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South Korea: दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति वर्षों बाद राष्ट्रपति भवन पहुंचे, ऐतिहासिक ब्लू हाउस में शिफ्ट हुए

पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के कार्यकाल में बेसहारा छोड़ दिया गया राष्ट्रपति भवन ब्लू हाउस एक बार फिर से आबाद हो गया और मौजूदा राष्ट्रपति ने आधिकारिक राष्ट्रपति भवन में शिफ्ट करने का फैसला किया है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग सोमवार को आधिकारिक राष्ट्रपति भवन चोंग वा डे पहुंचे, जून में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह ली जे म्युंग का पहला राष्ट्रपति भवन का दौरा था। यह राष्ट्रपति भवन बीते तीन वर्षों से खाली पड़ा है क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल ने राष्ट्रपति भवन को रक्षा मंत्रालय परिसर में स्थानांतरित कर दिया था।

ऐतिहासिक है दक्षिण कोरिया का ब्लू हाउस
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास की इमारत बेहद ऐतिहासिक है और इसे ब्लू हाउस कहा जाता है। 9 मई 2022 के बाद पहली बार कोई दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ब्लू हाउस गया है। 9 मई 2022 को तत्कालीन राष्ट्रपति मून जे इन के कार्यकाल का आखिरी दिन था। उनके बाद राष्ट्रपति बने यून सुक योल ने राष्ट्रपति भवन को रक्षा मंत्रालय की इमारत में शिफ्ट कर दिया था। दिसंबर 2024 में यून सुक योल पर देश में मार्शल लॉ लगाने का आरोप लगा और उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया। उसके बाद हुए चुनाव में ली जे म्युंग ने सत्ता संभाली।

यून सुक योल ने रक्षा मंत्रालय में शिफ्ट कर दिया था राष्ट्रपति भवन
ब्लू हाउस उत्तरी सियोल में शहर की भागदौड़ से दूर एक पहाड़ी के निचले इलाके में बना है। 62 एकड़ में फैली ये ऐतिहासिक इमारत ऐतिहासिक जियोंगबोकगुंग महल के पास स्थित है और दक्षिण कोरिया के जापान के शासन से आजाद होने के बाद से ही राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास रहा है। हालांकि यून सुक योल का मानना था कि राष्ट्रपति भवन लोगों की पहुंच से दूर है और ज्यादा लोकतांत्रिक होने का हवाला देते हुए रक्षा मंत्रालय परिसर में राष्ट्रपति भवन को स्थानांतरित कर दिया। इस काम में भारी-भरकम रकम खर्च हुई, जिसे लेकर यून की आलोचना भी हुई थी। यून ने ब्लू हाउस को संग्रहालय में तब्दील कर दिया और इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया था।

 

Veer Bal Diwas: राष्ट्रपति मुर्मू ने दिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, 20 बच्चों की प्रतिभा को मिला सम्मान

वीर बाल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। बहादुरी, खेल, विज्ञान, कला, पर्यावरण और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए बच्चों को यह राष्ट्रीय सम्मान दिया गया।

वीर बाल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। इन बच्चों को बहादुरी, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि इन बच्चों ने न केवल अपने परिवार और समाज, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मान देशभर के अन्य बच्चों को भी प्रेरित करेगा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन देगा।

साहिबजादों के बलिदान को किया याद

वीर बाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पहले दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चारों साहिबजादों ने सत्य और न्याय के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि सबसे छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की वीरता को भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर में सम्मान के साथ याद किया जाता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश की महानता इस बात से तय होती है कि उसके बच्चे कितने देशभक्त और उच्च आदर्शों से प्रेरित हैं। उन्होंने खुशी जताई कि पुरस्कार पाने वाले बच्चों ने बहादुरी, कला-संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

बच्चों के उल्लेखनीय असाधारण कार्य

उन्होंने सात वर्षीय शतरंज खिलाड़ी वाका लक्ष्मी प्रग्निका, साहसिक कार्यों के लिए सम्मानित अजय राज और मोहम्मद सिदान पी तथा दूसरों की जान बचाते हुए शहीद हुए व्योमा प्रिया और कमलेश कुमार का विशेष उल्लेख किया। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमावर्ती क्षेत्र में सैनिकों को सहायता पहुंचाने वाले श्रवण सिंह और दिव्यांग होते हुए भी खेल जगत में उपलब्धियां हासिल करने वाली शिवानी होसुरु उप्पारा की भी सराहना की।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि इस वर्ष 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 बच्चों को यह सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार यह साबित करते हैं कि आत्मविश्वास और समर्पण के बल पर संसाधनों की कमी को भी मात दी जा सकती है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।

 

मसूरी चल रहा है विंटरलाइन कार्निवाल, आमजन के साथ पर्यटक भी ले रहे हैं इसका आनंद

मसूरी विंटरलाइन कार्निवाल में गांधी चौक, अटल उद्यान और लंढौर चौक पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें लोक कलाकारों ने दर्शकों का मनोरंजन किया। नगर पालिका टाउनहाल में रात्रि कार्यक्रम हुए। देहरादून से मसूरी तक साइकिल रैली आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसका उद्देश्य खेल को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना था।

मसूरी विंटरलाइन कार्निवाल के दूसरे दिन गुरुवार को गांधी चौक, अटल उद्यान और लंढौर चौक पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोक कलाकारों के साथ पर्यटकों ने भी आयोजन का आनंद लिया। रात्रि कार्यक्रम नगर पालिका टाउनहाल में आयोजित किए गए, जो देर रात तक चले।

लंढौर चौक पर लोक गायक अर्जुन सेमल्याट ग्रुप ने गीतों और लोकनृत्य से दर्शकों का मनोरंजन किया। गांधी चौक पर लोक गायिका कविता रावत ग्रुप, जय बद्रीनाथ आजीविका समूह और लोकगायक बिक्रम कपरवाण ग्रुप ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोहा।

लोकगायिका कुसुम नेगी ग्रुप ने पांडव नृत्य और हारूल, रासौ-तांदी की शानदार प्रस्तुतियां दीं। गढ़वाल सभा के कलाकारों ने भस्मासुर नृत्य नाटिका का शानदार मंचन किया।

हालांकि, शहीद स्थल पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में विलंब हुआ, क्योंकि धरना दे रहे स्ट्रीट वैंडर्स ने मंच खाली करने से मना कर दिया। इसके कारण कार्यक्रम गांधी चौक पर आयोजित किए गए। विंटरलाइन कार्निवाल के तहत नगर पालिका टाउनहाल में मिजाज बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी। इसके बाद उत्तराखंड के लोकप्रिय गायक रूहान भारद्वाज और करिश्मा शाह का नाइट कार्यक्रम हुआ।

देहरादून से मसूरी तक साइकिल रैली

विंटरलाइन कार्निवाल के तहत देहरादून से मसूरी तक साइकिल रैली आयोजित की गई। इस रैली में सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिन्होंने देहरादून से मसूरी तक लगभग 35 किलोमीटर की दूरी तय की।

यह आयोजन न केवल खेल को बढ़ावा देने के लिए था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक प्रयास था। रैली का उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना और साइकिलिंग को एक लोकप्रिय गतिविधि बनाना है। इस अवसर पर आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार वितरित किए।

यूपी: आज राष्ट्र को समर्पित होंगी अटल बिहारी वाजपेयी सहित ये तीन प्रतिमाएं, 2022 से चल रहा निर्माण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लखनऊ में बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करेंगे। इसके बनने की शुरुआत 2022 से शुरू हुई थी।

बसंतकुंज योजना में बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो गई हैं। पीएम यहां पर लगी तीन विभूतियों अटल बिहारी वापजेयी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीन दयाल उपाध्याय की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण भी करेंगे। इन विभूतियों के संस्मरणों को संजोने के लिए बने म्यूजियम का लोकार्पण भी होगा।

इस आयोजन में डेढ़ लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का अनुमान है। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे। प्रधानमंत्री करीब दो बजे आयोजन स्थल पर हेलीकाॅप्टर से पहुंचेंगे। लोकार्पण के लिए आयोजन स्थल के साथ पूरे शहर को सजाया व संवारा गया है। आयोजन स्थल को भव्य बनाने के लिए कई प्रदेशों से बेहतरीन फूल वाले पौधे मंगाए गए हैं।
पूरे शहर में डिवाइडरों को साफ कर रंगा गया है। प्रमुख चौराहों और मार्गों पर स्ट्रीट लाइट के पोल पर रंगीन लाइट वाली झालरें लगाई गई हैं। दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी कराई गई है। सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आयोजन में आसपास के कई जिलों से करीब 2000 बसें आ रही हैं। इनकी पार्किंग के खास इंतजाम किए गए हैं। कुल 13 पार्किंग बनाई गई हैं। इनमें 2600 बसें और 2000 कारें खड़ी हो सकेंगी। व्यवस्था बनी रहे इसके लिए अफसरों और कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।
प्रेरणा स्थल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमाएं लगी हैं।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल 65 एकड़ में फैला है और इसके निर्माण पर 232 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका निर्माण दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार ने किया है जिन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया था।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का निर्माण मूर्तिकार माटू राम ने पूरा किया है।
तीनों विभूतियों की प्रतिमाओं के निर्माण पर 21 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

पहले प्रतिमाओं को होगा अनावरण

बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री सबसे पहले राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं का अनावरण कर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीयता की भावना के संचार के लिए तिरंगा गुब्बारे छोड़े जाएंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र नायकों को समर्पित म्यूजियम को लोकार्पण करेंगे। वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित गैलरियों को देखेंगे। पहली गैलरी में डिजिटल सिस्टम के जरिये राष्ट्र नायकों का संक्षिप्त जीवन परिचय दिखाया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री म्यूजियम परिसर में ही बनाए गए भारत माता, जनसंघ के प्रतीक चिह्न दीपक और सुदर्शन चक्र गैलरी में जाएंगे। राष्ट्र नायकों जुड़ी हुई वस्तुओं को देखने के लिए प्रथम तल पर बनी गैलरी में भी जाएंगे। म्यूजियम से बाहर निकल कर प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल पर बने मंच से कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करेंगे।

बदला रहेगा पूरे शहर का यातायात

25 दिसंबर को प्रधानमंत्री राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करने राजधानी आ रहे हैं। कार्यक्रम के मद्देनजर ट्रैफिक पुलिस ने डायवर्जन जारी किया है। 24 दिसंबर की रात 12 बजे से बृहस्पतिवार को कार्यक्रम की समाप्ति तक यातायात बदला रहेगा। इमरजेंसी की स्थिति में प्रतिबंधित मार्ग पर एंबुलेंस, फायर सर्विस, स्कूली वाहन, शव वाहन को रास्ता दिया जाएगा। इसके लिए ट्रैफिक कंट्रोल नंबर 9454405155 पर संपर्क किया जा सकता है।

आंतरिक डायवर्जन
मलीहाबाद चौराहे से बाजनगर किसान पथ, छंदोईया की ओर भारी या अन्य वाहन नहीं जा सकेंगे। इन्हें जीरो पॉइंट मोहान रोड होकर जाना होगा।
मुंजासा तिराहे से बाजनगर किसान पथ, छंदोईया की ओर वाहन नहीं जाएंगे। ये वाहन जीरो पॉइंट मोहान रोड होकर जा सकेंगे।
बाजनगर किसान पथ अंडरपास से छंदोईया बाईपास तिराहे की ओर वाहन नहीं जा सकेंगे। ये वाहन बाजनगर किसान पथ अंडरपास से किसान पथ होकर जाएंगे।
कसमंडी (हमसफर लॉन) अंडरपास से अंधे की चौकी तिराहे की ओर वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें किसानपथ होकर जाना होगा।
छंदोईया बाईपास तिराहे से कार्यक्रम स्थल, भिठौली तिराहे की तरफ वाहन नहीं जा सकेंगे। ये वाहन अंधे की चौकी तिराहे, बाजनगर किसान पथ अंडरपास से किसान पथ या दुबग्गा तिराहे होकर जाएंगे।
तिकोनिया तिराहे से दुबग्गा तिराहे, छंदोईया बाईपास तिराहे की तरफ भारी वाहन नहीं जाएंगे। ये वाहन नहर तिराहे मोहान रोड, खुशहालगंज बाजार होते हुए खुशहालगंज किसान पथ अंडरपास से किसानपथ होकर जाएंगे।
भिठौली तिराहे से कार्यक्रम स्थल, छंदोईया बाईपास तिराहे की तरफ वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें सैरपुर तिराहे, अस्ति क्राॅसिंग, बख्शी का तालाब होकर इंदौराबाग अंडरपास से किसान पथ या इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे से होकर जाना होगा।
नया पक्कापुल तिराहे, कुड़ियाघाट तिराहे से कार्यक्रम स्थल, घैला तिराहे की ओर वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें रूमी गेट, कोनेश्वर चौराहे, बालागंज चौराहे, दुबग्गा तिराहे से होकर जाना होगा।
दुबग्गा तिराहे से वाहन छंदोईया या सीतापुर बाईपास की तरफ नहीं जाएंगे। इन्हें तिकोनिया तिराहे से होकर जाना होगा।
नहरपुल तिराहे से वाहन बुद्धेश्वर की तरफ नहीं जाएंगे। इन्हें जीरो पॉइंट या किसान पथ के ऊपर से होकर जाना होगा।

कुछ ऐसा रहेगा बाहर से आने वाले वाहनों का डायवर्जन

कानपुर की तरफ से आने वाले भारी वाहन अंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ समेत अन्य जिलों की ओर जाने के लिए कानपुर, फतेहपुर, लालगंज, बछरांवा, हैदरगढ़, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जाएंगे।
उन्नाव की तरफ से आने वाले भारी वाहन उन्नाव के दही चौकी से पुरवा, मौरावां, बछरावां, हैदरगढ़, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जा सकेंगे। इसके अलावा उन्नाव (ललऊखेड़ा) से बीघापुर लालगंज, गुरुबक्शगंज, बछरावां से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर भी जा सकेंगे।
सीतापुर की तरफ से आने वाले भारी वाहन चाहलारी होते हुए बहराईच से गोंडा व बलरामपुर होकर जा सकेंगे।
हरदोई की तरफ से आने वाले भारी वाहन बघौली, बांगरमऊ, उन्नाव (ललऊखेड़ा), बीघापुर लालगंज, गुरुबक्शगंज, बछरांवा से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जा सकेंगे।
सुल्तानुपर रोड / हैदरगढ़ (जनपद बाराबंकी) की तरफ से आने वाले भारी वाहन हैदरगढ़ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जाएंगे।
रायबरेली रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन बछरावां से हैदरगढ़ होकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जाएंगे।
बाराबंकी रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन हैदरगढ, बछरावां, लालगंज, फतेहपुर, चौडगरा होकर जा सकेंगे। इसके अलावा बाराबंकी रोड से बहराईच के चहलारी घाट से सीतापुर होकर भी जा सकते हैं।

चप्पे-चप्पे पर रहेगी की पुलिस की नजर

 प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। जेसीपी एलओ बबलू कुमार ने बताया कि कार्यक्रम स्थल व उसके आसपास के पूरे इलाके पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है। हर जगह चेकिंग की जा रही है। सुरक्षा के लिए 18 पुलिस उपायुक्त, 26 अपर पुलिस उपायुक्त, 80 सहायक पुलिस आयुक्त, 189 इंस्पेक्टर, 1367 दरोगा, 214 महिला दरोगा, 4312 सिपाही, 997 महिला सिपाही, 18 कंपनी पीएसी, 4 कंपनी आरएएफ, 8 बम निरोधक दस्ता, एनएसजी की दो टीमें, एटीएस की एक टीम, एंटी ड्रोन की दो टीमें, एक एंटी माइन टीम, 14 एंटी सबोटाज टीम तैनात की गई है। 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी की जा रही है। क्विक रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है। पुलिस की चार टीमों को रिजर्व में रखा गया है।

Bangladesh: मोहम्मद यूनुस से नाराज हुआ अमेरिका, शेख हसीना की पार्टी को मिल सकती है प्रतिबंध से राहत

बांग्लादेश में जारी अराजकता के हालात पर अमेरिका ने नाराजगी जताई है। अमेरिका की विदेश मामलों की समिति ने मोहम्मद यूनुस को पत्र लिखा है। इस पत्र में मोहम्मद यूनुस के राजनीतिक पार्टियों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की आलोचना की गई है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक तरफ बांग्लादेश में कानून व्यवस्था खराब है और अराजकता का माहौल है। वहीं दूसरी तरफ अब अमेरिका भी मोहम्मद यूनुस से नाराज हो गया है। दरअसल अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति ने मोहम्मद यूनुस को पत्र लिखा है। इस पत्र में अमेरिकी सांसदों ने एक राजनीतिक पार्टी पर पूरी तरह से प्रतिबंध को गलत ठहराया है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में अवामी लीग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बांग्लादेश के हालात पर जताई चिंता
अमेरिका के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स की विदेश मामलों की समिति ने मोहम्मद यूनुस को लिखे पत्र में बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं पर भी नाराजगी जाहिर की। पत्र में लिखा गया है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार देश की राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाए, जिससे देश में निष्पक्ष, मुक्त और शांतिपूर्वक चुनाव हो सकें। लेकिन हमें आशंका है कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि अंतरिम सरकार ने राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियों को बर्खास्त कर दिया है और साथ ही त्रुटिपूर्ण इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल को भी फिर से शुरू कर दिया है।

‘एक राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध पूरी तरह से गलत’
अमेरिकी सांसदों ने लिखा, ‘2018 और 2024 के आम चुनाव निष्पक्ष नहीं थे और फरवरी में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट में बताया गया कि जुलाई और अगस्त 2024 में बांग्लादेश में भड़की हिंसा में करीब 1400 लोग मारे गए। असल में बांग्लादेश को इन घटनाओं से सीख लेकर लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए, लेकिन उसकी जगह वहां बदले की कार्रवाई शुरू हो गई है। हम चिंतित हैं कि एक राजनीतिक पार्टी को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना गलत है।’

कुछ माह पहले ही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग पार्टी की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध में अवामी लीग के ऑनलाइन मंचों पर होने वाली गतिविधियां भी शामिल हैं। यह प्रतिबंध तब लगाया गया, जब कई संगठन अवामी लीग पर प्रतिबंध की मांग कर रहे थे।

 

SIR: उत्तराखंड के 90 हजार मतदाताओं को लेना होगा बड़ा फैसला, दो जगह वोट होने पर बढ़ेगी मुसीबत

एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है।

उत्तराखंड के करीब 90 हजार मतदाताओं को चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने से पहले ही अहम फैसला लेना होगा। उन्हें बतौर सर्विस मतदाता या अपने गांव की वोटर लिस्ट में से कोई एक चुनना होगा। वहीं, सामान्य मतदाता, जिनके वोट शहरों के साथ ही गांव की मतदाता सूची में भी हैं, उन्हें भी कोई एक वोट कटवाना होगा।

प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से फिलहाल प्री एसआईआर गतिविधियों के तहत मतदाताओं की मैपिंग का काम किया जा रहा है। एक जनवरी 2025 को जारी हुई मतदाताओं की जानकारी के हिसाब से प्रदेश में 89,812 सर्विस मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 87,103 पुरुष और 2709 महिला मतदाता थे। ये ऐसे मतदाता हैं जो कि सेना या अर्द्ध सैनिक बलों में सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी की सर्विस के दौरान ही बतौर सर्विस मतदाता वोट बने हुए हैं।

अब एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने इन सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है। अगर कोई सर्विस मतदाता बनकर गांव या शहर का अपना वोट हटवाना चाहता तो उसे चुनाव आयोग की वेबसाइट http://voters.eci.gov.inमें फॉर्म-7 भरना होगा।

अगर कोई गांव-शहर में अपना वोट चाहता है और सर्विस मतदाता की सूची से नाम हटाना चाहता है तो उसे सर्विस वोटर पोर्टलhttp://svp.eci.gov.in के माध्यम से अपना सर्विस वोट हटवाना होगा। जनवरी में जारी हुई मतदाता सूची के हिसाब से प्रदेश में कुल 84,29,459 मतदाता हैं, जिनमें 43,64,667 पुरुष मतदाता, 40,64,488 महिला मतदाता और 304 थर्ड जेंडर शामिल हैं।

प्रधान चुनाव, निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट अलग
कई मतदाताओं को ये भी कंफ्यूजन है कि गांव से नाम कटने पर वह प्रधान या नगर पालिका चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, एसआईआर का काम केवल चुनाव आयोग की मतदाता सूची के लिए हो रहा है, जिससे लोकसभा या विधानसभा के चुनाव में वोट डाला जाता है। पंचायत या नगर निकायों के चुनाव की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग संभालता है, जिसकी वोटर लिस्ट अलग बनती है। उसका इससे कोई लेना देना नहीं है।

दो जगह वोट होने पर फंस सकते हैं कानूनी पचड़े में
अगर आपका वोट दो जगह होगा तो आप कानूनी पचड़े में भी फंस सकते हैं। लिहाजा, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि गांव या शहर में से किसी एक ही मतदाता सूची मे अपना नाम रखें। किसी एक जगह से हटवा लें। एसआईआर के दौरान पकड़ में आने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें सजा का भी प्रावधान है।

जितने भी सर्विस मतदाता हैं, वह किसी एक जगह ही अपना वोट सुनिश्चित कर लें। नियम के हिसाब से किसी का भी वोट दो जगह नहीं हो सकता है। हटवाने के बाद जरूरत पड़ने पर नए सिरे से कभी भी वोट बनवाया जा सकता है।
-डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड

Career Tips: फीडबैक से परेशान न हों, यह आपके प्रयासों को सही दिशा में रखता है और प्रदर्शन को बेहतर बनाता है

अक्सर फीडबैक में पुरानी गलतियों पर जोर दिया जाता है, जबकि अच्छे लीडर भविष्य पर ध्यान देते हैं। फीडबैक का उद्देश्य आपकी गलतियां गिनाना नहीं, बल्कि आपके प्रयासों को सही दिशा देना है।

आज संगठनों में फीडबैक पर तो जोर दिया जा रहा है, लेकिन उसका असली उद्देश्य कई बार लोग भूल जाते हैं। फीडबैक का मकसद व्यक्ति को अपने काम को बेहतर समझने, अपनी क्षमता का सही उपयोग करने और टीम के साथ प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करना होता है। इसमें लीडर की भूमिका अहम होती है। उन्हें ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जहां फीडबैक डर नहीं, बल्कि सीखने का अवसर बने। प्रभावी फीडबैक वही है, जो स्पष्ट रूप से बताए कि क्या सुधारना है और आगे कैसे बेहतर किया जा सकता है।

गलतियां ढूंढने वाला न बनें

जब लीडर हर बात में गलती निकालने वाला न होकर टीम का साथ देने वाला बनता है, तभी अच्छे काम की संस्कृति बनती है। ऐसा लीडर अपने व्यवहार से यह दिखाता है कि वह अपनी टीम पर भरोसा करता है, उनकी परवाह करता है और उनके साथ खड़ा है। इससे कर्मचारी बिना डर के अपनी बात कह पाते हैं।

अगर कोई सहकर्मी काम में परेशान है, तो उसे डांटने के बजाय उसकी समस्या को समझना और उसे यह भरोसा दिलाना कि वह मुश्किलों को पार कर सकता है, एक समझदार नेतृत्व की पहचान है। जब कर्मचारियों को ऐसा सहयोग मिलता है, तो वे खुद बेहतर करने की कोशिश करते हैं।

सकारात्मक नतीजों पर दें ध्यान

अक्सर फीडबैक में पुरानी गलतियों पर जोर दिया जाता है, जबकि अच्छे लीडर भविष्य पर ध्यान देते हैं। जब कर्मचारियों से उनके आगे के लक्ष्यों के बारे में पूछा जाता है और लक्ष्य स्पष्ट व सकारात्मक होते हैं, तो उनमें स्वाभाविक रूप से उत्साह पैदा होता है। इसी दृष्टिकोण से समस्या को देखने पर नए अवसर भी दिखाई देने लगते हैं।

छिपे अवसर पहचानें

जब लीडर और कर्मचारी दोनों के बीच यह स्पष्ट हो जाता है कि असली लक्ष्य क्या है, तब समस्या को एक नई दृष्टि से देखा जा सकता है। इस चरण में समस्या को केवल तुरंत सुलझाने पर ध्यान देने के बजाय यह समझना जरूरी होता है कि यह बेहतर परिणाम पाने में कैसे सहायक हो सकती है। अक्सर ऐसी समस्याएं सुधार के नए रास्ते खोलती हैं, मूल्यों और लक्ष्यों को पाने के लिए नए तरीकों की ओर ले जाती हैं, या संगठन में छिपी हुई बड़ी कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर देती हैं।

कार्य योजना बनाते चलें

लीडर और कर्मचारी मिलकर पहचाने गए अवसर को एक स्पष्ट और व्यावहारिक कार्य योजना में बदलते हैं, जिसमें यह तय किया जाता है कि कौन-सा लक्ष्य हासिल करना है और उसे कब तक पूरा करना है। इसके बाद लीडर समय-समय पर फीडबैक देते रहते हैं, तो इस पूरी प्रक्रिया में निरंतर सीख और सुधार को भी समान रूप से महत्व दिया जाता है।

Uttarakhand News: प्रदेश में रिजॉर्ट की तर्ज पर बनेंगे नेचुरोपैथी अस्पताल, वेलनेस टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

Uttarakhand: प्रदेश में रिजॉर्ट की तर्ज पर बनेंगे नेचुरोपैथी अस्पताल, वेलनेस टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा,जमीन चिह्नित

– चंपावत, पिथौरागढ़ में जमीन चिह्नित, बागेश्वर जिले में चल रही प्रक्रिया

– आयुष विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

प्रदेश के वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पहली बार नेचुरोपैथी अस्पताल (प्राकृतिक चिकित्सा) खोलने की तैयारी है। ये अस्पताल रिजॉर्ट की तर्ज पर बनाए जाएंगे। जहां पर बिना दवाइयों के प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से इलाज किया जाएगा। आयुष विभाग ने चंपावत व पिथौरागढ़ जिले में जमीन चयनित कर ली है। जबकि बागेश्वर में जमीन तलाशी जा रही है।

उत्तराखंड में आयुष व वेलनेस से पर्यटन को जोड़ने के लिए पहले चरण में प्रदेश के तीन जिलों में नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने की तैयारी की रही है। पिथौरागढ़ के बलवा कोट व चंपावत के कोली ढेक में जमीन का चयन किया गया। इसके अलावा बागेश्वर जिले में जमीन चयनित करने की प्रक्रिया चल रही है। आयुष विभाग की ओर से नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने का प्रस्ताव बना रहा है। जल्द ही केंद्र सरकार को वित्तीय सहायता के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। आयुष मिशन के तहत केंद्र सरकार नेचुरोपैथी अस्पताल के लिए वित्तीय सहायता देगी

दवाइयों की जगह प्राकृतिक तरीके से होगा इलाज

नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धति में जड़ी-बूटियों, आहार, व्यायाम, मालिश, जल चिकित्सा, योग और एक्यूपंक्चर का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति से बीमारी के मूल कारण को ठीक करना व समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है न कि सिर्फ लक्षणों का इलाज करना है। नेचुरोपैथी में आहार और पोषण, जल चिकित्सा, मृदा चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, योग और व्यायाम चिकित्सा, जड़ी-बूटी, एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर, मालिश चिकित्सा, उपवास, मन शरीर चिकित्सा की सुविधा रहेगी।

आयुष ग्राम योजना को केंद्र सरकार ने किया बंद

केंद्र सरकार ने बीते वर्ष आयुष मिशन के तहत आयुष ग्राम योजना को शुरू किया था। इस योजना के तहत उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में एक-एक आयुष ग्राम बनाए जाने थे, लेकिन अब केंद्र सरकार ने आयुष ग्राम योजना बंद कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना कि आयुष ग्राम की जगह केंद्र सरकार नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने के लिए वित्तीय सहायता देगी। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

पहले चरण में तीन जिलों में नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। ये अस्पताल रिजॉर्ट की तर्ज पर स्थापित होंगे। जहां पर प्राकृतिक चिकित्सा के साथ ठहरने की बेहतर सुविधा मिलेगी। इससे प्रदेश में वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। -दीपेंद्र चौधरी, सचिव आयुष

उत्तरांचल जन विकास समिति की पहल: नैनबाग में सीयूईटी काउंसलिंग और योग अभ्यास

नैनबाग (टिहरी  गढ़वाल)। उत्तरांचल जन विकास समिति  (देहरादून)द्वारा 13 तारीख को नैनबाग स्थित सरदार सिंह राजकीय इंटर कॉलेज और

एसएसआर मॉडल इंटर कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक शैक्षिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा के प्रति जागरूक करना तथा योग के माध्यम से मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य का महत्व समझाना रहा।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सीयूईटी परीक्षा की महत्ता, पात्रता, परीक्षा पैटर्न, विषय चयन, तैयारी की रणनीति और करियर अवसरों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा की गई काउंसलिंग से विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान हुआ और उन्हें उच्च शिक्षा के नए अवसरों की जानकारी मिली।

सुबह सत्र में विद्यार्थियों को योग अभ्यास भी कराया गया, जिससे उनमें एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। योग के लाभों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि नियमित योग अभ्यास से परीक्षा तनाव कम होता है और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

इस कार्यक्रम का सफल आयोजन चेतना उपाध्याय (उत्तरांचल जन विकास समिति की CEO) के नेतृत्व में किया गया, जिनके समर्पण और मेहनत से यह पहल संभव हो सकी। उनके साथ वालंटियर्स अनीश, अंकिता, पीयूष, लावांशी और आवृति ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यालय के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल सीयूईटी परीक्षा के प्रति जागरूक किया, बल्कि योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी दी। यह आयोजन छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध हुआ।

Uttarakhand: सख्ती…163 प्रमोटर्स को रेरा का नोटिस, प्रोजेक्ट आरडब्ल्यूए को सौंपे, बढ़े धोखाधड़ी के मामले

प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद आरडब्ल्यूए को न साैंपने वाले 163 प्रमोटर्स को रेरा ने नोटिस दिया है।तीन माह में मालिकाना हक देना होता है पर मनमानी से लगातार धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं।

प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद नियमानुसार आरडब्ल्यूए के नाम न करने वाले प्रमोटर्स के खिलाफ अब रेरा में मुकदमा चलाया जाएगा। रेरा के सदस्य नरेश मठपाल की पीठ ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए ऐसे 163 प्रमोटर्स को नोटिस भेजा है।

रेरा अधिनियम के तहत प्रमोटर्स जब आवासीय प्रोजेक्ट पूरा कर लेते हैं तो उन्हें पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के तीन महीने के भीतर इसका मालिकाना हक आरडब्ल्यूए को देना होता है लेकिन अधिकतर प्रमोटर्स ऐसा नहीं करते हैं। इससे धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा हो जाता है और लोग इसमें रहने लगते हैं। एक अधिकृत आरडब्ल्यूए भी बन जाती है।

इसके बावजूद मालिकाना हक नहीं दिया जाता। इससे कई बार प्रमोटर्स या अन्य जालसाज लोग इन संपत्तियों को दूसरे लोगों को भी बेच देते हैं जिसका आरडब्ल्यूए को पता भी नहीं चलता। इसके बाद जब पता चलता है तो उसके खिलाफ शिकायत लेकर रेरा के पास पहुंचते हैं। फिर रेरा संबंधित प्रमोटर्स के खिलाफ कार्रवाई करता है।

यही कारण है कि अब रेरा ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया है। फिलहाल प्रदेश में 643 प्रोजेक्ट चल रहे हैं जो कि रेरा में पंजीकृत हैं। इनमें से 163 ऐसे हैं जिनका काम पूरा हो चुका है लेकिन इन्होंने नियमानुसार मालिकाना हक एसोसिएशन को नहीं दिया है। अब इनके खिलाफ वाद दायर किया जाना है। इसके पहले इन सभी को नोटिस जारी किए गए हैं।

पहले से आसान हुई व्यवस्था पर नियमों की अनदेखी जारी

पहले मालिकाना हक सौंपने में प्रमोटर्स को भारी भरकम स्टांप ड्यूटी चुकानी होती थी। हालांकि, रेरा के प्रयासों से इसका भी हल निकाल लिया गया है। शासन ने अब इसके लिए एकमुश्त राशि 10 हजार रुपये शुल्क के रूप में तय किया है। इतना कम शुल्क होने के बाद भी कोई प्रमोटर्स नियमों का पालन नहीं कर रहा है।