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Uttarakhand: राज्य लोकसेवा आयोग ने प्रधानाचार्य पद पर भर्ती को किया रद्द, आठ फरवरी 2026 को होनी थी

शिक्षा सचिव ने 30 अक्तूबर को आयोग को पत्र भेजकर शासन की ओर से भर्ती के लिए भेजे गए अधियाचन को वापस लेने का अनुरोध किया था। इस अनुरोध पर आयोग ने आठ फरवरी 2026 को होने वाली प्रधानाचार्य सीमित विभागीय परीक्षा को रद्द कर दिया।

राज्य लोक सेवा आयोग ने राजकीय इंटर काॅलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य व प्रधानाचार्या पद पर विभागीय भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। इस संबंध में राज्य लोकसेवा आयोग के शिक्षा सचिव को पत्र भेजा है।

शिक्षा सचिव ने 30 अक्तूबर को आयोग को पत्र भेजकर शासन की ओर से भर्ती के लिए भेजे गए अधियाचन को वापस लेने का अनुरोध किया था। इस अनुरोध पर आयोग ने आठ फरवरी 2026 को होने वाली प्रधानाचार्य सीमित विभागीय परीक्षा को रद्द कर दिया।
इस संबंध में राज्य लोक सेवा आयोग के सचिव आलोक पांडेय ने शिक्षा सचिव को पत्र भेजा है। बता दें कि प्रदेश के राजकीय इंटरमीडिट काॅलेजों में प्रधानाचार्य के 1385 पदों में से 1184 पद रिक्त हैं। सरकार ने इन पदों को भरने के लिए 50 प्रतिशत पदों पर प्रधानाचार्य सीमित विभागीय परीक्षा कराने का फैसला किया था।

राजकीय शिक्षक संघ ने रैली स्थगित की
राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम सिंह चौहान व महामंत्री रमेश चंद्र पैन्यूली ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया कि शनिवार को मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री आवास कूच स्थगित कर दिया गया है। नौ अक्तूबर को संगठन से वार्ता हुई थी, उस वार्ता के क्रम में 34 सूत्रीय मांगपत्र पर कार्यवाही नहीं होती है तो फिर से आंदोलन होगा।

National Unity Day 2025: आज राष्ट्रीय एकता दिवस, देश की एकता के उस नायक को याद करें जिसने भारत को जोड़ा!

National Unity Day 2025 पर जानिए सरदार पटेल की जयंती का महत्व, उनके विचार और भारत को एक करने की प्रेरक कहानी। पढ़ें क्यों कहा जाता है उन्हें भारत का लौह पुरुष।

National Unity Day 2025: हर साल 31 अक्टूबर को भारत राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान व्यक्तित्व वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित है जिसने बिखरे रियासतों के भारत को एक सूत्र में पिरोया। वे सिर्फ भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री नहीं थे, बल्कि ‘भारत के लौह पुरुष’ के रूप में उस एकता के प्रतीक बने, जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी।

राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व

सरदार पटेल की जयंती को 2014 में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और संगठनों में “Run for Unity”, निबंध प्रतियोगिताएं और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस का संदेश है, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत।”

सरदार पटेल भारत को एक सूत्र में पिरोने वाले शिल्पकार

आजादी के बाद भारत 562 रियासतों में बंटा था। ऐसे समय में, सरदार पटेल ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति, राजनीतिक कुशलता और दृढ़ नेतृत्व से इन रियासतों का भारत संघ में विलय कराया। उनके प्रयास से,  हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी बड़ी रियासतों का भारत में एकीकरण संभव हुआ। उन्होंने “स्टेट्स रीऑर्गनाइजेशन कमेटी” की नींव रखी, जिससे भारत एक मज़बूत प्रशासनिक ढांचे में संगठित हुआ।

आज की पीढ़ी के लिए संदेश 

आज जब सोशल मीडिया, राजनीति और विचारधाराएं लोगों को बांट रही हैं, राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता में निहित है यानी भाषा, संस्कृति, धर्म, परिधान सब अलग, लेकिन आत्मा एक। यह दिन हर भारतीय के भीतर यह भावना जगाता है कि हम सब मिलकर ही भारत हैं और एकता में ही शक्ति है।

कैसे मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस

  •     ‘Run for Unity’ का आयोजन किया जाता है। लोगों में एकता का संदेश फैलाने के लिए देशभर में रन आयोजित की जाती है।
  • स्कूल और कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। जिसमें निबंध लेखन, भाषण, पोस्टर मेकिंग, क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन होता है।
  • प्रतिज्ञा समारोह होता है, जिसमें देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने की शपथ ली जाती है।
  • ‘Statue of Unity’ पर जा सकते हैं। गुजरात में स्थित 182 मीटर ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी जाती है।

Bihar Election 2025: प्रधानमंत्री मोदी का गुरुवार को बिहार दौरा, मुजफ्फरपुर और छपरा में जनसभाएं

Bihar Chunav 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को बिहार का दौरा करेंगे। वे राज्य में दो चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। बीजेपी ने उनके दौरे की तैयारी पूरी कर ली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को फिर से बिहार का दौरा करेंगे। वे गुरुवार को बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के उम्मीदवारों के प्रचार के लिए मुजफ्फरपुर और छपरा में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने इससे पहले 24 अक्टूबर को समस्तीपुर और बेगूसराय में जनसभाओं को संबोधित करके बिहार में बीजेपी का चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि गुरुवार को उन्हें मुजफ्फरपुर और छपरा में जनता से संवाद का सौभाग्य मिलेगा। प्रधानमंत्री ने लिखा- ”बिहार के मेरे परिवारजन भाजपा-एनडीए को प्रचंड जीत दिलाने के लिए खुद चुनाव मैदान में हैं। उत्साह के इस माहौल में कल सुबह करीब 11 बजे मुजफ्फरपुर में और दोपहर बाद 12:45 बजे छपरा में जनता-जनार्दन से संवाद का सौभाग्य मिलेगा। मुझे विश्वास है कि विधानसभा चुनाव में एक बार फिर राज्य के मेरे भाई-बहन महाविजय का शंखनाद करेंगे।”

प्रधानमंत्री का 2 नवंबर को पटना में रोड शो

पीएम मोदी ने 24 अक्टूबर को समस्तीपुर और बेगूसराय में चुनावी जनसभाओं को संबोधित किया था। उनके 30 अक्टूबर के बिहार दौरे की तैयारियां कर ली गई हैं। मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में उनकी जनसभा होगी जिसकी तैयारी कर ली गई है।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी का 2 नवंबर को पटना में विशाल रोड शो होगा। बीजेपी ने इस रोड शो के लिए रूट प्लान तैयार कर लिया है। रोड शो के जरिए पटना की सभी 14 विधानसभा सीटों बांकीपुर, पटना साहिब, दीघा, कुम्हरार, मनेर, बिक्रम, बाढ़, बख्तियारपुर, मोकामा, फतुहां, फुलवारी, मसौढ़ी, दानापुर और पालीगंज के मतदाताओं को एक साथ बड़ा संदेश देने की तैयारी की है। इस रोड शो के जरिए पीएम मोदी बिहार की जनता से सीधे रूबरू होंगे। बीजेपी के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को बीजेपी के कई बड़े नेताओं के साथ रोड शो की तैयारियों का जायजा लिया था।

पीएम मोदी 2 नवम्बर को दो रैलियों को भी संबोधित करेंगे। यह जनसभाएं नवादा और आरा में आयोजित की जाएंगी। बीजेपी का दावा है कि इस बार बिहार में एनडीए की सरकार बहुमत का रिकॉर्ड तोड़ेगी।

 

Uttarakhand News: ठंड के साथ बिजली की मांग बढ़नी शुरू, आंकड़ा चार करोड़ यूनिट के करीब पहुंचा

ठंड के साथ बिजली की मांग बढ़नी भी शुरू हो गई है। मांग का आंकड़ा चार करोड़ यूनिट के करीब पहुंच गया है।

प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों तक ठंड बढ़ने के कारण बिजली की मांग भी बढ़नी शुरू हो गई है। मंगलवार को मांग का आंकड़ा चार करोड़ यूनिट के करीब पहुंच गया। दिवाली के दौरान मौसम में हल्की ठंडक थी लेकिन बिजली की मांग करीब तीन करोड़ यूनिट चल रही थी।

दिवाली के बाद आठ दिन के भीतर बिजली की मांग लगातार बढ़ते हुए चार करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। इसके सापेक्ष यूजेवीएनएल से 1.1 करोड़ और केंद्रीय पूल से 1.4 करोड़, कुल मिलाकर करीब 2.5 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध है।
बाकी बिजली का इंतजाम बाजार से किया जा रहा है। हालांकि यूपीसीएल प्रबंधन का दावा है कि फिलहाल कहीं भी घोषित या अघोषित कटौती नहीं की जा रही है।

Uttarakhand: सीएम धामी 30 को बिहार में करेंगे दो चुनावी रैली, प्रमुख नेताओं को सौंपी गई प्रचार की जिम्मेदारी

बिहार में चुनाव प्रचार के लिए प्रमुख नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीएम धामी 30 अक्तूबर को बिहार में दो चुनावी रैली करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 30 अक्तूबर को बिहार में दो चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। यह चुनावी जनसभा मोतिहारी जिले के कल्याणपुर और हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र में होगी। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा नेतृत्व ने जिन प्रमुख नेताओं को प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है, उसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हैं।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) समेत अपने कई निर्णयों के लिए सीएम धामी सुर्खियों में रहे हैं। सीएम धामी बिहार चुनाव में इससे पहले गोरियाकोठी, वारसलीगंज, सिवान विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशियों के लिए प्रचार कर चुके हैं। एक बार फिर मुख्यमंत्री ने चुनाव जनसभाओं में वोट मांगेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के कार्यक्रम विभाग संयोजक सुशील चौधरी ने सीएम धामी का प्रस्तावित कार्यक्रम जारी किया है। 30 अक्तूबर को सीएम धामी सुबह 11:15 पर पटना हवाई अड्डे से निजी विमान से कल्याणपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।
महात्मा गांधी मिडिल स्कूल ग्राउंड, कल्याणपुर स्थित सभा स्थल पर बारह बजकर पांच मिनट पर प्रस्तावित जनसभा में सीएम धामी भाग लेंगे। इसके बाद अपराह्न 1:55 पर महावीर रामेश्वर इंटर काॅलेज, सोनवर्षा, हरसिद्धि में आयोजित जनसभा में भाग लेंगे।

उत्तराखंड मौसम: चमोली में कड़ाके की ठंड से जम गई देवताल झील, देहरादून समेत नीचले इलाकों में धूप-बदली

Uttarakhand Weather Today News: मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आज प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। फिलहाल एक नवंबर तक सभी जनपदों में मौसम साफ रहने की संभावना है, जिसके चलते तापमान भी सामान्य बना रहेगा।

 देहरादून: उत्तराखंडके पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। ताजा पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम करवट ले सकता है। हालांकि प्रदेश घर में मौसम शुष्क रहेगा। प्रदेश भर में इन दिनों चटक धूप खिलने की वजह से तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है, जिस कारण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में भी ठंड सामान्य से कम है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार के पहाड़ों में मौसम का मिजाज बदल सकता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में आंशिक बादल छाने के आसार हैं। मौसम का मिजाज बदलने के बाद पर्वतीय इलाकों में ठंड बढ़ने का अनुमान है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में भी सुबह और शाम के समय ठंड बढ़ सकती है। पर्वतीय क्षेत्र में तापमान में बदलाव का असर निचले क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। देहरादून में रविवार को धूप निकली रही, लेकिन धूप में गर्मी नहीं थी। कभी-कभी बादल भी छाते रहे जिस वजह से गर्मी का एहसास कम हुआ, जबकि शाम के समय एकदम ठंड बढ़ गई।

देवताल झील ठंड से जम गई

मौसम विभाग के अनुसार सोमवार से ठंड में हल्का इजाफा होगा। वहीं चमोली के माणा गांव के पास भारत-चीन सीमा क्षेत्र में 18000 फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल झील कड़ाके की ठंड के कारण जाम गई है। पिछले दिनों ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से तापमान में गिरावट आ गई और देवताल झील के साथ ही यहां के पानी के स्रोत भी जम गए हैं। इन दोनों जगह पर्यटक देवताल पहुंचकर जमी झील का लुत्फ उठा रहे हैं। यहां तक आने के लिए लोगों को स्थानीय प्रशासन से इनर लाइन परमिट लेना पड़ता है।

 

उत्तराखंड में BJP का मिशन 2027: प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन चरण में सर्वे, कई हो सकते हैं बेटिकट

Uttarakhand Election 2027 News: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को शुरू किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।

देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए संभावित प्रत्याशियों को तय करने की दिशा में प्रथम चरण का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। यह सर्वे प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय विधायकों के कामकाज और जनता की प्रतिक्रिया को आंका जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह सर्वे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण फिलहाल जारी है, जबकि दूसरे और तीसरे चरण के सर्वे परिणामों के आधार पर पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करेगी।

प्रदेश में विधानसभा चुनाव को सत्ताधारी पार्टी बड़े स्तर पर जमीन पर उतर रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी स्वयं मैदान में हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 2022 के चुनाव में लगातार जीत दर्ज कर इतिहास रचा था। अब पार्टी की कोशिश प्रदेश की सत्ता में हैट्रिक लगाने की है। इसके लिए सीएम धामी ग्रामीण प्रवास योजना के जरिए ग्रामीण इलाकों में रुककर विकास योजनाओं की पड़ताल की तैयारी में हैं।

टिकट वितरण का अलग सिस्टम

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी प्रत्याशी चयन में जनता की राय और जमीनी कामकाज को सबसे अधिक महत्व देती है। वरिष्ठ नेता का कहना है कि भाजपा में टिकट किसी पद या प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि कार्य और जनभावना के आधार पर दिया जाता है। सर्वे से हमें यह समझने में आसानी होती है कि जनता किसे अपना प्रतिनिधि देखना चाहती है।

कई एमएलए पर संकट

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार भाजपा ‘नो रिपीट थ्योरी’ पर भी काम कर सकती है। यानी कुछ सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं और उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। साथ ही, कुछ वरिष्ठ नेता अपनी वर्तमान सीट बदलने की इच्छा जता चुके हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे नेताओं को उनके सुरक्षित ठिकानों की तलाश है, जहां जीत की संभावना अधिक हो।

फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव

राज्य में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 के बीच प्रस्तावित हैं। भाजपा इसे ध्यान में रखते हुए अभी से संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी अगले साल को चुनावी वर्ष के रूप में देख रही है। इसलिए सभी नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों लगातार दौरे कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्‌ट भी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

मिशन 2027 के तहत सीएम धामी ने जनता के बीच उपस्थिति बढ़ाई है। हाल ही में उन्होंने 16 और 17 अक्टूबर को चंपावत, टनकपुर और खटीमा का सड़क मार्ग से दौरा किया और स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। सीएम धामी अब ग्राम रात्रि विश्राम की नई परंपरा शुरू करने जा रहे हैं, जिसके तहत वे गांवों में रुककर सीधे जनता से संवाद करेंगे।

 

Election: नेकां की तीन सीटों पर राह आसान, सत शर्मा वाली सीट पर घमासान; भाजपा को दो वोटों का करना होगा जुगाड़

राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की तीन सीटों पर राह आसान है। सत शर्मा वाली सीट पर घमासान है। भाजपा को एक सीट जीतने के लिए दो वोटों का जुगाड़ करना होगा। सज्जाद लोन को छोड़कर सभी विधायकों के वोट डालने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर में वीरवार को राज्यसभा की चार सीटों पर मतदान है, लेकिन सियासी घमासान इनमें से चौथी सीट पर ही है। वोटों के गणित के अनुसार अगर क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो तीन सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की राह आसान दिख रही है।

चौथी सीट पर नेकां और भाजपा दोनों के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है। 28 विधायकों वाली भाजपा को यह सीट जीतने के लिए दो और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। इस सीट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा चुनाव मैदान में हैं। पीडीपी और कांग्रेस के खुलकर नेकां के पक्ष में आने से भाजपा की जीत पूरी तरह से क्रॉस वोटिंग या निर्दलीयों के वोट पर टिकी है।

राज्यसभा चुनाव के लिए जारी पहली और दूसरी अधिसूचना वाली दोनों सीटों के चुनावी नतीजों पर कोई बड़ी उलझन नहीं दिखती। इन दोनों सीटों पर जीत के लिए पहली वरीयता के 45-45 वोट चाहिए।

फिलहाल जो समीकरण हैं उनके हिसाब से यह दोनों सीटें 41 विधायकों वाली नेकां आसानी से जीतती दिख रही है। बता दें कि सज्जाद लोन को छोड़कर राज्यसभा चुनाव में सभी विधायकों के वोट डालने की उम्मीद है।
तीसरी सीट : क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो नेकां मार सकती है बाजी
तीसरी अधिसूचना वाली दोनों सीटों पर जीत के लिए 30-30 वोट चाहिए। क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो इनमें से एक सीट नेकां आसानी से जीतती नजर आ रही है। इस अधिसूचना के तहत तीसरी सीट पर जीत के लिए वोटिंग के बाद नेकां के पास 11 विधायक चौथी सीट के लिए शेष रह जाएंगे। बता दें कि इस सीट पर पीडीपी ने नेकां के उम्मीदवार शम्मी ओबेरॉय को वोट देने के लिए समर्थन दिया है।
चौथी सीट : उलझ रहे सियासी समीकरण
जीत के लिए 30 वोट जुटाने के सियासी समीकरण चौथी सीट पर आकर उलझ रहे हैं। भाजपा के पास 28 विधायक हैं और उसे यह सीट जीतने के लिए दो और वोट चाहिए। कांग्रेस के छह और पीडीपी के सभी तीन विधायकों का समर्थन मिलने से नेकां के पास 20 वोट हो जाते हैं। इसलिए यह सीट जीतने के लिए नेकां और भाजपा दोनों को वोटों का जुगाड़ करना होगा। बता दें कि इस सीट पर भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा को उतारा है। वहीं, नेकां ने इमरान नबी डार पर दांव लगाया है।
निर्दलीय विधायकों की भूमिका रहेगी सबसे अहम
विधानसभा में 88 सदस्य हैं। इनमें से 41 नेकां, 28 भाजपा, छह कांग्रेस, तीन पीडीपी, एक माकपा, एक आप, एक जेकेपीसी और सात निर्दलीय हैं। चुनाव से ठीक पहले बनी राजनीतिक परिस्थितियों और समीकरणों के हिसाब से एनसी को अपने 41 के अलावा कांग्रेस के छह, सीपीआई और आप के एक-एक विधायक का वोट मिलने की उम्मीद है।
पीडीपी भी अपने तीन विधायकों के वोट एनसी प्रत्याशी शम्मी ओबरॉय को देने की घोषणा कर चुकी है। जेकेपीसी के एकमात्र विधायक सज्जाद लोन चुनाव में हिस्सा न लेने का एलान कर चुके हैं। ऐसे में चौथी सीट के लिए सारा दारोमदार निर्दलीय सात विधायकों पर आकर टिक गया है।
सरकार में शामिल निर्दलीय विधायकों को वोट दिखाने की छूट नहीं
सात में से पांच निर्दलीय विधायक नेकां सरकार को समर्थन दे रहे हैं। इनमें छंब से विधायक सतीश शर्मा, बनी से रामेश्वर सिंह, इंदरवल से प्यारेलाल शर्मा, सुरनकोट से चौधरी अकरम और थन्नामंडी से विधायक मुजफ्फर इकबाल खान शामिल हैं। सतीश शर्मा सरकार में मंत्री भी हैं। शोपियां से निर्दलीय विधायक शाबिर अहमद ने सरकार को समर्थन तो नहीं दिया लेकिन वह ज्यादातर मुद्दों पर सरकार के साथ ही खड़े नजर आते हैं।
लंगेट से निर्दलीय विधायक एवं सांसद इंजीनियर रशीद के भाई खुर्शीद अहमद शेख को किसी भी खेमे का नहीं माना जाता। पांच निर्दलीय एनसी सरकार को समर्थन जरूर दे रहे हैं लेकिन नियमों के तहत उन्हें मतदान करते समय वोट दिखाने की छूट नहीं है। अगर वह दिखा देते हैं कि किसे वोट दे रहे हैं तो उनका वोट अमान्य हो जाएगा। ऐसे में दो अतिरिक्त वोटों के इंतजाम के लिए भाजपा की निगाहें निर्दलीय विधायकों पर टिकी हैं।

Dehradun: कुंभ क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण के लिए लगेंगे भीड़ घनत्व सेंसर, संवेदनशील लोकेशन की होगी जियो फेंसिंग

भीड़ बढ़ते ही प्रशासन के पास सीधे अलर्ट आ जाएगा। आईओटी आधारित भीड़ घनत्व सेंसर के साथ ही संवेदनशील जगहों की जियो फेंसिंग भी होगी।

कुंभ 2027 में भीड़ नियंत्रण के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का खूब इस्तेमाल होगा। भीड़ बढ़ते ही प्रशासन के पास सीधे अलर्ट आ जाएगा। आईओटी आधारित भीड़ घनत्व सेंसर के साथ ही संवेदनशील जगहों की जियो फेंसिंग भी होगी।

हर बार कुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी चुनौती है। 2010 के कुंभ में महाशिवरात्रि, फाल्गुन अमावस्या, मेष संक्रांति और चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान में 3.11 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद अर्द्धकुंभ 2016 में इन चारों स्नान पर 72 लाख और कुंभ 2021 में कोविड के बावजूद 66.25 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इस बार राज्य सरकार ने मुख्य स्नान पर 1.5 से दो करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया है। पूरे कुंभ के दौरान चार माह में 17 से 21 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

इस नाते भीड़ का नियंत्रण बड़ी चुनौती होगा। लिहाजा, भीड़ नियंत्रण व यातायात प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा। भीड़ की रियल टाइम क्राउड मॉनिटरिंग होगी। इसके अलावा सभी जगहों पर भीड़ घनत्व सेंसर (क्राउड डेनसिटी सेंसर) लगाए जाएंगे, जो कि भीड़ बढ़ने पर अलर्ट दे देंगे। इसी हिसाब से प्रशासनिक अमला हरकत में आएगा।

कुंभ की सभी संवेदनशील लोकेशन की जियो फेंसिंग होगी, जिससे वहां होने वाली हर हलचल और भीड़ बढ़ने पर सैटेलाइट से पता चल जाएगा। साथ ही हीटमैप आधारित क्राउड फ्लो डैशबोर्ड बनाया जाएगा, जिसमें हर अवधि में भीड़ के आने का फ्लो पता चल सकेगा। इसी कड़ी में आईटी विभाग यहां ईवी चार्जिंग लोकेटर और सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर भी बनाएगा।

कुंभ 2027 के लिए डिजिटल कुंभ के तौर पर भी तैयारी की जा रही है। कुंभ के दौरान व्यवस्थाएं बनाने में अधिक से अधिक एआई व अन्य तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा।
-नितेश झा, सचिव आईटी

उत्‍तराखंड के चार पालिटेक्निक में AI लैब स्थापित, छात्रों को मिलेगा मॉडर्न टेक्नोलॉजी का साथ

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के चार पॉलिटेक्निक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रयोगशालाएं स्थापित करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य छात्रों को AI की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना है, जिसमें मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

अशोक केडियाल, जागरण, देहरादून । उत्तराखंड के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी पहल के तहत राज्य के चार राजकीय पालिटेक्निक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) प्रयोगशाला स्थापित की गईं हैं। ये प्रयोगशाला राजकीय पालिटेक्निक पित्थूवाला (देहरादून), रानीपोखरी (देहरादून), काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) और द्वाराहाट (अल्मोड़ा) में शुरू की गई हैं। इस पहल से उत्तराखंड तकनीकी रूप से सशक्त युवाओं के निर्माण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इन अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्र अब पारंपरिक विषयों को आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण से पढ़ पा रहे हैं, जिससे उनके ज्ञान और कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डाटा एनालिटिक्स जैसे उभरते हुए विषयों के साथ छात्रों को जोड़ने की दिशा में यह राज्य सरकार की एक अग्रणी पहल मानी जा रही है। इन प्रयोगशालाओं में आवश्यक कंप्यूटर संसाधन, साफ्टवेयर, हाई स्पीड इंटरनेट एवं प्रशिक्षित फैकल्टी की व्यवस्था की गई है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ तकनीकी अनुसंधान का भी अवसर मिल रहा है।

प्रविधिक शिक्षा निदेशालय की माने तो राज्य सरकार इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और इसका उद्देश्य युवाओं को भविष्य की तकनीकों से लैस करना है। प्रयोगशालाएं केवल इन चार संस्थानों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि राज्य के अन्य 71 पालिटेक्निक संस्थानों को भी इससे प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। इससे पूरे राज्य में तकनीकी शिक्षा का स्तर सुधरेगा और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

पालीटेक्निक छात्रों की रुचि और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग और इंडस्ट्री सह सहयोग प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी योजना बनाई जा रही है। इससे तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सकेगा।

ऐसे मिलेगा एआइ से छात्रों को लाभ

तकनीकी विषयों की समझ और व्यावहारिकता बढ़ेगी। एआइ के ज़रिए इलेक्ट्रानिक्स, मैकेनिकल, सिविल, कंप्यूटर साइंस आदि पारंपरिक विषयों में डाटा विश्लेषण, स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम, भविष्यवाणी माडल जैसे आधुनिक आयाम जोड़े जाते हैं। इससे छात्र किसी भी विषय को नई दृष्टि से समझ पाते हैं। आज की इंडस्ट्री आटोमेशन, रोबोटिक्स, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित है। इसका भी एआइ से लाभ मिलेगा।

समस्या सुलझाने की क्षमता में वृद्धि

एआइ का ज्ञान डिप्लोमा छात्रों को उद्योग की वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों के अनुसार तैयार करता है, जिससे वे सीधे काम के लिए तैयार रहते हैं। एआइ टूल्स और तकनीकों का इस्तेमाल कर छात्र रियल-लाइफ समस्याओं का विश्लेषण और समाधान कर पाते हैं। इससे उनमें जटिलताएं से जूझने, आत्म विश्वास एवं कौशल क्षमता विकसित होती हैं।