन्य भवन में शिफ्ट किया जाए। विभाग में पंचकर्म सहायक, फार्मेसी अधिकारी, योग प्राकृतिक चिकित्सा सहायक पदों पर नियुक्त कार्मिकों को आगामी एक सप्ताह के भीतर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाए।

Uttarakhand: क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर कर्मचारियों को बना दिया निकायों में अधिशासी अधिकारी, आदेशों से मची हलचल

उत्तराखंड के शहरी निकायों में अधिशासी अधिकारियों की तैनाती को लेकर शहरी विकास निदेशालय के हालिया आदेशों ने प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विभाग ने नियमित ईओ की कमी को पूरा करने के लिए क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक और अकाउंट कर्मचारियों सहित विभिन्न संवर्गों के अधिकारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी है।

शहरी विकास निदेशालय ने नगर निकायों में क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर कर्मचारियों को अधिशासी अधिकारी (ईओ) बना दिया। खास बात ये है कि विभाग के पास 60 ईओ हैं, जिनमें से कई को नगर निगमों में भेज दिया गया है। उनकी जगह खाली हुए पदों पर ये तैनाती बतौर प्रभारी ईओ की गई हैं।

प्रभारियों की तैनाती के सभी आदेश अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी के नाम से जारी हुए हैं। इनमें अकाउंट कर्मचारी सतीश कुमार को नगर पालिका महुआखेड़ागंज में प्रभारी ईओ, कर अधीक्षक हेमंत कुमार गुप्ता को नगर पंचायत लंढौरा में, निदेशालय में अटैच चल रहे मुख्य सफाई निरीक्षक गुरमीत सिंह को नगर पंचायत लंढौरा में, टैक्स वसूली कर्मचारी रोशन सिंह पुंडीर को नगर पालिका गौचर में, कर निरीक्षक तारिक खान को नगर पालिका टिहरी, कर निरीक्षक सरोज गौतम का नगर पंचायत नानकमत्ता, कर निरीक्षक पूजा को नगर पालिका बाजपुर, क्लर्क अंकित राणा को नगर पंचायत पिरान कलियर, क्लर्क कुलदीप चौहान को नगर पंचायत ढंडेरा, कर निरीक्षक यशवीर सिंह को नगर पंचायत तपोवन, अकाउंट कर्मचारी दीपक बुडलाकोटि को नगर पालिका कालाढूंगी, क्लर्क भरत पंवार को नगर पालिका देवप्रयाग, क्लर्क कुलदीप नैथानी को नगर पंचायत ऊखीमठ, अकाउंट कर्मचारी राकेश कोटिया को नगर पंचायत जसपुर, सफाई निरीक्षक कुसुम मटूडा को नगर पालिका उत्तरकाशी, क्लर्क वासुदेव डंगवाल को नगर पंचायत चमियाला, कर निरीक्षक पंकज सिंह को नगर पंचायत लालकुआं, कर निरीक्षक प्रेम सिंह रावत को नगर पालिका बड़कोट में प्रभारी ईओ बना दिया गया है।

जो पूरे कॅरिअर में नहीं बन सकते, उन्हें सीधे बना दिया ईओ

सफाई निरीक्षक अपने कॅरिअर की सभी पदोन्नति लेने के बाद भी कभी अधिशासी अधिकारी नहीं बन सकते। दूसरी बार, शहरी निकायों में ईओ की भर्ती उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से होती है। लिहाजा, सवाल उठ रहे हैं कि शहरी विकास विभाग ने नियमों का दरकिनार कर सफाई निरीक्षकों को ये जिम्मेदारी सौंप दी। उत्तर प्रदेश के 2017 के आदेश के अनुसार ईओ का प्रभार केवल एसडीएम स्तर के अधिकारी को ही दिया जा सकता है। उत्तराखंड में भी इसका अनुपालन होता रहा है। उत्तराखंड स्थानीय निकाय(केंद्रीकृत) सेवा नियमावली 2019 के तहत ईओ पद पर नियुक्ति पदोन्नति(सात-आठ वर्ष की सेवा या वरिष्ठता) या आयोग के माध्यम से होनी चाहिए।

हाईकोर्ट भी दे चुका आदेश

दो मई 2025 को नैनीताल हाईकोर्ट ने निकायों में कर्मचारियों की कमी, प्रभारी व्यवस्था पर अहम फैसला सुनाया था। न्यायालय ने सचिव शहरी विकास को याचिकाकर्ता अनु पंत की याचिका पर चार माह के भीतर निर्णय का निर्देश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश के अधिकांश निकायों में लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को अधिशासी अधिकारी, कर संग्राहक, सफाई निरीक्षक और सहायक लेखाकार जैसे जिम्मेदार पदों का प्रभार सौंपा गया है। इस व्यवस्था से निकायों का कामकाज और आम जनता को मिलने वाली बुनियादी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। राज्य सरकार के पक्ष और सभी पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए हाईकोर्ट ने सचिव शहरी विकास को इस संबंध में आदेश दिया था।

ये व्यवस्था पूर्व से चली आ रही है। जो पूर्व में प्रभारी ईओ रहे हैं, उन्हीं को ईओ बनाया गया है। हमारे पास ईओ के पद रिक्त हैं। इस कारण ये तैनातियां की गई हैं। -राम सिंह कैड़ा, शहरी विकास मंत्री

 

Char Dham Yatra: 94 दिन की यात्रा, दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 45 लाख पार; बद्रीनाथ पहुंचे सर्वाधिक

94 दिन की यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 45 लाख पार हो चुकी है जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में कुल 41 लाख 47 हजार 540 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे थे।

प्रदेश में संचालित चारधाम यात्रा इस बार भी नया रिकॉर्ड बना रही है। 94 दिन की यात्रा में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 45 लाख पार हो चुकी है जबकि बीते वर्ष इसी अवधि में कुल 41 लाख 47 हजार 540 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे थे। पिछले वर्ष की तुलना में 3.52 लाख यात्री अधिक पहुंचे हैं।

अभी तक सर्वाधिक 15 लाख 27 हजार 936 श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन को पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 12 लाख 19 हजार 744 था। इस प्रकार यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या 03 लाख 08 हजार 192 अधिक रही है।
प्रदेश सरकार की ओर से मानसून सीजन को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं आपदा प्रबंधन पर पूरी नजर रखे हुए हैं।
19 अप्रैल को शुरू हुई चारधाम यात्रा मंगलवार को 94 दिन पूर्ण कर चुकी है। इस अवधि में बद्रीनाथ में सर्वाधिक 15,27, 936 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे हैं। जबकि केदारनाथ में 14,11,861, गंगोत्री में 7,03,064 और यमुनोत्री धाम में 6,47,447 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। हेमकुंड साहिब में भी यात्रियों की संख्या 2,10,896 पहुंच चुकी है।
चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। मौसम खराब होने के बावजूद चारों धामों में यात्रियों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। मानसून को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री