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SIR: उत्तराखंड के 90 हजार मतदाताओं को लेना होगा बड़ा फैसला, दो जगह वोट होने पर बढ़ेगी मुसीबत

एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है।

उत्तराखंड के करीब 90 हजार मतदाताओं को चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने से पहले ही अहम फैसला लेना होगा। उन्हें बतौर सर्विस मतदाता या अपने गांव की वोटर लिस्ट में से कोई एक चुनना होगा। वहीं, सामान्य मतदाता, जिनके वोट शहरों के साथ ही गांव की मतदाता सूची में भी हैं, उन्हें भी कोई एक वोट कटवाना होगा।

प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से फिलहाल प्री एसआईआर गतिविधियों के तहत मतदाताओं की मैपिंग का काम किया जा रहा है। एक जनवरी 2025 को जारी हुई मतदाताओं की जानकारी के हिसाब से प्रदेश में 89,812 सर्विस मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 87,103 पुरुष और 2709 महिला मतदाता थे। ये ऐसे मतदाता हैं जो कि सेना या अर्द्ध सैनिक बलों में सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी की सर्विस के दौरान ही बतौर सर्विस मतदाता वोट बने हुए हैं।

अब एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने इन सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है। अगर कोई सर्विस मतदाता बनकर गांव या शहर का अपना वोट हटवाना चाहता तो उसे चुनाव आयोग की वेबसाइट http://voters.eci.gov.inमें फॉर्म-7 भरना होगा।

अगर कोई गांव-शहर में अपना वोट चाहता है और सर्विस मतदाता की सूची से नाम हटाना चाहता है तो उसे सर्विस वोटर पोर्टलhttp://svp.eci.gov.in के माध्यम से अपना सर्विस वोट हटवाना होगा। जनवरी में जारी हुई मतदाता सूची के हिसाब से प्रदेश में कुल 84,29,459 मतदाता हैं, जिनमें 43,64,667 पुरुष मतदाता, 40,64,488 महिला मतदाता और 304 थर्ड जेंडर शामिल हैं।

प्रधान चुनाव, निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट अलग
कई मतदाताओं को ये भी कंफ्यूजन है कि गांव से नाम कटने पर वह प्रधान या नगर पालिका चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, एसआईआर का काम केवल चुनाव आयोग की मतदाता सूची के लिए हो रहा है, जिससे लोकसभा या विधानसभा के चुनाव में वोट डाला जाता है। पंचायत या नगर निकायों के चुनाव की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग संभालता है, जिसकी वोटर लिस्ट अलग बनती है। उसका इससे कोई लेना देना नहीं है।

दो जगह वोट होने पर फंस सकते हैं कानूनी पचड़े में
अगर आपका वोट दो जगह होगा तो आप कानूनी पचड़े में भी फंस सकते हैं। लिहाजा, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि गांव या शहर में से किसी एक ही मतदाता सूची मे अपना नाम रखें। किसी एक जगह से हटवा लें। एसआईआर के दौरान पकड़ में आने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें सजा का भी प्रावधान है।

जितने भी सर्विस मतदाता हैं, वह किसी एक जगह ही अपना वोट सुनिश्चित कर लें। नियम के हिसाब से किसी का भी वोट दो जगह नहीं हो सकता है। हटवाने के बाद जरूरत पड़ने पर नए सिरे से कभी भी वोट बनवाया जा सकता है।
-डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड

Career Tips: फीडबैक से परेशान न हों, यह आपके प्रयासों को सही दिशा में रखता है और प्रदर्शन को बेहतर बनाता है

अक्सर फीडबैक में पुरानी गलतियों पर जोर दिया जाता है, जबकि अच्छे लीडर भविष्य पर ध्यान देते हैं। फीडबैक का उद्देश्य आपकी गलतियां गिनाना नहीं, बल्कि आपके प्रयासों को सही दिशा देना है।

आज संगठनों में फीडबैक पर तो जोर दिया जा रहा है, लेकिन उसका असली उद्देश्य कई बार लोग भूल जाते हैं। फीडबैक का मकसद व्यक्ति को अपने काम को बेहतर समझने, अपनी क्षमता का सही उपयोग करने और टीम के साथ प्रभावी ढंग से काम करने में मदद करना होता है। इसमें लीडर की भूमिका अहम होती है। उन्हें ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जहां फीडबैक डर नहीं, बल्कि सीखने का अवसर बने। प्रभावी फीडबैक वही है, जो स्पष्ट रूप से बताए कि क्या सुधारना है और आगे कैसे बेहतर किया जा सकता है।

गलतियां ढूंढने वाला न बनें

जब लीडर हर बात में गलती निकालने वाला न होकर टीम का साथ देने वाला बनता है, तभी अच्छे काम की संस्कृति बनती है। ऐसा लीडर अपने व्यवहार से यह दिखाता है कि वह अपनी टीम पर भरोसा करता है, उनकी परवाह करता है और उनके साथ खड़ा है। इससे कर्मचारी बिना डर के अपनी बात कह पाते हैं।

अगर कोई सहकर्मी काम में परेशान है, तो उसे डांटने के बजाय उसकी समस्या को समझना और उसे यह भरोसा दिलाना कि वह मुश्किलों को पार कर सकता है, एक समझदार नेतृत्व की पहचान है। जब कर्मचारियों को ऐसा सहयोग मिलता है, तो वे खुद बेहतर करने की कोशिश करते हैं।

सकारात्मक नतीजों पर दें ध्यान

अक्सर फीडबैक में पुरानी गलतियों पर जोर दिया जाता है, जबकि अच्छे लीडर भविष्य पर ध्यान देते हैं। जब कर्मचारियों से उनके आगे के लक्ष्यों के बारे में पूछा जाता है और लक्ष्य स्पष्ट व सकारात्मक होते हैं, तो उनमें स्वाभाविक रूप से उत्साह पैदा होता है। इसी दृष्टिकोण से समस्या को देखने पर नए अवसर भी दिखाई देने लगते हैं।

छिपे अवसर पहचानें

जब लीडर और कर्मचारी दोनों के बीच यह स्पष्ट हो जाता है कि असली लक्ष्य क्या है, तब समस्या को एक नई दृष्टि से देखा जा सकता है। इस चरण में समस्या को केवल तुरंत सुलझाने पर ध्यान देने के बजाय यह समझना जरूरी होता है कि यह बेहतर परिणाम पाने में कैसे सहायक हो सकती है। अक्सर ऐसी समस्याएं सुधार के नए रास्ते खोलती हैं, मूल्यों और लक्ष्यों को पाने के लिए नए तरीकों की ओर ले जाती हैं, या संगठन में छिपी हुई बड़ी कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर देती हैं।

कार्य योजना बनाते चलें

लीडर और कर्मचारी मिलकर पहचाने गए अवसर को एक स्पष्ट और व्यावहारिक कार्य योजना में बदलते हैं, जिसमें यह तय किया जाता है कि कौन-सा लक्ष्य हासिल करना है और उसे कब तक पूरा करना है। इसके बाद लीडर समय-समय पर फीडबैक देते रहते हैं, तो इस पूरी प्रक्रिया में निरंतर सीख और सुधार को भी समान रूप से महत्व दिया जाता है।

Uttarakhand News: प्रदेश में रिजॉर्ट की तर्ज पर बनेंगे नेचुरोपैथी अस्पताल, वेलनेस टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

Uttarakhand: प्रदेश में रिजॉर्ट की तर्ज पर बनेंगे नेचुरोपैथी अस्पताल, वेलनेस टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा,जमीन चिह्नित

– चंपावत, पिथौरागढ़ में जमीन चिह्नित, बागेश्वर जिले में चल रही प्रक्रिया

– आयुष विभाग ने तैयार किया प्रस्ताव

प्रदेश के वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पहली बार नेचुरोपैथी अस्पताल (प्राकृतिक चिकित्सा) खोलने की तैयारी है। ये अस्पताल रिजॉर्ट की तर्ज पर बनाए जाएंगे। जहां पर बिना दवाइयों के प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से इलाज किया जाएगा। आयुष विभाग ने चंपावत व पिथौरागढ़ जिले में जमीन चयनित कर ली है। जबकि बागेश्वर में जमीन तलाशी जा रही है।

उत्तराखंड में आयुष व वेलनेस से पर्यटन को जोड़ने के लिए पहले चरण में प्रदेश के तीन जिलों में नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने की तैयारी की रही है। पिथौरागढ़ के बलवा कोट व चंपावत के कोली ढेक में जमीन का चयन किया गया। इसके अलावा बागेश्वर जिले में जमीन चयनित करने की प्रक्रिया चल रही है। आयुष विभाग की ओर से नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने का प्रस्ताव बना रहा है। जल्द ही केंद्र सरकार को वित्तीय सहायता के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। आयुष मिशन के तहत केंद्र सरकार नेचुरोपैथी अस्पताल के लिए वित्तीय सहायता देगी

दवाइयों की जगह प्राकृतिक तरीके से होगा इलाज

नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धति में जड़ी-बूटियों, आहार, व्यायाम, मालिश, जल चिकित्सा, योग और एक्यूपंक्चर का उपयोग किया जाता है। इस पद्धति से बीमारी के मूल कारण को ठीक करना व समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है न कि सिर्फ लक्षणों का इलाज करना है। नेचुरोपैथी में आहार और पोषण, जल चिकित्सा, मृदा चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, योग और व्यायाम चिकित्सा, जड़ी-बूटी, एक्यूपंक्चर व एक्यूप्रेशर, मालिश चिकित्सा, उपवास, मन शरीर चिकित्सा की सुविधा रहेगी।

आयुष ग्राम योजना को केंद्र सरकार ने किया बंद

केंद्र सरकार ने बीते वर्ष आयुष मिशन के तहत आयुष ग्राम योजना को शुरू किया था। इस योजना के तहत उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में एक-एक आयुष ग्राम बनाए जाने थे, लेकिन अब केंद्र सरकार ने आयुष ग्राम योजना बंद कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना कि आयुष ग्राम की जगह केंद्र सरकार नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने के लिए वित्तीय सहायता देगी। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

पहले चरण में तीन जिलों में नेचुरोपैथी अस्पताल खोलने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। ये अस्पताल रिजॉर्ट की तर्ज पर स्थापित होंगे। जहां पर प्राकृतिक चिकित्सा के साथ ठहरने की बेहतर सुविधा मिलेगी। इससे प्रदेश में वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। -दीपेंद्र चौधरी, सचिव आयुष

उत्तरांचल जन विकास समिति की पहल: नैनबाग में सीयूईटी काउंसलिंग और योग अभ्यास

नैनबाग (टिहरी  गढ़वाल)। उत्तरांचल जन विकास समिति  (देहरादून)द्वारा 13 तारीख को नैनबाग स्थित सरदार सिंह राजकीय इंटर कॉलेज और

एसएसआर मॉडल इंटर कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादायक शैक्षिक एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा के प्रति जागरूक करना तथा योग के माध्यम से मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य का महत्व समझाना रहा।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सीयूईटी परीक्षा की महत्ता, पात्रता, परीक्षा पैटर्न, विषय चयन, तैयारी की रणनीति और करियर अवसरों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों द्वारा की गई काउंसलिंग से विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान हुआ और उन्हें उच्च शिक्षा के नए अवसरों की जानकारी मिली।

सुबह सत्र में विद्यार्थियों को योग अभ्यास भी कराया गया, जिससे उनमें एकाग्रता, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। योग के लाभों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि नियमित योग अभ्यास से परीक्षा तनाव कम होता है और स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

इस कार्यक्रम का सफल आयोजन चेतना उपाध्याय (उत्तरांचल जन विकास समिति की CEO) के नेतृत्व में किया गया, जिनके समर्पण और मेहनत से यह पहल संभव हो सकी। उनके साथ वालंटियर्स अनीश, अंकिता, पीयूष, लावांशी और आवृति ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यालय के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल सीयूईटी परीक्षा के प्रति जागरूक किया, बल्कि योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी दी। यह आयोजन छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध हुआ।

Uttarakhand: सख्ती…163 प्रमोटर्स को रेरा का नोटिस, प्रोजेक्ट आरडब्ल्यूए को सौंपे, बढ़े धोखाधड़ी के मामले

प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद आरडब्ल्यूए को न साैंपने वाले 163 प्रमोटर्स को रेरा ने नोटिस दिया है।तीन माह में मालिकाना हक देना होता है पर मनमानी से लगातार धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं।

प्रोजेक्ट पूरा करने के बाद नियमानुसार आरडब्ल्यूए के नाम न करने वाले प्रमोटर्स के खिलाफ अब रेरा में मुकदमा चलाया जाएगा। रेरा के सदस्य नरेश मठपाल की पीठ ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए ऐसे 163 प्रमोटर्स को नोटिस भेजा है।

रेरा अधिनियम के तहत प्रमोटर्स जब आवासीय प्रोजेक्ट पूरा कर लेते हैं तो उन्हें पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के तीन महीने के भीतर इसका मालिकाना हक आरडब्ल्यूए को देना होता है लेकिन अधिकतर प्रमोटर्स ऐसा नहीं करते हैं। इससे धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। प्रोजेक्ट पूरा हो जाता है और लोग इसमें रहने लगते हैं। एक अधिकृत आरडब्ल्यूए भी बन जाती है।

इसके बावजूद मालिकाना हक नहीं दिया जाता। इससे कई बार प्रमोटर्स या अन्य जालसाज लोग इन संपत्तियों को दूसरे लोगों को भी बेच देते हैं जिसका आरडब्ल्यूए को पता भी नहीं चलता। इसके बाद जब पता चलता है तो उसके खिलाफ शिकायत लेकर रेरा के पास पहुंचते हैं। फिर रेरा संबंधित प्रमोटर्स के खिलाफ कार्रवाई करता है।

यही कारण है कि अब रेरा ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया है। फिलहाल प्रदेश में 643 प्रोजेक्ट चल रहे हैं जो कि रेरा में पंजीकृत हैं। इनमें से 163 ऐसे हैं जिनका काम पूरा हो चुका है लेकिन इन्होंने नियमानुसार मालिकाना हक एसोसिएशन को नहीं दिया है। अब इनके खिलाफ वाद दायर किया जाना है। इसके पहले इन सभी को नोटिस जारी किए गए हैं।

पहले से आसान हुई व्यवस्था पर नियमों की अनदेखी जारी

पहले मालिकाना हक सौंपने में प्रमोटर्स को भारी भरकम स्टांप ड्यूटी चुकानी होती थी। हालांकि, रेरा के प्रयासों से इसका भी हल निकाल लिया गया है। शासन ने अब इसके लिए एकमुश्त राशि 10 हजार रुपये शुल्क के रूप में तय किया है। इतना कम शुल्क होने के बाद भी कोई प्रमोटर्स नियमों का पालन नहीं कर रहा है।

UK: हाईकोर्ट ने दो हजार आउटसोर्स कर्मियों की सेवा समाप्त करने संबंधी मामले में सुनवाई की, कहा- सेवा जारी रहेगी

हाईकोर्ट ने वन विभाग के करीब दो हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने संबंधी विभागीय निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वन विभाग के करीब दो हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने संबंधी विभागीय निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि विभाग कर्मचारियों से सशर्त नियमित सेवा लेता रहे।

वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में यह मामला सुना गया। याचिका में दिनेश चौहान सहित लगभग तीन सौ आउटसोर्स कर्मचारियों ने कहा था कि वन विभाग ने उनका वेतन जिस मद से दिया जाता था उसमें बदलाव होने की वजह से उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। साथ ही विभाग उनकी नियमित सेवाएं भी नहीं ले रहा था।

राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि इन कर्मचारियों के वेतन के लिए किसी वित्तीय मद का प्रावधान नहीं है। इस कारण सेवाएं जारी रखना संभव नहीं है। फरवरी 2023 में न्यायालय ने इस निर्णय पर अंतरिम रोक लगा दी थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने कर्मचारियों के हक में फैसला देते हुए उनकी सेवाएं बनाए रखने के निर्देश जारी किए। इस निर्णय का लाभ वन विभाग में आउटसोर्स के रूप में कार्यरत लगभग दो हजार कर्मचारियों को मिलेगा।

 

AILET 2026 : अखिल भारतीय विधि प्रवेश परीक्षा 14 दिसंबर 2025 (रविवार) को , उम्मीदवार तैयारियों के अंतिम चरण में

अखिल भारतीय विधि प्रवेश परीक्षा (AILET 2026) का आयोजन 14 दिसंबर 2025 (रविवार) को पूरे देश में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा। उत्तराखंड के परीक्षार्थियों के लिए इस वर्ष का प्रमुख परीक्षा केंद्र Doon University, Mothrowala Road, P.O. Defence Colony, Dehradun तय किया गया है। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक आयोजित होगी।

परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए देहरादून प्रशासन ने विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं। केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल, हेल्प डेस्क और ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था की गई है ताकि अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

परीक्षा से पहले प्रशासन की अपील

प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों से अनुरोध किया है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुँचें, क्योंकि सुरक्षा जांच और दस्तावेज़ सत्यापन में अतिरिक्त समय लग सकता है। परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार पर परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए सीटिंग अरेंजमेंट बोर्ड भी लगाया जाएगा।

📌 आवश्यक दिशानिर्देश (Mandatory Guidelines)

  • परीक्षा का समय: 2:00 PM – 4:00 PM
  • रिपोर्टिंग समय: 1:00 PM से पहले पहुँचना अनिवार्य
  • AILET Admit Card (प्रिंट कॉपी) और मान्य फोटो ID साथ रखना ज़रूरी
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे मोबाइल, स्मार्टवॉच, कैलकुलेटर वगैरह पूरी तरह प्रतिबंधित
  • केवल ब्लैक/ब्लू बॉल पेन की अनुमति
  • परीक्षा शुरू होने के बाद देर से आने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा
  • उम्मीदवारों को अनुशासन, शांति और नियमों का पालन करने का निर्देश

 

देहरादून केंद्र पर विशेष व्यवस्था

Doon University के बाहर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, पार्किंग व्यवस्था और हेल्प टीम तैनात की जाएगी। प्रशासन ने अभिभावकों से भी अनुरोध किया है कि वे भीड़ न बनाएं और सुचारू प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग करें।

यह परीक्षा देश के शीर्ष विधि विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए आयोजित की जाती है। अभ्यर्थियों में उत्साह के साथ-साथ अंतिम समय की तैयारियों को लेकर हलचल बनी हुई है।

सुप्रीम फैसला आज: बनभूलपुरा में जवानों की फौज तैनात, 29 हेक्टेयर रेलवे जमीन और 4365 घरों की किस्मत का सवाल

बनभूलपुरा के रेलवे भूमि विवाद में बुधवार (आज) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। फैसले से पहले जिला और पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।

बनभूलपुरा के रेलवे भूमि विवाद में बुधवार (आज) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। फैसले से पहले जिला और पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी गई है। बनभूलपुरा जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेड लगाकर चेकिंग की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक है। स्थानीय लोगों को भी लोकल आईडी दिखाने के बाद ही प्रवेश मिलेगा।पूर्व में यह सुनवाई दो दिसंबर को होनी थी लेकिन समयाभाव के कारण इसे टालते हुए 10 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की गई।

बुधवार को दोपहर बाद मामले की सुनवाई होगी। याचिका से जुड़े लोग भी दिल्ली पहुंच गए हैं। इसी दिन इस पर फैसला भी आ सकता है। यह मामला सीधे 4365 मकानों में रह रही बड़ी आबादी से जुड़ा है। बीते साल अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस और जिला प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। संभावित फैसले से पहले प्रशासन ने क्षेत्र की संवेदनशीलता और तनाव की आशंका को ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
रेलवे ने बनभूलपुरा की गफूर बस्ती, इंदिरा नगर, नई बस्ती और रेलवे पटरी से सटे इलाकों की करीब 29 हेक्टेयर जमीन पर दावा किया है। रेलवे के अनुसार यहां रह रही बड़ी आबादी ने अवैध रूप से निर्माण किया है। स्थानीय लोगों की मानें तो वे लोग यहां 40 से 50 साल से रह रहे हैं। मामले में हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी ने साल 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर कोर्ट ने भूमि को अतिक्रमणमुक्त करने के निर्देश दिए। इसके खिलाफ क्षेत्रीय लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

66 सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करें। आगे की कार्रवाई में शासन प्रशासन का सहयोग करें। शांति व्यवस्था बनाए रखें। अफवाह न फैलाएं। किसी भी तरह की गलत बयानबाजी तथा व्यवधान उत्पन्न करने और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने का प्रयास न करें। पुलिस, सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी नजर रखे है। लोग भी किसी भी तरह से गलत हरकत करने से बचें। डॉ. मंजूनाथ टीसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक


इमाम मोहम्मद आसिम सहित 20 लोग किए गए पाबंद

हल्द्वानी। बनभूलपुरा रेलवे जमीन मामले की सुनवाई को देखते हुए पुलिस ने बिलाली मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद आसिम सहित 20 लोगों को निजी मुचलके में पाबंद किया है। मौलाना से पिछले दिनों दिल्ली से आई सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में पूछताछ की थी। बाद में उन्हें छोड़ दिया था। पुलिस का मानना है कि मौलाना की आमजन में पकड़ है। उनके कहने पर भीड़ जमा हो सकती है। इससे पहले एक दिसंबर को 121 लोगों को पाबंद किया गया था। एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि बवाल की आशंका को देखते हुए पुलिस ने देर शाम तक 15 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। यह संख्या अभी बढ़ सकती है। पकड़े गए लोगों में बनभूलपुरा हिंसा के आरोपी भी शामिल हैं। कहा कि क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस का निगरानी तंत्र है। कंट्रोल रूम से भी सीसीटीवी के जरिए पुलिस नजर रख रही है।

बनभूलपुरा में आज बंद रहेंगे स्कूल
हल्द्वानी। रेलवे भूमि मामले की सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के चलते बुधवार को बनभूलपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वालीं शिक्षण संस्थाएं बंद रहेंगी। बनभूलपुरा क्षेत्र के अंतर्गत जीआईसी, जीजीआईसी, जूनियर हाईस्कूल, प्राइमरी, अशासकीय विद्यालय महिला गर्ल्स इंटर कॉलेज के अलावा निजी स्कूल भी हैं। सीईओ गोविंद राम जायसवाल ने बताया इन स्कूलों को बुधवार के लिए बंद किया जाएगा। इस संबंध में संबंधित शिक्षण संस्था के प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य से रिपोर्ट भी लेंगे। इसके अलावा बनभूलपुरा के जो बच्चे बसों के माध्यम से स्कूल जाते हैं, ट्रैफिक रूट डायवर्ट होने के कारण बुधवार को उन स्कूलों में भी अवकाश रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम भी नहीं खुलेगा
हल्द्वानी। सुप्रीम सुनवाई के चलते बुधवार को अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम गौलापार भी खिलाड़ियों के लिए बंद रहेगा। पुलिस प्रशासन की ओर से हल्द्वानी-गौलापार और शनिबाजार मार्ग को आवाजाही के लिए बंद किया गया है। इससे खिलाड़ियों को काठगोदाम और तीनपानी मार्ग से अतिरिक्त घूमकर आना-जाना होगा। खेल उप निदेशक राशिका सिद्दीकी ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से स्टेडियम को खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए बुधवार को एक दिन बंद करने का फैसला लिया गया है।

करीब आठ सौ कर्मियों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था
रेलवे जमीन मामले में बुधवार को सुनवाई के बाद आने वाले संभावित फैसले को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा की तैयारियां पूरी कर ली हैं। क्षेत्र में करीब 800 अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। मंगलवार को एसपी सिटी मनोज कत्याल ने रेलवे स्टेशन परिसर में सुरक्षा कर्मियों को ब्रीफिंग की। इसके बाद टीम ने ढोलक बस्ती, गफूर बस्ती, लाइन नंबर 17, इन्द्रानगर बड़ी रोड, बिलाली मस्जिद, लाइन नंबर 8, चोरगलिया रोड, ताज चौराहा आदि में मार्च किया। गलियों में तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय कर पुलिस फोर्स बनभूलपुरा थाने पहुंची। यहो से उन्हें तैनाती स्थल पर भेजा गया। एसपी सिटी ने कहा कि बनभूलपुरा रेलवे भूमि मामले को लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। संवेदनशील इलाकों पर पुलिस पैनी नजर रखेगी।

बताया कि सुरक्षा के लिहाज से तीन एएसपी, चार सीओ, 12 थानाध्यक्ष व इंस्पेक्टर, 45 एसआई व एएसआई और 400 कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल तैनात रहेंगे। पीएसी की तीन कंपनियां भी तैनात होंगी। इसके साथ ही चार-चार की संख्या में फायर
यूनिट, टियर गैस यूनिट और ड्रोन रहेंगे। वहां एसपी डॉ. जगदीश चंद्रा, एडीएम विवेक राय, एएसपी दीपशिखा अग्रवाल, सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल सिंह चौहान, एसडीएम राहुल शाह, सीओ अमित कुमार आदि मौजूद थे।

प्रवेश के लिए आईडी जरूरी… बुधवार सुबह छह बजे से ही बनभूलपुरा क्षेत्र में बिना लोकल आईडी के किसी का भी प्रवेश नहीं होगा। बिना पहचान पत्र मिलने पर पुलिस उस व्यक्ति पर कार्रवाई कर सकती है।

गौला बाईपास से करनी होगी आवाजाही… बनभूलपुरा को जाने वाले सभी मार्गों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। सभी रूट पर बैरिकेडिंग की गई है। ऐसे में गौलापार, चोरगलिया, सितारगंज, टनकपुर को जाने वाले लोगों को तीनपानी से गौला बाईपास होते हुए आवाजाही करनी होगी।

खुफिया तंत्र सक्रिय… बनभूलपुरा के माहौल की जमीनी हकीकत जानने को खुफिया तंत्र जुट गया है। हर तरह की सूचना एकत्र कर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट दी जा रही है।

Uttarakhand: हरक सिंह के बयान पर गुरुद्वारा पहुंच हरीश रावत ने मांगी माफी, बोले-मुंह की फिसलन पड़ जाती भारी

पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि पूर्व मंत्री हरक सिंह से हुई गलती के लिए गुरुद्वारे में जाकर जूता सेवा की। उन्होंने कहा कि मुंह की फिसलन कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाती है।

कांग्रेस नेता हरक सिंह के बयान के बाद सिख समाज में रोष है तो वहीं कांग्रेस भी अपने आप को असहज महसूस कर रही है। सोमवार को कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आढ़त बाजार गुरुद्वारे में पहुंचे और अरदास की। साथ ही उन्होंने जोड़ा सेवा (संगत के जूते रखने का स्थान) भी की। उन्होंने कहा कि जो गलती हुई है हम सिख समुदाय से उसकी माफी मांगते हैं।

सोमवार की शाम पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आढ़त बाजार स्थित गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा पहुंचे। यहां उन्होंने अरदास के साथ ही लंगर सेवा कर प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय भारत का एक गौरवशाली, उदार समाज है, ऐसे समाज की सपने में भी अपमान की कल्पना नहीं की सकती।

 

CLAT 2026 : छात्र बोले– पेपर संतुलित, पर लॉजिकल रीजनिंग ने रोका गति

क्लैट-2026 में शामिल छात्रों ने पेपर को संतुलित लेकिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण बताया। शहर में इस परीक्षा के लिए उत्तरांचल विश्वविद्यालय एकमात्र परीक्षा केंद्र बनाया गया था, जहाँ कुल 772 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था।

छात्रों का कहना था कि अंग्रेज़ी और सामान्य ज्ञान (GK) वाला सेक्शन अपेक्षाकृत सरल रहा, जबकि लीगल और लॉजिकल रीजनिंग ने सोचने पर मजबूर किया। छात्रों ने बताया कि इस बार लॉजिकल रीजनिंग सेक्शन में क्रिकेट की बजाय एनालिटिकल रीजनिंग के अधिक सवाल आए, जो उनके लिए नया अनुभव रहा। वहीं, क्वांटिटेटिव सेक्शन को मध्यम स्तर का बताया गया।
कई छात्रों का मानना था कि प्रश्नपत्र सभी सेक्शन में संतुलित चुनौती देता नजर आया।…