उत्तराखंड मौसम: चमोली में कड़ाके की ठंड से जम गई देवताल झील, देहरादून समेत नीचले इलाकों में धूप-बदली

Uttarakhand Weather Today News: मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आज प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। फिलहाल एक नवंबर तक सभी जनपदों में मौसम साफ रहने की संभावना है, जिसके चलते तापमान भी सामान्य बना रहेगा।

 देहरादून: उत्तराखंडके पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। ताजा पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम करवट ले सकता है। हालांकि प्रदेश घर में मौसम शुष्क रहेगा। प्रदेश भर में इन दिनों चटक धूप खिलने की वजह से तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है, जिस कारण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में भी ठंड सामान्य से कम है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार के पहाड़ों में मौसम का मिजाज बदल सकता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में आंशिक बादल छाने के आसार हैं। मौसम का मिजाज बदलने के बाद पर्वतीय इलाकों में ठंड बढ़ने का अनुमान है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में भी सुबह और शाम के समय ठंड बढ़ सकती है। पर्वतीय क्षेत्र में तापमान में बदलाव का असर निचले क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। देहरादून में रविवार को धूप निकली रही, लेकिन धूप में गर्मी नहीं थी। कभी-कभी बादल भी छाते रहे जिस वजह से गर्मी का एहसास कम हुआ, जबकि शाम के समय एकदम ठंड बढ़ गई।

देवताल झील ठंड से जम गई

मौसम विभाग के अनुसार सोमवार से ठंड में हल्का इजाफा होगा। वहीं चमोली के माणा गांव के पास भारत-चीन सीमा क्षेत्र में 18000 फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल झील कड़ाके की ठंड के कारण जाम गई है। पिछले दिनों ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से तापमान में गिरावट आ गई और देवताल झील के साथ ही यहां के पानी के स्रोत भी जम गए हैं। इन दोनों जगह पर्यटक देवताल पहुंचकर जमी झील का लुत्फ उठा रहे हैं। यहां तक आने के लिए लोगों को स्थानीय प्रशासन से इनर लाइन परमिट लेना पड़ता है।

 

उत्तराखंड में BJP का मिशन 2027: प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन चरण में सर्वे, कई हो सकते हैं बेटिकट

Uttarakhand Election 2027 News: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को शुरू किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।

देहरादून: उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए संभावित प्रत्याशियों को तय करने की दिशा में प्रथम चरण का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। यह सर्वे प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय विधायकों के कामकाज और जनता की प्रतिक्रिया को आंका जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह सर्वे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण फिलहाल जारी है, जबकि दूसरे और तीसरे चरण के सर्वे परिणामों के आधार पर पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम तय करेगी।

प्रदेश में विधानसभा चुनाव को सत्ताधारी पार्टी बड़े स्तर पर जमीन पर उतर रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी स्वयं मैदान में हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 2022 के चुनाव में लगातार जीत दर्ज कर इतिहास रचा था। अब पार्टी की कोशिश प्रदेश की सत्ता में हैट्रिक लगाने की है। इसके लिए सीएम धामी ग्रामीण प्रवास योजना के जरिए ग्रामीण इलाकों में रुककर विकास योजनाओं की पड़ताल की तैयारी में हैं।

टिकट वितरण का अलग सिस्टम

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी प्रत्याशी चयन में जनता की राय और जमीनी कामकाज को सबसे अधिक महत्व देती है। वरिष्ठ नेता का कहना है कि भाजपा में टिकट किसी पद या प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि कार्य और जनभावना के आधार पर दिया जाता है। सर्वे से हमें यह समझने में आसानी होती है कि जनता किसे अपना प्रतिनिधि देखना चाहती है।

कई एमएलए पर संकट

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार भाजपा ‘नो रिपीट थ्योरी’ पर भी काम कर सकती है। यानी कुछ सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं और उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। साथ ही, कुछ वरिष्ठ नेता अपनी वर्तमान सीट बदलने की इच्छा जता चुके हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे नेताओं को उनके सुरक्षित ठिकानों की तलाश है, जहां जीत की संभावना अधिक हो।

फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव

राज्य में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 के बीच प्रस्तावित हैं। भाजपा इसे ध्यान में रखते हुए अभी से संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी अगले साल को चुनावी वर्ष के रूप में देख रही है। इसलिए सभी नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों लगातार दौरे कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्‌ट भी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

मिशन 2027 के तहत सीएम धामी ने जनता के बीच उपस्थिति बढ़ाई है। हाल ही में उन्होंने 16 और 17 अक्टूबर को चंपावत, टनकपुर और खटीमा का सड़क मार्ग से दौरा किया और स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। सीएम धामी अब ग्राम रात्रि विश्राम की नई परंपरा शुरू करने जा रहे हैं, जिसके तहत वे गांवों में रुककर सीधे जनता से संवाद करेंगे।

 

Election: नेकां की तीन सीटों पर राह आसान, सत शर्मा वाली सीट पर घमासान; भाजपा को दो वोटों का करना होगा जुगाड़

राज्यसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की तीन सीटों पर राह आसान है। सत शर्मा वाली सीट पर घमासान है। भाजपा को एक सीट जीतने के लिए दो वोटों का जुगाड़ करना होगा। सज्जाद लोन को छोड़कर सभी विधायकों के वोट डालने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर में वीरवार को राज्यसभा की चार सीटों पर मतदान है, लेकिन सियासी घमासान इनमें से चौथी सीट पर ही है। वोटों के गणित के अनुसार अगर क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो तीन सीटों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की राह आसान दिख रही है।

चौथी सीट पर नेकां और भाजपा दोनों के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है। 28 विधायकों वाली भाजपा को यह सीट जीतने के लिए दो और विधायकों की जरूरत पड़ेगी। इस सीट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा चुनाव मैदान में हैं। पीडीपी और कांग्रेस के खुलकर नेकां के पक्ष में आने से भाजपा की जीत पूरी तरह से क्रॉस वोटिंग या निर्दलीयों के वोट पर टिकी है।

राज्यसभा चुनाव के लिए जारी पहली और दूसरी अधिसूचना वाली दोनों सीटों के चुनावी नतीजों पर कोई बड़ी उलझन नहीं दिखती। इन दोनों सीटों पर जीत के लिए पहली वरीयता के 45-45 वोट चाहिए।

फिलहाल जो समीकरण हैं उनके हिसाब से यह दोनों सीटें 41 विधायकों वाली नेकां आसानी से जीतती दिख रही है। बता दें कि सज्जाद लोन को छोड़कर राज्यसभा चुनाव में सभी विधायकों के वोट डालने की उम्मीद है।
तीसरी सीट : क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो नेकां मार सकती है बाजी
तीसरी अधिसूचना वाली दोनों सीटों पर जीत के लिए 30-30 वोट चाहिए। क्रॉस वोटिंग नहीं हुई तो इनमें से एक सीट नेकां आसानी से जीतती नजर आ रही है। इस अधिसूचना के तहत तीसरी सीट पर जीत के लिए वोटिंग के बाद नेकां के पास 11 विधायक चौथी सीट के लिए शेष रह जाएंगे। बता दें कि इस सीट पर पीडीपी ने नेकां के उम्मीदवार शम्मी ओबेरॉय को वोट देने के लिए समर्थन दिया है।
चौथी सीट : उलझ रहे सियासी समीकरण
जीत के लिए 30 वोट जुटाने के सियासी समीकरण चौथी सीट पर आकर उलझ रहे हैं। भाजपा के पास 28 विधायक हैं और उसे यह सीट जीतने के लिए दो और वोट चाहिए। कांग्रेस के छह और पीडीपी के सभी तीन विधायकों का समर्थन मिलने से नेकां के पास 20 वोट हो जाते हैं। इसलिए यह सीट जीतने के लिए नेकां और भाजपा दोनों को वोटों का जुगाड़ करना होगा। बता दें कि इस सीट पर भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा को उतारा है। वहीं, नेकां ने इमरान नबी डार पर दांव लगाया है।
निर्दलीय विधायकों की भूमिका रहेगी सबसे अहम
विधानसभा में 88 सदस्य हैं। इनमें से 41 नेकां, 28 भाजपा, छह कांग्रेस, तीन पीडीपी, एक माकपा, एक आप, एक जेकेपीसी और सात निर्दलीय हैं। चुनाव से ठीक पहले बनी राजनीतिक परिस्थितियों और समीकरणों के हिसाब से एनसी को अपने 41 के अलावा कांग्रेस के छह, सीपीआई और आप के एक-एक विधायक का वोट मिलने की उम्मीद है।
पीडीपी भी अपने तीन विधायकों के वोट एनसी प्रत्याशी शम्मी ओबरॉय को देने की घोषणा कर चुकी है। जेकेपीसी के एकमात्र विधायक सज्जाद लोन चुनाव में हिस्सा न लेने का एलान कर चुके हैं। ऐसे में चौथी सीट के लिए सारा दारोमदार निर्दलीय सात विधायकों पर आकर टिक गया है।
सरकार में शामिल निर्दलीय विधायकों को वोट दिखाने की छूट नहीं
सात में से पांच निर्दलीय विधायक नेकां सरकार को समर्थन दे रहे हैं। इनमें छंब से विधायक सतीश शर्मा, बनी से रामेश्वर सिंह, इंदरवल से प्यारेलाल शर्मा, सुरनकोट से चौधरी अकरम और थन्नामंडी से विधायक मुजफ्फर इकबाल खान शामिल हैं। सतीश शर्मा सरकार में मंत्री भी हैं। शोपियां से निर्दलीय विधायक शाबिर अहमद ने सरकार को समर्थन तो नहीं दिया लेकिन वह ज्यादातर मुद्दों पर सरकार के साथ ही खड़े नजर आते हैं।
लंगेट से निर्दलीय विधायक एवं सांसद इंजीनियर रशीद के भाई खुर्शीद अहमद शेख को किसी भी खेमे का नहीं माना जाता। पांच निर्दलीय एनसी सरकार को समर्थन जरूर दे रहे हैं लेकिन नियमों के तहत उन्हें मतदान करते समय वोट दिखाने की छूट नहीं है। अगर वह दिखा देते हैं कि किसे वोट दे रहे हैं तो उनका वोट अमान्य हो जाएगा। ऐसे में दो अतिरिक्त वोटों के इंतजाम के लिए भाजपा की निगाहें निर्दलीय विधायकों पर टिकी हैं।

Dehradun: कुंभ क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण के लिए लगेंगे भीड़ घनत्व सेंसर, संवेदनशील लोकेशन की होगी जियो फेंसिंग

भीड़ बढ़ते ही प्रशासन के पास सीधे अलर्ट आ जाएगा। आईओटी आधारित भीड़ घनत्व सेंसर के साथ ही संवेदनशील जगहों की जियो फेंसिंग भी होगी।

कुंभ 2027 में भीड़ नियंत्रण के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का खूब इस्तेमाल होगा। भीड़ बढ़ते ही प्रशासन के पास सीधे अलर्ट आ जाएगा। आईओटी आधारित भीड़ घनत्व सेंसर के साथ ही संवेदनशील जगहों की जियो फेंसिंग भी होगी।

हर बार कुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी चुनौती है। 2010 के कुंभ में महाशिवरात्रि, फाल्गुन अमावस्या, मेष संक्रांति और चैत्र पूर्णिमा के शाही स्नान में 3.11 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद अर्द्धकुंभ 2016 में इन चारों स्नान पर 72 लाख और कुंभ 2021 में कोविड के बावजूद 66.25 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इस बार राज्य सरकार ने मुख्य स्नान पर 1.5 से दो करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया है। पूरे कुंभ के दौरान चार माह में 17 से 21 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

इस नाते भीड़ का नियंत्रण बड़ी चुनौती होगा। लिहाजा, भीड़ नियंत्रण व यातायात प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा। भीड़ की रियल टाइम क्राउड मॉनिटरिंग होगी। इसके अलावा सभी जगहों पर भीड़ घनत्व सेंसर (क्राउड डेनसिटी सेंसर) लगाए जाएंगे, जो कि भीड़ बढ़ने पर अलर्ट दे देंगे। इसी हिसाब से प्रशासनिक अमला हरकत में आएगा।

कुंभ की सभी संवेदनशील लोकेशन की जियो फेंसिंग होगी, जिससे वहां होने वाली हर हलचल और भीड़ बढ़ने पर सैटेलाइट से पता चल जाएगा। साथ ही हीटमैप आधारित क्राउड फ्लो डैशबोर्ड बनाया जाएगा, जिसमें हर अवधि में भीड़ के आने का फ्लो पता चल सकेगा। इसी कड़ी में आईटी विभाग यहां ईवी चार्जिंग लोकेटर और सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर भी बनाएगा।

कुंभ 2027 के लिए डिजिटल कुंभ के तौर पर भी तैयारी की जा रही है। कुंभ के दौरान व्यवस्थाएं बनाने में अधिक से अधिक एआई व अन्य तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा।
-नितेश झा, सचिव आईटी

उत्‍तराखंड के चार पालिटेक्निक में AI लैब स्थापित, छात्रों को मिलेगा मॉडर्न टेक्नोलॉजी का साथ

उत्तराखंड सरकार ने राज्य के चार पॉलिटेक्निक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रयोगशालाएं स्थापित करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य छात्रों को AI की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना है, जिसमें मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

अशोक केडियाल, जागरण, देहरादून । उत्तराखंड के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी पहल के तहत राज्य के चार राजकीय पालिटेक्निक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) प्रयोगशाला स्थापित की गईं हैं। ये प्रयोगशाला राजकीय पालिटेक्निक पित्थूवाला (देहरादून), रानीपोखरी (देहरादून), काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) और द्वाराहाट (अल्मोड़ा) में शुरू की गई हैं। इस पहल से उत्तराखंड तकनीकी रूप से सशक्त युवाओं के निर्माण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इन अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से छात्र अब पारंपरिक विषयों को आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण से पढ़ पा रहे हैं, जिससे उनके ज्ञान और कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डाटा एनालिटिक्स जैसे उभरते हुए विषयों के साथ छात्रों को जोड़ने की दिशा में यह राज्य सरकार की एक अग्रणी पहल मानी जा रही है। इन प्रयोगशालाओं में आवश्यक कंप्यूटर संसाधन, साफ्टवेयर, हाई स्पीड इंटरनेट एवं प्रशिक्षित फैकल्टी की व्यवस्था की गई है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ तकनीकी अनुसंधान का भी अवसर मिल रहा है।

प्रविधिक शिक्षा निदेशालय की माने तो राज्य सरकार इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और इसका उद्देश्य युवाओं को भविष्य की तकनीकों से लैस करना है। प्रयोगशालाएं केवल इन चार संस्थानों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि राज्य के अन्य 71 पालिटेक्निक संस्थानों को भी इससे प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलेगा। इससे पूरे राज्य में तकनीकी शिक्षा का स्तर सुधरेगा और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

पालीटेक्निक छात्रों की रुचि और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग और इंडस्ट्री सह सहयोग प्रशिक्षण कार्यक्रम की भी योजना बनाई जा रही है। इससे तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सकेगा।

ऐसे मिलेगा एआइ से छात्रों को लाभ

तकनीकी विषयों की समझ और व्यावहारिकता बढ़ेगी। एआइ के ज़रिए इलेक्ट्रानिक्स, मैकेनिकल, सिविल, कंप्यूटर साइंस आदि पारंपरिक विषयों में डाटा विश्लेषण, स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम, भविष्यवाणी माडल जैसे आधुनिक आयाम जोड़े जाते हैं। इससे छात्र किसी भी विषय को नई दृष्टि से समझ पाते हैं। आज की इंडस्ट्री आटोमेशन, रोबोटिक्स, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग पर आधारित है। इसका भी एआइ से लाभ मिलेगा।

समस्या सुलझाने की क्षमता में वृद्धि

एआइ का ज्ञान डिप्लोमा छात्रों को उद्योग की वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों के अनुसार तैयार करता है, जिससे वे सीधे काम के लिए तैयार रहते हैं। एआइ टूल्स और तकनीकों का इस्तेमाल कर छात्र रियल-लाइफ समस्याओं का विश्लेषण और समाधान कर पाते हैं। इससे उनमें जटिलताएं से जूझने, आत्म विश्वास एवं कौशल क्षमता विकसित होती हैं।

 

‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर आधिकारिक बातचीत के लिए यह सही समय नहीं है।’

वाणिज्य राजेश अग्रवाल का कहना है कि भारत से एक टीम टैरिफ पर चर्चा करने के लिए अमेरिका में है; लेकिन शटडाउन के कारण अमेरिका में कर्मचारियों की कमी है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, भारत की एक टीम वर्तमान में टैरिफ से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अमेरिका में है।

हालाँकि, अमेरिकी सरकार में चल रहे कामबंदी के कारण, द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर अगले आधिकारिक दौर की वार्ता आयोजित करने का यह “सही समय” नहीं है, उन्होंने कहा। श्री अग्रवाल, जो वर्तमान में बीटीए पर भारत के मुख्य वार्ताकार हैं, ने आगे कहा कि भारत को अमेरिका से अपने ऊर्जा आयात को बढ़ाने में “बहुत खुशी” होगी। अमेरिकी सरकार वर्तमान में “कामबंदी” के दौर से गुजर रही है क्योंकि वह उस देश में चालू वित्तीय वर्ष के लिए आवश्यक वित्त पोषण कानून लागू नहीं कर पाई है।

“हमारी वार्ता टीम अमेरिका में है और यह देखने की कोशिश कर रही है कि क्या हम दोनों पक्षों के बीच एक ऐसा समाधान निकाल सकते हैं जो टैरिफ से जुड़े कुछ मुद्दों को सुलझा सके,” श्री अग्रवाल ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता में कहा। “इस पर पहले से ही चर्चा चल रही है और समाधान निकलने की हमेशा उम्मीद है।”

“औपचारिक वार्ता के दौर के संबंध में, अमेरिका वर्तमान में बंद है और उनकी जनशक्ति कम है, इसलिए यह पूर्ण व्यापार वार्ता करने का सही समय नहीं है,” वाणिज्य सचिव ने द हिंदू द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष सक्रिय रूप से इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा व्यापार तनाव का समाधान कैसे निकाला जाए। उन्होंने कहा, “एक देश के रूप में, हमें अमेरिका से और अधिक ऊर्जा खरीदने में बहुत खुशी होगी, बशर्ते वह सही कीमत पर उपलब्ध हो।”

उत्तराखंड में लक्सर सब स्टेशन का बढ़ेगा लोड, पूहाना–रुड़की लाइन की बढ़ेगी करंट वहन क्षमता

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने पिटकुल की दो परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। लक्सर सबस्टेशन की क्षमता बढ़ाई जाएगी और पूहाना-रुड़की ट्रांसमिशन लाइन को सुदृढ़ किया जाएगा। आयोग ने कुछ शर्तों के साथ स्वीकृति दी है और राज्य सरकार से वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। गलत जानकारी मिलने पर स्वीकृति रद्द हो सकती है।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन आफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सशर्त मंज़ूरी दे दी है। पहली परियोजना हरिद्वार ज़िले के 132 केवी लक्सर सबस्टेशन की क्षमता बढ़ाने से जुड़ी है, जबकि दूसरी परियोजना 220 केवी पूहाना–रुड़की ट्रांसमिशन लाइन की वहन क्षमता बढ़ाने से संबंधित है। आयोग ने दोनों प्रस्तावों की गहन समीक्षा करने के बाद सशर्त स्वीकृति जारी की है।

लक्सर सबस्टेशन से जुड़ी परियोजना में वर्तमान में तीन 40 एमवीए ट्रांसफार्मर स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 120 एमवीए है। सबस्टेशन पर कुल लोड लगभग 155 एमवीए तक पहुंच गया है और ट्रांसफार्मर लगभग 90 प्रतिशत तक ओवरलोड स्थिति में चल रहे हैं। इस कारण पिटकुल ने एक 40 एमवीए ट्रांसफार्मर को 80 एमवीए ट्रांसफार्मर से बदलने का प्रस्ताव दिया, जिससे कुल क्षमता बढ़कर 160 एमवीए हो जाएगी।

परियोजना की प्रारंभिक लागत 18.43 करोड़ थी, जिसे संशोधित डीपीआर में बढ़ाकर 24.36 करोड़ किया गया। आयोग ने तकनीकी समीक्षा के दौरान पाया कि प्रोजेक्ट के कुछ प्रस्ताव उचित नहीं हैं। इसलिए इन हिस्सों को अस्वीकृत कर दिया गया। हालांकि, आयोग ने ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाने और उससे संबंधित उपकरणों जैसे करंट ट्रांसफार्मर आदि के कार्य को मंज़ूरी दे दी।

आयोग ने निर्देश दिया कि पिटकुल 15 दिनों में संशोधित लागत का विवरण प्रस्तुत करे और एक महीने के भीतर राज्य सरकार से इक्विटी अंशदान की स्वीकृति का प्रमाण दे। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि सभी कार्य प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के तहत किए जाएं।

दूसरी ओर, 220 केवी पूहाना–रुड़की लाइन से संबंधित परियोजना में वर्तमान में एसीएसआर ज़ेब्रा कंडक्टर उपयोग किए जा रहे हैं, जिनकी अधिकतम करंट वहन क्षमता लगभग 650 एम्पियर है। गर्मियों के दौरान यह लाइन 600 से 800 एम्पियर तक लोड वहन करती है, जिससे ओवरहीटिंग जैसी समस्या सामने आती हैं।

इस स्थिति को सुधारने के लिए पिटकुल ने लाइन को एचटीएलएस (हाई टेंपरेचर लो सैग) कंडक्टर से री-कंडक्टर करने का प्रस्ताव दिया, जिसकी करंट क्षमता लगभग 1600 एम्पियर है। परियोजना की लागत 13.95 करोड़ निर्धारित की गई थी, जिसे 15 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। आयोग ने परियोजना की तकनीकी व आर्थिक समीक्षा के बाद 12.89 करोड़ की मंज़ूरी दी और कुछ आवश्यक शर्तों के साथ कार्य आरंभ करने की अनुमति दी।

आयोग ने दोनों मामलों में यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल प्रस्तुत लागत को प्रावधिक माना जाएगा। अंतिम लागत का निर्धारण ट्रू-अप प्रक्रिया के समय किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर गलत या अधूरी जानकारी सामने आती है, तो आयोग स्वीकृति को निरस्त कर सकता है। साथ ही, आयोग ने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह इक्विटी अंशदान सुनिश्चित करे ताकि परियोजना बिना वित्तीय अड़चन के पूरी हो सकें।

UKSSSC की सहकारी निरीक्षक भर्ती परीक्षा 16 नवंबर को होगी, आयोग ने जारी की नई डेट

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) ने सहकारी निरीक्षक भर्ती परीक्षा की नई तिथि घोषित कर दी है। अब यह परीक्षा 16 नवंबर, 2025 को होगी। पहले यह 5 अक्टूबर को होने वाली थी। यह परीक्षा देहरादून और हल्द्वानी के 26 केंद्रों पर होगी। आयोग ने उप पुस्तकालय अध्यक्ष परीक्षा का परिणाम भी जारी कर दिया है।

 देहरादून:  उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) प्रस्तावित सहकारी निरीक्षक पदों की भर्ती परीक्षा 16 नवंबर, 2025 को आयोजित करेगा। पूर्व में प्रस्तावित पांच अक्टूबर को इस परीक्षा को आयोग ने स्थगित कर दिया था। सोमवार को परीक्षा की नयी तिथि घोषित की गई।

सहकारी निरीक्षक वर्ग-दो/ सहायक विकास अधिकारी (सहकारी) के 45 पदों के लिए लिखित परीक्षा देहरादून और हल्द्वानी के 26 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। प्रवेश पत्र कुछ समय बाद आयोग की वेबसाइट http://www.sssc.uk.gov.in पर अपलोड किए जाएंगे।

आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्ताेलिया ने पुष्टि करते हुए बताया कि 16 नवंबर को सहकारी विभाग की समूह-ग की परीक्षा आयोजित की जाएगी। हालांकि आयोग ने बीती 12 अक्टूबर को प्रस्तावित सहायक कृषि अधिकारी वर्ग-एक (रसायन विज्ञान) व प्राविधिक सहायक वर्ग-एक (अभियंत्रण शाखा) के 10 पदों के लिए भर्ती परीक्षा पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। आयोग जल्दी ही इस परीक्षा की भी नई तिथि घोषित करेगा।

SpaceX: स्पेसएक्स ने 40 माले की इमारत के बराबर रॉकेट का सफल परीक्षण किया, 11वीं उड़ान में हासिल की यह खासियत

दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप का 11वां टेस्ट सफल रहा।मंगलवार (14 अक्तूबर) को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से स्टारशिप की सफल लॉन्चिंग की गई।

दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने फिर बड़ा कारनामा किया है। सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप का 11वां टेस्ट सफल रहा। मंगलवार (14 अक्तूबर) को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से स्टारशिप की सफल लॉन्चिंग की गई। स्टारशिप की हिंद महासागर में लैंडिंग कराई गई।

स्टारशिप अब तक का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। जो कि टेक्सास के दक्षिणी सिरे से आकाश में गर्जना के साथ उड़ा। बूस्टर रॉकेट अलग हो गया और योजना के मुताबिक मेक्सिको की खाड़ी में नियंत्रित रूप से प्रवेश किया, और स्टारशिप हिंद महासागर में उतरने से पहले अंतरिक्ष में उड़ता रहा।

स्टारशिप रॉकेट को परीक्षण उड़ान के दौरान प्रक्षेपित किया और पिछली बार (10वां टेस्ट) की तरह ही दुनिया के आधे हिस्से का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। बूस्टर ने योजना के अनुसार मेक्सिको की खाड़ी में नियंत्रित प्रवेश किया, और अंतरिक्ष यान हिंद महासागर में उतरने से पहले अंतरिक्ष में घूमता रहा। घटनास्थल से कुछ भी बरामद नहीं हुआ।

सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई, जबकि स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। स्टारशिप अंतरिक्ष यान (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को पूरे तौर से स्टारशिप कहा जाता है। जिसका उद्देश्य भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े परीक्षण करना था। स्टारशिप की ऊंचाई 403 फीट है। जिसका उपयोग स्पेसएक्स के संस्थापक और सीईओ एलन मस्क मंगल ग्रह पर लोगों को भेजने के लिए करना चाहते हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली रॉकेट
स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर वापस भेजने के अपने प्रयासों में दुनिया के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली रॉकेट, स्टारशिप का उपयोग करने की योजना बनाई थी। कंपनी ने उन आलोचकों को भी खारिज करने की कोशिश की, जिन्होंने कहा था कि इसकी तकनीक नासा की चंद्र परियोजनाओं को पूरा करने और मनुष्यों को मंगल ग्रह पर ले जाने के मस्क के सपने को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है।

आपको बता दें कि इससे पहले स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त को किया गया था, जो सफल रहा था। स्टारशिप का 10वां ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे किए गए थे। गौरतलब है कि स्टारशिप का उपयोग एलन मस्क लोगों को मंगल ग्रह पर भेजने के लिए करना चाहते हैं। जो कि यह एक प्रयोज्य वाहन यानी रीयूजेबल व्हीकल है, जिसे चंद्रमा की कक्षा से सतह तक और वापस ऊपर ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

 

Uttarakhand: चारधामों के कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन यात्रा से भी घूमेगा पर्यटन का पहिया, तैयारियां शुरू

चारधामों के कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन यात्रा से पर्यटन को बढ़ावा देने की सरकार की तैयारी है। केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने पर ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की पूजा अर्चना होगी। वहीं, बदरीनाथ धाम के प्रवास स्थल योग बदरी पांडुकेश्वर, ज्योतिर्मठ में नृसिंह मंदिर में शीतकाल में यात्रा संचालित होगी। यमुनोत्री धाम की खरसाली व गंगोत्री धाम की मुखबा में पूजा की जाएगी।

चारधामों के कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन यात्रा से पर्यटन कारोबार का पहिया घूमेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। चारधामों के शीतकाल प्रवास स्थलों से यात्रा संचालित होगी। चारधाम यात्रा अंतिम चरण में है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित हो चुकी है।

दीपावली के बाद इसी माह केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होंगे। जबकि बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को बंद होंगे। केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने पर ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की पूजा अर्चना होगी। वहीं, बदरीनाथ धाम के प्रवास स्थल योग बदरी पांडुकेश्वर, ज्योतिर्मठ में नृसिंह मंदिर में शीतकाल में यात्रा संचालित होगी। यमुनोत्री धाम की खरसाली व गंगोत्री धाम की मुखबा में पूजा की जाएगी।

प्रवास स्थलों पर भक्तों के लिए तैयारियां
वर्ष 2024-25 में शीतकालीन यात्रा के दौरान चारधामों में 70 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मुख्यमंत्री धामी ने बाबा केदार के शीतकालीन प्रवास ओंकारेश्वर मंदिर से शीतकालीन यात्रा का शुभांभ किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगोत्री धाम के प्रवास स्थल मुखबा पहुंच कर पूरे देश में शीतकालीन यात्रा का संदेश दिया था।

इस बार सरकार शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए प्रवास स्थलों पर भक्तों के लिए तैयारियों में जुटी है।पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि बीते वर्ष शीतकालीन यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु चारधामों के प्रवास स्थलों पर दर्शन के लिए आए थे।

सरकार का प्रयास है कि चारधाम यात्रा पूरे साल चलती रही है। यात्रा प्रदेश की अर्थव्यवस्था व पर्यटन कारोबार से जुड़ी है। शीतकालीन यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा दी जाएगी।