जातिगत जनगणना पर लालू ने केंद्र पर जातिगत जनगणना कराने से इनकार करने को लेकर निशाना साधा

बिहार में जातिगत जनगणना के मुद्दे पर राजनीति जारी है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर 2021 में जातिगत जनगणना कराने से इनकार करने को लेकर निशाना साधा है।लालू ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि जनगणना में सांप, बिच्छू तोता, मैना, हाथी, घोड़ा, कुत्ता, बिल्ली, सूअर और सियार समेत सभी पशु-पक्षी, पेड़-पौधे गिने जाएंगे, लेकिन पिछड़े -अति पिछड़े वर्गों के इंसानों की गिनती नहीं होगी।

लालू ने भाजपा और संघ से पूछा सवाल

लालू यादव ने भाजपा और संघ से सवाल पूछा है कि आखिर उन्हें पिछड़ों और अति पिछड़ों से इतनी नफरत क्यों हैं। लालू ने कहा, जातिगत जनगणना कराने से सभी वर्गों का भला होगा और सब की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। लालू ने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के साथ बहुत बड़ा धोखा कर रहा है।

लालू ने कहा अगर केंद्र सरकार जनगणना फॉर्म में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़कर देश की कुल आबादी के 60 फीसदी से अधिक लोगों की जातीय जनगणना नहीं कर सकती तो ऐसी सरकार और इन वर्गों के चुने हुए सांसदों और मंत्रियों पर धिक्कार है।लालू ने जनता से ऐसे सांसदों और मंत्रियों का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील की।

नीतीश कुमार की पार्टी को उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाएगी।जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने भी कहा कि अभी जातिगत जनगणना शुरू नहीं हुई है. भले ही केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में जातिगत जनगणना कराने में तकनीककठिनाई की बात कही है, मगर केंद्र सरकार इस मुद्दे पर अब तो कोई निर्णय नहीं लिया है

बिहार सरकार में मंत्री संजय कुमार झा ने कहा, जातिगत जनगणना का नीतीश कुमार पिछले 30 सालों से उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर हमारे पार्टी का रुख बिल्कुल साफ है हमें उम्मीद है कि जाति का जनगणना के मुद्दे पर कोई सकारात्मक कदम उठाया जाएगा।हम सबको प्रधानमंत्री के निर्णय का इंतजार है।

आज से देहरादून में अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव, उत्तराखंड के सेब को नई पहचान मिलेगी

देहरादून :-  उत्तराखंड के सेबों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए तीन दिवसीय (24 से 26 सितंबर) अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव (संगोष्ठी और प्रदर्शनी) का शुभारंभ आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यहां रेंजर ग्राउंड में करेंगे। इसका आयोजन आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत उद्यान विभाग कर रहा है। महोत्सव में अदानी ग्रुप समेत टर्की, नाइजीरिया समेत कई देशों की कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इससे उत्तराखंड के सेब को मार्केटिंग के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि इस महोत्सव के माध्यम से सरकार का उद्देश्य है कि राष्ट्रीयस्तर पर उत्तराखंड के सेब को नई पहचान मिल सके। इसमें उत्तराखंड समेत हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रगतिशील किसान उत्पादों को प्रदर्शित करेंगे। महोत्सव में प्रतियोगिता भी होंगी। इसमें सेब और उससे तैयार होने वाले उत्पाद, पैकेजिंग भी शामिल हैं।

उत्तराखंड में औद्यानिकी फसलों का सालाना 3250 करोड़ रुपये का कारोबार है। 25785 हेक्टेयर भूमि पर सेब का उत्पादन होता है। प्रतिवर्ष 62 हजार मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन होता है। राज्य में औद्यानिकी फसलों के तहत 2.96 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है।4.50 लाख किसान औद्यानिकी फसलों का उत्पादन करते हैं। उत्तरकाशी सेब उत्पादन में अग्रणी जिला है।

जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के सेबों को सबसे बेहतर सेब के रूप में पहचान मिली है। देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही इसकी बेहद ज्यादा डिमांड है. खास बात ये है कि उत्तराखंड के आराकोट बंगाण, हर्षिल समेत दूसरे क्षेत्रों में भी बेहतर क्वालिटी के सेब का उत्पादन किया जाता है, लेकिन यहां के सेबों को इस रूप में पहचान नहीं मिल पाई है। इसी बात को समझते हुए उत्तराखंड उद्यान विभाग ने भी प्रदेश के सेब को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं, इस दिशा में देहरादून में होने जा रहा अंतरराष्ट्रीय सेब महोत्सव बेहद खास है, तीन दिवसीय इस सेब महोत्सव में सेबों की कई किस्में लोगों को देखने को मिलेगी।

उत्तराखंड का सेब हिमाचल की ब्रांडिंग
आज भी उत्तराखंड के सेबों को हिमाचल की पेटियों में भरकर बेचा जाता है. उत्तरकाशी और दून के पर्वतीय क्षेत्र में होने वाले सेब हिमाचल की ब्रांडिंग के जरिये बिकते हैं. यानी सेब तो उत्तराखंड का होता है, लेकिन उस पर टैग हिमाचल का लगता है. जिस कारण उत्तराखंड के सेब को पहचान नहीं मिल पाती है.

जिलेवार सेब का उत्पादन
जिला                      क्षेत्रफल         (हेक्टेयर) उत्पादन (मीट्रिक टन)
उत्तरकाशी             9372.59            20529
अल्मोड़ा                1577                   14137
नैनीताल                1242                   9066
देहरादून                 4799                  7342
चमोली                  1064                   3354
पौड़ी                      1123                   3057
पिथौरागढ़             1600                   3012
टिहरी                     3820.34            1910

 

 

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, 2021 की जनगणना में पिछड़े वर्गों की जाति जनगणना प्रशासनिक रूप से है कठिन

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पिछड़ा वर्ग की जाति जनगणना प्रशासनिक रूप से कठिन और बोझिल है। साथ ही कहा कि इस तरह की जानकारी को जनगणना के दायरे से बाहर करना एक सचेत नीति निर्णय है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने 2021 की जनगणना में ओबीसी की गणना नहीं करने का फैसला किया है। SC में हलफनामा दाखिल कर सरकार ने कहा है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा पिछड़े वर्गों (Other Backward Caste) की जाति आधारित जनगणना प्रशासनिक रूप से काफी जटिल काम है और इससे पूरी या सही सूचना हासिल नहीं की जा सकती है। सरकार का कहना है कि जनगणना के दायरे से इस तरह की सूचना को अलग करना नीतिगत फैसला है।

पिछड़ा वर्गों की जनगणना को लेकर केंद्र का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 10 दलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जाति गणना की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।अब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया है, उसके मुताबिक सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना (SECC), 2011 में काफी गलतियां एवं अशुद्धियां हैं। ऐसे में उस पर भरोसा या उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

केंद्र ने खामियों को सामने रखते हुए कहा है कि 1931 जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि कुल जातियां 4,147 थीं लेकिन 2011 SECC में 46 लाख से ज्यादा पता चलते हैं। सरकार ने कहा है कि यह आंकड़ा वास्तव में हो ही नहीं सकता, संभव है कि इनमें कुछ जातियां उपजातियां रही हों।सरकार ने बताया है कि जनगणना करने वाले कर्मचारियों की गलती और गणना करने के तरीके में गड़बड़ी के कारण आकंड़े विश्वसनीय नहीं रह जाते हैं।

केंद्र की ओर से यह हलफनामा महाराष्ट्र की ओर से दाखिल एक याचिका के जवाब में दाखिल किया गया जिसमें कोर्ट से केंद्र व अन्य संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि एसईसीसी 2011 का मूल डाटा उपलब्ध कराया जाए जो कई बार मांगने के बाद भी मुहैया नहीं कराया गया है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिव द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया कि केंद्र ने पिछले साल जनवरी में एक अधिसूचना जारी की है जिसमें जनगणना 2021 के दौरान एकत्र की जाने वाली सूचनाओं की श्रृंखला निर्धारित की गई है और इसमें अनुसूचित से संबंधित जानकारी सहित कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। जाति और अनुसूचित जनजाति लेकिन जाति की किसी अन्य श्रेणी को संदर्भित नहीं करता है। साथ ही कहा गया कि जनगणना के दायरे से किसी भी अन्य जाति के बारे में जानकारी को बाहर करना केंद्र सरकार द्वारा लिया गया एक सचेत नीति निर्णय है।

सरकार ने यह भी कहा है कि जनगणना कराने का काम एडवांस्ड स्टेज में है और अब मानदंडों में बदलाव नहीं किया जा सकता है। वैसे भी कोरोना महामारी के चलते प्रक्रिया में थोड़ी देर हो गई है। सरकार ने आगे कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ओबीसी जातिगत जनगणना कराने को लेकर कोई भी निर्देश बड़े पैमाने पर भ्रम पैदा करेगा और सरकार के नीतिगत फैसले में भी दखल होगा, जबकि सरकार ने सेंसस 2021 में OBC जाति जनगणना न कराने का फैसला किया है।’

सरकार ने साफ कहा है कि एसईसीसी 2011 सर्वेक्षण ‘ओबीसी सर्वेक्षण’ नहीं है जैसा कि आरोप लगाया जाता है, बल्कि यह देश में सभी घरों में जातीय स्थिति का पता लगाने की व्यापक प्रक्रिया थी। यह मामला गुरुवार को न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। अब आगे की सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

उत्तराखंड सरकार को हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की नियुक्ति न होने पर नोटिस जारी कर, 4 हफ्ते में मांगा जवाब

नैनीताल :- लोकायुक्त की नियुक्ति की मांग वाली यह याचिका हल्द्वानी के रवि शंकर जोशी ने दाखिल की है। याचिका में बताया गया है कि 2014 में सरकार ने एक्ट में बदलाव कर दिया और 2014 का संसोधन एक्ट बनाते हुए शर्त रख दी कि जिस दिन लोकायुक्त नियुक्त होगा, उसी दिन से एक्ट प्रभावी होगा।उच्च न्यायालय ने राज्य में लोकायुक्त नियुक्त करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई भी चार सप्ताह बाद होगी। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की जनहित पर सुनवाई हुई।

हल्द्वानी के रवि शंकर जोशी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि सरकार ने 2013 में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए अधिनियम बनाया, जिसके सख्त प्रावधान थे, लेकिन 2014 में सरकार ने इस एक्ट में संशोधन कर दिया और यह शर्त रख दी कि जिस दिन लोकायुक्त की नियुक्ति होगी, उसी दिन से एक्ट प्रभावी होगा। आठ साल बीतने के बाद भी सरकार ने भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने से बचाने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति ही नहीं की।भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए उनके पास उच्च न्यायालय के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है, अगर सरकार राच्य में लोकायुक्त की नियुक्त कर देती तो उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ मामलों में लडऩे में मदद मिल सकेगी।

रविशंकर जोशी के अनुसार 2012 में खंडूरी सरकार के कार्यकाल में सशक्त लोकायुक्त बिल राज्य विधानसभा में पारित हुआ था लेकिन 2014 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लोकायुक्त विधेयक को निरस्त कर नया लोकायुक्त बिल लाया गया, जिसे कभी लागू ही नहीं किया गया। त्रिवेंद्र सरकार ने लोकायुक्त बिल को संशोधन के लिए प्रवर समिति को सौंप दिया। 2017 में प्रवर समिति के पास भेजा गया बिल ठंडे बस्ते में पड़ा है।

अब 8 साल बीतने के बाद भी लोकायुक्त नियुक्त नहीं होने पर कोर्ट से मांग की गई है कि लोकायुक्त की नियुक्ति हो ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके। इस याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आरएस चौहान व जस्टिस आलोक कुमार की बेंच ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति क्यों नहीं हो सकी।

हाईकोर्ट में रवि शंकर जोशी के वकील राजीव बिष्ट ने बताया कि 2013 में जो एक्ट सरकार लेकर आई थी, वह काफी मजबूत था. उसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर प्रावधान थे. पर बाद में इनमें बदलाव कर एक्ट को कमजोर कर दिया गया. राजीव बिष्ट ने बताया कि 2016 में भी ये मामला हाईकोर्ट में उठाया गया था लेकिन सरकार ने कहा कि ऐसा ही मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है, जिसके बाद याचिका वापस ले ली गई. लेकिन साल 2018 में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 2017 में एक्ट लाए गए हैं और एक्ट पास होने के तीन महीने के लोकायुक्त नियुक्त कर देंगे, जो अभी भी नहीं हुआ है. अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने बताया कि अगर राज्य में लोकायुक्त नियुक्त होगा तो भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आएगी और कोर्ट में जो भ्रष्टाचार के मामले पेंडिंग हैं, उनमें भी कमी आएगी।

उत्तराखंड पुलिस के ‘शक्तिमान’ की मौत मामले में मंत्री गणेश जोशी समेत पांच आरोपी दोषमुक्त, पुलिस के घोड़े शक्तिमान की हुई थी मौत

देहरादून :- कैबिनेट मंत्री (तत्कालीन विधायक) गणेश जोशी, योगेंद्र रावत समेत पांच आरोपियों को सीजेएम कोर्ट ने बरी कर दिया है। इन सभी पर 14 मार्च 2016 को विधानसभा कूच के दौरान पुलिस के घोड़े की टांग तोड़ने का आरोप था। उक्त घोड़े का नाम शक्तिमान था। तब यह मामला सोशल मीडिया पर बेहद चर्चित हुआ था। पुलिस के शक्तिमान घोड़े की मौत के मामले में पुष्कर सिंह धामी की उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के साथ ही अन्य 4 आरोपियों को न्यायालय ने दोष मुक्त करार दिया। जोशी के खिलाफ मारपीट, बलवे और पशुओं के खिलाफ क्रूरता संबंधी मामले दर्ज थे, जिनमें साक्ष्यों की कमी के आधार पर कोर्ट ने उन्हें पांच साल पुराने एक मामले में बरी कर दिया। इस फैसले के बाद भावुक होते हुए जोशी ने कहा कि सच की जीत आज हुई. जानिए क्या था पूरा मामला और किस तरह जोशी को बरी किया गया।

दरअसल, साल 2016 में बजट सत्र के दौरान भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ विधानसभा तक रैली निकाली थी। इस दौरान पुलिसकर्मियों व भाजपा समर्थकों के बीच झड़प भी हुई थी।आरोप था कि इस दौरान भाजपा विधायक गणेश जोशी ने पुलिस की लाठी छीनकर उन्हीं पर बरसाना शुरू कर दिया था। लाठी की कुछ चोटें पुलिस के घोड़े शक्तिमान को भी आईं, जिसके चलते वह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई थी।

इस सिलसिले में पुलिस ने जोशी के खिलाफ बलवे और मारपीट के अलावा पशु क्रूरता अधिनियम का मामला दर्ज कराया था। गुरुवार को देहरादून के मुख्य न्यायाधीश लक्ष्मण सिंह की कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त किया। इस फैसले के बाद जोशी ने भावुक होते कहा, ‘मैं पहले से कह रहा था कि निर्दोष हूं। आज सत्य की जीत हुई। वहीं, जोशी के वकील मनमोहन कंडवाल ने बताया कि साक्ष्यों की कमी और गवाहों के विरोधाभासी बयानों के चलते कोर्ट ने जोशी को दोषमुक्त किया।

अमरीका से नकली पैर मंगवाकर भी लगवाया गया था

तब करीब एक महीने से भी ज्यादा समय शक्तिमान घोड़ा जिंदगी और मौत से लड़ा। इस बीच अमरीका से नकली पैर मंगवाकर भी लगवाया गया था। लेकिन शक्तिमान की जान नहीं बचाई जा सकी।अंत में 20 अप्रैल 2016 को शक्तिमान ने दम तोड़ दिया। इस मामले में तत्कालीन विधायक गणेश जोशी को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बाद उन्हें कई दिन सुद्धोवाला जेल में भी बिताने पड़े थे।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की मुलाकात होगी खास, वाशिंगटन में दिखेगा भारतीय कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने खास दौरे पर अमेरिका पहुंच चुके हैं और भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात को उनकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात होनी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की जब मुलाकात होगी, तब अमेरिका में इतिहास रचा जाएगा. ये पहली बार होगा जब कोई अमेरिकी सरकार में नंबर दो का व्यक्ति भारतीय मूल का है और एक भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत कर रहा है।ये मुलाकात बेहद खास होने जा रही है, क्योंकि ऐसा पहली बार हो रहा है जब कोई भारतीय मूल का अमेरिकी उप-राष्ट्रपति एक भारतीय प्रधानमंत्री का अमेरिकी धरती पर स्वागत कर रहा है।

अमेरिकी मीडिया भी इस मुलाकात को खास नज़रिए से देख रहा है, The Los Angeles Times अखबार ने लिखा है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए ये एक ऐतिहासिक पल है. 56 साल की कमला हैरिस अमेरिका की पहली महिला उप-राष्ट्रपति हैं, वह भारतीय मूल की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अमेरिकी दौरे की शुरुआत सीईओ के साथ मुलाकात से करने जा रहे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मिलने से पहले कमला हैरिस से मुलाकात करेंगे। इस मीटिंग पर एक अमेरिकी अखबार का कहना है कि नरेंद्र मोदी-कमला हैरिस की मुलाकात अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को उनकी ताकतअहसास करवाएगी।

पहले फोन पर हो चुकी है दोनों की बातचीत

कमला हैरिस ने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन जून को फोन पर बात की थी, लेकिन आमने-सामनेये पहली मीटिंग है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, कमला हैरिस-पीएम मोदी की मुलाकात का फोकस भारत-अमेरिका की दोस्ती को मजबूत करना है। इनमें क्लाइमेट चेंज, हेल्थ, मानवाधिकार, लोकतंत्र समेत अन्य मसलों पर बात होगी।

कमला हैरिस एक अश्वेत पिता-भारतीय माता की संतान हैं. उनकी मां का भारत के तमिलनाडु के चेन्नई से नाता रहा है। जब कमला हैरिस ने उप-राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, तब यहां भारत में भी जश्न मना था।

कोरोना संकट के बीच पीएम मोदी का ये पहला बड़ा विदेशी दौरा है, इस दौरान पीएम मोदी कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। कमला हैरिस के साथ मुलाकात के अलावा अमेरिकन कंपनियों के सीईओ से मीटिंग भी है। साथ ही जो बाइडेन से द्विपक्षीय वार्ता होगी, क्वाड देशों के साथ साझा मीटिंग होनी है और ऑस्ट्रेलिया-जापान के पीएम से भी द्विपक्षीय वार्ता है।

PMO से उत्‍तराखंड पहुंची टीम,अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ सकते हैं केदारनाथ

देहरादून. उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र राज्य में सियासी सरगर्मियां बढ़ने जा रही हैं।अक्टूबर के महीने में भाजपा के शीर्ष नेता उत्तराखंड पहुंचेंगे। इसी सिलसिले में पीएम नरेंद्र मोदी का केदारनाथ दौरा अक्टूबर में संभव है। यहां काम का जायज़ा लेने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से एक टीम केदारनाथ पहुंची है। पीएमओ में सलाहकार भास्कर खुल्बे, आईएएस मंगेश घिल्डियाल अन्य अफसरों के साथ केदारनाथ पहुंचे हैं। ये टीम गुरुवार दोपहर 12 बजे तक यहां कामों और व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। 6 अक्टूबर के बाद प्रधानमंत्री मोदी केदारनाथ दौरे पर आ सकते हैं।

चुनावी हलचलों के तहत बीजेपी अक्टूबर के महीने में पार्टी के शीर्ष नेताओं के उत्तराखंड दौरे तय कर रही है। फ़िलहाल प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के दौरों को लेकर स्थान, दिन और समय के बारे में रूपरेखा बनाई जा रही है। इसी रूपरेखा के तहत केदारनाथ में व्यवस्थाओं का जायज़ा लेने पीएमओ से टीम पहुंची है, जिससे यह पूरी तरह तय माना जा रहा है कि पीएम मोदी यहां आने वाले हैं. गौरतलब है कि पीएम मोदी का दौरा केदारनाथ धाम के नवनिर्माण के लिहाज़ से भी अहम हो सकता है।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जासूसी के आरोप में पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक की सजा रखी बरकरार, दून सहित अन्य सैन्य ठिकाने के मिले थे नक्शे

उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल ने जासूसी करने के आरोपी पाकिस्तानी नागरिक आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अजीत सिंह निवासी लाहौर (पाकिस्तान) मामले में न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए आरोपी की सजा को बरकरार रखा है। सरकार को निर्देश दिए है कि उसके बेलबोंड को निरस्त कर उसे हिरासत में लिया जाय। पूर्व में कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।न्यायमूर्ति रवींन्द्र मैठाणी की एकलपीठ में सुनवाई हुई। रिहाई याचिका पर दिए निर्णय में कहा है कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए गए है। उसने पासपोर्ट एक्ट के दुरुपयोग किया है।

रुड़की पुलिस ने किया गिरफ्तार था
25 जनवरी 2010 को महाकुंभ के दौरान हरिद्वार के गंगनहर कोतवाली पुलिस द्वारा आबिद अली उर्फ असद अली उर्फ अजीत सिंह निवासी लाहौर (पाकिस्तान) को ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, विदेश एक्ट और पासपोर्ट एक्ट में थाना कोतवाली रुड़की गंगनहर में गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से मेरठ, देहरादून, रुड़की और अन्य सैन्य ठिकानों के नक्शे मिले थे। उससे बरामद एक पेन ड्राइव व कई गोपनीय जानकारी से जुड़े दस्तावेज मिले थे। पुलिस ने रुड़की के मच्छी मुहल्ला स्थित उसके ठिकाने पर छापा मारा तो वहाँ से बिजली फिटिंग के बोर्ड तथा सीलिंग फैन में छिपाकर रखे गए करीब एक दर्जन सिमकार्ड भी बरामद किये।

निचली अदालत ने 19 दिसंबर 2012 को उसे दोषी पाते हुए सात साल की सजा सुनाई थी।। इसके विरुद्ध अभियुक्त के अधिवक्ता द्वारा अपील दायर की गई लेकिन वकील द्वारा उसके पते इत्यादि के बारे में सही तथ्य नहीं लिखा गया।। सुनवाई करते हुए अपर जिला जज (द्वितीय) हरिद्वार ने अभियुक्त को बरी करने के आदेश पारित किए गए। लेकिन इसके बाद जेल अधीक्षक के स्तर से कोर्ट तथा एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर बताया गया कि अभियुक्त विदेशी नागरिक है और इसके लिए उसको रिहा करने से पहले उसका व्यक्तिगत बंधपत्र व अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी आवश्यक हैं। अपर जिला जज ने जेल अधीक्षक के पत्र के संदर्भ में स्पष्ट किया कि इसके लिए अलग से आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। एसएसपी के आदेश पर उसे रिहा कर दिया गया।

निचली अदालत के आदेश को सरकार ने हाइकोर्ट में विशेष अपील दायर कर चुनौती दी। सरकार द्वारा कहा गया कि निचली अदालत ने बिना ठोस सबूत पाते हुए पाकिस्तानी नागरिक को रिहा करने के आदेश दिए हैं, जिसे निरस्त किया जाए। उसके खिलाफ जासूसी करने के कई सबूत हैं। दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने उक्‍त आदेश दिए।

उत्तराखंड में सात हेली सेवाओं को दी मंजूरी, सात शहरों की हेलीकॉप्टर से करें हवाई यात्रा, जानें कब उड़ान भरेंगी फ्लाइट्स

देहरादून :- उत्तराखंड में सात अक्तूबर से सात शहरों में हेलीकॉप्टर से हवाई सेवा शुरू हो जाएगी। हवाई सेवा का शुभारंभ सात अक्तूबर को होगा। इस सेवा को केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फ्लैग ऑफ करेंगे। सात अक्तूबर को जौलीग्रांट में बने नए टर्मिनल का भी लोकार्पण किया जाएगा। इस दौरान दून-पंतनगर-पिथौरागढ़-पंतनगर-दून हवाई सेवा का फ्लैग ऑफ भी किया जाएगा।

मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उत्तराखंड में हवाई सेवा को बढ़ाने के संबंध में वर्चुअल बैठक की। बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लिए जो हेलीपोर्ट चिह्नित किए गए हैं, उनमें से 11 की डीपीआर तैयार हो चुकी है। मसूरी हेलीपोर्ट की डीपीआर भी जल्द तैयार हो जाएगी। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से शहरों की कनेक्निविटी बढ़ाई जाएगी। जौलीग्रांट टर्मिनल की यात्री क्षमता नए टर्मिनल के एक हिस्से के बनने के बाद 26 हजार यात्री हो जाएगी। पूरा टर्मिनल बनने के बाद यह क्षमता 43 हजार यात्री हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की कार्यवाही में और तेजी लाई जाएगी। उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तराखंड के वैट चार्ज एटीएफ पर अधिक है। इस चार्ज को कम करने से राज्य में हवाई संपर्क तेजी से बढ़ेगा और हवाई सेवा में भी वृद्धि होगी।

उत्तराखंड में सात हेली सेवाओं का रूट
देहरादून-श्रीनगर-देहरादून, देहरादून-गौचर-देहरादून, हल्द्वानी-हरिद्वार-हल्द्वानी, पंतनगर-पिथौरागढ़-पंतनगर, चिन्यालीसौड़ – सहस्त्रधारा-चिन्यालीयौड़, गौचर-सहस्त्रधारा-गौचर, हल्द्वानी-धारचूला-हल्द्वानी।

उत्तराखंड में 13 हेलीपोर्ट के लिए जमीन चिह्नित की गई है। इनमें से 11 की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। आठ की टेंडर प्रक्रिया 20 अक्तूबर तक पूरी हो जाएगी। मसूरी हेलीपोर्ट की डीपीआर भी जल्द तैयार हो जाएगी। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से शहरों की कनेक्टिविटी और बढ़ाई जाएगी। पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की कार्यवाही में और तेजी लाई जाएगी।

उत्तराखंड में बिजली कर्मचारी अपनी मांगें पूरी न होने के चलते ‘टूल एंड पेन डाउन’ करते हुए 21 से 23 सितंबर तक कामबंदी

देहरादून:- राज्य भर में आज से बिजली उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उत्तराखंड में तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों द्वारा मंगलवार से ‘टूल और पेन डाउन’ किया जाना है. उत्तराखंड में बिजली कर्मचारी अपनी मांगें पूरी न होने के चलते 21 से 23 सितंबर तक एक तरह से काम रोककर हड़ताल करने जा रहे हैं। किसी भी इलाके में कोई बिजली फॉल्ट हुआ, तो दुरुस्तीकरण का काम नहीं होगा, नये मीटर लगने का काम बंद रहेगा, बिजली बिल बनने समेत कई तरह के काम प्रभावित रहेंगे।

ऊर्जाकर्मी लम्बे समय से अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर समय-समय पर आंदोलन करते रहे हैं. इससे पहले ये कर्मचारी 26 जुलाई को भी हड़ताल पर गये थे, लेकिन सरकार के साथ बातचीत के बाद मिले आश्वासनों के चलते कर्मचारियों ने सरकार को एक महीने का समय दिया था. महीना गुज़रने के बाद भी कर्मचारियों की मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो कर्मचारियों ने एक बार फिर नाराज़गी दिखाई है. अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर एक बार फिर वे आन्दोलन कर रहे हैं.

अक्टूबर में हड़ताल की धमकी
इस कामबंदी के दौरान 21 से 23 तक कर्मचारी न तो दफ्तरों में पेन का प्रयोग करेंगे और न ही कोई टूल उठाएंगे। जूनियर इंजीनियर संगठन के अध्यक्ष संदीप शर्मा का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को जल्द न मानी, तो कर्मचारी 6 अक्टूबर से हड़ताल पर रहेंगे । वेतन विसंगति, ग्रेड पे, समान कार्य समान वेतन, प्रमोशन जैसी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर ऊर्जा कर्मचारी संगठन लम्बे समय से आंदोलन कर रहे है लेकिन अभी शासन और सरकार से वार्ता के बाद भी मांगों पर अमल न होने के कारण कर्मचारी बेहद नाराज़ नजर आ रहे हैं।